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411 समाचार
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प्रशांत महासागर का युद्ध

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प्रशांत महासागर का युद्ध 1879 से 1884 तक चिली, पेरू और बोलिविया के बीच लड़ा गया। यह युद्ध चिली के द्वारा बोलिविया की समुद्र तट तक पहुँच समाप्त करने और पेरू के दक्षिणी प्रांतों पर अधिकार करने का परिणाम था। इस युद्ध ने इन तीन देशों के बीच स्थायी कड़वाहट छोड़ दी, जो आज भी इनके आपसी संबंधों को प्रभावित करती है। प्रशांत महासागर का युद्ध दक्षिण अमेरिकी संघर्ष 1879 – 1884 अंटोफगास्ता, तारापाका, अरिका और दक्षिणी पेरू चिली की विजय; बोलिविया का स्थलीयकरण चिली पेरूबोलिविया मैनुएल बकेडानोआर्टुरो प्रैट मारियानो इग्नासियो प्राडोहिलारियोन दाज़ाफ्रांसिस्को बोलोग्नेसि 25,000 सैनिक 40,000 सैनिक लगभग 2,500 मृत या घायल लगभग 10,000 मृत या घायल पृष्ठभूमि इस युद्ध की पृष्ठभूमि स्पेनी औपनिवेशिक शासन के अंत से जुड़ी है, जब बोलिविया को समुद्र तक पहुँच के लिए अटाकामा मरुस्थल के माध्यम से एक गलियारा दिया गया था। यह क्षेत्र, जो उस समय अनुपयोगी माना जाता था, बाद में गुआनो (पक्षियों की बीट से बना नाइट्रेट) और खनिज संपत्तियों के कारण अत्यंत मूल्यवान हो गया। नाइट्रेट का उपयोग उर्वरक और विस्फोटक बनाने में होता था, जिससे इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बढ़ गया।Farcau Bruce Pacific, War of the (1879–1883) 2011 https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/9781444338232.wbeow467 The Encyclopedia of War John Wiley & Sons, Ltd en 10.1002/9781444338232.wbeow467 978-1-4443-3823-2 2025-01-19 हालांकि, बोलिविया की कमजोर राजनीतिक स्थिति के कारण इस क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया। चिली ने धीरे-धीरे अटाकामा क्षेत्र पर अधिकार जमाने के लिए सीमाओं का पुनःव्याख्या शुरू किया। 1878 में, जब बोलिविया ने अंटोफगास्ता क्षेत्र में निर्यातित नाइट्रेट पर कर लगाने का प्रयास किया, तो चिली ने इसे आक्रमण का बहाना बना लिया। युद्ध की शुरुआत 1879 में, चिली ने अंटोफगास्ता क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। बोलिविया और पेरू ने एक गुप्त गठबंधन किया था, लेकिन उनकी संयुक्त सेनाएँ प्रभावी साबित नहीं हुईं। बोलिवियाई सेना कमजोर और असंगठित थी, जबकि पेरू की सेना में भी नेतृत्व और संगठन की कमी थी।https://www.britannica.com/event/War-of-the-Pacific War of the Pacific 1879, Latin America, Summary, & Facts Britannica 2024-12-24 www.britannica.com en 2025-01-19 चिली, जिसे "दक्षिण अमेरिका का प्रशिया" कहा जाता था, ने अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए त्वरित सैन्य लामबंदी की। उसकी सेना आधुनिक राइफलों और अच्छी तरह से प्रशिक्षित सैनिकों से सुसज्जित थी। चिली ने जल्दी ही समुद्री शक्ति का लाभ उठाते हुए बोलिविया के तटीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। समुद्री और भूमि युद्ध चिली और पेरू के बीच युद्ध मुख्य रूप से समुद्र में केंद्रित था। चिली के पास अत्याधुनिक युद्धपोत थे, जबकि पेरू के पुराने आयरनक्लैड जहाज कमजोर साबित हुए। अक्टूबर 1879 में, चिली ने पेरू के प्रमुख जहाज हुआस्कर को कब्जे में ले लिया और समुद्र पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया। भूमि पर, चिली ने पिसागुआ, डोलोरेस और तारापाका क्षेत्रों में बोलिविया और पेरू की संयुक्त सेनाओं को हराया। 1880 में, टाक्ना की लड़ाई में बोलिवियाई सेना पूरी तरह से हार गई, जिसके बाद बोलिविया ने युद्ध से हटने का फैसला किया। 1881 में, चिली ने पेरू की राजधानी लिमा पर कब्जा कर लिया। इसके बाद, पेरू ने छापामार युद्ध शुरू किया, लेकिन चिली ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। परिणाम और प्रभाव 20 अक्टूबर 1883 को अंकोन की संधि पर हस्ताक्षर के साथ युद्ध समाप्त हुआ। इस संधि के तहत, पेरू को अपने दक्षिणी प्रांत अरिका और तारापाका चिली को सौंपने पड़े। बोलिविया ने अपना तटीय क्षेत्र खो दिया, जिससे वह एक स्थलीय देश बन गया। हालांकि, चिली ने बाद में बोलिविया के लिए माल के परिवहन और समुद्र तक पहुंच की सुविधा प्रदान की, लेकिन समुद्र तक अपनी सीधी पहुँच न होने के कारण बोलिविया में असंतोष बना रहा। यह युद्ध दक्षिण अमेरिका के राजनीतिक मानचित्र को हमेशा के लिए बदलने वाला साबित हुआ। चिली एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा और उसने अपने क्षेत्रीय प्रभुत्व को बढ़ाया। बोलिविया ने समुद्र तक पहुँच खो दी, जिससे उसकी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति कमजोर हो गई। पेरू को भी अपने खनिज संपन्न प्रांतों के नुकसान का सामना करना पड़ा। युद्ध के परिणामस्वरूप आज भी चिली, पेरू और बोलिविया के बीच तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं। संदर्भ श्रेणी:युद्ध