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बाबा फकीर चंद
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बाबा फकीर चंद फकीर_चंद.png.png 150px बाबा फकीर चंद १८ नवंबर, १८८६ गांव पंझाल, होशियारपुर जिला, पंजाब, भारत ११ सितंबर, १९८१ उत्तरी अमरीका भारतीय दयाल फकीर', 'परम दयाल जी महाराज', 'संत सत्गुरु परम दयाल जी महाराज', 'बाबा फकीर', 'फकीर चन्द जी महाराज', 'संत सत्गुरु वक्त फकीर चन्द जी महाराज हिन्दू
बाबा फकीर चंद (१८ नवंबर, १८८६ - ११ सितंबर, १९८१) सुरत शब्द योग अर्थात मृत्यु अनुभव के सचेत और नियंत्रित अनुभव के साधक और भारतीय गुरु थे।द अननोइंग सेज-लाइफ एण्ड वर्क ऑफ बाबा फकीर चंदजून 2020 InternetArchiveBot । पृष्ठ २०।२७ सितंबर, २००९द अननोइंग सेज-लाइफ एण्ड वर्क ऑफ बाबा फकीर चंदजून 2020 InternetArchiveBot । पृष्ठ ५।२२ सितंबर, २००९chand.html. बाबा फ़कीरचंद, अवेकंड टीचर्स फ़ोरमजून 2020 InternetArchiveBot , अभिगमन तिथि 2009-09-12, भाषा अंग्रेज़ी}} वे संतमत के पहले गुरु थे जिन्होंने व्यक्ति में प्रकट होने वाले अलौकिक रूपों और उनकी निश्चितता के छा जाने वाले उस अनुभव के बारे में बात की जिसमें उस व्यक्ति को चैतन्य अवस्था में इसकी कोई जानकारी नहीं थी जिसका कहीं रूप प्रकट हुआ था। इसे अमरीका के कैलीफोर्निया में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर डॉ॰ डेविड सी. लेन ने नई शब्दावली 'चंदियन प्रभाव' के रूप में व्यक्त किया और उल्लेख किया।पृ.५जून 2020 InternetArchiveBot । अभिगमन तिथि: २२ सितंबर २००९http://www.एंजलफायर.कॉम/रीअल्म/बोधिसत्त्व/baba chand.html
बाबा फकीर चंद
अवेकंड टीचर्स फोरम
2009-09-12
en
जून 2020 InternetArchiveBot राधास्वामी मत सहित नए धार्मिक आंदोलनों के शोधकर्ता मार्क ज्यर्गंसमेयेर ने फकीर का साक्षात्कार लिया जिसने फकीर के अंतर्तम को उजागर किया। यह साक्षात्कार फकीर की आत्मकथा का अंश बना। p.69.जून 2020 InternetArchiveBot अभिगमन तिथि 2009-10-31
जीवन
18 नवम्बर 1886 में गांव पंझाल, जिला होशियारपुर, पंजाब, भारत में उनका जन्म हुआ।http://www.babafaqirchand.com/index.html
बाबा फकीर चंद
हरजीत सिंह
2009-09-12
en
https://web.archive.org/web/20090915182231/http://www.babafaqirchand.com/index.html
15 सितंबर 2009
dead
http://www.lulu.com/content/paperback-book/the-unknowing-sage/1907803
द अननोइंग सेज
लूलू
2009-09-12
en
https://web.archive.org/web/20090827081558/http://www.lulu.com/content/paperback-book/the-unknowing-sage/1907803
27 अगस्त 2009
dead
उनकी पृष्ठभूमि में उनका गरीब ब्राह्मण परिवार और एक दबा हुआ बचपन था और वे ईश्वर भक्ति में राहत पाते थे।पृ.३१जून 2020 InternetArchiveBot , अभिगमन तिथि २२ सितंबर, २००९कुछ देर मांसाहारी रहने के बाद उनका पश्चाताप और प्रार्थना उन्हें एक दैवी दृश्य के द्वारा दाता दयाल शिव ब्रत लाल के ज़रिए राधा स्वामी मत में ले गए।पृ.36.जून 2020 InternetArchiveBot अभिगमन तिथि 2009-09-22 उन्होंने फकीर को राधास्वामी मत में दीक्षित किया और 'सार-वचन' नामक पुस्तक पढ़ने के लिए दी जो राधास्वामी मत के संस्थापक शिव दयाल सिंह (स्वामी जी महाराज) की लिखी हुई थी।स्मैशहिट्स.कॉमजून 2020 InternetArchiveBot , अभिगमन तिथि 2009-09-12फकीर ने पाया कि वह पुस्तक उसके हिंदू विश्वासों और रुचि के विपरीत थी। उसमें कई धार्मिक आंदोलनों के बारे किए गए उल्लेख फकीर के तत्संबंधी विचारों से मेल नहीं खाते थे।http://ईलर्न.एमटीएसएसी.एजु/डीलेन/The%20Unknowing%20SageMINI.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . पृ.38. अभिगमन तिथि 2009-09-22 तथापि दाता दयाल जी में अपने दृढ़ विश्वास के कारण उन्होंने प्रण किया कि वे सच्चे बन कर अपने गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करेंगे और अपना अनुभव दुनिया को बता जाएँगे. उन्होनें दाता दयाल जी के निधन के बाद अपने अनुयायियों को सत्संग कराने का कार्य शुरू किया और तब अपना अनुभूत सत्य लोगों को बताया कि विश्वासी साधक में प्रकट होने वाले दृश्य, रूप, रंग और रेखाएँ वास्तव में माया होती हैं, सत्य नहीं. फकीर ने पारंपरिक तरीके से 'नाम-दान' (दीक्षा) देना भी बंद कर दिया। सत्गुरु की महिमा और माया का रूप
भगत मुंशी राम
कश्यप पब्लिकेशन
2007
112
9788190550109 फकीर का कहना था कि सत्संग में आंतरिक अनुभव ज्ञान की उच्चतर अवस्थाओं का उनके द्वारा किया गया वर्णन ही नाम दान है।संत मत (दयाल फकीर मत की व्याख्या)
भगत मुंशी राम
कश्यप पब्लिकेशन
2008
8
9788190550147 उन्होंने गुरु बने बिना गुरु के सभी कर्तव्य पूरे किए। सत्गुरु की महिमा और माया का रूप
भगत मुंशी राम
कश्यप पब्लिकेशन
2007
112
9788190550109http://www.lulu.com/content/paperback-book/the-unknowing-sage/1907803
द अननोइंग सेज
लूलू
2009-09-12
en
https://web.archive.org/web/20090827081558/http://www.lulu.com/content/paperback-book/the-unknowing-sage/1907803
27 अगस्त 2009
dead
संकट और विपदा की स्थिति में उनके अनुयायियों में फकीर के चमत्कारी और दैवीय रूप का प्रकट होना साहित्य में मिलता है।मेघ-माला
एम.आर. भगत
एम.आर. भगत
63-66http://www.bhagatshaadi.com/megh/MEGH-MALA.pdf
मेघ माला
भगतशादी.कॉम
31-33
2009-09-12
https://web.archive.org/web/20090806042152/http://bhagatshaadi.com/megh/MEGH-MALA.pdf
6 अगस्त 2009
dead
लेकिन फकीर ने सार्वजनिक रूप से ऐसे सभी ऐसे चमत्कारों को यह कह कर अपने से अलग कर दिया कि जो हुआ वह लोगों के विश्वास के कारण हुआ न कि फकीर के कारण. उन्होंने ऐसे सभी अनुयायियों को अपना सत्गुरु (सच्चा ज्ञान देने वाला) घोषित कर दिया, क्योंकि उन्हें गुरु मानने वालों के अनुभव ने ही फकीर को मन, आत्मा (प्रकाश) और शब्द (आंतरिक शब्द धारा) के अनुभवों से आगे जाने के लिए विवश कर दिया। इसीसे अंतत: उन्होंने परम शांति पाई और उनकी सत्य की खोज तथा कुरेद समाप्त हुई। संत मत और आत्मानुभूति
फकीर चंद
डॉ॰आई.सी. शर्मा
फकीर लाइब्रेरी चेरीटेबल ट्रस्ट
1988
175 to 178 फकीर के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए सन् 1980 में डॉ॰ डेविड क्रिस्टोफर लेन के अनुरोध करने पर फकीर ने प्रोफेसर बी.आर. कमल को अपनी आत्मकथा लिखाई थी। मूलतः उर्दू भाषा में लिखाई गई इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद प्रोफेसर कमल ने किया और बाद में डॉ॰ लेन ने इसके संपादन और प्रकाशन का कार्य किया।बीज़ोन पर देखेंजून 2020 InternetArchiveBot
फकीर का निधन संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरे के दौरान ११ सितंबर, १९८१ को पिट्सबर्ग, पेनिसिल्वेनिया, उत्तर अमेरिका में हुआ।अभिगमन तिथि=2009-12-12जून 2020 InternetArchiveBot अपनी वसीयत के जरिए फकीर ने मानवता मंदिर, होशियारपुर के अस्तित्व को अलग स्थापित क्या और इसे अन्य मानवता केंद्रों से स्वतंत्र रखा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनके ट्रस्ट का देश-विदेश में उनके नाम में खुले मानवता केंद्रों और उनके आचार्यों के साथ प्रेम के अतिरिक्त और कोई संबंध नहीं है। उन्होंने अपने संबंधियों को मंदिर की सेवा करने की अनुमति तो दी परंतु ट्रस्ट का सदस्य बनने या मंदिर के मामलों में दखल देने पर रोक लगा दी। उनकी वसीयत में उनका मिशन 'मनुष्य बनो' भी शामिल किया गया है। उन्होंने भगत मुंशीराम को नामदान देने, जीवों को हिदायत करने और दुखी और अशांत जीवों की मदद करने के लिए नियुक्त किया। उन्होंने भगत मुंशीराम की उपस्थिति या अनुपस्थिति में डॉ॰आई.सी. शर्मा को अपनी जगह काम करने के लिए नियुक्त किया जो परमार्थ और अभ्यास वगैरा के बहुत तालीमयाफ्ता थे। फकीर ने पुन: आई.सी. शर्मा की अनुपस्थिति में भगत मुंशीराम को अपनी जगह सत्गुरु की हैसीयत में काम करने के लिए नियुक्त किया। उनकी वसीयत के अनुसार मानवता मंदिर द्वारा चलाए जा रहे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से कोई फीस नहीं ली जाएगी परंतु फकीर ने बच्चों के माता-पिता के लिए अनिवार्य कर दिया कि वे वचन देंगे कि वे तीन से अधिक बच्चे पैदा नहीं करेंगे (1980 में परिवार कल्याण कार्यक्रम को उनके 'मानवता धर्म' में शामिल करने की यह गंभीर, ईमानदार और उत्तरदायित्वपूर्ण कोशिश थी)। http://भगतशादी.कॉम/मेघ/Sant%20Satguru%20Vaqt%20Ka%20Vasiyatnama.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा, भगत मुंशीराम, पृ.11, अभिगमन तिथि 2009-10-13संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा
भगत मुंशीराम
कश्यप पब्लिकेशन
2007
29-31
9788190550116 मानवता मंदिर के प्रांगण में फकीर की अस्थियां गाड़ी गई हैं जिन पर 'मनुष्य बनो' का झंडा फहराया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि उनके सतंमत में कब्र, मकबरे, समाध या मृत महापुरुषों की पूजा का कोई स्थान नहीं है। अत: उन्होंने अपने आप को 'शिव समाध' (दाता दयाल शिव ब्रत लाल की समाध) से असंबद्ध रखा। संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा
भगत मुंशीराम
कश्यप पब्लिकेशन
2007
30
9788190550116
धर्म संबंधी विचार
फकीर के धार्मिक विचारों के कई स्रोत थे जैसे हिंदू धर्म (सनातन धर्म) और राधास्वामी मत से उनकी लंबी सहबद्धता और सुरत शब्द योग में उनका अनुभव. फकीर को उनके मानवतावादी नजरिए में सहमति के योग्य बहुत कुछ मिला लेकिन वे उनके नामदान के परंपरागत तरीके और भारत में प्रचलित गुरुवाद से असहमत थे। ऐसी धार्मिक प्रथाओं के प्रति उनकी सहनशीलता शून्य थी जिनसे गरीब, विश्वासी और भोले-भाले लोगों का शोषण होता हो। http://ईलर्न.एमटीएसएसी.एजु/डीलेन/The%20Unknowing%20SageMINI.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . पृ.82. अभिगमन तिथि 2009-10-14 उनका साहित्य इस तथ्य का साक्षी है कि वे कबीर द्वारा चलाए गए संत मत के बुनियादी सिद्धांतों के प्रबल हिमायती थे परंतु सुरत शब्द योग की उच्चतम अवस्थाओं के अंतिम परिणाम और संतों द्वारा पोषित रहस्यवाद से उनका मोहभंग हो गया था। बाद में उन्होंने योग-साधना को दिए जा रहे महत्व को कम किया और संत मत के मानवतावाद पर बल दिया। सत्गुरु की महिमा और माया का रूप
भगत मुंशीराम
कश्यप पब्लिकेशन
2007
65
9788190550109.
फकीर की इस विचार में आस्था थी कि 'सेक्स केवल संतान उत्पत्ति के लिए हो' (यहाँ वांछित संतान अभिप्रेत है)। इससे मानव जाति के कष्ट कम हो सकते हैं।http://ईलर्न.एमटीएसएसी.एजु/डीलेन/The%20Unknowing%20SageMINI.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . पृ.56. अभिगमन तिथि 2009-09-22 उनके जीवन-दर्शन के अनुसार दूसरों के और अपने कल्याण की इच्छा करना जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। युवाओं को आंतरिक शांति के लिए उन्होंने सदा व्यस्त रहने, अपनी आजीविका स्वयं कमाने, किसी सच्चे इंसान के मार्गदर्शन में रहने और आत्म-संयमी बनने की सलाह दी। अपने सामाजिक कर्तव्य के तौर पर उन्होंने अनुयायियों से कहा कि वे दूसरों को नीयतन कष्ट न पहुँचाएँ, बेमतलब बात करने से बचें, कड़वे शब्दों के प्रति सहनशील बनें और साथी प्राणियों की नि:स्वार्थ सेवा करें
फकीर ने 'हर कीमत पर घरेलू शांति' पर विशेष बल दिया। शुभ कर्म, शुद्ध कमाई, दान (जिसमें प्रेम और कल्याण भी शामिल है) आदि जीवन के ऐसे पक्ष थे जो उन्होंने अन्य सामाजिक दायित्व में शामिल किए। इन दायित्वों को मानव मात्र के लिए आवश्यक माना जाता है। अन्य आध्यात्मिक साधनाओं के अंतर्गत उन्होंने उन्होंने प्रेम, भक्ति, विश्वास, समर्पण पर जोर दिया। कई स्थानों पर उन्होंने 'स्वयं के प्रति सच्चा बनने', ईश्वर की इच्छा के प्रति समर्पण करने, सुमिरन-ध्यान करने और इस प्रकार करके अंत में आत्मज्ञान प्राप्त करने की बात की। मानवता युग धर्म
दयाल फकीर
नंदु भाई, शिव साहित्य प्रकाशन, दयाल नगर, अलीगढ़ (उ.प्र.)
1971
36-42
फकीर ने अनुभव किया कि सभी जीव परम चेतन तत्त्व के बुलबुले हैं और मानव का अंतिम लक्ष्य शांति है।http://ईलर्न.एमटीएसएसी.एजु/डीलेन/The%20Unknowing%20SageMINI.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . p.76. अभिगमन तिथि 2009-10-14http://www.बीज़ोन.कॉम/लाफिंगमैनमैग/fifthstage.htmlजून 2020 InternetArchiveBot . डेविड सी. लेन, बीज़ोन.कॉम, 'दि टीचिंग्स ऑफ बाबा फकीर चंद' के अंश (I am nothing more...)
मानवता मंदिर
thumb|right|200px|मानवता मंदिर, होशियारपुर.
सन् 1933 में दाता दयाल ने फकीर को आदेश दिया था कि संत मत की शिक्षा को आने वाले समय के अनुरूप बदल जाना. गुरु के आदेश का पालन करने और दाता दयाल के कार्य को परिवर्तित समय के साथ अनुसार आगे ले जाने के लिए फकीर ने सन् 1962 में होशियारपुर में मानवता मंदिर की स्थापना की। http://ईलर्न.एमटीएसओसी.एजु/डीलेन/The%20Unknowing%20SageMINI.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . पृ.67. अभिगमन तिथि 2009-09-27 एक मासिक पत्रिका 'मानव मंदिर' का प्रकाशन शुरू किया गया।http://www.नोवेलगाइड.कॉम/ए/डिस्कवर/ear_01_00174.htmlजून 2020 InternetArchiveBot . मानवता मंदिर, उपशीर्ष:पीरियॉडिकल्स भी यह मंदिर मानवता और मानव-धर्म को समर्पित है। (Hindi:मानव-धर्म)। अंतर्राष्ट्रीय मानवता केंद्र
भगत मुंशी राम
कश्यप पब्लिकेशन
2009
10-13
9788190550109सत्गुरु की महिमा और माया का रूप
भगत मुंशी राम
कश्यप पब्लिकेशन
2007
97
9788190550109संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा
भगत मुंशी राम
कश्यप पब्लिकेशन
2007
29
9788190550116 मानवता मंदिर उनके मिशन का केंद्र बना रहा जहाँ उन्होंने लोगों को चमत्कारों का सत्य (मन की रहस्यात्मक कार्यप्रणाली) और मन के आगे का सत्य बताना जारी रखा। फकीर ने मंदिर चलाने के लिए आवश्यक दान और भेंटों की कीमत पर भी अपना यह धर्म निभाया.http://ईलर्न.एमटीएसओसी.एजु/डीलेन/The%20Unknowing%20SageMINI.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . पृ.80-81. अभिगमन तिथि 2009-10-14
अन्य महत्वपूर्ण अनुयायी और सहकर्मी
बाबा फकीर चंद के जीवन के दौरान के और बाद के अनुयायियों और सहकर्मियों की सूची बहुत लंबी है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:- पीर-ए-मुग़ां (पंडित बुआ दत्त) (दिल्ली), संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा
भगत मुंशीराम
2007
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9788190550116 नंदु भाई (निज़ामाबाद, आंध्र प्रदेश),http://ईलर्न.एमटीएसएसी.एजु/डीलेन/The%20Unknowing%20SageMINI.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . पृ.75. अभिगमन तिथि 2009-10-14 पी. आनंद राव (हैदराबाद (भारत), आंध्र प्रदेश), तारा चंद (हरियाणा),http://groups.याहू.कॉम/ग्रुप/राधास्वामीस्टडीज़/संदेश/151921जून 2020 InternetArchiveBot . उपशीर्ष 'Secret nine' गोपी लाल कृषक, संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा
भगत मुंशीराम
2007
16
9788190550116http://us.ज्योसिटीज़.कॉम/eckcult/फकीरचंद/faqir6.htmlजून 2020 InternetArchiveBot . उपशीर्ष 'Thirteen'. अभिगमन तिथि 2009-10-15 कुबेर नाथ श्रीवास्तव (वाराणसी), प्रेमानंद जी, (कुबेर नाथ श्रीवास्तव और प्रेमानंद को शिव समाध, राधास्वामी धाम, वाराणसी का कार्य बारी-बारी सौंपा गया था)http://भगतशादी.कॉम/मेघ/Sant%20Satguru%20Vaqt%20Ka%20Vasiyatnama.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा, भगत मुंशीराम, भगतशादी.कॉम, पृ.78, अभिगमन तिथि 2009-12-11 पृथ्वी नाथ पंडित (जम्मू और कश्मीर),http://अखंडमानवताधाम.इन/pandit_dayal.htmlजून 2020 InternetArchiveBot . अभिगमन तिथि 2009-10-15 लाल चंद (चूरू, राजस्थान),http://www.meditation.dk/old_meditation_master.htm https://web.archive.org/web/20090825223728/http://www.meditation.dk/old_meditation_master.htm 25 अगस्त 2009 . अभिगमन तिथि 2009-10-14 बी.आर. कमल (हिमाचल प्रदेश),http://www.बीज़ोन.कॉम/लाफिंगमैनमैग/fifthstage.htmlजून 2020 InternetArchiveBot . उपशीर्ष 'The Reluctant Guru' अभिगमन तिथि 2009-10-14 लज्जावती कक्कड़ (कमालपुरवाली माई) (पंजाब), तृप्ता देवी (योगिनी माताhttp://www.मेट्टा.ऑर्ग.य़ूके/फोरम्स/वाइसेफ/शोसब्ज.एएसपी?सब्जेक्ट=डेडीकेशन%20to%20योगिनी%20माताजीजून 2020 InternetArchiveBot
) (पठानकोट, पंजाब) (फकीर ने कमालपुरवाली माई और योगिनी माता को महिलाओं का गुरु नियुक्त किया था),http://www.बिलीफनेट.कॉम/बोर्ड्स/message_list.asp?discussionID=583392जून 2020 InternetArchiveBot . अभिगमन तिथि 2009-10-14 दयाल दास (उत्तर प्रदेश), सेठ दुर्गा दास (चंडीगढ़),Books https://web.archive.org/web/20121103071908/http://books.google.co.in/books?id=cnWmWUQ1paYC&pg=PA68&lpg=PA68&dq=nandu+bhai&source=bl&ots=buNwPJ5zeF&sig=RcY0PrwisSBs_U-I3Q9re2s_bBo&hl=en&ei=ArPVSvydG8G1lAf3_ZycCQ&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=8&ved=0CB4Q6AEwBw#v=onepage&q=nandu%20bhai&f=false.Google 3 नवंबर 2012 . पृ.67-68, अभिगमन तिथि 2009-10-14 मोहन लाल (होशियारपुर), सत्गुरु की महिमा और माया का रूप
भगत मुंशीराम
2007
34
9788190550109 माम चंद, सत्गुरु की महिमा और माया का रूप
भगत मुंशीराम
2007
57
9788190550109 हरजीत सिंह संधु (पंजाब),http://www.बाबाफकीरचंद.कॉम/harjit.htmlजून 2020 InternetArchiveBot . अभिगमन तिथि 2009-10-14 कर्मचंद कपूर (पालमपुर, हिमाचल प्रदेश), हुकम सिंह, अन्नदाता, जसवंत सिंह,, तारा सिंह.
फकीर एक लेखक के रूप में
युवा आयु में फकीर ने उर्दू में कई पुस्तकें लिखीं, जो बाद में देवनागरी (हिन्दी) में लिप्यंतरित की गईं। उनकी अधिकतर पुस्तकें उनके सत्संगों के सीधे संकलन हैं जो मुख्यत: दो पत्रिकाओं नामत: 'मनुष्य बनो' (अलीगढ़ से प्रकाशित) और 'मानव मंदिर' (फकीर द्वारा स्थापित मानवता मंदिर ट्रस्ट, होशियारपुर द्वारा प्रकाशित) में छपी थीं। उनकी कुछ हिन्दी और अंग्रेज़ी पुस्तकें निम्नानुसार हैं:
2
जगत उभार
गरुड़ पुराण रहस्य
अजायब पुरुष
पाँच नाम की व्याख्या
मेरी धार्मिक खोज
बारह मासा की व्याख्या
कबीर सार शब्द व्याख्या
सत कबीर की साखी
गुरु तत्त्व
प्रेम रहस्य
गुरु महिमा
मानवता युगधर्म
उन्नति मार्ग
ईश्वर दर्शन
गुरु वंदना
सत्ज्ञान दाता
सार का सार
50 वर्षीय फकीर अनुभव
हृदय उद्गार
अगम विकास
आकाशीय रचना
यथार्थ संदेश
सच्चाई
अगम वाणी
मानव धर्म प्रकाश
आदि-अंत
ज्ञान - योग
निर्वाण से परे
सार-भेद
कर्मभोग या मौज
The Essence of Truth
Satya Sanatan Dharm or True Religion of Humanity
The Art of Happy Living
</div>
अन्य सम्मान सूचक
जीवन काल में बाबा फकीर चंद के लिए कई सम्मान सूचक शब्द प्रयोग किए जाते थे, यथा दयाल फ़कीर, परम दयाल जी महाराज, संत सत्गुरु परम दयाल जी महाराज, बाबा फ़कीर, फ़कीर चंद जी महाराज, संत सत्गुरु वक़्त फ़कीर चंद जी महाराज. उनके निधन के बाद उनके नाम के साथ "पंडित" शब्द भी जोड़ा गया जो उनकी इच्छा के विरुद्ध था।http://भगतशादी.कॉम/मेघ/Sant%20Satguru%20Vaqt%20Ka%20Vasiyatnama.pdfजून 2020 InternetArchiveBot . संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा, अभिगमन तिथि 2009-10-14, पृ.53.संत सत्गुरु वक्त का वसीयतनामा
भगत मुंशीराम
कश्यप पब्लिकेशन
2007
143
9788190550116
इन्हें भी देखें
शिव ब्रत लाल
सुरत शब्द योग
संत मत
राधास्वामी मत
डेविड सी. लेन
मार्क ज्यर्गंसमेयेर
बाहरी कड़ियाँ
2
https://web.archive.org/web/20100710173727/http://sites.google.com/site/dayalfaqirmat/
https://web.archive.org/web/20100712161604/http://sites.google.com/site/faqirchandlibrary/
https://web.archive.org/web/20110622093315/http://video.google.com/videoplay?docid=2542290213691270338
https://web.archive.org/web/20110622085447/http://video.google.com/videoplay?docid=5977858875089797931#docid=4584877123197657131
https://web.archive.org/web/20110622085447/http://video.google.com/videoplay?docid=5977858875089797931#docid=2541801883157187697
https://web.archive.org/web/20110622085447/http://video.google.com/videoplay?docid=5977858875089797931
https://web.archive.org/web/20161014050147/https://www.youtube.com/watch?v=hb1VLfQDdOs&feature=channel_page
http://video.google.com/videoplay?docid=5977858875089797931# https://web.archive.org/web/20110622085447/http://video.google.com/videoplay?docid=5977858875089797931 22 जून 2011
www.babafaqirchand.com/
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</div>
सन्दर्भ
2
श्रेणी:राधा स्वामी मत
श्रेणी:संत मत
श्रेणी:सुरत शब्द योग
श्रेणी:आध्यात्मिक गुरु
श्रेणी:योगी
श्रेणी:१९८१ में निधन