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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अल-मुअव्विधतैन

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अल-मुअव्विधतैन File:Sura113.pdf File:Sura114.pdf 200px अल-मुअव्विधतैन की सुलेखित छवि अल-मुअव्विधतैन की कलात्मक प्रस्तुति मदीनी सूरह 113 और 114 المعوذتان सुरक्षा प्रदान करने वाली दो सूरहें शरण मांगने वाली दो 5 (सूरह अल-फलक), 6 (सूरह अन-नास) अल-मुअव्विधतैन (المعوذتان) इस्लाम के पवित्र ग्रंथ क़ुरआन की अंतिम दो सूरहों - सूरह अल-फलक (113) और सूरह अन-नास (114) - को कहा जाता है। इन दोनों सूरहों में अल्लाह से शरण मांगी जाती है और उन्हें इस्लामी परंपरा में सुरक्षा के लिए विशेष महत्व दिया गया है।https://www.islamicstudies.info/quran/जून 2025 InternetArchiveBot नाम और महत्व "अल-मुअव्विधतैन" का अर्थ है "शरण मांगने वाली दो।" ये सूरहें मुसलमानों के जीवन में बुराई, शैतानी ताकतों और हर प्रकार के नुकसान से बचाव के लिए पढ़ी जाती हैं। इन्हें अक्सर नबी मुहम्मद द्वारा बुराई और बीमारियों से बचने के लिए पढ़ा जाता था।https://www.sunnah.com/muslim सूरह अल-फलक सूरह अल-फलक (अध्याय 113) में पाँच आयतें हैं। इसमें अल्लाह से प्रार्थना की जाती है कि वह रात के अंधेरे, जादू और ईर्ष्या जैसी बुरी ताकतों से सुरक्षा प्रदान करे।https://www.altafsir.com सूरह अल-फलक का पाठ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ * مِن شَرِّ مَا خَلَقَ * وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ * وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ * وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ सूरह अन-नास सूरह अन-नास (अध्याय 114) में छह आयतें हैं। इसमें अल्लाह को इंसानों के पालनहार, राजा और ईश्वर के रूप में पुकारा जाता है और हर प्रकार के शैतानी प्रभाव से सुरक्षा मांगी जाती है।https://www.quran.com सूरह अन-नास का पाठ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ * مَلِكِ ٱلنَّاسِ * إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ * مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ * ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ * مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ इस्लामिक परंपरा में उपयोग मुसलमान प्रायः अल-मुअव्विधतैन को सुबह और शाम के समय पढ़ते हैं। इन्हें शारीरिक और मानसिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। नबी मुहम्मद ने इन सूरहों को पढ़ने का महत्व बार-बार समझाया है।https://www.islamicity.org विरासत और आध्यात्मिक महत्व अल-मुअव्विधतैन का पाठ न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक समस्याओं के समाधान के लिए भी किया जाता है। इनकी सरलता और गहराई इन्हें क़ुरआन की सबसे महत्वपूर्ण सूरहों में से एक बनाती है। स्रोत श्रेणी:क़ुरआनी सूरहें श्रेणी:इस्लामी परंपरा श्रेणी:क़ुरआन श्रेणी:क़ुरआन की आयतें