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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

भवाई नृत्य

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भवाई पश्चिमी राजस्थान में किया जाने वाला एक ’स्टंट नृत्य’ है। http://www.tourismtravelindia.com/rajasthanportal/dances%26music/index.html संग्रहीत प्रति 15 जून 2020 https://web.archive.org/web/20190329225348/http://tourismtravelindia.com/rajasthanportal/dances%26music/index.html 29 मार्च 2019 dead यह नृत्य अपनी चमत्कारिता के लिए प्रसिद्ध है। इस नृत्य में विभिन्न शारीरिक करतब दिखाने पर अधिक बल दिया जाता है। यह भवाई जाति की स्त्रियों द्वारा किया जाता है। पुष्पा व्यास, भवाई नृत्य की पहली महिला कलाकार थीं। उन्होने भवाई नृत्य को राजस्थान और राजस्थान से बाहर पहचान दिलाई थी। भवाई नृत्य यह मूलतः मटका नृत्य है, इस नृत्य की यही पहचान है। इसे करने वाला अपने सिर पर मटका लिए रहता है। यह उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में लोकप्रिय है। सिर पर 7-8 मटके रखकर नृत्य करना, तलवारों की धर पर नृत्य करना, जमीन से मुंह से रूमाल उठाना, गिलासों पर नाचना, थाली के किनारों पर नाचना आदि इस नृत्य की मुख्य विशेषताएँ हैं। इसमें शारीरिक क्रियाओं के अद्भुत चमत्कार तथा लयकारी देखने को मिलती है। इस नृत्य के कई प्रकार हैं, जैसे- बोरा बोरी, शंकरिया, सूरदास, बीकाजी, बाघाजी, ढोलामारू आदि। कलजी, कुसुम, द्रोपदी, रूपसिंह शेखावत, सांगीलाल सांगड़िया (बाड़मेर), तारा, शर्मा, दयाराम, पुष्पा व्यास (जोधपुर), स्वरूप पंवार (बाड़मेर) आदि इसके प्रसिद्ध कलाकार रहे हैं। सन्दर्भ इन्हें भी देखें भवाई (लोकनाट्य) श्रेणी:नृत्य श्रेणी:लोक नृत्य श्रेणी:राजस्थान