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कुशीनगर जिला
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उत्तर प्रदेश के जिले इसी नाम के कस्बे और जिला मुख्यालय कुशीनगर
कुशीनगर जिला उत्तर प्रदेश गोरखपुर पडरौना India Uttar Pradesh districts 2012 Kushinagar.svg 2873.5 3,560,830 4.87 प्रतिशत 2011 1228 68.00% 960 कुशीनगर http://www.kushinagar.nic.in
कुशीनगर जिला भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मंडल के अन्तर्गत एक जिला है। इस जनपद का मुख्यालय कुशीनगर से लगभग 15 किमी दूर रवींद्रनगर धूस, पडरौना में स्थित है। यह पहले देवरिया जिले का भाग था। कुशीनगर जिले के पूर्व में बिहार राज्य, दक्षिण-पश्चिम में देवरिया जिला, पश्चिम में गोरखपुर जिला, उत्तर-पश्चिम में महराजगंज जिला स्थित हैं।
इस जिले का क्षेत्रफल 2,873.5 वर्ग किमी है। जनसंख्या 3,560,830 (2011), साक्षरता दर 67.66% और लिंगानुपात 955 है। इस जिले में एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (कुशीनगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र) है और सात विधानसभा क्षेत्र - फाजिलनगर, खड्डा, रामकोला, हाटा, कसया, पडरौना, तमकुही राज हैं। जिले में 6 तहसीलें हैं - पडरौना, कुशीनगर, हाटा, तमकुहीराज, खड्डा, कप्तानगंज और 14 विकासखण्ड हैं - पडरौना, बिशुनपुरा, कुशीनगर, हाटा, मोतीचक, सेवरही, नेबुआ नौरंगिया, खड्डा, दुदही, फाजिल नगर, सुकरौली, कप्तानगंज, रामकोला और तमकुहीराज। जिले में ग्रामों की संख्या 1447 हैं।
जिले में तीन नगरपालिका क्रमशः पडरौना, हाटा एवम् कुशीनगर तथा दस नगर पंचायत हैं जिनमें सुकरौली, मथौली, कप्तानगंज, रामकोला, खड्डा, छितौनी, दुदही, फाजिलनगर, तमकुही व सेवरही हैं। कुशीनगर जिले में गन्ने की खेती बहुतायत होती है।
धार्मिक व ऐतिहासिक परिचय
right|thumb|260px|रामभार स्तूप जहाँ महात्मा बुद्ध का अंतिम-संस्कार हुआ था।
हिमालय की तराई वाले क्षेत्र में स्थित कुशीनगर का इतिहास अत्यन्त ही प्राचीन व गौरवशाली है। वर्ष 1876 ई0 में अंग्रेज पुरातत्वविद ए कनिंघम ने यहाँ पुरातात्विक खुदाई करायी थी और उसके बाद सी एल कार्लाइल ने भी खुदाई करायी जिसमें यहाँ का मुख्य स्तूप (रामाभार स्तूप) और 6.10 मीटर लम्बी भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा मिली थी। इन खोजों के परिणामस्वरूप कुशीनगर का गौरव पुनर्स्थापित हुआ। जे. पीएच. वोगेल के देखरेख में पुनः 1904-05, 1905-06 एवं 1906-07 में खुदाई हुई जिससे बौद्ध धर्म से सम्बन्धित अनेकों वस्तुएँ प्राप्त हुईं।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार यह स्थान त्रेता युग में भी आबाद था और यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी थी जिसके चलते इसे 'कुशावती' के नाम से जाना गया। पालि साहित्य के ग्रन्थ त्रिपिटक के अनुसार बौद्ध काल में यह स्थान षोड्श महाजनपदों में से एक था और मल्ल राजाओं की राजधानी। तब इसे 'कुशीनारा' के नाम से जाना जाता था। ईसापूर्व छठी शताब्दी के अन्त या ईसापूर्व पांचवी शताब्दी के आरम्भ में यहां भगवान बुद्ध का आगमन हुआ था। कुशीनगर में ही उन्होंने अपना अन्तिम उपदेश देने के बाद महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया था।
कुशीनगर से 16 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में मल्लों का एक और गणराज्य पावा था। यहाँ बौद्ध धर्म के समानान्तर ही जैन धर्म का प्रभाव था। माना जाता है कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी (जो बुद्ध के समकालीन थे) ने पावानगर (वर्तमान में फाजिलनगर) में ही परिनिर्वाण प्राप्त किया था। इन दो धर्मों के अलावा प्राचीन काल से ही यह स्थल सनातन हिन्दू धर्मावलंम्बियों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
गुप्तकाल के तमाम भग्नावशेष आज भी जिले में बिखरे पड़े हैं। इनमें लगभग डेढ़ दर्जन प्राचीन टीले हैं जिसे पुरातात्विक महत्व का मानते हुए पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित कर रखा है। उत्तर भारत का एकमात्र सूर्य मंदिर भी इसी जिले के तुर्कपट्टी में स्थित है। भगवान सूर्य की प्रतिमा यहां खुदाई के दौरान ही मिली थी जो गुप्तकालीन मानी जाती है। इसके अलावा भी जनपद के विभिन्न भागों में अक्सर ही जमीन के नीचे से पुरातन निर्माण व अन्य अवशेष मिलते ही रहते हैं।
कुशीनगर जनपद का जिला मुख्यालय पडरौना है जिसके नामकरण के सम्बन्ध में यह कहा जाता है कि भगवान राम विवाह के उपरान्त पत्नी सीता व अन्य सगे-संबंधियों के साथ इसी रास्ते जनकपुर से अयोध्या लौटे थे। उनके पैरों से रमित धरती पहले 'पदरामा' और बाद में पडरौना के नाम से जानी गई। जनकपुर से अयोध्या लौटने के लिए भगवान राम और उनके साथियों ने पडरौना से 10 किलोमीटर पूरब से होकर बह रही बांसी नदी को पार किया था। आज भी बांसी नदी के इस स्थान को 'रामघाट' के नाम से जाना जाता है। हर वर्ष यहां भव्य मेला लगता है जहाँ उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों श्रद्धालु आते हैं। बांसी नदी के इस घाट को स्थानीय लोग इतना महत्व देते हैं कि 'सौ काशी न एक बांसी' की कहावत ही बन गई है। मुगल काल में भी यह जनपद अपनी खास पहचान रखता था।
तहसीलें
कुशीनगर जिले में 6 तहसीलें हैं:
पडरौना
कुशीनगर
हाटा
तमकुहीराज
खड्डा और
कप्तानगंज
विकासखण्ड
कुशीनगर जिले में 14 विकासखण्ड हैं - पडरौना, बिशुनपुरा, कुशीनगर, हाटा, मोतीचक, सेवरही, नेबुआ नौरंगिया, खड्डा, दुदही, फाजिल नगर, सुकरौली, कप्तानगंज, रामकोला और तमकुहीराज।
विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र
फाजिलनगर
खड्डा
रामकोला
हाटा
कसया
पडरौना
तमकुही राज
प्रमुख पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थल
कुशीनगर
कुशीनगर
right|thumb|260px|कुशीनगर स्थित परिनिर्वाण मंदिर
कुशीनगर में महात्मा बुद्ध का परिनिर्वाण हुअ था। तत्कालीन मल्ल महाजनपद एवं कुशीनगर के बघोचिया/ बौद्धोचिया राजवंश के शासक ने तथागत बुद्ध का अंतिम संस्कार किया था। बघोचिया राजवंश के द्वारा कुशीनगर में आठ स्तूपों का निर्माण करवाया गया था। तथागत बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद बघोचिया राजवंश में पैदा हुए राजकुमार का नाम "निर्वाण सेन" रखा गया था जो मल्ल महाजनपद के अगले शासक बने थे। मल्ल महाजनपद के शासक राजा निर्वाण सेन के पुत्र राजा जगत सेन को मगध के शासक ने "सिम्हा" उपाधि से सम्मानित किया था। राजा जगत सिम्हा को मगध के शासक ने अपना सेनापति नियुक्त किया था। यहां पर मुख्य रूप से महापरिनिर्वाण मंदिर, रामाभार स्तूप तथा माथाकुँवर मंदिर है। आज कुशीनगर में म्यांमार बुद्ध विहार, थाईलैंड बुद्ध विहार, कोरिया बुद्ध विहार, चीनी बुद्ध विहार, जापानी बुद्ध विहार, श्री लंका बुद्ध विहार, कम्बोडिया बुद्ध विहार, एकयुप्रेशर परिषद्, प्रबुद्ध सोसाइटी, भदंत ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार एवं भिक्षु संघ सेवारत है तथा प्रत्येक बर्ष बुद्ध पूर्णिमा धूमधाम से कुशीनगर में मनाया जाता है जिसमे देश विदेश के लाखों श्रद्धालु आते हैं । कुशीनगर में प्रत्येक वर्ष 10 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, मिलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन कुशीनगर भिक्षु संघ, एकयुप़ेशर काउंसिल एवं प्रबुद्ध सोसाइटी द्वारा किया जाता है।
तुर्कपट्टी का सूर्य मंदिर
तुर्कपट्टी से लगभग 800 मीटर दक्षिण की ओर एक सूर्य मंदिर है। कुशीनगर का 'कोणार्क' कहे जाने वाले इस स्थान पर मिले सूर्य प्रतिमा की कथा सुदामा शर्मा से जुड़ी है। परिवार के लोगों के आकस्मिक निधन से परेशान श्री शर्मा ने रात में सपना देखा। स्वप्न में देखे गए स्थान की खुदाई में नीलमणि पत्थर की दो खंडित प्रतिमाएं मिली। अध्ययन के बाद इतिहासकारों ने बताया कि इनमें मिली मूर्तियां गुप्तकालीन हैं। एक प्रतिमा सूर्यदेव की है। 24 अप्रैल 1998 को इस प्रतिमा की चोरी हो गई थी, लेकिन पुलिस के प्रयास से प्रतिमा को बरामद कर लिया गया। अब यहां मंदिर बन चुका है। मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहता है। इस मूर्ति की विशेषता है कि सूर्य के उगने के साथ ही मूर्ति की चमक बढ़ती है और दोपहर बाद मूर्ति की चमक मंद पड़ने लगती है।
बघउच बाबा
तथागत बुद्ध के समय में राजा लक्ष्मण सेन समस्त मल्ल महाजनपद के शासक थे जो बघोचिया / बौद्धोचिया राजवंश के अंतर्गत आते थे। राजा लक्ष्मण सेन के पूर्वज एवं तत्कालीन मल्ल महाजनपद के शासक "राजा वीरसेन " ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व में "बघोचिया राजवंश" की स्थापना किया था। कुशीनगर में कुकुत्था ( घाघी) नदी के किनारे ऐतिहासिक मल्लूडीह पर मल्ल महाजनपद के शासक राजा वीरसेन की समाधि/ स्तूप मौजूद हैं। पिछले सैकड़ों वर्षों से स्थानीय लोगों के द्वारा राजा वीरसेन को बघउच बाबा/ बौद्धउच बाबा के नाम से पूजा जाता रहा है। मल्ल महाजनपद के शासक "राजा लक्ष्मण" ने तथागत बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद पैदा हुए अपने पुत्र का नाम "निर्वाण सेन" रखा था जो मल्ल महाजनपद के अगले शासक बने थे। मल्ल महाजनपद के अंतर्गत वर्तमान बिहार के छपरा, सिवान एवं गोपालगंज जिले एवं उत्तर प्रदेश के कुशीनगर, देवरिया एवं गोरखपुर जिले आते थे जिन्हें संयुक्त रूप से एक विशेष संस्कृति के अंतर्गत एकीकृत किया गया था। मुगल शासनकाल में मल्ल महाजनपद के अंतर्गत आनेवाले क्षेत्र दो भागों में बट गए। बिहार के छपरा, सिवान एवं गोपालगंज जिले बंगाल के नवाब के नियंत्रण में थे जबकि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर, देवरिया एवं गोरखपुर जिले अवध के नवाब के अधीन आते थे। हालांकि इस बंटवारे के बाद भी इन क्षेत्रों की संस्कृति सदैव एकसमान बनी रही।
अन्य
कुशीनगर के पनियहवा में गंडक नदी पर बना पुल देखने में काफी रोचक लगता है। पडरौना का बहुत पुराना राज दरबार भी पर्यटकों का दिल लुभाता है। कुशीनगर का सबसे बड़ा गांव जंगल खिरकिया में भव्य मंदिर है जहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। ग्राम जंगल अमवा के समीप मुसहर टोली में बना पंचवटी पार्क भी देखने योग्य हैं।
यातायात
इस जिले में पडरौना, कप्तानगंज जं, बोदरवार, लक्ष्मीगंज, रामकोला, कठकुईयां, खड्डा, दुदही, तमकुही रोड, पनियहवा समेत कई छोटे बड़े रेलवे स्टेशन हैं। वर्तमान में कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का 2021 में उद्घाटन हुआ है, लेकिन अभी तक नियमित उड़ानें शुरू नहीं हो सकीं हैं।
कृषि
कुशीनगर मुख्यतः कृषि-प्रधान जनपद है। गन्ना, गेहूँ, धान यहाँ की प्रमुख फसलें हैं। इसके अलावा मक्का, बाजरा, मूंग, उड़द, अरहर एवं सब्जियों की खेती भी की जाती है।
चीनी मिलें
कुशीनगर जिला गन्ना एवं चीनी उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां गन्ने की सर्वाधिक खेती की जाती है। अतः यहां चीनी मिलों की अधिकता है। इस जिले में निम्नलिखित स्थानों पर मिलें स्थापित की गयी है -
सेवरही, पडरौना, खड्डा, कप्तानगंज, रामकोला, लक्ष्मीगंज, कटकुंइयाँ, छितौनी, ढाढ़ा
जनसांख्यिकी
कुशीनगर जिले की धार्मिक जनसांख्यिकी #Fcd116 धर्म प्रतिशत right हिन्दू orange 82.16
मुसलमान green 17.40
सन 2011 की भारत की जनगणना के अनुसार कुशीनगर जिले की कुल जनसंख्या 35,60,830 है, http://www.census2011.co.in/district.php District Census 2011 2011-09-30 2011 Census2011.co.in https://web.archive.org/web/20110611224943/http://www.census2011.co.in/district.php 11 जून 2011 live जो लिथुआनिया की जनसंख्या के लगभग बराबर है। US Directorate of Intelligence Country Comparison:Population https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/rankorder/2119rank.html 2011-10-01 Lithuania 3,535,547 July 2011 est. https://web.archive.org/web/20110927165947/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/rankorder/2119rank.html 27 सितंबर 2011 live इस प्रकार कुशीनगर जिला भारत के 640 जिलों में 81वाँ सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला है। इस जिले का जनघनत्व 1226 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। 2001 से 2011 के बीच इस जिले की जनसंख्या की वृद्धि दर 23.08% रही। लिंगानुपात की दृष्टि से इस जिले में 1000 पुरुषों पर 955 स्त्रियाँ हैं। साक्षरता दर 67.66% है।
कुशीनगर जिले में हिन्दू, मुसलमान व बौद्ध धर्म के अधिकतर लोग निवास करते है। हिन्दू समुदाय के मल्ल-सैंथवार, अहिर, कोइरी, कुर्मी, भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ, चमार, डोम, दुसाद, मुसहर, पासी, बीन, मल्लाह, भर, बारी, कुम्हार, भेड़िहार, हजाम, आदि जातियाँ निवास करती हैं और मुस्लिम समुदाय की शेख, पठान, अंसारी (जुलाहा), देवान, कुरैशी, चुड़ीहार, मिसकार, गद्दी, राकी इत्यादि।
शिक्षा
इस जिले में शिक्षा का स्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। बहुत सारे कालेज व शैक्षिण संस्थान हैं। जिनमें बुद्ध डिग्री कॉलेज, उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, किसान इंटर कॉलेज खड्डा में श्री गाँधी स्मारक इंटरमीडिएट कॉलेज प्रमुख हैं। यहां महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के रूप में प्रदेश के पांचवें कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं। निर्माणाधीन विश्वविद्यालय परिसर में कृषि से संबंधित तीन महाविद्यालय संचालित किए जाने की योजना है।
संस्कृति
लोकरंग सांस्कृतिक समिति´ विगत तीन वषों से लोक संस्कृतियों के अन्वेषण, संवर्धन और संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है। किसी भी समाज की लोक संस्कृति, कला और संगीत का उसके मानवीय संवेदनाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान होता है।
इन्हें भी देखें
कुशीनगर (कस्बा)
पडरौना - जहाँ कुशीनगर जिले का मुख्यालय स्थित है।
कप्तानगंज (कस्बा)
महात्मा बुद्ध
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
https://kushinagar.nic.in/
श्रेणी:उत्तर प्रदेश के जिले
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