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411 समाचार
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शंकराचार्य

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हिन्दू धर्म के धर्मगुरु पद शंकराचार्य दार्शनिक शंकराचार्य आदि शंकराचार्य thumb|आदि शंकराचार्य अपने चार शिष्यों - पद्मपादाचार्य , सुरेश्वराचार्य , हस्तामलकाचार्य और तोटकाचार्य के साथ शंकराचार्य धर्मसम्राट पद, शिव अवतार भगवान आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सत्य सनातन धर्म के आधिकारिक मुखिया के लिये प्रयोग की जाने वाली उपाधि है। इस पद की परम्परा आदि गुरु शंकराचार्य ने आरम्भ की। यह उपाधि आदि शंकराचार्य, जो कि शिव अवतार, हिन्दू दार्शनिक एवं संपूर्ण कलियुग के धर्मगुरु थे एवं जिन्हें हिन्दुत्व के सबसे महान प्रतिनिधियों में जाना जाता है, के नाम पर है। उनका जन्म कालड़ी, केरला में हुआ था, उन्हें जगद्गुरु के तौर पर मान्यता प्राप्त है एक उपाधि जो हर युग मे एक ऋषि को प्राप्त होती है। सत्ययुग में वामन, त्रेतायुग में सर्व गुरू ब्रम्हर्षि वशिष्ठ थे, द्वापर के सर्वगुरू वेदव्यास थे। भगवान कृष्ण ही सर्वकालिक अखिल गुरू हैं। उन्होंने सनातन धर्म की प्रतिष्ठा हेतु भारत के चार क्षेत्रों में चार मठ स्थापित किये तथा शंकराचार्य पद की स्थापना करके उन पर अपने चार प्रमुख शिष्यों को आसीन किया। उनसे शास्त्रार्थ में पराजित श्री मंडन मिश्र पहले शंकराचार्य थे। तबसे इन चारों मठों में शंकराचार्य पद की परम्परा चली आ रही है। यह पद हिन्दू धर्म का सर्वोच्च गौरवमयी पद माना जाता है। right|thumb|300px|शृंगेरी का विद्याशंकर मंदिर चार मठ निम्नलिखित हैं जिन पर चयन भगवान आदि शंकराचार्य द्वारा प्रदत्त मठाम्नाय महानुशासन संविधान ग्रंथ अनुसार होता है। उत्तराम्नाय मठ या उत्तर मठ, ज्योतिर्मठ जो कि जोशीमठ में स्थित है। जिसके शंकराचार्य ब्रम्हलीन स्वामी शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी के ईश्वी सन् 2022 में देहत्याग कर बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अभिषिक्त हुए हैं जिनका अभिषेक श्रृंगेरी के शंकराचार्य भारती तीर्थ महास्वामी जी ने किया था। पूर्वाम्नाय मठ या पूर्वी मठ, गोवर्धन मठ जो कि पुरी में स्थित है जिसके वर्तमान शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी 1992 से हैं, वे धर्म सम्राट स्वामी हरिहरात्मक सरस्वती "करपात्री" जी महाराज के शिष्य हैं। पूर्ववर्ती शंकराचार्य ब्रम्हलीन स्वामी निरंजनदेव तीर्थ ईश्वी सन् 1960-1992 थे और उनके भी पूर्ववर्ती स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थ ईश्वी सन् 1924 से 1960 तक थे। दक्षिणाम्नाय मठ या दक्षिणी मठ, शृंगेरी शारदा पीठ जो कि शृंगेरी, कर्नाटक में स्थित है।जिसके वर्तमान शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ हैं। पश्चिमाम्नाय मठ या पश्चिमी मठ, द्वारिका पीठ जो कि द्वारिका में स्थित है। जिसमें स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बाद ईश्वी सन् 2022 में स्वामी सदानंद अभिषिक्त हुए है। इन चार मठों के अतिरिक्त भी भारत में कई अन्य जगह शंकराचार्य पद लगाने वाले मठ मिलते हैं जो वैदिक ईश्वरीय परम्परानुसार नहीं बल्कि स्वैच्छिक मानव निर्मित हैं। पद लोलुप लोगों ने अपने मठ स्थापित कर लिये एवं अपने नाम के आगे भी शंकराचार्य उपाधि लगाने लगे। परन्तु वास्तविक शंकराचार्य उपरोक्त चारों मठों पर महानुशासन आसीन को ही माना जाता है। शिष्यभारत में किस दिशा मेंमठमहावाक्यवेदसम्प्रदायवर्तमान शंकराचार्यपद्मपादपूर्वपुरी गोवर्धन मठ पीठम्प्रज्ञानं ब्रह्म (चेतना ही ब्रह्म है)ऋग्वेदभोगवलस्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीसुरेश्वरदक्षिणशृंगेरी शारदा पीठम्अहं ब्रह्मास्मि (मैं ब्रह्म हूँ)यजुर्वेदभूरिवलश्री भारती तीर्थहस्तामलकाचार्यपश्चिमद्वारका शारदा पीठम्तत्त्वमसि (वह तुम हो)सामवेदकीटवलस्वामी सदानंद सरस्वतीSwami Swaroopanand Saraswati's successors: TWO Shankaracharyas of two different Peeths now - DETAILS here https://zeenews.india.com/india/swami-swaroopanand-saraswati-s-successors-two-shankaracharyas-of-two-different-peeths-now-details-here-2509089.html 2023-05-06 Zee News enतोटकाचार्यउत्तरबदरी ज्योतिर्मठ पीठम्अयमात्मा ब्रह्म (यह आत्मा ब्रह्म है)अथर्ववेदनंदवलस्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (विवादित)ANI 2022-10-15 SC stops the coronation of Swami Avimukteshwaranand Saraswati, next hearing on October 18 https://theprint.in/india/sc-stops-the-coronation-of-swami-avimukteshwaranand-saraswati-next-hearing-on-october-18/1169772/ 2025-01-23 ThePrint en-US इन्हें भी देखें आदि शंकराचार्य ज्योतिर्मठ गोवर्धन मठ शृंगेरी शारदा पीठ द्वारिका पीठ सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दू धर्म