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ग्रहण युग (खगोल विज्ञान)
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ग्रहण युग (अंग्रेजी: saros ) ठीक २२३ चंद्रमास की अवधि है। दूसरे शब्दों में लगभग ६५८५.३२११ दिन, या १८ साल और १० और ८ घंटे ( इस बीच आए अधिवर्षों की संख्या के आधार पर ये ११, या १२ दिन भी हो सकता है) । ग्रहण युग का उपयोग ग्रहणों की भविष्यवाणी करने के लिए किया जा सकता है । किसी ग्रहण होने के एक ग्रहण युग के समयांतराल के बाद , सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग वैसी ही सापेक्ष ज्यामितिय स्थिति में पुनः आ जाते हैं और लगभग वैसा ही ग्रहण होता है, जिसे ग्रहण चक्र के रूप में जाना जाता है। एक ग्रहण-अर्धयुग एक ग्रहण युग का आधा है।
एक ग्रहण युग में हुए सभी ग्रहणों को मिलकर ग्रहण युग श्रृंखला कहा जाता है।
ग्रहण युग की माप ये हैं :
६५८५.३२११ सौर दिन
१८.०२९ वर्ष
२२३ चंद्रमास
२४१.९९ राहू मास
१८.९९९ ग्रहण वर्ष (३८ ग्रहण काल)
२३८.९९२ विसंगतिपूर्ण महीने
१९ ग्रहण वर्ष
मान ले कि यदि आज कोई सूर्य ग्रहण होता है इसका अर्थ है कि आज अमावस्या है और चन्द्रमा किसी एक चन्द्रपात पर है। इसके एक ग्रहण युग के बाद जो अमावस्या होती तब चंद्रमा की कक्षा के इसी चन्द्रपात एक और सूर्य ग्रहण होगा ।
== इतिहास ==
ग्रहण युग (अंग्रेजी: saros ) का प्राचीनतम ऐतिहासिक रिकॉर्ड ईसा पूर्व की अंतिम कुछ शताब्दियों में कलडीन (नव बेबीलोन) खगोलविदों के द्वारा है । इसे बाद में हिप्पार्कस, प्लिनी और टॉलेमी के ने भी जाना है ।
== यह सभी देखें ==
ग्रहण
ग्रहण युग
ग्रहण वर्ष
ग्रहण ऋतु
== संदर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ ==