411 REFERENCE · Wikipedia
जयदयाल डालमिया
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
जयदयाल डालमिया भारतीय 1904 1993 उद्योगपति
जयदयाल डालमिया (1904-1993) https://books.google.com/books?id=XAO3i_gS61wC&q=jaidayal+dalmia+died&pg=PA234 Religion, Caste, and Politics in India By Christophe Jaffrelot Jaffrelot Christophe 2010 9789380607047 234 भारत के एक प्रमुख उद्योगपति और परोपकारी तथा लेखक थे। वे डालमिया समूह के सह-संस्थापकों में से एक तथा .https://books.google.com/books?id=MFyE_jYD43EC&q=jaidayal+dalmia+born Who's who in India, Burma & Ceylon Who's Who Publishers (India) Limited 1941 131 https://books.google.com/books?id=rc0tAAAAMAAJ&q=jaidayal+dalmia+ The Aggarwals: a socio-economic study by am Gupta S. Chand 1975 9780883867150 vii, 67 रामकृष्ण डालमिया के छोटे भाई थे।
आरम्भिक जीवन
जयदयाल डालमिया का जन्म 11 दिसंबर 1904 को राजस्थान के चिरावा शहर में एक हिन्दू अग्रवाल परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता में शुरू की और बांग्ला सीखी। बाद में चिरावा जाकर उन्होंने मैट्रिक तक की पढ़ाई की।
व्यवसाय
उन्होंने अपने बड़े भाई रामकृष्ण डालमिया से व्यवसाय सीखा और डालमिया इंडस्ट्रीज की स्थापना में एक प्रमुख भूमिका निभाई । बाद में 1935 में डालमिया सीमेंट्स की स्थापना की, http://www.dalmiacement.com/?act=cms-page&cat_id=1&id=4 History That Dates Back To 1935 Dalmia Cement 10 April 2013 22 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20130822122150/http://www.dalmiacement.com/?act=cms-page&cat_id=1&id=4 dead जिसे अब उनके बेटे और पोते चलाते हैं। http://www.moneycontrol.com/barclayswealth/insights_gurumurthy.php?p=7& Barclays Wealth Moneycontrol.com 10 April 2013 http://entrepreneurindia.in/people/coverstory/will-your-legacy-live-on/733/ Will Your Legacy Live On? 16 January 2010 Entrepreneurindia.in https://web.archive.org/web/20131028022018/http://entrepreneurindia.in/people/coverstory/will-your-legacy-live-on/733/ 28 October 2013 10 April 2013
वर्ष 1932-33 में बिहार के एक व्यापारी निर्मलकुमार जैन के साथ रामकृष्ण डालमिया ने एक चीनी मिल चलाया। जयदयाल को मिल की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया। अपनी गहरी रुचि और समर्पण के साथ उन्होंने 1 वर्ष की छोटी अवधि के भीतर मिल चालू कर दिया। एक वर्ष के भीतर डालमियानगर में डेहरी-ऑन-सोन के पास 'रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड' नामक एक और चीनी मिल शुरू की गई। जयदयाल ने अपने सभी उपक्रमों में अपने बड़े भाई रामकृष्ण का सहयोग किया और व्यवसाय में अत्यधिक रुचि दिखाई।
कुछ वर्षों में रामकृष्ण और जयदयाल ने डिंडोत, कल्लकुडी, राजगांगपुर, चरखी दादरी में छह सीमेंट कारखाने और शांतिनगर, कराची में एक और कारखाना स्थापित किया। जयदयाल ने यूरोप से मशीनरी प्राप्त करने में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने बेहतर तकनीक का आयात किया जो न केवल उनके प्रतिस्पर्धी की तकनीक को अप्रचलित बना दिया बल्कि उन्होंने दानिश को भी मजबूर किया कि वे भारत को निर्यात की जा रही 'वेट प्रोसेस टेक्नोलॉजी' की कीमत को कम करें।
जयदयाल डालमिया को मशीनरी में व्यापक रुचि थी। इसलिये उन्होंने डालमियानगर और अन्य संयंत्रों में भी सभी कारखानों के तकनीकी कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाई। 'उड़ीसा सीमेंट्स' नामक राजगंगपुर कारखाने की स्थापना के तुरंत बाद जयदयाल ने 1954 में राउरकेला में फायर ब्रिक्स रिफ्रैक्टरी की शुरुआत की।
रामकृष्ण डालमिया ने बैंकिंग क्षेत्र में कदम रखा और भारत में कई जगहों पर भारत बैंक की शाखाएँ आरम्भ हुईं। उन्होंने उड्ड्यन उद्योग में भी प्रवेश किया और भारत इंश्योरेंस कंपनी में अंश हासिल किया और पंजाब नेशनल बैंक में नियंत्रण हासिल किया। मोटर वाहन क्षेत्र में उन्होंने हाथ लगाया। उनकी 'एलन बेरी एंड कंपनी लिमिटेड', कम्पनी ने लगभग 50,000 अमेरिकी वाहन खरीदे जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बच गये थे और जिन्हें निपटाया जा रहा था। इस कंपनी ने 1950 के दशक तक भारत के विभिन्न हिस्सों में विशाल कार्यशालाएँ चलाईं। इसके बाद इसे भंग कर दिया गया। वे जानते थे कि मीडिया ने राष्ट्र के विकास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अतः उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया का अधिग्रहण किया और साथ ही हिंदी और बांग्ला में समाचार पत्र भी आरम्भ किये। उन्होंने गोवन ब्रदर्स को खरीद लिया और रसायनिक उद्यम के क्षेत्र में भी उद्यम किया। उस समय डालमिया कंपनियां, टाटा और बिड़ला के बाद भारत के प्रमुख औद्योगिक समूहों में एक साथ तीसरे स्थान पर थीं।
स्वतंत्रता के कुछ समय बाद, डालमिया साम्राज्य रामकृष्ण डालमिया, जयदयाल डालमिया और रामकृष्ण के दामाद साहू शांति प्रसाद जैन के बीच विभाजित हो गया। डालमियानगर और बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड नामक प्रकाशन कम्पनी साहू शांति प्रसाद जैन को मिली। जयदयाल डालमिया को राजगांगपुर और डालमियापुरम की सीमेंट फैक्ट्रियां तथा पाकिस्तान की दो फैक्ट्रियां मिल गईं। वर्ष 1964 में पाकिस्तान की दोनों फैक्ट्रियां बिक गईं।
जयदयाल डालमिया कई कंपनियों से जुड़े थे। उन्होंने चीनी, डिस्टिलरी और अन्य कारखानों के प्रबंध निदेशक के रूप में काम किया। वे चुर्क में स्थापित उत्तर प्रदेश के पहले सीमेंट कारखाने के तकनीकी निदेशक भी थे। उन्होंने सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियों जैसे सीमेंट, चीनी, डिस्टिलरी, पेपर, वनस्पति घी, रिफ्रेक्ट्रीज, सिरेमिक, मैग्नेटाइट, फाइनेंसिंग, इंश्योरेंस और विभिन्न उद्योगों के अध्यक्ष, निदेशक, तकनीकी निदेशक के पद भी संभाले।
परिवार
जयदयाल डालमिया का विवाह कृष्णा देवी से हुआ था। उनके सात पुत्र और दो पुत्रियाँ थीं। उनके बेटों के नाम विष्णु हरि डालमिया, https://books.google.com/books?id=hmwfAQAAMAAJ&q=jaidayal+dalmia+born Barque's Pakistan trade directory and who's who 1961 2058 नरहरि डालमिया, मृदुहरि डालमिया, जयहरि डालमिया, अजय हरि डालमिया, यदुहरि डालमिया और रघुहरि डालमिया हैं, जिन्हें 1993 में उनके निधन के बाद डालमिया समूह में उनकी हिस्सेदारी विरासत में मिली थी। उनकी दो बेटियां उमा देवी और उषा देवी थीं।
लोकोपकार के कार्य
जयदयाल महान परोपकारी थे। 1951 के बाद उन्होंने कई ट्रस्टों की स्थापना की जो निजी अस्पतालों, स्कूलों, विधवा घरों, धर्मशालाओं आदि को चलाते हैं। वे मुखर समाज सुधारक थे। उन्होंने गौ-वध विरोधी आंदोलन का समर्थन किया और कृष्ण जमनाभूमि केशव देव मंदिर के निर्माण में वे गहराई से जुडे थे। http://shrikrishnajanmasthan.net/history.html Shri Krishna Janmasthan Shri Krishna Janmasthan Trust https://web.archive.org/web/20150904230906/http://shrikrishnajanmasthan.net/history.html 4 September 2015 24 August 2012
उन्होंने बाढ़, सूखा, भूकंप और दंगों के पीड़ितों को वित्तीय सहायता प्रदान की। मेधावी व गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति दी। साथ ही निर्धन परिवारों की लड़कियों के विवाह में भी सहायता की।
उनके बड़े भाई रामकृष्ण डालमिया और जयदयाल डालमिया, ने मिलकर कई ट्रस्टों की स्थापना की, जिनमें से रामकृष्ण जयदयाल डालमिया श्रीवाणी अलंकरण प्रसिद्ध है। यह अलंकरण संस्कृत भाषा और साहित्य में उत्कृष्ट कार्य के लिये दिया जाने वाला एक पुरस्कार है।http://speakerloksabha.nic.in/Speech/SpeechDetails.asp?SpeechId=195 The Office of Speaker Lok Sabha 18 January 2007 Speakerloksabha.nic.in 10 April 2013 http://www.culturopedia.com/awards/awards_nongovernmental.html Non-governmental Awards of India Culturopedia.com Culturopedia.com 10 April 2013 26 मई 2013 https://web.archive.org/web/20130526063758/http://www.culturopedia.com/Awards/awards_nongovernmental.html dead इसी तरह, दोनों भाइयों द्वारा स्थापित श्री रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान नामक एक अन्य ट्रस्ट द्वारा जल संचयन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए डालमिया ट्रस्ट जल पर्यावरण पुरस्कार दिया जाता है। यह राजस्थान के झुंझुनू जिले में उनके पैतृक गांव चिरावा से संचालित होता है। http://www.newkerala.com/news/2011/worldnews-97594.html%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20Mon,%2031%20Oct%202011%2016:23:19%20+0530%20%20%20%20%20%20%20%20%20http://www.newkerala.com/news/2011/self-help/#.UDd69-x4pr4 News # 100413-174753] Newkerala.com 10 April 2013
अपने व्यावसायिक जीवन से निवृत्ति की घोषणा करने के बाद दो दशकों तक वे मथुरा के श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के प्रबंध न्यासी रहे और कई मंदिरों के निर्माण में मदद की। उन्होंने ट्रस्ट के प्रकाशन साहित्य को भी संभाला। गरीबों, विकलांगों, नेत्रहीनों और जरूरतमंदों की मदद करने वाले विभिन्न धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्टों में उनकी रुचि थी।
लेखन कार्य
उन्होंने कैइ पुस्तकें भी लिखीं। 1971 में प्रकाशित 'धर्मशास्त्र और अस्पृश्यता' और 'प्राचीन भारत में गोमांस - एक समीक्षा' जैसी पुस्तकों की रचना की। https://books.google.com/books?id=1wYaAAAAMAAJ&q=jaidayal+dalmia+born A Review of beef in ancient India – Google Books Dalmia Jaidayal 1971 10 April 2013 बंगाली वैष्णव साहित्य के अनेक पुस्तकों को हिंदी में प्रकाशित करने में भी वे आगे रहे।
संदर्भ
श्रेणी:हिन्दी भाषा के लेखक
श्रेणी:१९९३ में निधन
श्रेणी:1904 में जन्मे लोग
श्रेणी:राजस्थानी लोग
श्रेणी:Pages with unreviewed translations