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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कचनार

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गुलाबी कचनारPhanera variegata Bauhinia variegata_flower.jpg कचनार के फूल पादप (Plantae) आवृतबीजी (Angiosperms) युडिकॉट (Eudicots) रोज़िड्स (Rosids) फ़ाबेलेस (Fabales) फ़ाबेसी (Fabaceae) फ़नेरा (Phanera) P. variegata Phanera variegata http://www.legumes-online.net/ildis/aweb/td003/td_00496.htm Version 10.38 20 July 2010 - Scientific Names: Bauhinia variegata L.. www.legumes-online.net 2026-04-06 (L.) Benth. कचनार एक सुंदर फूलों वाला वृक्ष है। कचनार के छोटे अथवा मध्यम ऊँचाई के वृक्ष भारतवर्ष में सर्वत्र होते हैं। लेग्यूमिनोसी (Leguminosae) कुल और सीज़लपिनिआयडी (Caesalpinioideae) उपकुल के अंतर्गत बॉहिनिया प्रजाति की समान, परंतु किंचित्‌ भिन्न, दो वृक्षजातियों को यह नाम दिया जाता है, जिन्हें बॉहिनिया वैरीगेटा (Bauhinia variegata) और बॉहिनिया परप्यूरिया (Bauhinia purpurea) कहते हैं। बॉहिनिया प्रजाति की वनस्पतियों में पत्र का अग्रभाग मध्य में इस तरह कटा या दबा हुआ होता है मानों दो पत्र जुड़े हुए हों। इसीलिए कचनार को युग्मपत्र भी कहा गया है। बॉहिनिया वैरीगेटा में पत्र के दोनों खंड गोल अग्रभाग वाले और तिहाई या चौथाई दूरी तक पृथक, पत्रशिराएँ १३ से १५ तक, पुष्पकलिका का घेरा सपाट और पुष्प बड़े, मंद सौरभ वाले, श्वेत, गुलाबी अथवा नीलारुण वर्ण के होते हैं। एक पुष्पदल चित्रित मिश्रवर्ण का होता है। अत: पुष्पवर्ण के अनुसार इसके श्वेत और लाल दो भेद माने जा सकते हैं। बॉहिनिया परप्यूरिया में पत्रखंड अधिक दूर तक पृथक पत्रशिराएँ ९ से ११ तक, पुष्पकलिकाओं का घेरा उभरी हुई संधियों के कारण कोणयुक्त और पुष्प नीलारुण होते हैं। संस्कृत साहित्य में दोनों जातियों के लिए 'कांचनार' और "कोविदार' शब्द प्रयुक्त हुए हैं। किंतु कुछ परवर्ती निघुटुकारों के मतानुसार ये दोनों नाम भिन्न-भिन्न जातियों के हैं। अत: बॉहिनिया वैरीगेटा को कांचनार और बॉहिनिया परप्यूरिया को कोविदार मानना चाहिए। इस दूसरी जाति के लिए आदिवासी बोलचाल में, "कोइलार' अथवा "कोइनार' नाम प्रचलित हैं, जो निस्संदेह "कोविदार' के ही अपभ्रंश प्रतीत होते हैं। आयुर्वेदीय वाङ्मय में भी कोविदार और कांचनार का पार्थक्य स्पष्ट नहीं है। इसका कारण दोनों के गुणसादृश्य एवं रूपसादृश्य हो सकते हैं। चिकित्सा में इनके पुष्प तथा छाल का उपयोग होता है। कचनार कषाय, शीतवीर्य और कफ, पित्त, कृमि, कुष्ठ, गुदभ्रंश, गंडमाला एवं व्रण का नाश करनेवाला है। इसके पुष्प मधुर, ग्राही और रक्तपित्त, रक्तविकार, प्रदर, क्षय एवं खाँसी का नाश करते हैं। इसका प्रधान योग "कांचनारगुग्गुल' है जो गंडमाला में उपयोगी होता है।https://bioinformaticssikkim.gov.in/bioinformaticssikkim/medicinal%20Plants/27.html 27 bioinformaticssikkim.gov.in 2026-04-06जून 2026 InternetArchiveBot कोविदार की अविकसित पुष्पकलिकाओं का शाक भी बनाया जाता है, जिसमें हरे चने (होरहे) का योग बड़ा स्वादिष्ट होता है।http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.112096 Indian Materia Medica Vol.i K.m.nadkarni 1908 184-185 कुछ लोगों के मत से कांचनार को ही 'कर्णिकार' भी मानना चाहिए। परंतु संभवत: यह मत ठीक नहीं है। छवि दीर्घा Bauhinia variegata Bauhinia variegata Bauhinia variegata Bauhinia variegata बाहरी कड़ियाँ अभिव्यक्ति पत्रिका का कचनार विशेषांक कचनार की कली की सब्जी https://web.archive.org/web/20101127180441/http://nishamadhulika.com/sabzi/sabzi_sookhi/kachnar-kali-recipe.html 27 नवंबर 2010 (निशा मधुलिका) कचनार : शोथ एवं ग्रंथिनाशक (वेबदुनिया) कचनार सन्दर्भ श्रेणी:फूलों वाले वृक्ष श्रेणी:फूल