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विशिष्टद्वैत
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संभवतः आपका तात्पर्य विशिष्टाद्वैत (Vishishtadvaita) दर्शन से है, जिसे 11वीं-12वीं शताब्दी में आचार्य रामानुज ने प्रतिपादित किया था। इसके अनुसार ब्रह्म (ईश्वर) ही सर्वोच्च सत्य हैं, और संपूर्ण जगत तथा जीवात्मा उन्हीं के विशिष्ट अंग या रूप हैं, जैसे सूर्य और उसकी किरणें।Google gemini AI
विशिष्टाद्वैत दर्शन के मुख्य बिंदु
ब्रह्म और जीव का संबंध: जीव और जगत ब्रह्म से अलग भी हैं और जुड़े भी हुए हैं। जीव ब्रह्म पर पूरी तरह निर्भर हैं।
सगुण ईश्वर: इस मत में ईश्वर को निराकार या गुणों से रहित नहीं, बल्कि अनंत कल्याणकारी गुणों से युक्त एक व्यक्तिगत सर्वोच्च सत्ता (भगवान विष्णु/नारायण) माना गया है।
भक्ति का महत्व: इस दर्शन में मुक्ति या मोक्ष का एकमात्र साधन सगुण ईश्वर की अनन्य भक्ति और प्रपत्ति (शरणागत होना) को माना गया है।