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इस्लामी वास्तुकला
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thumb|ताज महल इस्लामिक वास्तुकला की एक अनुपम कृति
इस्लामी वास्तुकला एक प्रकार की वास्तु कला है जो की इस्लाम धर्म से प्रभावित है और इस्लामिक शासकों एवं सरकारों द्वारा दुनिया भर में प्रचारित की गयी।
मुख्य तत्त्व
इस्लामी भवन निर्माण को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है; धार्मिक एवं गैर धार्मिक इमारतें।http://www.boloji.com/architecture/00015.htm इस्लामी प्रभाव 25 अगस्त 2009 https://web.archive.org/web/20100114070904/http://boloji.com/architecture/00015.htm 14 जनवरी 2010 dead
धार्मिक इमारतें
कुरान में नमाज को विशेष महत्त्व दिया गया है और कुरान यह भी निर्देश देती है कि नमाज मक्का की दिशा में ही पड़ी जा सकती है। इसलिए हर इस्लामी धार्मिक इमारत उस धुरी (किबला) पर ही बनायी गयी। मज्जिदों में मक्का की दिशा में नमाज पड़ने के लिए एक बड़ी आयताकार जगा होती है जिसे मिहराब कहा जाता है। मिहराब के कोने में मीनारे होती है जो स्तंभ नुमा होती है।
मकबरा या समाधि अन्य प्रकार की धार्मिक इमारत है। इस्लामी प्रभाव के पूर्व भारत में इस प्रकार की इमारतें नहीं हुआ करती थी। शुरुआत में सूफी संतो की कब्र के ऊपर इस प्रकार की इमारत को बनया जाता था परन्तु कालांतर में विभिन्न शासकों ने भी अपने मृत्यु के बाद मकबरों का निर्माण कराया। इस इमारत में एक बहुत बड़ा गुम्बज कब्र के ऊपर कई स्तंभों पर टिका होता है।.
गैर धार्मिक इमारतें
इस्लामी शासकों ने अपने राज्य की रक्षा के लिए कीलो एवं दीवारों का निर्माण कराया था।
मुगल वास्तुकला
मुगल वास्तुकला
भारत की प्रसिद्ध मस्जिदें
मुगल वंश आरंभ हुआ बादशाह बाबर से 1526 में। बाबर ने पानीपत में एक मस्जिद बनवाई, इब्राहिम लोदी पर अपनी विजय के स्मारक रूप में। एक दूसरी मस्जिद, जिसे बाबरी मस्जिद कहते हैं, अयोध्या में बनवाई। एक तीसरी मस्जिद उसने सम्भल, मुरादाबाद जिले में बनवाई।
left|200px|thumb|बुलंद दरवाजा, फतेहपुर सिकरी, आगरा।
बादशाह अकबर (1556-1605) ने बहुत निर्माण करवाया, एवं उसके काल में इस शैली ने खूब विकास किया। गुजरात एवं अन्य शैलियों में, मिस्लिम एवं हिंदु लक्षण, उसके निर्माण में दिखाई देते हैं। अकबर ने फतेहपुर सीकरी का शाही नगर 1500 में बसाया, जो कि आगरा से 26 मील (42 कि मी) पश्चिम में है। फतेहपुर सीकरी का अत्यधिक निर्माण, उसकी कार्य शैली को सर्वाधिक दर्शाता है। वहाँ की वृहत मस्जिद, उसकी कार्य शैली को सर्वोत्तम दर्शाती है, जिसका कि कोई दूसरा जोड़ मिलना मुश्किल है। यहाँ का दक्षिण द्वार, अति प्रसिद्ध है, एवं इसका कोई जोड़ पूरे भारत में नहीं है। यह विश्व का सर्वाधिक ऊँचा द्वार है, जिसे बुलन्द दरवाज़ा कहते हैं। मुगलों ने प्रभाचशाली मकबरे बनवाए, जिनमें अकबर के पिता हुमायूँ का मकबरा, दिल्ली में, एवं अकबर का मकबरा, सिकंदरा, आगरा के पास स्थित है। यह दोनों ही अपने आप में बेजोड़ हैं।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
श्रेणी:स्थापत्य
श्रेणी:इस्लामी वास्तुकला