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व्यावहारिक मनोविज्ञान

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अंगूठाकार|मनोविज्ञान् मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का विभिन्न मानवीय समस्याओं के सुलझाने में प्रयोग करना व्यावहारिक मनोविज्ञान (Applied psychology) के क्षेत्र में आता है। व्यावहारिक मनोविज्ञान, मनोविज्ञान का ही एक पहलू है। हैपनर के अनुसार, ‘‘व्यावहारिक मनोविज्ञान के लक्ष्य मानव क्रियाओं का वर्णन, भविष्य कथन और मानव क्रियाओं पर नियंत्रण है जिससे हम अपने जीवन को बुद्धिमता पूर्वक समझ सकें और निर्देशित कर सकें तथा दूसरे के जीवन को प्रभावित कर सकें।’’ जिस तरह विज्ञान के सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक दोनों पहलू होते हो उसी प्रकार मनोविज्ञान में सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक पहलू भी है। व्यावहारिक मनोविज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं विकास पैटर्सन (1940) ने अपने लेख 'अप्लायड साइक्लोजी कम्स टू एज (Applied Psychology Comes to Age) में व्यावहारिक मनोविज्ञान के इतिहास के विकास पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार व्यावहारिक मनोविज्ञान का विकास चार चरणों में हुआ है। ये चरण हैं - गर्भावस्था, जन्म, बचपन तथा युवावस्था।https://books.google.co.in/books?id=rH6ImBVnDigC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false Advanced Applied Psychology (2 Vols. Set by Ram Nath Sharma, Rachana Sharma) 19 अप्रैल 2015 https://web.archive.org/web/20150419102939/https://books.google.co.in/books?id=rH6ImBVnDigC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false 19 अप्रैल 2015 live प्रथम चरण : गर्भावस्था पैटर्सन के अनुसार 1882 से लेकर 1917 तक मनोविज्ञान का विकास व्यावहारिक मनोविज्ञान के गर्भावस्था का काल था। इस काल में गाल्टन, केटेल और बिने का योगदान महत्वपूर्ण था। इस काल में अमेरिका जैसे कई देश प्रथम विश्वयुद्ध में लगे हुए थे। द्वितीय चरण : जन्मकाल पैटर्सन ने 1917 से 1918 तक के समय को व्यावहारिक मनोविज्ञान का जन्मकाल माना है और इस काल में कई मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का निर्माण हुआ। इस काल में ही अमेरिका जैसे देशों ने सेना में भर्ती के लिए मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का उपयोग किया। इसी काल में सैनिकों के चुनाव के लिए आर्मी-अल्फा और आर्मी-बीटा परीक्षणों का जन्म हुआ। अल्फा परीक्षण अधिकारी वर्ग के लिए तथा बीटा परीक्षण जवानों व अनपढ़ लोगों के लिए उपयोग में लाये गए। तीसरा चरण : बाल्यावस्था पैटर्सन के अनुसार सन् 1918 से 1937 तक मनोविज्ञान के विकास के काल को व्यावहारिक मनोविज्ञान की बाल्यावस्था मानी जानी चाहिए। इसी काल में 1937 में अमेरिका में व्यावहारिक मनोविज्ञान के एक राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना हुई जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुधार में मनोविज्ञान के व्यवहार को बढ़ावा देना था। चौथा चरण : युवावस्था सन् 1937 के बाद व्यावहारिक मनोविज्ञान ने अपनी युवावस्था में प्रवेश किया। तब से आज तक इसका क्षेत्र बढ़ता ही जा रहा है। वर्तमान काल में मानव के जीवन के कई क्षेत्रों में इसका उपयोग हो रहा है। व्यावहारिक मनोविज्ञान के क्षेत्र आधुनिक युग में व्यावहारिक मनोविज्ञान का क्षेत्र बराबर बढ़ता जा रहा है। उस हर क्षेत्र में जहां मानव जीवन में मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों का प्रयोग किया जा सकता है वहां व्यावहारिक मनोविज्ञान का भी क्षेत्र है। अतः व्यावहारिक मनोविज्ञान का क्षेत्र बड़ा व्यापक एवं विस्तृत है। परन्तु इसके क्षेत्र को निम्नलिखित मुख्य भागों में बांटा जा सकता है- 1. मानसिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा 2. सामाजिक समस्याएं 3. शिक्षा 4. परामर्श तथा निर्देशन (Counseling psychology) 5. उद्योग एवं व्यापार (Industrial and organizational psychology) 6. सेवाओं या नौकरियों में चुनाव 7. अपराध निरोध 8. सैनिक क्षेत्र 9. राजनैतिक क्षेत्र 10. विश्व शांति (Peace psychology) 11. यौन शिक्षा 12. क्रीड़ा या खेल क्षेत्र (Sport psychology) 13. विज्ञापन सन्दर्भ * श्रेणी:मनोविज्ञान की शाखाएँ