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मिश्रिख
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मिश्रिख / मिस्रिख Misrikh मिश्रिख India Uttar Pradesh 27.27 80.31 inline, title उत्तर प्रदेश में स्थिति देश प्रान्त उत्तर प्रदेश ज़िला सीतापुर ज़िला तहसील 15163 2011 भाषाएँ प्रचलित हिन्दी भामस +5:30 पिनकोड दूरभाष कोड
मिश्रिख (Misrikh) या मिस्रिख भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सीतापुर ज़िले में स्थित एक नगर है। समीप ही नैमिषारण्य स्थित है जो "नीमसार" भी कहलाता है, जिस कारणवश इस शहर को मिस्रिख नीमसार (Misrikh Neemsar) भी कहते हैं।"Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716"Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC 23 अप्रैल 2017 ," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975
विवरण
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में नैमिषारण्य से दस किलोमीटर की दूरी पर मिश्रिख या मिसरिख है। मिश्रिख की प्रसिद्धि दधीचि कुंड के कारण है। मिश्रिख में महर्षि दधीचि का आश्रम है । कथा है कि एक बार समस्त देवता और इंद्र वृत्तासुर राक्षस से पराजित हो गए। ब्रह्मा और विष्णु जी ने देवताओं से कहा की वृत्तासुर को पराजित करने के लिए ऋषि दधीचि की हड्डियों से यदि एक धनुष बनाया जाय तभी उस धनुष से इस राक्षस को मारा जा सकता है । दधीचि ऋषि उस समय घोर जंगल में तप में लीन थे और उस स्थान का पता लगा पाना बहुत कठिन था। देवताओं ने भगवान विष्णु से इसमें सहायता का आग्रह किया। इस पर भगवान ने अपना सुदर्शन चक्र फ़ेंक कर कहा कि जहां यह चक्र गिरेगा उसी के पास में ऋषि दधीचि तप करते हुए मिलेंगे । यह चक्र नैमिषारण्य में गिरा जहाँ पर आज भी चक्र तीर्थ है। चक्र की नेमि (धुरी) इस स्थान पर गिरने के कारण ही इस स्थान का नाम नैमिषारण्य हुआ। इसके पास में मिश्रिख में ऋषि दधीचि तप करते हुए मिले। इन्द्रदेव और सभी देवों ने ऋषि से अपनी हड्डियां देने का आग्रह किया जिससे राक्षस वृत्तासुर का वध किया जा सके। ऋषि ने देव कल्याण के लिए यह अनुरोध स्वीकार कर लिया पर कहा कि वह मृत्यु से पहले सभी तीर्थों के जल से स्नान करना चाहते हैं। इंद्र ने सभी तीर्थों को वही बुलवा लिया और तीर्थों ने दधीचि को स्नान करवाया स्नान का जल दधीचि के यज्ञ कुंड में संग्रहित हो गया । कुंड आज भी मिश्रिख में है। क्योंकि इस कुंड में सभी तीर्थों का जल मिश्रित था अतः इस स्थान का नाम भी मिश्रित पड़ा। अब इस स्थान को मिश्रिख या मिसरिख भी कहते हैं।
इन्हें भी देखें
सीतापुर ज़िला
नैमिषारण्य
सन्दर्भ
श्रेणी:सीतापुर ज़िला
श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर
श्रेणी:सीतापुर ज़िले के नगर