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411 समाचार
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ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी

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सितंबर 2026 ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (अंग्रेज़ी: Transport Layer Security, संक्षिप्त रूप में TLS या टीएलएस) इंटरनेट पर संचार की सुरक्षा के लिए प्रयुक्त एक क्रिप्टोग्राफ़िक प्रोटोकॉल है। यह दो संचार करने वाले अनुप्रयोगों के बीच डेटा की गोपनीयता और अखंडता प्रदान करने के लिए बनाया गया है तथा संचार के दौरान छिपकर सुनने, डेटा में अनधिकृत परिवर्तन और संदेशों की जालसाजी से सुरक्षा प्रदान करता है।RFC 9846: The Transport Layer Security (TLS) Protocol Version 1.3, Internet Engineering Task Force. टीएलएस का प्रयोग सामान्यतः अनुप्रयोग प्रोटोकॉल और विश्वसनीय परिवहन प्रोटोकॉल के बीच सुरक्षा की एक परत के रूप में किया जाता है। इसका सबसे सामान्य उपयोग एचटीटीपीएस में होता है, जहाँ एचटीटीपी संचार को टीएलएस द्वारा सुरक्षित किया जाता है। टीएलएस का उपयोग अन्य इंटरनेट अनुप्रयोगों में भी किया जा सकता है। सुरक्षा के उद्देश्य टीएलएस का प्रमुख उद्देश्य दो अनुप्रयोगों के बीच संचार की सुरक्षा करना है। इसके प्रमुख सुरक्षा गुणों में डेटा की गोपनीयता, अखंडता और संचार करने वाले पक्ष की प्रमाणीकरण व्यवस्था शामिल हैं।RFC 5246: The Transport Layer Security (TLS) Protocol Version 1.2, Internet Engineering Task Force. गोपनीयता — एन्क्रिप्शन के माध्यम से संचारित डेटा को अनधिकृत पक्षों द्वारा पढ़े जाने से बचाया जाता है। अखंडता — प्राप्तकर्ता यह पता लगा सकता है कि संचार के दौरान डेटा में अनधिकृत परिवर्तन हुआ है या नहीं। प्रमाणीकरण — TLS प्रमाणपत्रों और क्रिप्टोग्राफ़िक तकनीकों के माध्यम से सर्वर की पहचान सत्यापित करने की व्यवस्था प्रदान करता है। TLS स्वयं किसी विशेष अनुप्रयोग के लिए उपयोगकर्ता की पहचान या अधिकार निर्धारित नहीं करता। इसके बजाय यह सुरक्षित संचार के लिए आवश्यक क्रिप्टोग्राफ़िक तंत्र प्रदान करता है; प्रमाणपत्रों की जाँच और प्रमाणीकरण से संबंधित कुछ निर्णय उस अनुप्रयोग पर निर्भर करते हैं जो TLS का उपयोग करता है।RFC 5246, Internet Engineering Task Force. कार्यप्रणाली TLS में संचार शुरू होने से पहले एक हैंडशेक (handshake) प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया में क्लाइंट और सर्वर TLS संस्करण तथा अन्य क्रिप्टोग्राफ़िक मापदंडों पर सहमत होते हैं और सुरक्षित संचार के लिए आवश्यक कुंजियाँ स्थापित करते हैं। TLS 1.3 में हैंडशेक को सरल बनाया गया और पहले की तुलना में कम संदेशों में सुरक्षित कनेक्शन स्थापित करने की व्यवस्था की गई। TLS 1.3 में सार्वजनिक-कुंजी आधारित कुंजी-विनिमय की ऐसी विधियों का उपयोग किया जाता है जो फ़ॉरवर्ड सीक्रेसी प्रदान करती हैं। इस संस्करण में स्थिर RSA और स्थिर Diffie–Hellman आधारित कुंजी-विनिमय विधियों को हटा दिया गया है।RFC 9846: The Transport Layer Security (TLS) Protocol Version 1.3, Internet Engineering Task Force. सफल हैंडशेक के बाद स्थापित गुप्त कुंजियों का उपयोग करके अनुप्रयोग डेटा को सुरक्षित किया जाता है। TLS 1.3 में कुंजी व्युत्पत्ति के लिए HMAC-आधारित Extract-and-Expand Key Derivation Function (HKDF) का उपयोग किया जाता है। डिजिटल प्रमाणपत्र और प्रमाणीकरण TLS में सर्वर की पहचान प्रमाणित करने के लिए सामान्यतः डिजिटल प्रमाणपत्र का उपयोग किया जाता है। HTTPS के मामले में ब्राउज़र सर्वर द्वारा प्रस्तुत प्रमाणपत्र की जाँच करता है और प्रमाणपत्र में दी गई पहचान तथा विश्वसनीय प्रमाणन प्राधिकरण से संबंधित जानकारी के आधार पर सर्वर की पहचान सत्यापित करता है। प्रमाणपत्र-आधारित प्रमाणीकरण TLS की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग है, क्योंकि केवल डेटा को एन्क्रिप्ट करना पर्याप्त नहीं है। यदि क्लाइंट यह सुनिश्चित न कर सके कि वह सही सर्वर से जुड़ा है, तो हमलावर सुरक्षित दिखने वाले कनेक्शन के बीच में स्वयं को स्थापित करने का प्रयास कर सकता है। TLS रिकॉर्ड प्रोटोकॉल TLS संचार में डेटा को रिकॉर्ड के रूप में संसाधित करता है। TLS रिकॉर्ड प्रोटोकॉल का कार्य उच्च-स्तरीय प्रोटोकॉल से प्राप्त डेटा को सुरक्षित रूप में संरक्षित और संचारित करना है। TLS के प्रारंभिक संस्करणों की संरचना में रिकॉर्ड प्रोटोकॉल और हैंडशेक प्रोटोकॉल अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते थे।RFC 5246: The Transport Layer Security (TLS) Protocol Version 1.2, Internet Engineering Task Force. TLS 1.3 में रिकॉर्ड सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफ़िक संरचना को आधुनिक सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप बदला गया। इस संस्करण में AEAD आधारित रिकॉर्ड सुरक्षा का उपयोग किया जाता है। TLS के संस्करण TLS समय के साथ कई संस्करणों में विकसित हुआ है: TLS 1.0 — जनवरी 1999 में RFC 2246 के रूप में प्रकाशित हुआ। यह SSL 3.0 से विकसित हुआ था।RFC 2246: The TLS Protocol Version 1.0, Internet Engineering Task Force. TLS 1.1 — अप्रैल 2006 में RFC 4346 के रूप में प्रकाशित हुआ। इसमें TLS 1.0 की तुलना में कुछ सुरक्षा सुधार और स्पष्टताएँ जोड़ी गईं।RFC 4346: The Transport Layer Security Protocol Version 1.1, Internet Engineering Task Force. TLS 1.2 — अगस्त 2008 में RFC 5246 के रूप में प्रकाशित हुआ। इसमें क्रिप्टोग्राफ़िक एल्गोरिदम और सुरक्षा संबंधी कई सुधार शामिल थे। TLS 1.3 — अगस्त 2018 में RFC 8446 के रूप में प्रकाशित हुआ। जुलाई 2026 में RFC 9846 ने TLS 1.3 की वर्तमान विनिर्देश को अद्यतन करते हुए RFC 8446 को अप्रचलित (obsolete) कर दिया। TLS 1.0 और TLS 1.1 को मार्च 2021 में RFC 8996 द्वारा औपचारिक रूप से अप्रचलित (deprecated) किया गया। इस दस्तावेज़ ने पुराने प्रोटोकॉल संस्करणों के उपयोग को समाप्त करने और आधुनिक TLS संस्करणों की ओर स्थानांतरण की अनुशंसा की।RFC 8996: Deprecating TLS 1.0 and TLS 1.1, Internet Engineering Task Force. TLS 1.3 में प्रमुख परिवर्तन TLS 1.3 को TLS के पुराने संस्करणों की तुलना में अधिक सरल और आधुनिक सुरक्षा संरचना प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया। इसके प्रमुख परिवर्तनों में निम्न शामिल हैं: हैंडशेक प्रक्रिया को सरल बनाया गया। पुराने और कम सुरक्षित क्रिप्टोग्राफ़िक विकल्पों को हटाया गया। स्थिर RSA तथा स्थिर Diffie–Hellman कुंजी-विनिमय विधियों को हटाया गया। सार्वजनिक-कुंजी आधारित कुंजी-विनिमय में फ़ॉरवर्ड सीक्रेसी को अनिवार्य बनाया गया। HKDF आधारित कुंजी व्युत्पत्ति का उपयोग किया गया। हैंडशेक संदेशों के एक बड़े भाग को पहले की तुलना में शीघ्र एन्क्रिप्ट किया जाता है। 0-RTT डेटा के लिए एक विकल्प जोड़ा गया, जिससे कुछ परिस्थितियों में कनेक्शन स्थापित करते समय एक राउंड ट्रिप बचाई जा सकती है। 0-RTT सुविधा कम विलंबता प्रदान कर सकती है, लेकिन इसमें सामान्य TLS 1.3 प्रारंभिक डेटा की तुलना में अलग सुरक्षा गुण होते हैं। इसलिए इसका उपयोग अनुप्रयोग की आवश्यकताओं और पुनरावृत्त अनुरोधों से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। पुराने संस्करणों की स्थिति SSL 2.0 और SSL 3.0 को आधुनिक सुरक्षित संचार के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। IETF ने SSL 3.0 को अप्रचलित घोषित किया और इसके उपयोग को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की।RFC 7568: Deprecating Secure Sockets Layer Version 3.0, Internet Engineering Task Force. TLS 1.0 और TLS 1.1 को भी अप्रचलित किया जा चुका है। RFC 8996 के अनुसार इन पुराने संस्करणों में आधुनिक क्रिप्टोग्राफ़िक एल्गोरिदम और सुरक्षा तंत्रों का पर्याप्त समर्थन नहीं है।RFC 8996: Deprecating TLS 1.0 and TLS 1.1, Internet Engineering Task Force. आधुनिक प्रणालियों में TLS 1.2 और TLS 1.3 का उपयोग किया जाता है। RFC 9325 सुरक्षित TLS/DTLS उपयोग के लिए TLS 1.0 और TLS 1.1 तथा SSL के पुराने संस्करणों को नकारने और आधुनिक संस्करणों को प्राथमिकता देने की सिफारिश करता है।RFC 9325: Recommendations for Secure Use of Transport Layer Security (TLS) and Datagram Transport Layer Security (DTLS), Internet Engineering Task Force. उपयोग TLS का सबसे प्रसिद्ध उपयोग HTTPS में होता है। इसके अतिरिक्त इसका उपयोग ई-मेल, त्वरित संदेश, वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क तथा अन्य इंटरनेट-आधारित अनुप्रयोगों की सुरक्षा में किया जा सकता है। TLS एक सामान्य सुरक्षा प्रोटोकॉल है, इसलिए विभिन्न अनुप्रयोग प्रोटोकॉल इसके ऊपर अपनी संचार व्यवस्था चला सकते हैं। TLS का उपयोग केवल वेबसाइटों को सुरक्षित करने तक सीमित नहीं है। इसका मूल उद्देश्य दो संचार करने वाले अनुप्रयोगों के बीच गोपनीयता और डेटा अखंडता प्रदान करना है। TLS और SSL का संबंध TLS का विकास SSL प्रोटोकॉल के बाद हुआ। TLS 1.0 का विनिर्देशन SSL 3.0 से संबंधित प्रोटोकॉल विकास पर आधारित था, लेकिन TLS और SSL अलग प्रोटोकॉल संस्करण हैं। SSL 3.0 को अब सुरक्षित नहीं माना जाता और IETF ने इसके उपयोग को प्रतिबंधित किया है। इसलिए आधुनिक संदर्भ में "SSL" शब्द का प्रयोग कई बार सामान्य रूप से TLS के लिए किया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से SSL और TLS एक ही प्रोटोकॉल नहीं हैं। सीमाएँ TLS संचार को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा सुविधाएँ प्रदान करता है, लेकिन यह किसी पूरे अनुप्रयोग की सभी सुरक्षा समस्याओं का समाधान नहीं करता। उदाहरण के लिए, यदि सर्वर स्वयं असुरक्षित हो, उपयोगकर्ता गलत वेबसाइट को संवेदनशील जानकारी दे दे, या किसी अनुप्रयोग में प्रमाणीकरण और प्राधिकरण की त्रुटियाँ हों, तो केवल TLS का उपयोग उन समस्याओं को समाप्त नहीं करता। TLS की प्रभावशीलता सही प्रमाणपत्र सत्यापन, सुरक्षित क्रिप्टोग्राफ़िक विकल्पों, उचित कॉन्फ़िगरेशन और आधुनिक प्रोटोकॉल संस्करणों के उपयोग पर भी निर्भर करती है। पुराने TLS संस्करणों और कमजोर क्रिप्टोग्राफ़िक विकल्पों को हटाना सुरक्षा जोखिम कम करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन्हें भी देखें क्रिप्टोग्राफी सन्दर्भ श्रेणी:इंटरनेट प्रोटोकॉल