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411 समाचार
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चाङ्गुनारायण मन्दिर

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चाङ्गुनारायण मन्दिर Nepal - Changu_Narayan_(3566057331).jpg 27 42 58.6 N 85 25 40.4 E type:landmark_region:NP-BA inline,title नेपाल भक्तपुर जनपद चाङ्गुनारायण विष्णु तीज, प्रबोधिनी एकादशी, नाग पञ्चमी पगोडा हरिदत्त वर्मा बागमती प्रदेश चाङ्गुनारायण yes WHS काठमाण्डु उपत्यका १९७९ (तृतीय सत्र) (iii)(iv)(vi)(iii)(iv)(vi) १२१bis-००७ चाङ्गुनारायण (ne चाँगुनारायण मन्दिर, en Changu Narayan Temple) एक प्राचीन हिन्दू एवं बौद्ध मन्दिर है, जो नेपाल के भक्तपुर जनपद की चाङ्गुनारायण नगरपालिका में स्थित डोलगिरि (प्राचीन नाम) नामक पर्वतशिखर पर अवस्थित है। यह मन्दिर ईसा की चतुर्थ शताब्दी (लगभग विक्रम संवत् ४००; शक संवत् ३२५) में निर्मित माना जाता है और नेपाल के प्राचीनतम हिन्दू मन्दिरों में से एक है। यह मन्दिर भगवान् विष्णु को समर्पित है, जो हिन्दू धर्म के त्रिदेवों में एक हैं।Suwal Rajan Structural Vulnerability of Changu Narayan Temple, 17th World Conference in Earthquake Engineering, Sendai, Japan 2021 https://wcee.nicee.org/wcee/article/17WCEE/2f-0046.pdf 2024-11-08 Joshi Pukarntb.gov.np https://ntb.gov.np/changu-narayan-temple- 9 नवंबर 2025 10 सितंबर 2025 https://web.archive.org/web/20250910234847/https://ntb.gov.np/changu-narayan-temple- dead स्थान यह मन्दिर नेपाल की राजधानी काठमाण्डु से लगभग ७ मील (१२ सहस्रमान) पूर्व तथा भक्तपुर से कुछ सहस्रमान उत्तर में स्थित है। मन्दिर के समीप मनोहरा नामक नदी प्रवाहित होती है।Riccardi Theodore The Inscription of King Mānadeva at Changu Narayan 1989 https://www.jstor.org/stable/604086 Journal of the American Oriental Society 109 4 611–620 10.2307/604086 0003-0279 604086 2024-11-08 subscription इतिहास प्राचीन काल में यह मन्दिर चम्पक वृक्षों के वन से घिरा हुआ था और उसके समीप चाङ्गु नामक एक लघु ग्राम बसा हुआ था।Riccardi Theodore The Inscription of King Mānadeva at Changu Narayan 1989 https://www.jstor.org/stable/604086 Journal of the American Oriental Society 109 4 611–620 10.2307/604086 0003-0279 604086 2024-11-08 subscription ऐसा कहा जाता है कि कश्मीर के एक राजा ने अपनी पुत्री चम्पक का विवाह भक्तपुर के राजकुमार से किया था, और सम्भवतः उसी के नाम पर इस स्थान का नामकरण ‘चाङ्गु’ हुआ।Ravi Shakya Bhasha Vamshavali 1 http://archive.org/details/BhashaVamshavali1 2024-11-08 निम्नलिखित विवरण ‘भाषा वंशावली’ नामक ग्रन्थ से अनूदित है—Ravi Shakya Bhasha Vamshavali 1 http://archive.org/details/BhashaVamshavali1 2024-11-08डोलगिरि (चाङ्गुनारायण पर्वत का प्राचीन नाम) क्षेत्र में एक विशाल चम्पक वृक्ष था। उसी स्थान पर सुधर्शन नामक एक ब्राह्मण निवास करता था, जो शुद्धाचारी, संयमी किन्तु क्रोधी स्वभाव का था। उसके पास एक कपिला गौ थी, जो कामधेनु के सदृश दिव्य मानी जाती थी। वह ब्राह्मण उसी गौ के दुग्ध से विविध देवताओं को नैवेद्य अर्पित करता था। वह गौ प्रायः उसी चम्पक वृक्ष के नीचे बैठती थी। एक दिन, उस चम्पक वृक्ष से एक अत्यन्त सुन्दर पुरुष प्रकट हुआ, जिसने उस गौ का दुग्ध पान किया और पुनः वृक्ष में विलीन हो गया। यह घटना प्रतिदिन घटित होने लगी। सात दिनों तक जब ब्राह्मण को अपनी गौ से दुग्ध प्राप्त नहीं हुआ, तब वह अत्यन्त क्रोधित हो उठा और सोचने लगा- “जो भी यह पवित्र नैवेद्य का दुग्ध चुरा रहा है, मैं उसका शिरोच्छेद किये बिना विश्राम नहीं करूँगा।” अतः वह ब्राह्मण एक दिन छिपकर गौ के पीछे गया और एक गुप्त स्थान से देखने लगा। जब गौ चम्पक वृक्ष के नीचे पहुँची, तब वही पुरुष पुनः प्रकट हुआ और दुग्ध पान करने लगा। यह देखकर ब्राह्मण ने क्रोधावेश में तलवार खींची और उस पुरुष का शिरच्छेद कर दिया। तत्क्षण वह पुरुष भगवान् विष्णु के रूप में प्रकट हुए, उनके हाथों में शङ्ख, चक्र, गदा और पद्म थे, और वे गरुड़ पर आरूढ़ थे, किन्तु उनका मस्तक कट चुका था। यह दृश्य देखकर ब्राह्मण अत्यन्त पश्चात्ताप से भर गया और विलाप करने लगा- “हे प्रभो! मैंने कौन-सा पाप पूर्व जन्म में किया था, जिसके फलस्वरूप यह अनर्थ मेरे हाथों हुआ?” जब वह ब्राह्मण आत्महत्या करने को उद्यत हुआ, तब भगवान् नारायण प्रकट हुए और बोले- “हे मुनि! भय मत करो। तुम्हें शोक करने की आवश्यकता नहीं है। अपने भय को त्यागो और मुझसे कोई वर माँगो।” ब्राह्मण ने उत्तर दिया- “हे नारायण! यदि मैंने आपका शिरोच्छेद कर पाप किया है, तो कृपया अपने चक्र से मुझे दण्ड प्रदान करें।” तब भगवान् नारायण ने कहा- “हे मुनि! सुनो। प्राचीन काल में चन्द्र नामक दैत्य से युद्ध करते समय, उसके प्रिय मित्र सुमति नामक एक ब्राह्मण मेरे अस्त्र से मारा गया था। उसकी प्रबल भक्ति से प्रसन्न होकर उसके गुरु शुक्राचार्य ने मुझे शाप दिया कि भविष्य में सुमति के वंशज के हाथों मेरा मस्तक कटेगा। यह घटना उसी शाप का फल है, और यह कार्य तुम्हारे द्वारा होना नियत था।” भगवान् नारायण ने आगे कहा- “अतः यह अनिवार्य था। अब मैं इस स्थान पर मस्तकहीन रूप में निवास करूँगा। तुम मेरी यहाँ पूजा करो और मुझे अर्घ्य अर्पित करो।” इतना कहकर भगवान् अन्तर्धान हो गये। चित्रशाला सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ चाङ्गुनारायण मन्दिर ग्राम स्थित पुरस्कृत थाङ्का चित्रकला विद्यालय श्रेणी:विष्णु मन्दिर श्रेणी:नेपाल में विश्व धरोहर स्थल श्रेणी:नेपाली संस्कृति श्रेणी:विकिडेटा पर उपलब्ध निर्देशांक