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योगबीज

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अंगूठाकार|योगबीज, "योग का बीज", एक प्रारंभिक हठ योग ग्रन्थ है योगबीज (शाब्दिक अर्थ : "योग का बीज") लगभग १४वीं शताब्दी का एक प्रारंभिक हठ योग सम्बन्धी ग्रन्थ है।Muñoz 2016 124Mallinson Singleton 2017 xl यह पहला ग्रन्थ है जिसमें सूर्य (=ह) और चंद्रमा (=ठ)के लिए संस्कृत शब्दों से हठ की व्युत्पत्ति का प्रस्ताव किया गया है, और जिसकी कई गूढ़ व्याख्याएँ है। यह हठ योग परम्परा का पुरातन ग्रंथ है और इस ग्रन्थ को योग के बीज के रूप में माना जाता है। योगबीज ग्रंथ भगवान शिव के द्वारा कहा गया यह है। भगवान शिव एवं माता पार्वती के संवाद रूप इस ग्रंथ में माता पार्वती प्रश्न करती हैं एवं भगवान शिव उनका उतर देते हैं। योगबीज में कुल 182 श्लोक हैं (कुछ पुस्तक में 190 भी लिखा हुआ प्राप्त होता है)। इस ग्रन्थ में कोई भी अध्याय नहीं है। योगबीज के रचनाकार भगवान शिव एवं श्रोता माता पार्वती हैं। इस ग्रन्थ में माता पार्वती को 'सुरेश्वरि' भी कहा गया है। योगबीज में माता पार्वती मुख्य रूप से 12 प्रश्न करती हैं। योग बीज में सबसे प्रथम श्लोक में आदिनाथ शिव को प्रणाम किया गया है तथा इन्हे 'वृषभ नाथ' भी इसमें कहा गया है। इस ग्रन्थ में शिव को उत्पत्ति-कर्ता, पालक और संहार-कर्ता कहा गया है, और उन्हें सभी क्लेशों को हरने बाला कहा गया है। इन्हें भी देखें हठयोग बाहरी कड़ियाँ योगबीजम् (संस्कृत विकिस्रोत) योगबीजम् (गोरक्षनाथ) योगबीज https://web.archive.org/web/20250713150627/https://www.ssbyneducation.com/2021/06/yoga-beej-for-yoga-exam.html 13 जुलाई 2025 योगबीजम् सन्दर्भ श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ