411 REFERENCE · Wikipedia
शक्ति पीठ
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
हिन्दू धर्म के अनुसार जहां सती देवी के शरीर के अंग गिरे, वहां वहां शक्ति पीठ बन गईं। ये अत्यंत पावन तीर्थ कहलाये। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं। जयंती देवी शक्ति पीठ भारत के मेघालय राज्य में नाॅरटियांग नामक स्थान पर है।
thumb|भगवान शिव माता सती को ले जाते हुए
पौराणिक सन्दर्भ
पुराणों के अनुसारhttp://www.hindimilap.com/articles/602/1/aaaa-aaaaaaaa/Page1.html संग्रहीत प्रति 8 अक्तूबर 2008 https://web.archive.org/web/20081120084354/http://www.hindimilap.com/articles/602/1/aaaa-aaaaaaaa/Page1.html 20 नवंबर 2008 dead सती के शव के विभिन्न अंगों से बावन शक्तिपीठों का निर्माण हुआ था। इसके पीछे यह अंतर्कथा है कि दक्ष प्रजापति ने कनखल (हरिद्वार) में 'बृहस्पति सर्व' नामक यज्ञ रचाया। उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन जान-बूझकर अपने जमाता भगवान शंकर को नहीं बुलाया। शंकरजी की पत्नी और दक्ष की पुत्री सती पिता द्वारा न बुलाए जाने पर और शंकरजी के रोकने पर भी यज्ञ में भाग लेने गईं। यज्ञ-स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित न करने का कारण पूछा और पिता से उग्र विरोध प्रकट किया। इस पर दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर को अपशब्द कहे। इस अपमान से पीड़ित हुई सती ने यज्ञ-अग्नि कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी। भगवान शंकर को जब इस दुर्घटना का पता चला तो क्रोध से उनका तीसरा नेत्र खुल गया। भगवान शंकर के आदेश पर उनके गणों के उग्र कोप से भयभीत सारे देवता ऋषिगण यज्ञस्थल से भाग गये। भगवान शंकर ने यज्ञकुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाल कंधे पर उठा लिया और दुःखी हुए इधर-उधर घूमने लगे। तदनंतर सम्पूर्ण विश्व को प्रलय से बचाने के लिए जगत के पालनकर्त्ता भगवान विष्णु ने चक्र से सती के शरीर को काट दिया। तदनंतर वे टुकड़े 52 जगहों पर गिरे। वे ५२ स्थान शक्तिपीठ कहलाए।
सती ने दूसरे जन्म में हिमालयपुत्री पार्वती के रूप में शंकर जी से विवाह किया।
तंत्र चूडामणि अनुसार
पुराण ग्रंथों, तंत्र साहित्य एवं तंत्र चूड़ामणि में जिन बावन शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है, वे निम्नांकित हैं। निम्नलिखित सूची 'तंत्र चूड़ामणि' में वर्णित इक्यावन शक्ति पीठों की है। बावनवाँ शक्तिपीठ अन्य ग्रंथों के आधार पर है। इन बावन शक्तिपीठों के अतिरिक्त अनेकानेक मंदिर देश-विदेश में विद्यमान हैं। हिमाचल प्रदेश में नयना देवी का पीठ (बिलासपुर) भी विख्यात है। गुफा में प्रतिमा स्थित है। कहा जाता है कि यह भी शक्तिपीठ है और सती का एक नयन यहाँ गिरा था। इसी प्रकार उत्तराखंड के पर्यटन स्थल मसूरी के पास सुरकंडा देवी का मंदिर (धनौल्टी में) है। यह भी शक्तिपीठ है। कहा जाता है कि यहाँ पर सती का सिर धड़ से अलग होकर गिरा था। माता सती के अंग भूमि पर गिरने का कारण भगवान श्री विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से सती माता के समस्तांग विछेदित करना था।ऐसी भी मान्यता है कि उत्तरप्रदेश के सहारनपुर के निकट एक अति प्राचीन शक्तिपीठ क्षेत्र मे माता का शीश गिरा था जिस कारण वहाँ देवी को दुर्गमासुर संहारिणी शाकम्भरी कहा गया। यहाँ भैरव भूरादेव के नाम से प्रथम पुजा पाते हैं।
जाग्रत सिद्ध शक्तिपीठ
काली माता कलकत्ता
हिंगलाज भवानी
शाकम्भरी देवी सहारनपुर
विंध्यवासिनी शक्तिपीठ
चामुण्डा देवी हिमाचल प्रदेश
ज्वालामुखी हिमाचल प्रदेश
कामाख्या देवी असम
हरसिद्धि माता उज्जैन
छिन्नमस्तिका पीठ रजरप्पा
इक्यावन शक्तिपीठ
शक्तिपीठों की संख्या इक्यावन कही गई है। ये भारतीय उपमहाद्वीप में विस्तृत हैं। यहां पूरी शक्तिपीठों की सूची दी गई है।
"शक्ति" अर्थात देवी दुर्गा, जिन्हें दाक्षायनी या पार्वती रूप में भी पूजा जाता है।
"अंग या आभूषण" अर्थात, सती के शरीर का कोई अंग या आभूषण, जो श्री विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से काटे जाने पर पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिरा, आज वह स्थान पूज्य है और शक्तिपीठ कहलाता है।
शंकरी देवी, त्रिंकोमाली श्रीलंका
कामाक्षी देवी, कांची, तमिलनाडू
सुवर्णकला देवी, प्रद्युम्न, पश्चिमबंगाल
चामुंडेश्वरी देवी, मैसूर, कर्नाटक
जोगुलअंबा देवी, आलमपुर, आंध्रप्रदेश
भ्रमराम्बा देवी, श्रीशैलम, आंध्रप्रदेश
महालक्ष्मी देवी, कोल्हापुर, महाराष्ट्र
इकवीराक्षी देवी, नांदेड़, महाराष्ट्र
हरसिद्धी माता मंदिर, उज्जैन, मध्यप्रदेश
पुरुहुतिका देवी, पीथमपुरम, आंध्रप्रदेश
पूरनगिरि मंदिर, टनकपुर, उत्तराखंड
मनीअंबा देवी, आंध्रप्रदेश
कामाख्या देवी, गुवाहाटी, असम
मधुवेश्वरी देवी, इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश
वैष्णोदेवी, कांगड़ा, हिमाचलप्रदेश
शाकम्भरी माता बेहट उत्तर प्रदेश
सर्वमंगला देवी, गया, बिहार
विशालाक्षी देवी, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
शारदा देवी , पीओके
कालका देवी , दिल्ली
अन्य मंदिर
कुछ और शक्ति पीठ मंदिर कहे जाते हैं:-
विंध्यवासिनी मंदिर, मिर्ज़ापुर, उत्तर प्रदेश
महामाया मंदिर, अंबिकापुर, अंबिकापुर, छत्तीसगढ़
योगमाया मंदिर, दिल्ली, महरौली, दिल्ली
दंतेश्वरी मंदिर,दंतेवाड़ा,दंतेवाड़ा,छत्तीसगढ़
शाकम्भरी देवी मंदिर सहारनपुर उत्तर प्रदेश
मनसा देवी मंदिर मनीमाजरा पंचकुला
माँ विजयासन (बीजासेन) धाम,सलकनपुर,जिला सीहोर,मध्य प्रदेश
चंडिका स्थान, मुंगेर, बिहार
मुण्डेश्वरी मंदिर,भभुआ जिला कैमूर,बिहार
हरसिद्धि माता,रानगिर जिला सागर,मध्य प्रदेश
त्रिपुर सुंदरी वागड़ शक्तिपीठ बांसवाड़ा राजस्थान
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
{सरहद पार मां का द्वार (पाकिस्तान स्थित शक्तिपीठ)}
श्रेणी:दुर्गा
*