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न्यायालयिक भाषाविज्ञान
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न्यायालयिक भाषाविज्ञान या न्याय-भाषाविज्ञान (फोरेंसिक भाषाविज्ञान), अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की एक शाखा है जो भाषावैज्ञानिक ज्ञान, विधियों तथा अन्तर्दृष्टि का उपयोग करके न्यालयों में अपराध-अन्वेषण में सहायक होता है।
न्यायालयों में काम करने वाले भाषावैज्ञानिक निम्नलिखित तीन क्षेत्रों में इसका उपयोग करते हैं-Centre for Forensic Linguistics Aston University http://www.forensiclinguistics.net/cfl_fl.html 31 अक्तूबर 2016 https://web.archive.org/web/20100927010829/http://www.forensiclinguistics.net/cfl_fl.html 27 सितंबर 2010 dead ;
(1) लिखित कानून की भाषा को समझने में,
(2) फोरेंसिक तथा न्यायालयीय प्रक्रियाओं में प्रयोग की जाने वाली भाषा को समझने में,
(3) भाषाई साक्ष्य देने में।
कानूनी कार्यवाही में भाषावैज्ञानिक साक्ष्यों के उपयोग
भाषावैज्ञानिकों ने निम्नलिखित क्षेत्रों में साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं-
ट्रेडमार्क और अन्य बौद्धिक संपत्ति विवाद
अर्थ और भाषा-प्रयोग (usage) के विवाद
लेखक की पहचान करने में
फोरेंसिक शैलीविज्ञान (साहित्यिक चोरी आदि को पकड़ने में)
आवाज की पहचान ; इसे फोरेंसिक स्वनविज्ञान भी कहते हैं। उदाहरण के लिये, यह पता लगाने के लिये कि किसी टेप पर अंकित आवाज आरोपी की है या नहीं।
भाषण का विश्लेषण
भाषा विश्लेषण (फोरेंसिक बोलीविज्ञान)- शरण चाहने वालों के भाषाई इतिहास अनुरेखण, जिससे शरण चाहने वालों का वास्तविक जन्मस्थान का पता किया जा सके।
मोबाइल फोन पाठ-बातचीत का पुनर्निर्माण
फोरेंसिक स्वनविज्ञान (Forensic phonetics)
सन्दर्भ
श्रेणी:न्यायालयिक विज्ञान
श्रेणी:भाषा-विज्ञान