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411 समाचार
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उदयगिरि गुफाएँ

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उदयगिरि गुफाएँ Varahavtar Panel.jpg उदयगिरि की गुफा क्रमांक-५ का सामान्य दृष्य गुफा क्रमांक-५ में विष्णु के वाराह अवतार का चित्रण India #India Madhya Pradesh yes हिन्दू धर्म, जैन धर्म 23 32 11.0 N 77 46 20 E inline,title भारत मध्य प्रदेश विदिशा जिला उदयगिरि, विदिशा विष्णु, शक्ति, शिव, पार्श्वनाथ, एवं अन्य देवता गुप्त शैली c. 250-410 CEFebruary 2020 thumb|upright=1.1|गुफा क्रमांक-५ में वाराह अवतार के पास ही समुद्र देव का चित्रण है।H. von Stietencron Th. P. van Baaren A Schimmel etal Approaches to Iconology https://books.google.com/books?id=UesUAAAAIAAJ 1986 Brill Academic 90-04-07772-3 25 note 18 with Figure 3 on page 30 उदयगिरि की गुफाएँ, मध्य प्रदेश के विदिशा के निकट स्थित २० गुफाएँ हैं। ये गुफाएँ ५वीं शताब्दी (ईशा पश्चात) के आरम्भिक काल की हैं और शिलाओं को काटकर बनायी गयीं हैं। इन गुफाओं में भारत के कुछ प्राचीनतम हिन्दू मन्दिर और चित्र सुरक्षित हैं।Upinder Singh A History of Ancient and Early Medieval India: From the Stone Age to the 12th Century https://books.google.com/books?id=H3lUIIYxWkEC&pg=PA533 2008 Pearson 978-81-317-1120-0 533 30 मई 2020 https://web.archive.org/web/20200509114358/https://books.google.com/books?id=H3lUIIYxWkEC 9 मई 2020 liveFred Kleiner (2012), Gardner’s Art through the Ages: A Global History, Cengage, 978-0495915423, page 434Margaret Prosser Allen (1992), Ornament in Indian Architecture, University of Delaware Press, 978-0874133998, pages 128-129 इन गुफाओं में स्थित शिलालेखों के आधार पर यह स्पष्ट है कि ये गुफाएँ गुप्त नरेशों द्वारा निर्मित करायीं गयीं थी। उदयगिरि की ये गुफाएँ भारत के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल हैं और भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक हैं। विदिशा से वैसनगर होते हुए उदयगिरि पहुँचा जा सकता है। नदी से यह गिरि लगभग १ मील की दूरी पर है। पहाड़ी के पूरब की तरफ पत्थरों को काटकर गुफाएँ बनाई गई हैं। प्रस्तर की कटाई कर छोटे-छोटे कमरों के रुप में गुफाओं को बनाया गया है, साथ-ही-साथ मूर्तियाँ भी उत्कीर्ण कर दी गई हैं। उदयगिरि में कुल २० गुफाएँ हैं। इनमें से कुछ गुफाएँ ४वीं-५वीं सदी से सम्बद्ध हैं। गुफा संख्या १ तथा २० को जैन गुफा माना जाता है। इन गुफाओं में प्रस्तर-मूर्तियों के अतित्व के प्रमाण मिलते हैं लेकिन वर्तमान में इन गुफाओं में से अधिकांश मूर्ति-विहीन गुफाएँ रह गई हैं। ऐसा यहाँ पाये जाने वाले स्थानीय पत्थर के कारण हुआ है। पत्थर के नरम होने के कारण खुदाई का काम आसान था, लेकिन साथ-ही-साथ यह मौसमी प्रभावों को झेलने के लिए उपयुक्त नहीं है। उत्खनन से प्राप्त ध्वंसावशेष अपनी अलग कहानी कहते हैं। उदयगिरि को पहले "नीचैगिरि" के नाम से जाना जाता था। कालिदास ने भी इसे इसी नाम से संबोधित किया है। १०वीं शताब्दी में जब विदिशा, धार के परमारों के हाथ में आ गया, तो राजा भोज के पौत्र उदयादित्य ने अपने नाम से इस स्थान का नाम उदयगिरि रख दिया।http://ignca.nic.in/coilnet/mw040.htm विदिशा की गुफाएँ 30 मई 2020 https://web.archive.org/web/20170814055106/http://www.ignca.nic.in/coilnet/mw040.htm 14 अगस्त 2017 live thumb|गुफा क्रमांक-६ का चित्रण है। सन्दर्भ इन्हें भी देखें बाहरी कड़ियाँ विदिशा की गुफाएँ श्रेणी:मध्य प्रदेश की गुफाएँ श्रेणी:विदिशा श्रेणी:मध्य प्रदेश का इतिहास श्रेणी:भारत के हिन्दू गुहा-मंदिर श्रेणी:मध्य प्रदेश के पुरातात्विक स्थल श्रेणी:शैल आश्रय श्रेणी:चौथी शताब्दी के हिन्दू मंदिर श्रेणी:चौथी शताब्दी के जैन मंदिर श्रेणी:गुप्त कला