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वन विहार राष्ट्रीय उद्यान

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वन विहार राष्ट्रीय उद्यान II Alligator at Van Vihar National Park.jpg वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में घड़ियाल 300 India Madhya Pradesh मध्य प्रदेश, भारत भोपाल 23 13 48 N 77 21 59 E 4.45 वर्ग कि॰मी॰ 1983 2,50,000 मध्य प्रदेश वन विभाग वन विहार राष्ट्रीय उद्यान मध्य भारत में स्थित मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का एक विशिष्ट प्राकृतिक स्थल है,लोकसभा भारत. संसद. https://www.google.co.th/books/edition/Parliamentary_Debates_House_of_the_Peopl/0OAf7EJ7ulMC?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%B5%E0%A4%A8+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF+%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8&dq=%E0%A4%B5%E0%A4%A8+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF+%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8&printsec=frontcover Parliamentary Debates, House of the People संसद सचिवालय 2012 जो संरक्षण और संवर्धन की आधुनिक अवधारणा का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है। सन् 1979 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में स्थापित यह उद्यान लगभग 4.45 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है।कुमार संजीत https://www.google.co.th/books/edition/Madhya_Pradesh_Samanya_Gyan/dkkCEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B5%E0%A4%A8+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF+%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8&pg=PA62&printsec=frontcover Madhya Pradesh Samanya Gyan (H) अरिहंत पब्लिकेशन इंडिया लिमिटेड 2020 यद्यपि इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्राप्त है, फिर भी इसका प्रबंधन केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक आधुनिक प्राणी उद्यान की भाँति किया जाता है, जहाँ संरक्षण और देखरेख का संतुलन बनाए रखा गया है। इस उद्यान की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यहाँ निवास करने वाले पशुओं को उनके स्वाभाविक परिवेश के निकटतम परिस्थितियों में रखा जाता है, जिससे वे अपेक्षाकृत स्वतंत्र और सहज जीवन व्यतीत कर सकें। यहाँ अधिकांश जीव ऐसे हैं, जो या तो अनाथ अवस्था में विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए हैं या अन्य प्राणी उद्यानों के साथ आदान-प्रदान के माध्यम से प्राप्त हुए हैं; किसी भी पशु को जानबूझकर उसके प्राकृतिक वन्य आवास से पकड़कर यहाँ नहीं लाया जाता।वन विहार राष्ट्रीय उद्यान Van Vihar National Park - an Introduction 2007 http://210.212.144.202/vanvihar/about_vvnp.html https://web.archive.org/web/20120323190711/http://210.212.144.202/vanvihar/about_vvnp.html 23 मार्च 2012 dead यह नीति वन्यजीव संरक्षण के प्रति उद्यान की संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व को दर्शाती है। वन विहार का अनुभव भी विशिष्ट है—आगंतुक एक मार्ग के माध्यम से उद्यान के भीतर प्रवेश करते हुए विभिन्न प्राणियों को उनके विस्तृत और सुरक्षित आवासों में देख सकते हैं। खाइयों, दीवारों और जालीदार अवरोधों की सहायता से न केवल आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, बल्कि पशुओं को भी ऐसा वातावरण प्रदान किया जाता है, जो उनके प्राकृतिक निवास का आभास कराता है। इतिहास बीसवीं शताब्दी के मध्य में यह क्षेत्र अनेक चुनौतियों से घिरा हुआ था। यहाँ अवैध पत्थर की खदानें सक्रिय थीं, और बड़ी झील के किनारे स्थित इसकी शांत एवं रमणीय भू-स्थिति के कारण कई व्यावसायिक संस्थाएँ इस मूल्यवान भूमि पर अधिकार स्थापित करने का प्रयास कर रही थीं। ऐसे समय में, स्थानीय तथा व्यापक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के महत्व को समझते हुए, इस क्षेत्र को विधिक संरक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया गया और इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत सुरक्षित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया, जिसने क्षेत्र को संरक्षित रूप देने की संभावनाओं का सूक्ष्म अध्ययन किया। अंततः सन् 1983 में समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने लगभग 4.4521 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया।intranet.mpforest.gov.in वन विहार 2024 https://www.intranet.mpforest.gov.in/ho_outer/vanvihar.aspx https://web.archive.org/web/20240529120222/https://www.intranet.mpforest.gov.in/ho_outer/vanvihar.aspx 29 मई 2024 dead इस कुल क्षेत्रफल में से लगभग 3.8839 वर्ग किलोमीटर भूमि सरकारी स्वामित्व में थी, जबकि शेष भाग प्रेमपुरा, धरमपुरी और अमखेड़ा गाँवों के ग्रामीणों के अधीन था। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के अंतर्गत निजी स्वामित्व वाली लगभग 0.5692 वर्ग किलोमीटर भूमि के लिए ग्रामीणों को उपयुक्त मुआवजा प्रदान किया गया, जिसमें लगभग 23.52 लाख रुपये का भुगतान किया गया। राष्ट्रीय उद्यान के गठन के उपरांत, अधिग्रहित क्षेत्र को पत्थर की दीवारों और जालीदार बाड़ से सुरक्षित किया गया, ताकि संरक्षण की सीमाएँ स्पष्ट रहें और वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित एवं नियंत्रित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के सुव्यवस्थित संचालन हेतु पहली प्रबंधन योजना वर्ष 2000 से 2010 की अवधि के लिए तैयार की गई, जिसने इसके संरक्षण, विकास और प्रबंधन की दिशा को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया।History : Peep into the Past वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल, भारत 2007 http://210.212.144.202/vanvihar/history.html https://web.archive.org/web/20120323185553/http://210.212.144.202/vanvihar/history.html 23 मार्च 2012 dead thumb|सूर्यास्त के समय वन विहार इससे पूर्व, श्यामला हिल की उपेक्षित पहाड़ियों तथा आसपास की निजी ग्रामीण भूमि को सन् 1980 में विकसित करने की पहल आरंभ की गई थी, जो आगे चलकर सन् 1983 में इस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किए जाने का आधार बनी। उद्यान के विकास को एक नई गति तब मिली, जब सन् 1993–94 में केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुदान प्राप्त होना शुरू हुआ। उसी वर्ष इसे एक मध्यम आकार के चिड़ियाघर के रूप में औपचारिक मान्यता भी प्रदान की गई, जिससे इसके प्रबंधन और संरचना में और अधिक सुव्यवस्था आई। निरंतर प्रयासों, दूरदर्शी योजना और समर्पित प्रबंधन के परिणामस्वरूप यह क्षेत्र, जो कभी उपेक्षित और अव्यवस्थित था, आज एक सघन हरियाली से आच्छादित नखलिस्तान में परिवर्तित हो चुका है। वर्तमान में वन विहार न केवल वन्यजीव संरक्षण का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है, बल्कि भोपाल नगर के लिए “हरित फेफड़े” के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ की हरियाली और स्वच्छ वातावरण शहर के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वन्यजीव स्तनधारी thumb|चीतल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान जैव-विविधता से परिपूर्ण एक सजीव पारिस्थितिक तंत्र प्रस्तुत करता है, जहाँ अनेक प्रकार के शाकाहारी और अन्य जीव अपने स्वाभाविक परिवेश में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। यहाँ चीतल, सांभर, काला हिरण, नीलगाय, चार सींग वाला हिरण, जंगली सूअर, साही, खरगोश, रीसस बंदर और लंगूर जैसे जीव खुले वातावरण में चरते और जीवन-यापन करते देखे जा सकते हैं। उद्यान में उगने वाली प्राकृतिक घास और विविध वनस्पतियाँ सामान्यतः इन शाकाहारी जीवों की आहार आवश्यकताओं को पूर्ण करती हैं, जिससे उनके लिए संतुलित और स्वाभाविक भोजन व्यवस्था बनी रहती है। गर्मियों के महीनों में, जब प्राकृतिक घास की उपलब्धता घट जाती है, तब प्रबंधन द्वारा अतिरिक्त पोषण की व्यवस्था की जाती है। इसके अंतर्गत चारा फार्म में उत्पादित हरा चारा तथा बाजार से प्राप्त गेहूँ का छिलका पूरक आहार के रूप में प्रदान किया जाता है, ताकि जीवों का स्वास्थ्य और पोषण स्तर संतुलित बना रहे। उद्यान के जलाशयों और तालाबों में भी समृद्ध जलीय जीवन देखने को मिलता है, जहाँ भारतीय तारा कछुआ, अन्य कछुए और विभिन्न प्रकार की मछलियाँ निवास करती हैं। इसके अतिरिक्त, वन विहार लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल उन्हें सुरक्षित आवास प्रदान करता है, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के माध्यम से जैविक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक सशक्त योगदान भी देता है। पक्षी thumb|दालचीनी बिटरन वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का वन्य क्षेत्र पक्षी विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध और अनुकूल आवास प्रदान करता है। यहाँ अब तक लगभग दो सौ से अधिक पक्षी प्रजातियों का अभिलेखन किया जा चुका है,http://www.bhopalbirds.com/birdingspot/Van%20vihar Van Vihar National Park - A Rich Birding Spot 2011-11-08 https://web.archive.org/web/20111204203612/http://www.bhopalbirds.com/birdingspot/Van%20vihar 2011-12-04 dead जो इस क्षेत्र की पारिस्थितिक संपन्नता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उद्यान की हरियाली, जलस्रोतों की उपलब्धता और शांत वातावरण मिलकर पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और पोषक निवास-स्थल का निर्माण करते हैं। विशेष रूप से शीत ऋतु के आगमन के साथ यह क्षेत्र और भी जीवंत हो उठता है, जब दूरस्थ क्षेत्रों से प्रवासी जलपक्षी बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं। समीप स्थित बड़ी झील की विस्तृत आर्द्रभूमि इन पक्षियों के लिए एक आदर्श अवतरण स्थल सिद्ध होती है, जहाँ वे विश्राम, आहार और प्रजनन की गतिविधियाँ संचालित करते हैं। यह दृश्य न केवल जैव-विविधता का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति के अद्भुत चक्र का भी सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसी क्रम में, सन् 2010 के दशक में उद्यान के भीतर एक गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्वास को बढ़ावा देना था। इस केंद्र ने विशेष रूप से सफेद पूँछ वाले गिद्ध और लंबी चोंच वाले गिद्धों की घटती आबादी को पुनर्स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया।2014 Kerwa breeding centre to get another 50 pairs of vultures द टाइम्स ऑफ इंडिया http://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/Kerwa-breeding-centre-to-get-another-50-pairs-of-vultures/articleshow/35370726.cms https://web.archive.org/web/20140521002805/http://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/Kerwa-breeding-centre-to-get-another-50-pairs-of-vultures/articleshow/35370726.cms 21 May 2014 live प्रशासन यह उद्यान मध्य प्रदेश के वन विभाग द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जाता है, जहाँ प्रशासनिक संरचना स्पष्ट और कार्यक्षम है। इसके संचालन का दायित्व मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक निदेशक के हाथों में होता है, जिनकी सहायता के लिए एक सहायक निदेशक, तीन रेंज अधिकारी, तीन उप-रेंजर, चार वनपाल तथा चौबीस वन रक्षक नियुक्त रहते हैं।bhopal.nic.in वन विहार राष्ट्रीय उद्यान 1981 https://bhopal.nic.in/tourist-place/%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/ https://web.archive.org/web/20191017113016/https://bhopal.nic.in/tourist-place/%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/ 17 अक्टूबर 2019 live इन सभी के समन्वित प्रयासों से उद्यान की देखरेख, संरक्षण और दैनिक व्यवस्थाएँ सुचारु रूप से संचालित होती हैं। इसके अतिरिक्त, पशुओं की देखभाल और प्रबंधन की नियमित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दिहाड़ी कर्मियों की भी सेवाएँ ली जाती हैं, जो इस तंत्र को और सुदृढ़ बनाती हैं। वन विहार प्रशासन पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के प्रति भी सजग है। इसी क्रम में, उद्यान के भीतर साइकिल चलाने को बढ़ावा दिया गया है, जिससे आगंतुक प्रकृति के निकट रहकर शांत और संतुलित अनुभव प्राप्त कर सकें। पार्क के दोनों छोरों पर स्थित प्रवेश द्वारों के भीतर साइकिल किराए पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे यह सुविधा सहज और सुलभ बनी रहती है। उल्लेखनीय है कि वन विहार प्रति सप्ताह शुक्रवार को आगंतुकों के लिए बंद रहता है, जिससे उस दिन उद्यान के रखरखाव, प्रबंधन और संरक्षण से संबंधित कार्यों को व्यवस्थित रूप से संपन्न किया जा सके। महत्वपूर्ण जानकारियाँ : - कब जाएँ : उद्यान पूरे साल भर खुला रहता है। - समय : 16 फरवरी से 15 अप्रैल तक - प्रात: 6.30 बजे से सायं 6.30 बजे तक, 16 अप्रैल से 31 जुलाई तक - प्रात: 6.00 बजे से सायं 7.00 बजे तक, 01 अगस्त से 31 अक्टूबर तक - प्रात: 6.30 बजे से सायं 6.30 बजे तक, 01 नवम्बर से 15 फरवरी तक - प्रात: 6.30 बजे प्रात: से सायं 6.00 बजे तक इन्हें भी देखें भारतीय पशु और पक्षी सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का मानचित्र पटना चिड़ियाघर का शेर शेरू वन विहार में दहाड़ेगा वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल 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