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सहजीवी संबंध
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सहजीवी संबंध या माइकोराइजा (mycorrhiza)(from Greek μύκης mýkēs, "fungus", and ῥίζα rhiza, "root"; pl. mycorrhizae, mycorrhiza or mycorrhizas) किसी कवक तथा वाहिक पादपों (vascular plant) की जडों के बीच परस्पर सहजीवी सम्बन्ध को कहते हैंAinsworth and Bisby's Dictionary of the Fungi Kirk P. M. Cannon P. F. David J. C. Stalpers J. 2001 CAB International 9th Wallingford, UK amp।इस प्रकार के सहजीवी सम्बन्ध में कवक, पौधे की जड़ों पर आश्रित होते हैं तथा मृदा-जीवन का एक महत्वपूर्ण घटक होते हैं।
पादप organic molecules (saugar) कवक को प्रदान करता है। जब्कि कवक जल तथा mineral nutrients पादप को प्रदान करता है ये एक दुसरे के साथ मिलकर जिवन यापन करते हैं इन दोनो मैं से कोई भी एक दुसरे के लिये हानिकारक नही होता हैं दोनो ही एक दुसरे के विकास मै सहायक होते हैं।
श्रेणी:भूमि
कवक मुख्य रूप से मृदा से फोस्फोरस(P) का अवशोषण कर मृदा में transfer करता है।
इस सहजीवी में संबंध के कारण पादप का मुख्य लाभ प्राप्त होते हैं-- १.मूलवातोढ रोगजनक के प्रति प्रतिरोधकता
२. लवणता एवम् सुखे के प्रति सहनशीलता तथा विकास प्रदर्शित।
माइकोराइजा कवक और पादप जड़ के मध्य एक सहजीवी संबंध होता है। लगभग 95 प्रतिशत पौधों की प्रजातियों में यह संबंध पाया जाता है। माइकोराइजा मृदा जैविकी और मृदा रसायन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माइकोराइजा पौधों के लिए मृदा से विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व जैसे फास्फोरस, नाइट्रोजन और अन्य सूक्ष्म मात्रिक पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करते हैं। अतः यह फसलोें के पैदावार को बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माइकोराइजा पौधों के द्वारा जल के अंतरग्रहण की क्रिया दर को बढ़ाते हुए उन्हें सूखे की परिस्थिति में प्रतिरोधी बनाते हैं। इस कारण इन्हें प्राकृतिक जैव उर्वरक के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही साथ रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्म जीवों से पौधे को सुरक्षा प्रदान करते हैं
2 संबंधों: ट्रफल, सूक्ष्मजीव।
ट्रफल
श्याम पेरिगॉर्ड कंदकवक कंदकवक या ट्रफल (अंग्रेजी:truffle) किसी भूमिगत खुम्बी का फलन-पिंड है, जिसका बीजाणु प्रसार कवकाहारी जीवों द्वारा किया जाता है। लगभग सभी ट्रफल वाह्यमूलकवकीय होते हैं और इसलिए आम तौर पर पेड़ों निकट पाये जाते हैं। कंदकवक की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं। कुछ कंदकवकों के फलन पिंड (ज्यादातर कंद वंशीय) को एक बेशकीमती भोजन माना जाता है: मध्य पूर्वी, फ्रांसीसी, स्पानी, उत्तरी इतालवी और यूनानी भोजन में खाद्य कंदकवकों को बेहतरीन भोजन के रूप में स्वीकार किया जाता है। .
सूक्ष्मजीव
जीवाणुओं का एक झुंड वे जीव जिन्हें मनुष्य नंगी आंखों से नही देख सकता तथा जिन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र की आवश्यकता पड़ता है, उन्हें सूक्ष्मजीव (माइक्रोऑर्गैनिज्म) कहते हैं। सूक्ष्मजैविकी (microbiology) में सूक्ष्मजीवों का अध्ययन किया जाता है। सूक्ष्मजीवों का संसार अत्यन्त विविधता से बह्रा हुआ है। सूक्ष्मजीवों के अन्तर्गत सभी जीवाणु (बैक्टीरिया) और आर्किया तथा लगभग सभी प्रोटोजोआ के अलावा कुछ कवक (फंगी), शैवाल (एल्गी), और चक्रधर (रॉटिफर) आदि जीव आते हैं। बहुत से अन्य जीवों तथा पादपों के शिशु भी सूक्ष्मजीव ही होते हैं। कुछ सूक्ष्मजीवविज्ञानी विषाणुओं को भी सूक्ष्मजीव के अन्दर रखते हैं किन्तु अन्य लोग इन्हें 'निर्जीव' मानते हैं। सूक्ष्मजीव सर्वव्यापी होते हैं। यह मृदा, जल, वायु, हमारे शरीर के अंदर तथा अन्य प्रकार के प्राणियों तथा पादपों में पाए जाते हैं। जहाँ किसी प्रकार जीवन संभव नहीं है जैसे गीज़र के भीतर गहराई तक, (तापीय चिमनी) जहाँ ताप 100 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा हुआ रहता है, मृदा में गहराई तक, बर्फ की पर्तों के कई मीटर नीचे तथा उच्च अम्लीय पर्यावरण जैसे स्थानों पर भी पाए जाते हैं। जीवाणु तथा अधिकांश कवकों के समान सूक्ष्मजीवियों को पोषक मीडिया (माध्यमों) पर उगाया जा सकता है, ताकि वृद्धि कर यह कालोनी का रूप ले लें और इन्हें नग्न नेत्रों से देखा जा सके। ऐसे संवर्धनजन सूक्ष्मजीवियों पर अध्ययन के दौरान काफी लाभदायक होते हैं।
स्रोत