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ब्रह्मचारिणी
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Hindu Brahmacharini.jpg ब्रह्मचारिणी- नवदुर्गाओं में द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी ब्रह्मचारिणी हिन्दू देवी
ऋक्,यजुष,साम,अथर्वा (पौत्र:व्याडि,लोकविश्रुत मीमांस,पाणिनी,वररुचि) कमंडल व माला पैर
ब्रह्मचारिणी माँ की नवरात्र पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना की जाती हैद्वितीय नवरात्र 2017 : यश, सिद्धि और सर्वत्र विजय के लिए होती है देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा NDTVIndia १९ मार्च 2020 https://khabar.ndtv.com/news/faith/second-day-of-navratri-dedicated-to-maa-brahmacharini-1744418 हिन्दी भाषा २७ मार्च २०२० https://web.archive.org/web/20190809193217/https://khabar.ndtv.com/news/faith/second-day-of-navratri-dedicated-to-maa-brahmacharini-1744418 9 अगस्त 2019 dead । साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। यह जानकारी भविष्य पुराणBhavishaya Puran Diamond Pocket Books (P) Limited 978-81-288-0562-2 http://books.google.co.in/books?id=Prucpv0o4rUC&pg=PT13 tl २७ मार्च २०२० 13 से ली गई हे।
श्लोक
दधाना कर पद्माभ्यामक्ष माला कमण्डलु |
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा || Gupta G.J. Ved Aaur Purano Me Varnit Mahashaktiya Hindūlôjī Buksa 2009 http://books.google.co.in/books?id=6UwqAQAAMAAJ it २७ मार्च २०२०
शक्ति
इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। जिससे उनका जीवन सफल हो सके और अपने सामने आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सामना आसानी से कर सकें।
फल
माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता।
माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है।
इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं।
उपासना
प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए।
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।
सन्दर्भ
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