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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

चाँद (पत्रिका)

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चाँद एक प्रसिद्ध हिन्दी मासिक पत्रिका थी जिसका प्रकाशन सन् १९२२ में इलाहाबाद (प्रयागराज) से हुआ। इस पत्रिका के पहले संपादक लाहौर के एक उद्यमी रामरख सिंह सहगल थे, और इसका पहला अंक नवंबर १९२२ में प्रकाशित हुआ था। इस पत्रिका का संपादन महादेवी वर्मा और नन्द किशोर तिवारी ने भी किया। कुछ दिनों तक इसका संपादन मुंशी नवजादिक लाल ने किया था। आरम्भ में इस पत्रिका में नारी जीवन से सम्बंधित चर्चा अधिक रहती थी। 'चाँद' का मारवाणी अंक अपने समय में बहुचर्चित रहा। साहित्यिक होते हुए भी इस में समाज सुधार की प्रवृत्ति बलवती रही।समाज दर्शन : अर्थात सामाजिक कुरीतियों का दिग्दर्शन (रामरख सिंह सहगल) इसका एक विशेषांक ‘फाँसी’ नाम से भी (नवम्बर १९२८ ई०) में प्रकाशित हुआ था जो अनेक देशभक्तों के लिये प्रेरणा का स्रोत बना।बाहरी डॉ॰ हरदेव साहित्य कोश, भाग-2, १९८६ ज्ञानमंडल लिमिटेड वाराणसी 184 27 जून 2008 ‘चाँद’ पत्रिका की 29 विशेषांक प्रकाशित हुए।   पत्रिका का मुख्य नैतिक विचार यह था - ‘आध्यात्मिक स्वराज हमारा ध्येय, सत्य हमारा साधन और प्रेम हमारी प्रणाली है। जब तक इस पावन अनुष्ठान में हम अविचल हैं, तब तक हमें इसका डर नहीं कि हमारे विरोधियों की संख्या और शक्ति कितनी है।' स्त्री विमर्श यह पत्रिका अपनी आरम्भ से स्त्री को केंद्रित करते हुए रचनओं, लेखों, कविताओं और आलेखों को प्रकाशित कर रही थी। स्त्री शिक्षा और विधवा प्रश्न मुख्य केंन्द्र रहे। पत्रिका के पहले खंड में स्त्री शिक्षा पर ५६ लेख थे।https://www.outlookhindi.com/story/book-review-chand-2804 क्या ‘चांद’ ने स्त्रियों को रोशनी दी थी https://www.outlookhindi.com/ en-US 2026-05-07   स्वराज्य समाज चाँद पत्रिका का 'फाँसी' अंक अपनी राजनीतिक चेतना और आंदोलनकारी दृष्टिकोण की वजह से चर्चित रहा। इसी अंक में भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त आदि द्वारा लिखित ३७ रेखाचित्र बदले हुए नामों के साथ प्रकाशित हुए। चतुरसेन शास्त्री के एक संस्मरण ‘पहले सलामी’ के अनुसार, इस अंक में छपने वाले राजनीतिक हुतात्माओं के सम्पूर्ण चित्र और चरित्र उन्हें तत्कालीन क्रांतिकारियों द्वारा ही प्राप्त हुआ था जिसे उन्होंने नाम बदल कर प्रकाशित किए थे। इस अंक को ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिया गया था। 'फाँसी' अंक का संपादन चतुरसेन शास्त्री ने किया था।https://www.google.co.in/books/edition/A%E1%B9%85grez%C4%AB_r%C4%81ja_aura_pratibandhita_Hind/SwdlAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A6%20%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE Aṅgrezī rāja aura pratibandhita Hindī patrikāem̐ Bhadauriyā Santosha 2001 Svarāja Saṃsthāna Sañcālanālaya, Saṃskr̥ti Vibhāga, Madhyapradeśa Śāsana hi इस पत्रिका का 'मारवाड़ी' नाम का एक और अंक अंग्रेज़ों ने ज़ब्त किया था।   सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ चाँद का फाँसी अंक (गूगल पुस्तक ; लेखक - नरेशचन्द्र चतुर्वेदी) भविष्य (रामरख सिंह सहगल) श्रेणी:ऐतिहासिक हिन्दी पत्रिकाएँ श्रेणी:महादेवी वर्मा