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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

श्रीधर कन्दलि

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श्रीधर कंदलि 200px असम भारतीय भारतीय असमिया श्रीधर कंदलि मध्यकाल के एक विशिष्ट असमिया कवि और वैष्णव साहित्य के लेखक थे। वे मुख्यतः महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के समकालीन थे और उनसे प्रभावित थे। उन्हें 15वीं शताब्दी के अंत से 16वीं शताब्दी के मध्य तक सक्रिय माना जाता है। उनकी रचना 'घुनुचा कीर्त्तन' को शंकरदेव की 'कीर्तन घोषा' में सम्मिलित किया गया था। शंकरदेव का जीवनकाल (1449-1568) 15वीं और 16वीं शताब्दी के बीच था। इसलिए, उनके 17वीं शताब्दी के कवि होने की संभावना कम है। वे मुख्य रूप से शंकरदेव के समय के या उसके ठीक बाद के कवि हैं। रचनाएँ श्रीधर कंदलि की दो प्रमुख पुस्तकें 'काणखोवा' और कीर्तन-घोषा के अंतर्गत आने वाली 'घुनुचा-कीर्तन' हैं। उन्होंने महाभारत के “अश्वमेध पर्व” का भी असमिया में अनुवाद किया था। इसके अतिरिक्त, उन्हें “कानाई धेमेलिया” नामक एक हास्य-प्रधान पुस्तक का रचयिता भी माना जाता है।असमिया जीवनी अभिधान बनलता बर्मन, शिवनाथ 2018 248 978-81-7339-428-7 'काणखोवा' की विषयवस्तु बाल कृष्ण और उन्हें सुलाने/शांत करने के लिए माता यशोदा द्वारा किए गए प्रयास हैं। लोरी (निचुकणि गीत) की शैली में विष्णु के अवतारों की लीला और महिमा को कवि ने 'काणखोवा' में सरल, सुबोध और अभिनव रूप में प्रस्तुत किया है।असमिया साहित्य का समीक्षात्मक इतिवृत्त शर्मा, डॉ॰ सत्येंद्रनाथ (संपा॰) 2018 157 'घुनुचा कीर्तन' की विषयवस्तु कृष्ण की इंद्रद्युम्न की पत्नी गुंडिचा (घुनुचा) के घर की यात्रा और उस पर रुक्मिणी की ईर्ष्या, क्रोध और अभिमान है। 'घुनुचा-कीर्तन' की कहानी 'स्कंदपुराण' के उत्कल खंड की कथा पर आधारित है। संदर्भ श्रेणी:असमिया साहित्यकार श्रेणी:मृत व्यक्ति