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शतरञ्ज
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अंग्रेज़ी फ़रवरी 2026
चौसठ ख़ानों वाला खेल जहाँ दो फ़ौजें एक-दूसरे के बादशाह को घेरने की कोशिश करती हैं शतरंज हिन्दूस्तान का एक पुराना जंगी खेल जिसमें दुश्मन के बादशाह को क़ाबू करने के लिए फ़ौज के चार हिस्सों का इस्तेमाल होता है चतुरंग १९६९ की फ़िल्म शतरंज (1969 फ़िल्म) १९९३ की फ़िल्म शतरंज (1993 फ़िल्म)
अंगूठाकार|१४३० में बनी 'बायसनघोरी शाहनामा' की इस फ़ारसी मिनिएचर तस्वीर में दो खिलाड़ी शतरञ्ज खेलते हुए नज़र आ रहे हैं। यह तस्वीर उस दौर की तहज़ीब और इस खेल की मक़बूलियत का एक नायाब नमूना है।
शतरञ्ज (ar شطرنج, तलफ़्फ़ुज़: [ʃaˈtˤrandʒ]; मध्य फ़ारसीfa chatrang से निकला हुआ) शतरञ्ज (चेस) का एक पुराना रूप है, जैसा कि सासानी सल्तनत में खेला जाता था। इसकी बुनियाद हिन्दुस्तानी खेल 'चतुरङ्ग' (चतुरंग) पर टिकी है। मौजूदा दौर का शतरञ्ज रफ़्ता-रफ़्ता इसी खेल से परवान चढ़ा, जब १०वीं सदी में मुस्लिम अल अन्दलुस (आज का स्पेन) और सिसली के ज़रिए यूरोप में इसकी आमद हुई। जदीद फ़ारसी में भी इस लफ़्ज़ का इस्तेमाल 'चेस' के तर्जुमे के तौर पर किया जाता है।https://abadis.ir/fatofa/%D8%B4%D8%B7%D8%B1%D9%86%D8%AC/ شطرنج، دیکشنری آبادیس fa
वजह-ए-तस्मिया और तारीख़
अंगूठाकार|१४वीं सदी के एक फ़ारसी नुस्ख़े में इस बात का ज़िक्र मिलता है कि कैसे हिन्दुस्तान के एक सफ़ीर (राजदूत) ने शतरञ्ज को फ़ारस के शाही दरबार (अदालत) में पेश किया।
अंगूठाकार|कन्नौज के मौखरि राजा शर्ववर्मन (तक़रीबन ५६०–५८० ईस्वी) के ज़रिए भेजे गए एक हिन्दुस्तानी सफ़ीर (राजदूत) ने सासानी शहंशाह ख़ुसरो अव्वल 'अनोशीरवान' के दरबार में शतरञ्ज को एक ज़हनी चुनौती के तौर पर पेश किया था।http://history.chess.free.fr/papers/Eder%202007-2.pdf South Asian Archaeology 2007 Proceedings of the 19th Meeting of the European Association of South Asian Archaeology in Ravenna, Italy, July 2007, Volume II Eder Manfred A. J. 2010 Archaeopress Archaeology 978-1-4073-0674-2 69 https://web.archive.org/web/20160414233414/http://history.chess.free.fr/papers/Eder%202007-2.pdf 2016-04-14 livehttp://history.chess.free.fr/shatranj.htm Shatranj Jean-Louis Cazaux 2012-04-20 History.chess.free.fr 2013-11-23
पड़ोसी मुल्कों में इस खेल का नाम 'चतुरङ्ग' से ही निकला हुआ मालूम होता है, जैसे फ़ारसी में 'चतरंग', अरबी में 'शतरञ्ज' और तिब्बती में 'चन्देरकी' इसके मिसाल हैं। इससे अन्दाज़ा होता है कि यह खेल और इसका नाम, दोनों हिन्दुस्तान से आए थे। साथ ही, जैसा कि आगे ज़िक्र आएगा, फ़ारस में भी यही माना जाता था कि यह खेल वहाँ हिन्दुस्तान से ही पहुँचा है।"The name of the game in adjoining countries appears to be derived from chaturanga – chatrang in Persian, shatranj in Arabic, chanderaki in Tibetan are examples. This suggests that the game, as well as its name, came from India. Also, as will appear, it was believed in Persia that the game arrived there from India."http://archive.org/details/ancientboardgame0000unse Ancient board games in perspective : papers from the 1990 British Museum colloquium, with additional contributions 2007 British Museum Press 978-0-7141-1153-7 London 18
फ़ारसी लफ़्ज़ 'शतरञ्ज' की असल बुनियाद संस्कृत के 'चतुरङ्ग' (चतु यानी "चार"; अङ्ग यानी "हिस्से/बाज़ू") से है, जो इसी नाम के खेल 'चतुरङ्ग' की तरफ़ इशारा करता है। मध्य फ़ारसी में यह लफ़्ज़ 'चतरंग' की शक्ल में मिलता है, जिसमें 'u' और 'a' के तलफ़्फ़ुज़ वक़्त के साथ कम हो गए, जैसा कि ७वीं सदी ईस्वी की किताब 'मादयान-ए-चतरंग' (शतरञ्ज की किताब) के नाम में देखा जा सकता है।
'कार-नामग-ए-अर्दशीर-ए-पाबगान' में अर्दशीर अव्वल को इस खेल का माहिर बताया गया है: "ख़ुदा की इनायत से, अर्दशीर पोलो, घुड़सवारी, चतरंग और विने-अर्तख़शीर, और कई दूसरे फ़ुनून में सब पर ग़ालिब और जंगी सिफ़त साबित हुआ।"http://history.chess.free.fr/shatranj.htm Shatranj Jean-Louis Cazaux 2012-04-20 History.chess.free.fr 2013-11-23 अगरचे, 'कारनामग' में कई क़िस्से-कहानियाँ भी शामिल हैं, और इससे महज़ उस ज़माने में 'चतरंग' की मक़बूलियत का पता चलता है।Murray 1913
बाद के सासानी बादशाह ख़ुसरो अव्वल (५३१–५७९) के दौर में, एक हिन्दुस्तानी राजा (मुमकिन है कि कन्नौज के मौखरि खानदान का कोई राजा) की तरफ़ से भेजे गए तोहफ़ों में शतरञ्ज का एक खेल शामिल था, जिसमें १६ मोहरे पन्ने (ज़मुर्रद) के और १६ याक़ूत (कुरुविन्द) के थे (हरा बनाम लाल)।Murray 1913 इस खेल के साथ एक पहेली भी आई थी जिसे ख़ुसरो के दरबारियों ने बा-आसानी हल कर लिया था। इस वाक़ये का ज़िक्र सबसे पहले 'मादयान-ए-चतरंग' (तक़रीबन ६२० ईस्वी) में मिलता है, और फिर फ़िरदौसी के 'शाहनामा' (तक़रीबन १०१० ईस्वी) में भी इसका बयान आया है।
आज हिन्दुस्तान में 'चतुरङ्ग' के जो क़ायदे मिलते हैं उनमें काफ़ी फ़र्क़ है, मगर उन सब में फ़ौज के चार हिस्से (अंग) शामिल होते हैं: घोड़ा, हाथी, रथ और पैदल सिपाही, जो ८×८ के पट्ट पर खेला जाता है। (हालाँकि, शमाली हिन्दुस्तान के पुराने खेलों में, जो आज भी गांवों में खेले जाते हैं, नामों में थोड़ा फ़र्क़ है। वहाँ 'रुक' को हाथी या क़िला कहा जाता है, लेकिन 'बिशप' को फ़ील या ऊँट कहा जाता है, क्योंकि ऊँट पर सवार सिपाही वहाँ आम थे)। शतरञ्ज ने 'चतुरङ्ग' के ज़्यादातर क़ायदों और १६ मोहरों वाली बुनियादी बनावट को ही अपनाया। बाद की कुछ क़िस्मों में गहरे रंग के ख़ानों पर नक़्क़ाशी भी की जाती थी। फ़ारस पर इस्लामी फ़तह के बाद यह खेल मग़रिब (पश्चिम) की तरफ़ फैला और ८वीं सदी के बाद से इस खेल की हिकमत-ए-अमली और चालों पर बड़ी तादाद में अदब (साहित्य) रचा गया।http://history.chess.free.fr/shatranj.htm Shatranj Jean-Louis Cazaux 2012-04-20 History.chess.free.fr 2013-11-23
शुरुआती हिन्दुस्तानी चतुरङ्ग (तक़रीबन ५००–७००) में, बादशाह को क़ब्ज़े में लिया जा सकता था और इससे खेल ख़त्म हो जाता था। फ़ारसी शतरञ्ज (तक़रीबन ७००–८००) में यह तरीक़ा शुरू हुआ कि बादशाह पर हमला होने की इत्तिला दी जाए (जिसे आज की ज़बान में 'शह' देना कहते हैं)। ऐसा इसलिए किया गया ताकि खेल वक़्त से पहले और इत्तिफ़ाक़िया तौर पर ख़त्म न हो जाए।Davidson Henry A Short History of Chess 1949 McKay 0-679-14550-8 (1981 paperback)*Emms John Starting Out: Minor Piece Endgames 22 2004 Everyman Chess 1-85744-359-4 John Emms (chessmaster) बाद में फ़ारसियों ने यह नियम भी जोड़ दिया कि बादशाह को न तो शह की ज़द में लाया जा सकता है और न ही शह की हालत में छोड़ा जा सकता है। इसका नतीजा यह हुआ कि बादशाह को अब कब्ज़े में नहीं लिया जा सकता था, और 'शहमात' (चेकमेट) ही खेल के फ़ैसले का इकलौता ज़रिया रह गया।Davidson Henry A Short History of Chess 1949 McKay 0-679-14550-8 (1981 paperback)*Emms John Starting Out: Minor Piece Endgames 63–64 2004 Everyman Chess 1-85744-359-4 John Emms (chessmaster)
बाएँ|अंगूठाकार|शिमाली हिन्दुस्तान के मुग़ल दौर के पुराने शतरञ्ज सेट अपनी नक़्क़ाशी और चन्दन की ख़ुशबू के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। इन सेटों की सबसे बड़ी ख़ासियत यह होती है कि इनके मोहरे इन्सानी या जानवरों की शक्ल में होते हैं, जो मुग़ल सल्तनत की फ़ौजी तरतीब को दिखाते हैं।
इस्लाम की आमद के साथ, शतरञ्ज मग़रिब (उत्तरी अफ़्रीका) और फिर वहाँ से अन्दालुसिया (स्पेन) तक फैल गया। हिन्दुस्तान की इस्लामी फ़तह (तक़रीबन १२वीं सदी) के दौरान, इस खेल के कुछ रूप वापस हिन्दुस्तान भी आए, जैसा कि शिमाली हिन्दुस्तान के लफ़्ज़ 'मात' (फ़ारसी 'मात' से निकला हुआ) या बंगाली लफ़्ज़ 'बोरे' (माना जाता है कि अरबी 'बैदक़' से निकला है) से ज़ाहिर होता है।http://history.chess.free.fr/shatranj.htm Shatranj Jean-Louis Cazaux 2012-04-20 History.chess.free.fr 2013-11-23
आने वाली सदियों में, शतरञ्ज यूरोप में मक़बूल (लोकप्रिय) हो गया, जिसने आख़िरकार जदीद (आधुनिक) शतरञ्ज को जन्म दिया।http://history.chess.free.fr/shatranj.htm Shatranj Jean-Louis Cazaux 2012-04-20 History.chess.free.fr 2013-11-23
क़ायदे (नियम)
tright rd nd bd kd qd bd nd rd pd pd pd pd pd pd pd pd pl pl pl pl pl pl pl pl rl nl bl kl ql bl nl rl शतरंज बिछाने का तरीक़ाशतरञ्ज की शुरुआती सजावट तक़रीबन वैसी ही थी जैसी आज के शतरञ्ज में होती है; हालाँकि, सफ़ेद 'शाह' (बादशाह) की जगह दाएँ या बाएँ तरफ़ तय नहीं थी। या तो आज के शतरञ्ज जैसी तरतीब मुमकिन थी या फिर वैसी जैसी नक़्शे में दिखाई गई है। दोनों ही सूरतों में, सफ़ेद और काला शाह एक ही फ़ाइल में होते थे। खेल इन मोहरों के साथ खेला जाता था:
शतरञ्ज के मोहरे25x25पिक्सेल25x25पिक्सेलशाह (राजा) 25x25पिक्सेल25x25पिक्सेलफ़र्ज़, वज़ीर या मन्त्री (सलाहकार)25x25पिक्सेल25x25पिक्सेलरुख़ (हाथी या गज)25x25पिक्सेल25x25पिक्सेलपील, या अरबी में "अलफ़ील" (हाथी)25x25पिक्सेल25x25पिक्सेलअस्ब या फ़रस (घोड़ा या अश्व)25x25पिक्सेल25x25पिक्सेलसरबाज़ / प्यादा, या अरबी में "बैदक़" (सिपाही या पैदल)
tright xx xx ql xx xx Moves of the ferz
संदर्भ
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श्रेणी:भारतीय खोज
श्रेणी:फ़ारसी शब्द