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वाहिकारोध
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right|thumb|300px|अन्तःहृद वाहिकारोध (इंट्राकोरोनरी वाहिकारोध)
वाहिकारोध (embolism) से आशय किसी वाहिका (embolus) का अवरोधित होना है। वाहिका का अवरोध रक्त के जमने से हो सकता है या रक्तधारा में गैस के बुलबुलेले (globule) से हो सकता है और इससे रक्त-प्रवाह रुक सकता है। यद्यपि वाहिकारोध का घटक साधारणतया रक्त का थक्का होता है, तथापि वसा और वायु के भी रक्तस्रोतरोधन बनते हैं। वसावाहिकारोध (Fat embolus) अस्थिभंग में मज्जा से और वात-वाहिकारोध (Air embolus) शिरा में वायुप्रवेश से होते हैं।
वाहिकारोध के दुष्परिणाम घनास्र के मूलस्थान, विस्तार तथा उसके पूतिदूषित या अपूतिक होने पर निर्भर होते हैं। शिराओं की, या दक्षिण हृदयार्ध की, घनास्रता का वाहिकारोध फेफड़ों में जाकर अटकता है। यदि वह बड़ा हुआ तो फौफ्फुसिक धमनियों में मार्ग-अवरोध करके घातक होता है। शल्यकर्म या प्रसव के पश्चात् होनेवाली आकस्मिक मृत्यु प्राय: इसी प्रकार से हुआ करती है। यदि वह छोटा रहा, तो फुफ्फुस का अल्पांश बेकार होकर थोड़ी सी बेचैनी उत्पन्न होती है, जो प्राय: अल्पकाल में ठीक हो जाती है। अंत:शल्य पूतिक (septic) होने पर फोड़ा, कोथ या अंत:पूयता (empyema) उत्पन्न होती है। हृदय के वामार्ध की घनास्रता से शारीरिक धमनियों में वाहिकारोध उत्पन्न होता है।
इन्हें भी देखें
घनास्रता
श्रेणी:चिकित्सकीय समस्याएँ