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बशोली
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बशोली Basholi Basohli bridge1.jpg बशोली पुल बशोली India Jammu and Kashmir 32.50 75.82 inline, title जम्मू और कश्मीर में स्थिति देश प्रान्त जम्मू और कश्मीर ज़िला कठुआ ज़िला 5433 2011 भाषा प्रचलित डोगरी भारतीय मानक समय +5:30 460
बशोली (Basholi) या बसोहली (Basohli) भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के कठुआ ज़िले में स्थित एक नगर है। यह रावी नदी के किनारे 1876 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। बशोली अपनी विशेष प्रकार की चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसे बशोली चित्रकला कहा जाता है।"Jammu, Kashmir, Ladakh: Ringside Views," Onkar Kachru and Shyam Kaul, Atlantic Publishers, 1998, ISBN 9788185495514"District Census Handbook, Jammu & Kashmir https://web.archive.org/web/20160512072405/https://books.google.com/books?id=cb7UAAAAMAAJ 12 मई 2016 ," M. H. Kamili, Superintendent of Census Operations, Jammu and Kashmir, Government of India"Restoration of Panchayats in Jammu and Kashmir," Joya Roy (Editor), Institute of Social Sciences, New Delhi, India, 1999"Land Reforms in India: Computerisation of Land Records," Wajahat Habibullah and Manoj Ahuja (Editors), SAGE Publications, India, 2005, ISBN 9788132103493
जनसांख्यिकी
भारत की 2001 की जनगणना के अनुसारIndia बशोली की जनसंख्या 5865 थी, जिसमें पुरुषों का प्रतिशत 53 और महिलाओं का प्रतिशत 47 था। बशोली की साक्षरता दर 77% था, जो कि राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक था। कस्बे की 12% जनसंख्या, 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की थी।
बशोली चित्रकला
thumb|280px|गणेश (ई. 1730).राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली। कार्य के विवरण हेतु देखें: मार्टिन-डुबोस्ट (1997), पृ. 73, जिसके अनुसार: "गणेश अपना कमल फेंकने वाले हैं। बशोली लघुचित्र, ईसवी 1730। राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली। पूरे लाल रंग के शरीर पर नारंगी धोती पहने हैं। उनके छोटे से मुकुट के तीन कोनों पर कमल की कली सुशोभित हैं। गणेश ने अपने दोनो दाएं हाथों में से एक में माला और दूसरे में तीन मोदकों का पात्र उठा रखा है, जबकि एक चौथा मोदक उन्होनें अपनी सूंड से उठाया हुआ है और जिसे वो चखने ही वाले हैं। अपने बाएं दोनो हाथों मे से एक में एक कमल पुष्प और दूसरे में एक परशु उठा रखा है और इस परशु का हत्था उनके स्कंध पर झुका है। मुदगलपुराण (सप्तम,70), के अनुसार अहंकार के राक्षस ममासुर जिसने उन पर आक्रमण किया था, के वध के लिए, गणेश विघ्नराज ने उस पर कमल फेंका था। उस दैविक पुष्प की गंध से विचलित होकर ममासुर ने गणेश के समक्ष समर्पण किया।"
बशोली अपनी विशेष प्रकार की चित्रकारी, बशोली चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है। इसे पहाड़ी चित्रकला के प्रथम रूप के रूप में स्वीकार किया जाता है जो अंतत: अठारहवीं सदी के मध्य में कांगड़ा चित्रकला के रूप में विकसित हुई।Pahari centres https://web.archive.org/web/20140705054353/http://books.google.com/books?id=8EGUpX1O0hoC&pg=RA2-PA62&dq=Kangra+painting&as_brr=0 5 जुलाई 2014 Arts of India: Architecture, Sculpture, Painting, Music, Dance and Handicraft, by Krishna Chaitanya. Published by Abhinav Publications, 1987. ISBN 81-7017-209-8. Page 62.
इतिहास
अपनी कलात्मक श्रेष्ठता और राजसी संरक्षण द्वारा पोषित बशोली चित्रकला को आज चित्रकला की एक जोरदार, साहसिक, कल्पनाशील, अपरंपरागत और कलात्मक रूप से धनी शैली में शुमार किया जाता है। सत्रहवीं और अठाहरवीं सदी की शुरुआत में प्राथमिक रंगों का अधिक प्रयोग और विशेष प्रकार के चेहरे इस शैली की चित्रकला का प्रमुख गुण था, जो पश्चिमी हिमालय की तलहटी में यानि जम्मू और पंजाब में अधिक प्रचलित था। इस शैली के शुरुआती चित्र यहां के राजपुत राजा किरपाल पाल (1678-1693) के समय के हैं।
A Review of Basohli Style in Indian Painting, Chandramani Singh, Kailash - Journal of Himalayan Studies vol 2, Number 1&2, 1974 https://web.archive.org/web/20060906095501/http://www.thdl.org/texts/reprints/kailash/kailash_02_0102_reviews.pdf 6 सितंबर 2006 .
बशोली से शुरु होकर चित्रकला की यह शैली मनकोट, नूरपुर, कुल्लू, मंडी, सुकेत, बिलासपुर, नालागढ़, चंबा, कांगड़ा और गुलेर के पहाड़ी राज्यों तक फैल गयी। बशोली चित्रकला का पहला उल्लेख 1921 में प्रकाशित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में है।
चित्रदीर्घा
इन्हें भी देखें
कठुआ ज़िला
सन्दर्भ
श्रेणी:जम्मू और कश्मीर के शहर
श्रेणी:कठुआ ज़िला
श्रेणी:कठुआ ज़िले के नगर