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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सुशीला सामद

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सुशीला सामद या सुशीला सामंत (7 जून 1906-10 दिसंबर 1960) हिंदी की पहली भारतीय आदिवासी कवयित्री, पत्रकार, संपादक और स्वतंत्रता आंदोलनकारी हैं।भारत की पहली महिला आदिवासी संपादक - सुशीला सामद | https://www.facebook.com/AdivasiLiterature/photos/a.159734160887444/218793921648134/?type=1&theater हिंदी कविता में ये महादेवी वर्मा और सुभद्रा कुमार चौहान की समकालीन हैं।सजग ऐंद्रिय बोध और वस्तु-पर्यवेक्षण की कविताएँ | https://samkaleenjanmat.in/2018/08/26/ पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर स्थित लउजोड़ा गांव में मां लालमनी सांडिल और पिता मोहनराम सांडिल के घर इनका जन्म हुआ था। 1931 में सुशीला सामद ने प्रयाग-महिला-विद्यापीठ से प्रवेशिका की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। फिर 1932 में वहीं से सफलतापूर्वक विनोदिनी और 1934 में विदुषी (बी.ए. ऑनर्स) की शिक्षा पूरी की। इस प्रकार हिंदी माध्यम से ‘हिंदी विदूषी’ होने का गौरव हासिल करने वाली वह भारत की प्रथम आदिवासी महिला भी हैं।प्रलाप, पृ 7-8 | https://books.google.co.in/books?id=RpxVDwAAQBAJ https://web.archive.org/web/20181003100919/https://books.google.co.in/books?id=RpxVDwAAQBAJ 3 अक्तूबर 2018 सुशीला सामद मात्र एक कवयित्री ही नहीं हैं, बल्कि 1925-30 के दौर में वे एक साहित्यिक-सामाजिक पत्रिका ‘चाँदनी’ का संपादन-प्रकाशन भी कर रही थीं और तत्कालीन बिहार में गांधी की एकमात्र आदिवासी महिला ‘सुराजी’ आंदोलनकर्ता भी थीं। वे एमएलसी भी रहींThe Bihar Gazette, 1959, p. 546 | https://books.google.co.in/books?id=AxvOtTEIsTEC& https://web.archive.org/web/20181003101001/https://books.google.co.in/books?id=AxvOtTEIsTEC& 3 अक्तूबर 2018 और सामाजिक-सांस्कृतिक, साहित्यिक दायित्वों का निर्वाह भी सुसंगठित तरीके से किया। इनके दो काव्य संग्रह प्रकाशित है: 1935 में ‘प्रलाप’ और 1948 में ‘सपने का संसार’। सन्दर्भ श्रेणी:आदिवासी (भारतीय) श्रेणी:मुण्डा आदिवासी श्रेणी:झारखंड श्रेणी:भारतीय महिला साहित्यकार श्रेणी:भारतीय आदिवासी महिला साहित्यकार