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शिशुनाग वंश
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शिशुनाग राजवंश मगध पर शासन करने वाला चौथा राजवंश था। शिशुनाग राजवंश मे कुल छह राजाओं द्वारा ल. 413 से 345 ई.पू मे 68 वर्षों तक शासन किया था।Raychaudhuri 1972 193,201 शिशुनाग राजवंश की स्थापना 413 ई.पू. में शिशुनाग के द्वारा हर्यक वंश के अंतिम शासक महाराजा नागदशक की हत्या करने के बाद की गई थी।Upinder Singh 2016 272 शिशुनाग वंश के राजाओं ने मगध की प्राचीन राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) और वैशाली को अपनी राजधानी बना कर शासन किया था।
शिशुनाग राजवंश शिशुनाग राजवंश लौह युग राजतन्त्र 413 – 345 ई.पू हर्यक वंश अवन्ति वत्स नंद वंश Magadha Expansion (6th-4th centuries BCE).png मगध के प्रद्योत वंश, हर्यक वंश और शिशुनाग वंश का विस्तार (700 से 350 ई.पू तक गिरिव्रजपाटलीपुत्रसाथ ही वैशाली संस्कृत (मुख्य) मागधी प्राकृत हिंदू धर्म साथ ही जैन धर्म और
बौद्ध धर्म पण सम्राट शिशुनाग 413–395 ई.पू (प्रथम) कालाशोक 395–377 ई.पू (मुख्य) महानन्दि 349–345 ई.पू (अंतिम) भारत
इतिहास
शिशुनाग
शिशुनाग
शिशुनाग (413–395 ई.पू.) मगध की गद्दी पर बैठा। महावंश के अनुसार वह लिच्छवि राजा के वेश्या पत्नी से उत्पन्न पुत्र था। पुराणों के अनुसार वह क्षत्रिय था।शिशुनाग वंशमार्च 2026 InternetArchiveBot
शिशुनाग ने मगध से बंगाल की सीमा से मालवा तक विशाल भू-भाग पर अधिकार कर लिया। शिशुनाग ने सर्वप्रथम मगध के प्रबल प्रतिद्वन्दी राज्य अवन्ति को मिलाया। मगध की सीमा पश्चिम मालवा तक फैल गई और वत्स को मगध में मिला दिया। वत्स और अवन्ति के मगध में विलय से, पाटलिपुत्र को पश्चिमी देशों से व्यापारिक मार्ग के लिए रास्ता खुल गया।
शिशुनाग एक शक्तिशाली शासक था जिसने गिरिव्रज के अलावा वैशाली नगर को भी अपनी राजधानी बनाया। 395/394 ई.पू. में इसकी मृत्यु हो गई।
कालाशोक (काकवर्ण)
कालाशोक
कालाशोक (394–366 ई.पू.) शिशुनाग का पुत्र था जो उसकी मृत्यु के बाद मगध का शासक बना। महावंश में इसे कालाशोक तथा पुराणों में "'काकवर्ण'" कहा गया है। कालाशोक ने अपनी राजधानी को पुनः पाटलिपुत्र स्थानांतरित करवा दिया था। इसने 28 वर्षों तक शासन किया। कालाशोक के शासनकाल में ही बौद्ध धर्म की द्वितीय संगीति का आयोजन हुआ।
बाणभट्ट रचित हर्षचरित के अनुसार काकवर्ण को राजधानी पाटलिपुत्र में घूमते समय उनके ही पुत्र महापद्यनन्द ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। 366 ई.पू. कालाशोक की मृत्यु हो गई।
अन्य शासक और राजवंश का अंत
महाबोधिवंश के अनुसार कालाशोक के दस पुत्र थे, जिन्होंने मगध पर 28 वर्षों तक शासन किया।
महानन्दि
महानन्दि
शिशुनाग वंश का अंतिम राजा महानन्दि था। 345/344 ई.पू. में
उसके बेटे महापद्म नन्द द्वारा महानन्दि की हत्या कर साम्राज्य को कब्जा लिया और नंद वंश की नीव रखी। इसी के साथ शिशुनाग वंश का अन्त हो गया और नंद वंश का उदय हुआ।
शासकों की सूची
+शिशुनाग राजवंश के शासकों की सूचीक्रम-संख्याशासकशासन अवधि (ई.पू)शासन वर्षटिप्पणी1.महाराजा शिशुनाग 413–395 18महाराजा नागदशक की हत्या करने के बाद राजवंश की स्थापना की।2.महाराजा कालाशोक 395–377 18महाराजा शिशुनाग का पुत्र3.महाराजा क्षेमधर्मन 377–365 12महाराजा कालाशोक का पुत्र4.महाराजा क्षत्रौजस 365–355 10महाराजा क्षेमधर्मन का पुत्र5.महाराजा नंदिवर्धन 355–349 6महाराजा क्षत्रौजस का पुत्र6. महाराजा महानन्दि 349–345 4वंश का अंतिम शासक, उसका साम्राज्य उसके बेटे महापद्म नन्द को कब्जा लिया।
इन्हें भी देखें
मगध
महाजनपद
नंद वंश
मगध के राजवंशों और शासकों की सूची
भारत के राजवंशों और सम्राटों की सूची
हिन्दू साम्राज्यों और राजवंशों की सूची
सन्दर्भ
श्रेणी:मगध
श्रेणी:राजवंश
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श्रेणी:मगध के राजवंश
श्रेणी:भारत का इतिहास