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अद्वैत आचार्य
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श्री अद्वैत आचार्य Wooden idols of Advaita Acharya and Sita Devi, Sitanath Advaita Mandir, Nabadwip 6.jpg Hinduism Gaudiya Vaisnavism अद्वैत आचार्य और सीत देवी की काष्ठ की मूर्तियाँ (सीतानाथ अद्वैत मन्दिर, नवद्वीप) 1434 ई नवग्राम, लौड़ रज्य (वर्तमान समय में बांग्लादेश के सुनामगञ्ज जिले के अन्तर्गत बड़ाघात, ताहिरपुर) कमलाक्ष मिश्र माधवेन्द्र पुरी भक्ति योग, अचिन्त्य भेद अभेद गौडीय वैष्णव सम्प्रदाय का प्रवर्तन, चैतन्य महाप्रभु और नित्यानन्द के साथ भक्ति योग कुबेर आचार्य संगी श्री नित्यानन्द प्रभु, चैतन्य महाप्रभु, गदाधर भट्ट, श्रीवास ठाकुर, हरिदास ठाकुर एवं अन्य Orange
अद्वैत आचार्य (मूल नाम कमलाक्ष भट्टाचार्य ; 1434 - 1559), "Shantipur parichoy"-Kalikrishna Bhattacharaya&"Samajer Pratichhabi Bises Shantipur Sankhya."-editor-Satya Narayan Goswami. https://books.google.com/books?id=mEsdAAAAMAAJ Srikṛṣṇa Caitanya: A Historical Study on Gauḍiya Vaiṣṇavism A. N. Chatterjee Associated Pub. Co. 1984 9780836413212 2008-06-07p. 52 चैतन्य महाप्रभु के सखा तथा हरिदास ठाकुर के गुरु थे। Brzezinski, J.A.N. 2004 Charismatic Renewal And Institutionalization In The History Of Gaudiya Vaishnavism And The Gaudiya Math https://books.google.com/books?id=mBMxPdgrBhoC&dq=Advaita+Acharya&pg=PA73 The Hare Krishna Movement: The Postcharismatic Fate of a Religious Transplant Columbia University Press 978-0-231-12256-6 2008-06-07 Reconstructing tradition: Advaita Ācārya and Gauḍīya Vaiṣṇavism at the cusp of the twentieth century https://archive.org/details/reconstructingtr00manr_703 Rebecca Manring Columbia University Press 2005 0-231-12954-8 New York 168 वे श्री चैतन्य महाप्रभु के अन्तरंग पार्षदों में से एक थे तथा सदाशिव एवं महाविष्णु के अवतार माने जाते हैं। यह उनकी प्रार्थनाओं द्वारा आह्वाहन का ही प्रतिफल था जिसके कारण श्री चैतन्य महाप्रभु इस पृथ्वी पर अवतरित हुए ।
अद्वैत आचार्य का जन्म श्री चैतन्य से लगभग पचास वर्ष पूर्व 1434 में लाउड (वर्तमान सुनामगंज जिला, बांग्लादेश ) के नवग्राम में हुआ था। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन अपनी पत्नी और परिवार के साथ नादिया के शांतिपुर (वर्तमान मतीगंज) में बिताया। अद्वैत आचार्य के छह पुत्र थे, अच्युतानन्द दास, कृष्ण मिश्र, गोपाल दास, बलराम दास मिश्र, स्वरूप दास और जगदीश मिश्र।
अद्वैत आचार्य के वंश और जीवन का वर्णन कई ग्रन्थों में किया गया है, जिसमें संस्कृत में कृष्णदास का बाल्यालीलासूत्र (1487? ) और बंगाली में नरहरिदास का अद्वैतविलास । Sen, Dinesh Chandra (1911). History of Bengali Language and Literature, Calcutta: University of Calcutta, pp.496-7 उनकी कई गतिविधियों का वर्णन चैतन्य चरितामृत, चैतन्यमङ्गल और चैतन्य भागवत में किया गया है।
रचनावली
अद्वैत आचार्य ने संस्कृत में दो ग्रन्थों की रचना की।https://books.google.com/books?id=Djx131iEeYkC Society and Economy in North-East India Momin Mignonette Mawlong Cecile A. Qādrī Fuz̤ail Aḥmad 2006 Regency Publications 978-81-89233-40-2 271 en
योगवासिष्ठ-भाष्य
गीता-भाष्य
अद्वत आचार्य के बारे में मुख्यतः निम्नलिखित ग्रन्थ प्रसिद्ध हैं-
वाल्यलीलासूत्र (१४८७) - हरकृष्ण दास द्वारा संस्कृत में रचित। इसमें अद्वैते आचार्य के बाल्यकालीन लीला का वर्णन है।
अद्वैतप्रकाश (१५६९) - ईशान नागर द्वारा बांग्ला में रचित।
अद्वैतमङ्गल - हरिचरण दास द्वारा बांग्ला में रचित।
अद्वैतमङ्गल - श्यामदास द्वारा बांग्ला में रचित।
अद्वैतविलास (१८वीं शताब्दी ) - नरहरि दास द्वारा बांग्ला में रचित।
सन्दर्भ
श्रेणी:गौडीय वैष्णव सम्प्रदाय