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411 समाचार
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बुकर टी वाशिंगटन

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right|thumb|300px|बुकर टी वाशिंगटन बुकर टी वाशिंगटन (Booker Taliaferro Washington ; 1856 – 1915) अफ्रीकी-अमेरिकी शिक्षाविद, लेखक, वक्ता तथा संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति के सलाहकार थे।http://archive.org/details/upfromslaveryan08washgoog Up from Slavery: An Autobiography Booker T. Washington 1906 Doubleday, Page Harvard University English बुकर टी० वाशिंगटन का जन्म एक अज्ञात श्वेत पिता और एक अफ्रीकी गुलाम माँ से 5 अप्रैल, 1856 को हुआ था। उनकी माँ वर्जीनिया में जेम्स बरोज़ नामक एक छोटे तंबाकू किसान के स्वामित्व में थी। बाद में, उनकी माँ ने वाशिंगटन फर्ग्यूसन नामक एक गुलाम से शादी कर ली। वाशिंगटन ने पहली बार स्कूल में दाखिला लेते समय अपने सौतेले पिता का नाम अपने अंतिम नाम के रूप में इस्तेमाल करने का विकल्प चुना। यद्यपि वाशिंगटन का जन्म गुलामी में हुआ था, लेकिन फिर भी उन्होंने खुद को स्कूल में प्रविष्ट करवाया और अमेरिकी गृहयुद्ध के बाद शिक्षक बने। 1881 में, उन्होंने अलाबामा में टस्केगी नॉर्मल एंड इंडस्ट्रियल इंस्टीट्यूट की स्थापना की। कुछ समय बाद यह इंस्टीट्यूट टस्केगी विश्वविद्यालय में परिवर्तित हो गया। इस संस्थान का तेजी से विस्तार हुआ क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में अफ्रीकी अमेरिकियों ने दाखिला लिया, क्योंकि यह विशेषकर अफ्रीकी अमेरिकियों को कुशल बनाने और प्रशिक्षित करने के लिए स्थापित किया गया था। बुकर टी. वाशिंगटन राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट और विलियम हॉवर्ड ताफ्ट के राजनीतिक सलाहकार थे। वह एक लेखक भी थे जिन्होंने "अप फ्रॉम स्लेवरी" नामक एक पुस्तक लिखी, जो गुलाम और उनके अनुभवों पर आधारित थी। कोयला खदान में काम करते समय वाशिंगटन ने पहली बार वर्जीनिया के हैम्पटन इंस्टीट्यूट के बारे में सुना। हैम्पटन इंस्टीट्यूट की स्थापना अफ्रीकी-अमेरिकी सेना के पूर्व जनरल सैमुअल आर्मस्ट्रांग ने की थी, जिन्होंने गृहयुद्ध में भाग लिया था। वाशिंगटन उनके बहुत बड़े प्रशंसक थे। आर्मस्ट्रांग भी कड़ी मेहनत और मजबूत नैतिक चरित्र के अपने मूल्यों के कारण वाशिंगटन के गुरु बन गए। आर्मस्ट्रांग ने अफ्रीकी-अमेरिकियों को शिक्षा का अवसर प्रदान करने की दृष्टि से संस्थान स्थापित किए, क्योंकि उनमें से अधिकांश गृहयुद्ध और मुक्ति से पहले निरक्षर थे। औद्योगिक शिक्षा के साथ-साथ उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें पारंपरिक विषयों, पढ़ना, भूगोल की जानकारी, बढ़ईगीरी, सिलाई, ईंट बिछाने के साथ-साथ शिक्षक प्रशिक्षण भी शामिल था। वाशिंगटन ने देखा कि हैम्पटन इंस्टीट्यूट अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए अन्य स्कूलो की तुलना में अधिक अवसर प्रदान कर रहा था और इसने उन्हें संस्थान में दाखिला लेने के लिए आकर्षित किया। इसने उन्हें अपने बचाए हुए थोड़े से पैसे के साथ पैदल ही हैम्पटन की यात्रा करने के लिए प्रेरित किया। कुछ वर्ष बाद, अलबामा सरकार ने अश्वेत छात्रों को सामान्य पाठों के साथ-साथ कौशल प्रशिक्षण सिखाने के लिए एक स्कूल स्थापित करने की मंजूरी दी और सेना के जनरल आर्मस्ट्रांग को स्कूल के लिए एक श्वेत प्रिंसिपल की सिफारिश करने के लिए कहा। लेकिन इसके बजाय उन्होंने वाशिंगटन की सिफारिश की क्योंकि उनका प्रदर्शन अद्भुत था। स्कूल को टस्केगी नॉर्मल एंड इंडस्ट्रियल इंस्टीट्यूट कहा जाने लगा। इस संस्थान के लिए कक्षाएं पहली बार एक पुराने चर्च में आयोजित की गईं, जबकि प्रिंसिपल धन जुटाने और अधिक अश्वेत लोगों को संस्थान में दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पूरे देश में घूमते रहे। यही कारण था इस संस्थान का बहुत विस्तार हुआ। संस्थान में अपने प्रशासन के दौरान, वाशिंगटन ने सरकार और श्वेत आबादी को आश्वासन दिया कि टस्केगी कार्यक्रम श्वेत वर्चस्व या आर्थिक प्रतिस्पर्धा को चुनौती नहीं देगा, और अश्वेत लोगों को उन्होंने सिखाया कि उनके लिए आर्थिक सफलता में समय लगेगा और यदि उन्हें सफल होना है और श्वेत लोगों द्वारा स्वीकार किया जाना है तो उन्हें श्वेत लोगों के अधीन रहना होगा। उन्होंने समाज में श्वेत लोगों द्वारा स्वीकार किए जाने के लिए अश्वेतों की अधीनता की वकालत की और यह एक संदेश था जिसे उन्होंने टस्केगी संस्थान में छात्रों की भर्ती के लिए हर जगह भेजा।बुकर टी0 वाशिंगटन सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ बुकर टी० वाशिंगटन बुकर.टी.वाशिंगटन : जन्म-आधार पर झुकने वाला सिर, जिनके सम्मान में झुका दुनिया का सिर श्रेणी:अश्वेत अमेरिकी श्रेणी:1856 में जन्मे लोग श्रेणी:१९१५ में निधन श्रेणी:अमेरिकी लेखक