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श्रीरंगम
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यह लेख तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के एक नगर के बारे में है। यहाँ के श्री रंगनाथस्वामी मंदिर के बारे में जानने के लिए उस लेख पर जाँय।
Srirangam Trichy City Limit 10.87 78.68 right Tamil Nadu Tiruchirapalli 70 2001 181556 km² 91-431 620006 TN-48
श्रीरंगम (ஸ்ரீரங்கம்), जिसका वास्तविक तमिल नाम तिरुवरंगम (திருவரங்கம்) है, दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली शहर (जिसे त्रिची या तिरुची के नाम से भी जाना जाता है) का एक क्षेत्र और एक द्वीप है।
श्रीरंगम, एक तरफ कावेरी नदी से और दूसरी तरफ कावेरी शाखा कोलिदम (कोलेरून) से घिरा हुआ है। श्रीरंगम, वैष्णवों (भगवान विष्णु के अनुयायी, हिन्दू देवताओं के त्रिमूर्ति में से एक, अन्य दो भगवान शिव, विनाशक और भगवान ब्रह्मा या ब्रह्मदेव, रचयिता) की एक व्यापक आबादी का घर है।
श्री रंगनाथस्वामी मंदिर
thumb|left|150px|श्रीरंगम के श्री रंगनाथस्वामी मंदिर के मुख्य गोपुरम
thumb|150px|left|श्रीरंगम मंदिर का सफ़ेद गोपुरम
thumb|right|श्रीरंगम मंदिर के खंभे
श्रीरंगम, अपने श्री रंगनाथस्वामी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो हिन्दुओं (विशेष रूप से वैष्णवों) का एक प्रमुख तीर्थयात्रा गंतव्य और भारत के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक है।
मंदिर की वेबसाइट के अनुसार, श्रीरंगम को दुनिया का सबसे बड़ा क्रियाशील हिन्दू मंदिर माना जा सकता है क्योंकि इसका क्षेत्रफल लगभग 6,31,000 वर्ग मी (156 एकड़) है जिसकी परिधि 4 किमी (10,710 फीट) है।http://www.srirangam.org/ श्री रंगनाथस्वामी मंदिर की वेबसाइट 2 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101029022348/http://www.srirangam.org/ 29 अक्तूबर 2010 dead श्रीरंगम सबसे बड़ा क्रियाशील मंदिर होने का दावा करता है क्योंकि अंगकोर वट दुनिया का सबसे बड़ा लेकिन गैर-क्रियाशील हिन्दू मंदिर है।
श्रीरंगम मंदिर का परिसर 7 संकेंद्रित दीवारी अनुभागों और 21 गोपुरम से बना है .सरीना सिंह, जोए बिंडलॉस, पॉल क्लैमर, जेनिन एबर्ल के अनुसार भारत मंदिर के गोपुरम को राजगोपुरम कहा जाता है और यह 236 फीट (72 मी) है जो एशिया में सबसे लम्बा है।
इसके बारे में एक मिथक है कि गोपुरम के ऊपर से श्रीलंका के तट को देखा जा सकता है। मंदिर का गठन सात प्रकारों (उन्नत घेरों) से हुआ है जिसका गोपुरम अक्षीय पथ से जुड़ा हुआ है जो सबसे बाहरी प्रकार की तरफ सबसे ऊंचा और एकदम अन्दर की तरफ सबसे नीचा है।
कावेरी के तट पर तीन पवित्र रंगनाथ मंदिर हैं:
आदि रंगा: श्रीरंगापट्टना का रंगनाथस्वामी मंदिर
मध्य रंगा: शिवानासमुद्र का रंगनाथस्वामी मंदिर
अंत्य रंग: श्रीरंगम का रंगनाथस्वामी मंदिर
पौराणिक कथाओं के अनुसार, वैदिक काल में गोदावरी नदी के तट पर गौतम ऋषि का आश्रम था। उस समय अन्य क्षेत्रों में जल की काफी कमी थी। एक दिन जल की तलाश में कुछ ऋषि गौतम ऋषि के आश्रम जा पहुंचे। अपने यथाशक्ति अनुसार गौतम ऋषि ने उनका आदर सत्कार कर उन्हें भोजन कराया। परंतु ऋषियों को उनसे ईर्ष्या होने लगी। उर्वरक भूमि की लालच में ऋषियों ने मिलकर छल द्वारा गौतम ऋषि पर गौ हत्या का आरोप लगा दिया तथा उनकी सम्पूर्ण भूमि हथिया ली। इसके बाद गौतम ऋषि ने श्रीरंगम जाकर श्री रंगनाथ श्री विष्णु की आराधना की और उनकी सेवा की। गौतम ऋषि के सेवा से प्रसन्न होकर श्री रंगनाथ ने उन्हें दर्शन दिया और पूरा क्षेत्र उनके नाम कर दिया ओर गौतम ऋषि के आग्रह पर स्वयं ब्रह्माजी ने विश्र्व केे सबसे बड़े इस भव्य मंदिर का निर्माण किया था। भगवान श्री राम के वनवास काल मे, इस मंदिर में देवताओं की, भगवान राम के द्वारा पूजा की जाती थी और रावण पर श्री राम की विजय के बाद मंदिर ओर देवताओं को, राजा विभिषन को सौंप दिया गया। भगवान श्री विष्णु विभिषण के सामने उपस्थित हुए और इसी स्थान पर ' रंगनाथ' के रूप में रहने की अपनी इच्छा को व्यक्त किया और तब से कहा जाता है कि, भगवान् विष्णु श्री रंगनाथस्वामी के रूप में यहां वास करते हैं ओर [ श्री रंगम् ] से लेकर श्री पद्मनाभस्वामी [ तिरुवनंतपुरम ] तक के व्याप मे विराजमान है।।
अर्थव्यवस्था
प्रसिद्ध मंदिर के कारण, श्रीरंगम की अर्थव्यवस्था, पर्यटन पर आधारित एक संपन्न अर्थव्यवस्था है। भारत के सभी भागों और विदेशों से भक्तगण यहां आते हैं। मार्गाज़ी (मार्गशीर्ष) के तमिल महीने में पड़ने वाली वैकुण्ठ एकादशी जैसे त्योहारों के दौरान नगर में भक्तगणों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
तिरुवरंगम उन कुछ मंदिरों में से एक है जहां हमेशा भक्तगणों की भीड़ लगी रहती है।
श्रीरंगम के पास कई अन्य प्रसिद्ध मंदिर हैं। उनमें रॉकफोर्ट मंदिर, समयपुरम मरियाम्मन मंदिर, तिरुवानैकोविल मंदिर, कुमार वैयालुर मंदिर, उरैयुर वेक्काली अम्मन मंदिर, सिंगपेरुमाल (नरसिंह) इत्यादि शामिल हैं।
श्रीरंगम नगर, उन सैकड़ों लोगों का भी घर है जो त्रिची में स्थित कार्यालयों और उद्योगों में काम करते हैं। श्रीरंगम को त्रिची से जोड़ने वाला सार्वजनिक परिवहन (रूट #1) में अक्सर भीड़-भाड़ रहती है।
विद्यालय
नगर में निजी और सार्वजनिक दोनों तरह के, कई विद्यालय हैं। हायर सेकंडरी स्कूल फॉर बॉयज़ अर्थात् उच्चतर माध्यमिक बाल विद्यालय की स्थापना 1896 में की गई थी और यह इस नगर का सबसे पुराना विद्यालय है। यहां एक हायर सेकंडरी स्कूल फॉर गर्ल्स अर्थात् उच्चतर माध्यमिक बालिका विद्यालय भी है जो लगभग उतना ही पुराना है जितना पुराना लड़कों का विद्यालय है। श्रीमद अंदवन कॉलेज, श्री अकिलंदेश्वरी विद्यालय, चिन्मय विद्यालय मैट्रिकुलेशन स्कूल, श्री सत्य साई विद्यालय, श्री रंगा मैट्रिकुलेशन स्कूल, श्री वैजयंती विद्यालय इत्यादि, श्रीरंगम के अन्य संस्थान हैं। अधिकांश विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम अंग्रेज़ी है। कुछ विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम तमिल है और कुछ में दोनों है। ऐसे कई विद्यालयी छात्र हैं जो पास के त्रिची की यात्रा करते हैं।
परिवहन
वायु
सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा, त्रिची / तिरुचिरापल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
त्रिची हवाई अड्डा, चेन्नई, बैंगलोर, तिरुवनंतपुरम, सिंगापुर, दुबई, शारजाह, कुवैत, कोलम्बो और मलेशिया से जुड़ा हुआ है।
रेल
अंगूठाकार|232x232पिक्सेल|श्रीरंगम रेलवे स्टेशन नाम बोर्ड
श्रीरंगम के रेलवे स्टेशन तक चेन्नई से चेन्नई-कन्याकुमारी रेलवे ट्रैक पर यात्रा करने वाली किसी भी प्रमुख ट्रेन के माध्यम से पहुंचा जा सकता है और चेन्नई से वहां तक पहुंचने का अनुमानित यात्रा समय लगभग 5 घंटा (320 किमी) है।
2 किमी और 8 किमी की दूरी पर स्थित क्रमशः तिरुचिरापल्ली किला और त्रिची जंक्शन, दक्षिण भारत के अधिकांश स्थानों के लिए एक संयोजन स्थल के रूप में काम करता है, जैसे - तंजावुर, चिदंबरम, मदुराई, तिरुपति, तुतिकोरिन, तेनकासी, किलोन, रामेश्वरम, बैंगलोर, कोयंबटूर, मैसूर, कोची, कन्याकुमारी और मंगलोर. यह हावड़ा, दिल्ली, कश्मीर जैसे उत्तर भारत के कुछ स्थानों से भी जुड़ा हुआ है।
बस
thumb|250px|right|कावेरी नदी के आर-पार त्रिची और श्रीरंगम को जोड़ने वाला पुल
त्रिची सेंट्रल बस स्टैंड, तमिलनाडु के अधिकांश भागों के लिए सीधी सेवाएं उपलब्ध कराता हैं। श्रीरंगम तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को बस स्टैंड से स्थानीय बस, टैक्सी, ऑटो रिक्शा मिल सकता है।
सिटी बस, सेंट्रल बस स्टैंड और चिंतामणि - मेन गार्ड गेट बस स्टैंड (दोनों त्रिची में) से पर्यटकों के सभी पसंदीदा जगहों तक की सेवा प्रदान करता है। त्रिची ट्रैवल्स जैसी पर्यटक टैक्सियां और ऑटो रिक्शा भी उचित दर पर उपलब्ध हैं।
सिटी बस सेवा का रूट नं. 1, श्रीरंगम और सेंट्रल बस स्टैंड को जोड़े हुए है। यह मार्ग त्रिची सेंट्रल बस स्टैंड से शुरू होकर त्रिची जंक्शन रेलवे स्टेशन, पलक्करई रेट्टई पिल्लैयर कोविल स्ट्रीट, मेन गार्ड गेट, छत्रम बस स्टैंड, कावेरी रिवर ब्रिज, माम्बज़ा सलई, तिरुवानैक्कोविल से होते हुए श्रीरंगम ठेर्क्कू वासल (मंदिर का दक्षिणी प्रवेश द्वार) के पास श्रीरंगम बस स्टैंड पर ख़त्म होती है।
बस सेवा की आवृत्ति बहुत बढ़िया है। हर 5 मिनट में एक बस की सुविधा उपलब्ध है और देर रात की यात्राएं भी, हर एक घंटे या इसी के आसपास एक बार, उपलब्ध हैं।
जलवायु
त्रिची (और श्रीरंगम) की जलवायु उष्णकटिबंधीय है। तापमान सीमा (°C या डिग्री सेल्सियस): ग्रीष्मकालीन-अधिकतम 37.1 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम 26.4 डिग्री सेल्सियस; शीतकालीन-अधिकतम 31.3 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम 20.6 डिग्री सेल्सियस; वर्षा: 835 मिमी
राजनीति
श्रीरंगम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, तिरुचिरापल्ली (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) का हिस्सा है। http://archive.eci.gov.in/se2001/background/S22/TN_ACPC.pdf PDF List of Parliamentary and Assembly Constituencies 2008-10-11 Tamil Nadu Election Commission of India https://web.archive.org/web/20081031131000/http://archive.eci.gov.in/se2001/background/S22/TN_ACPC.pdf 31 अक्तूबर 2008 dead
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, श्रीरंगम
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श्रीरंगम मंदिर में ऑनलाइन हिंदू सेवा
वास्तु परिप्रेक्ष्य में श्रीरंगम मंदिर
वेद ज्ञान में श्रीरंगम मंदिर की जानकारी
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