411 REFERENCE · Wikipedia
भरभोलिए
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
thumb|right|300px|बीकानेर में भलभोलियों की दूकानभरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं जिनके बीच में छेद होता है। इस छेद में मूँज की रस्सी डाल कर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं। होली में आग लगाने से पहले इस माला को भाईयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर फेंक दिया जाता है। रात को होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है। इसका यह आश्य है कि होली के साथ भाईयों पर लगी बुरी नजर भी जल जाए।http://www.khabarexpress.com/3/1/2007/-news_928.html भरभोळियों का है होली पर विशेष महत्व 3 मार्च 2008 एचटीएमएल खबर एक्सप्रेस https://web.archive.org/web/20110315031743/http://www.khabarexpress.com/3/1/2007/-news_928.html 15 मार्च 2011 dead भारतीय जन मानस व संस्कृति में गाय के गोबर का अपना विशेष महत्व है। होली पर भी इसका महत्व देखने को मिलता है। किसी समय जब घर घर में गाय हुआ करती थी उस समय होली के दिनों में दोपहर में घर की महिलाएँ उपले और भरभोलिए बनाती थी लेकिन बदलते परिवेश ने इसमें फर्क डाला है। आज घर घर में गैस के चूल्हों ने जगह बना ली है और गाय का गोबर उपयोग में नहीं आता है। इस कारण भरभोलियों को घर में बनाना संभव नहीं हैं। लेकिन होली के अवसर पर इन्हें दूकान से ख़रीदा जा सकता है। इन भरभोलियों का राजस्थान में बहुत प्रचलन है। बीकानेर के दम्माणियों के चौक व बारहगुवाड चौक में होली के अवसर पर भरभोलियों की बिक्री परवान पर चढ़ती है।
सन्दर्भ
श्रेणी:होली