Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान 'शहरयार'

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान'शहरयार' #B0C4DE शहरयार 1936 6 16 y बरेली, उत्तर प्रदेश 2012 2 13 1936 6 16 y अलीगढ़, उत्तर प्रदेश गीतकार, कवि भारतीय ग़ज़ल प्रेम, दर्शन उर्दू शायरी अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान (१६ जून १९३६ – १३ फ़रवरी २०१२शायरी के शहजादे सुपुर्द-ए-खाक http://www.jagran.com/news/national-shahryar-buried-8896902.html 14 फ़रवरी 2012 दैनिक जागरण 14 फ़रवरी 2012 अलीगढ़ हिन्दी), जिन्हें उनके तख़ल्लुस या उपनाम शहरयार से ही पहचाना जाना जाता है, एक भारतीय शिक्षाविद और भारत में उर्दू शायरी के दिग्गज थे। आरंभिक जीवन शहरयार का जन्म उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक मुस्लिम राजपूत परिवार में १९३६ में हुआ था। १९६१ में उर्दू में स्नातकोत्तर डिग्री लेने के बाद उन्होंने १९६६ में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उर्दू के व्याख्याता के तौर पर काम शुरू किया। वह यहीं से उर्दू के विभागाध्यक्ष के तौर पर १९९६ में सेवानिवृत्त हुए। कार्य बेहद जानकार और विद्वान शायर के तौर पर अपनी रचनाओं के जरिए वह स्व-अनुभूतियों और आधुनिक वक्त की समस्याओं को समझने की कोशिश करते नज़र आते हैं। शहरयार ने गमन और आहिस्ता-आहिस्ता आदि कुछ हिंदी फ़िल्मों में गीत लिखे, लेकिन उन्हें सबसे ज़्यादा लोकप्रियता १९८१ में बनी फ़िल्म उमराव जान से मिली। "इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं," "जुस्तजू जिस की थी उसको तो न पाया हमने," "दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिये," "कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता" - जैसे गीत लिख कर हिंदी फ़िल्म जगत में शहरयार बेहद लोकप्रिय हुए हैं।जमीं की गोद में सदा के लिए सो गया शब्दों का चितेरा http://khabar.ibnlive.in.com/news/67143/6/23 14 फ़रवरी 2012 आईबीएन-7 14 फ़रवरी 2012 अलीगढ़ हिन्दी https://web.archive.org/web/20120216234727/http://khabar.ibnlive.in.com/news/67143/6/23 16 फ़रवरी 2012 dead पुरस्कार एवं सम्मान यह वर्ष २००८ के लिए ४४वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजे गये। समकालीन उर्दू शायरी के जगत में अहम भूमिका निभाने वाले शहरयार को उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, दिल्ली उर्दू पुरस्कार और फ़िराक सम्मान सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया।मशहूर शायर शहरयार नहीं रहे http://www.jansatta.com/index.php?option=com_content&task=view&id=11516 14 फ़रवरी 2012 जनसत्ता 14 फ़रवरी 2012 अलीगढ़ हिन्दी https://web.archive.org/web/20131103161557/http://www.jansatta.com/index.php?option=com_content&task=view&id=11516 3 नवंबर 2013 dead शहरयार उर्दू के चौथे साहित्यकार हैं जिन्हें ज्ञानपीठ सम्मान मिला। इससे पहले फ़िराक गोरखपुरी, क़ुर्रतुल-एन-हैदर और अली सरदार जाफ़री को ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है। सन्दर्भ श्रेणी:1936 में जन्मे लोग श्रेणी:२०१२ में निधन श्रेणी:गीतकार श्रेणी:ज्ञानपीठ सम्मानित श्रेणी:उर्दू शायर श्रेणी:भारतीय शिक्षाविद् श्रेणी:अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत उर्दू भाषा के साहित्यकार