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मानव बुद्धिमत्ता
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मानव बुद्धिमत्ता (Human Intelligence) मनुष्य की बौद्धिक क्षमता है , जो जटिल संज्ञानात्मक क्षमताओं और उच्च स्तर की प्रेरणा एवं आत्म-जागरूकता द्वारा पहचानी जाती है । अपनी बुद्धि का उपयोग करके , मनुष्य सीखने , अवधारणाएँ बनाने , समझने और तर्क एवं विवेक का प्रयोग करने में सक्षम होते हैं। मानव बुद्धि में पैटर्न पहचानने , योजना बनाने , नवाचार करने , समस्याओं का समाधान करने , निर्णय लेने , जानकारी को बनाए रखने और संवाद करने के लिए भाषा का उपयोग करने की क्षमताएँ भी सम्मिलित होती हैं।
thumb|गुकेश दोम्मराजु, भारतीय शतरंज ग्राण्डमास्टर
बुद्धि के क्षेत्र में अन्वेषकों ने कई तरीकों से यह जानने का प्रयास किया है कि बुद्धि वास्तव में क्या है। विभिन्न शोधकर्ताओं ने अपनी परिभाषाओं में बुद्धि के भिन्न-भिन्न पहलुओं पर जोर दिया है।
प्रारंभिक मतभेद
उदाहरणार्थ, वर्ष १९२१ में आयोजित एक संगोष्ठी में, दो प्रमुख अमेरिकी मनोवैज्ञानिकों, लुईस टर्मन और एडवर्ड एल. थार्नडाइक, के बीच बुद्धि की परिभाषा को लेकर मतभेद थेSternberg Robert J. Definition, Types, Test, Theories, & Facts Encyclopedia Britannica 20 July 1998 https://www.britannica.com/science/human-intelligence-psychology 2 October 2025। टर्मन ने अमूर्त रूप से सोचने की क्षमताा को बुद्धि का मूल माना, जबकि थार्नडाइक ने सीखने की योग्यता और प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर देने की क्षमताा पर जोर दिया।APA PsycNet APA PsycNet 1 June 1999 https://psycnet.apa.org/record/1926-00296-001 2 October 2025
मनोवैज्ञानिक हावर्ड गार्डनर ने बहु-बुद्धिमत्ता सिद्धांत का प्रतिपादन किया https://dspace.sxcjpr.edu.in/jspui/bitstream/123456789/720/1/Howard%20Gardner%20-%20Frames%20of%20Mind_%20The%20Theory%20of%20Multiple%20Intelligences-Basic%20Books%20%282011%29%20%281%29.pdf 2 October 2025, यह तर्क देते हुए कि मनुष्यों के पास कोई एकल सामान्य बुद्धि (IQ) नहीं होती, बल्कि कई स्वतंत्र प्रकार की बुद्धिमत्ताएँ होती हैं। गार्डनर ने बुद्धिमत्ता को "एक जैव-मनोवैज्ञानिक क्षमता" के रूप में परिभाषित किया, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपने पर्यावरण के हिसाब से रचनात्मक और कार्यात्मक समाधान ढूंढ सकता है। उन्होंने मूल रूप से सात प्रकार की बुद्धिमत्ताओं का उल्लेख किया की भाषिक, तार्किक-गणितीय, संगीतिक, स्थानिक, शारीरिक-किनैस्थेटिक, और अंतः व्यक्तिक बुद्धिमत्ता,और बाद में इसमें प्राकृतिकवादी तथा संभावित अस्तित्ववादी बुद्धिमत्ता को भी जोड़ा। इस सिद्धांत की मूल अवधारणा यह है कि हर व्यक्ति का बुद्धिमत्ता क्षमता अद्वितीय होता है, यहाँ तक कि जुड़वाँ व्यक्तियों का भी नहीं। शिक्षा के क्षेत्र में इसका गहरा प्रभाव पड़ा है, जहाँ यह सिद्धांत शिक्षकों को सलाह देता है कि वे विद्यार्थियों की विविध बुद्धिमत्ता क्षमता को ध्यान में रखते हुए शिक्षण और मूल्यांकन करें, जिससे व्यक्तिगत क्षमताओं को पहचाना और बढ़ावा दिया जा सके।
सन्दर्भ
श्रेणी:मानवशास्त्र