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द्रव्य उपयोग विकार
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background:#ff9999; font-size:125%; font-weight:bold; text-align:center; द्रव्य उपयोग विकार (SUD) 250px|center|alt=व्यसनी मस्तिष्क का तंत्र व्यसनी मस्तिष्क का तंत्र: नशीले पदार्थ VTA से न्यूक्लियस एक्यूम्बेंस तक डोपामाइन स्रावित करते हैं, जिससे प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। background:#ffcccc; नैदानिक जानकारी प्रकार मानसिक विकार, रोग विशेषज्ञता मनोरोग विज्ञान, व्यसन चिकित्सा, मनोविज्ञान प्रमुख लक्षण सहिष्णुता, विथड्रॉल, तीव्र लालसा, शारीरिक व मानसिक निर्भरता जोखिम कारक आनुवंशिकी, मानसिक आघात, अन्य मानसिक बीमारियाँ उपचार मनोचिकित्सा, पुनर्वास, दवाएँ चिकित्सा वर्गीकरण ICD-11 6C40–6C4Z ICD-10 F10-F19 MeSH D019966 सांख्यिकी प्रभावित व्यक्ति ~3.5 करोड़ (वैश्विक स्तर पर) भारत की स्थिति ~16 करोड़ शराब उपभोक्ता (AIIMS डेटा) वैज्ञानिक पहचान विकिडाटा Q7632070
द्रव्य उपयोग विकार (Substance Use Disorder - SUD) एक जटिल मस्तिष्क विकार है जिसमें व्यक्ति नशीले पदार्थों का सेवन अनियंत्रित रूप से जारी रखता है, भले ही इसके गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य परिणाम हों। यह केवल एक व्यवहारिक समस्या नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की एक संरचनात्मक चिकित्सा स्थिति है जो निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती है।Thair T. 2020 Substance Use Disorder AAVV Ferri's Clinical Advisor https://archive.org/details/ferrisclinicalad0000ferr_y2j5 Elsevier Philadelphia 1321–1322 978-0-323-67254-2
मस्तिष्क पर प्रभाव और लक्षण
यह विकार मस्तिष्क के 'रिवॉर्ड सिस्टम' को स्थायी रूप से बदल देता है। वेंट्रल टेगमेंटल एरिया (VTA) से डोपामाइन का तीव्र स्राव पदार्थ के प्रति 'क्रेविंग' (तीव्र लालसा) पैदा करता है। लंबे समय तक नशे के सेवन से मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की कार्यक्षमता घट जाती है और शरीर में 'सहनशीलता' विकसित होने लगती है। इसका नतीजा यह होता है कि उसी नशे का समान प्रभाव पाने के लिए व्यक्ति को पहले से अधिक मात्रा की आवश्यकता होने लगती है। यदि व्यक्ति अचानक सेवन रोक दे, तो उसे बेहद कष्टदायक 'निकासी लक्षण' का सामना करना पड़ता है।Volkow Nora D. Koob George F. McLellan A. Thomas 2016-01-28 Neurobiologic Advances from the Brain Disease Model of Addiction https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/26816013 The New England Journal of Medicine 374 4 363–371 10.1056/NEJMra1511480 1533-4406 6135257 26816013 अनुसंधान यह भी बताते हैं कि उत्तेजक पदार्थों का उपयोग करने वाले युवा वयस्कों में जोखिम लेने और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है।Leland David S. Paulus Martin P. 2005-04-04 Increased risk-taking decision-making but not altered response to punishment in stimulant-using young adults https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/15769561 Drug and Alcohol Dependence 78 1 83–90 10.1016/j.drugalcdep.2004.10.001 0376-8716 15769561
निदान और भारत की स्थिति
किसी व्यक्ति को यह विकार है या नहीं, इसका निदान करने के लिए 'DSM-5' के 11 पैमानों का उपयोग किया जाता है।Diagnostic and statistical manual of mental disorders: DSM-5 https://archive.org/details/diagnosticstatis0005unse 2013 American Psychiatric Association 978-0-89042-554-1 American Psychiatric Association 5 Washington, D.C American Psychiatric Association यदि 12 महीने के भीतर 2 से 3 लक्षण मिलते हैं तो इसे 'हल्का' विकार माना जाता है। 4 से 5 लक्षणों पर यह 'मध्यम' और 6 या उससे अधिक लक्षणों के दिखने पर इसे 'गंभीर' श्रेणी में रखा जाता है।
अगर हम भारत की बात करें, तो एम्स की राष्ट्रीय रिपोर्ट दर्शाती है कि यहाँ शराब के बाद सबसे ज़्यादा ओपियोइड और कैनबिस का उपयोग किया जाता है। चिंता की बात यह है कि विशेष रूप से युवाओं और किशोरों के बीच यह समस्या बहुत तेज़ी से बढ़ी है।(2019) भारत में मादक द्रव्य उपयोग की व्यापकता। नई दिल्ली: राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र (NDDTC), एम्स (AIIMS)। (रिपोर्ट)। महामारी विज्ञान के हालिया शोध भी वैश्विक स्तर पर इसके बढ़ते चिकित्सीय परिणामों की पुष्टि करते हैं।Fuster Daniel Zuluaga Paola Muga Robert 2024-05-17 Substance use disorder: Epidemiology, medical consequences and treatment https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/38218656 Medicina Clinica 162 9 431–438 10.1016/j.medcli.2023.11.016 1578-8989 38218656
उपचार और पुनर्वास
इस विकार से बाहर निकलने के लिए 'औषधि-सहायता प्राप्त उपचार' का सहारा लिया जाता है। इसमें ब्यूप्रेनोरफिन और नाल्ट्रैक्सोन जैसी दवाओं का उपयोग किया जाता है जो नशे की लत को कम करती हैं। इसके साथ ही, 'संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी' (CBT) मरीज के मानसिक सुधार और समाज में पुनर्वास के लिए बहुत मददगार साबित होती है।
इसके अलावा, दुनिया भर में 'नुकसान न्यूनीकरण' की नीति भी अपनाई जा रही है। इसके तहत ओवरडोज़ से होने वाली अचानक मौतों को रोकने के लिए 'नैलोक्सोन' जैसी जीवन रक्षक दवाओं का वितरण किया जाता है।Koob George F. Volkow Nora D. Neurobiology of addiction: a neurocircuitry analysis https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC6135092/ The Lancet. Psychiatry 3 8 760–773 10.1016/S2215-0366(16)00104-8 2215-0374 6135092 27475769
सन्दर्भ