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अष्टावक्र गीता
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अष्टावक्र गीता अद्वैत वेदान्त का ग्रन्थ है जो ऋषि अष्टावक्र और राजा जनक के संवाद के रूप में है। भगवद्गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र के समान अष्टावक्र गीता अमूल्य ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में ज्ञान, वैराग्य, मुक्ति और समाधिस्थ योगी की दशा का सविस्तार वर्णन है।
इस पुस्तक के बारे में किंवदंती है कि रामकृष्ण परमहंस ने भी यही पुस्तक नरेंद्र को पढ़ने को कहा थाhttp://realization.org/page/doc0/doc0004.htm संग्रहीत प्रति 24 अगस्त 2009 https://web.archive.org/web/20090908195255/http://www.realization.org/page/doc0/doc0004.htm 8 सितंबर 2009 dead जिसके पश्चात वे उनके शिष्य बने और कालांतर में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए।
इस ग्रंथ का प्रारम्भ राजा जनक द्वारा किये गए तीन प्रश्नों से होता है। (१) ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? (२) मुक्ति कैसे होगी? और (३) वैराग्य कैसे प्राप्त होगा? ये तीन शाश्वत प्रश्न हैं जो हर काल में आत्मानुसंधानियों द्वारा पूछे जाते रहे हैं। ऋषि अष्टावक्र ने इन्हीं तीन प्रश्नों का संधान राजा जनक के साथ संवाद के रूप में किया है जो अष्टावक्र गीता के रूप में प्रचलित है। ये सूत्र आत्मज्ञान के सबसे सीधे और सरल वक्तव्य हैं। इनमें एक ही पथ प्रदर्शित किया गया है जो है ज्ञान का मार्ग। ये सूत्र ज्ञानोपलब्धि के, ज्ञानी के अनुभव के सूत्र हैं। स्वयं को केवल जानना है—ज्ञानदर्शी होना, बस। कोई आडम्बर नहीं, आयोजन नहीं, यातना नहीं, यत्न नहीं, बस हो जाना वही जो हो। इसलिए इन सूत्रों की केवल एक ही व्याख्या हो सकती है, मत मतान्तर का कोई झमेला नहीं है; पाण्डित्य और पोंगापंथी की कोई गुंजाइश नहीं है। http://pustak.org/books/bookdetails/528 संग्रहीत प्रति 4 सितंबर 2017 https://web.archive.org/web/20170904153744/http://pustak.org/books/bookdetails/528 4 सितंबर 2017 dead
संरचना
अष्टावक्र गीता में २० अध्याय हैं-
साक्षी
आश्चर्यम्
आत्माद्वैत
सर्वमात्म
लय
प्रकृतेः परः
शान्त
मोक्ष
निर्वाण
वैराग्य
चिद्रूप
स्वभाव
यथासुखम्
ईश्वर
तत्त्वम्
स्वास्थ्य
कैवल्य
जीवन्मुक्ति
स्वमहिमा
अकिंचनभाव
बाहरी कड़ियाँ
तत्त्व विचार – सन्दर्भः अष्टावक्र संहिता https://web.archive.org/web/20210108150000/http://www.pravasiduniya.com/%E0%A4%A4%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%83-%E0%A4%85%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE 8 जनवरी 2021 (प्रवासी दुनिया)
अष्टावक्र गीता सार – डॉ मृदुल कीर्ति
मूल पाठ
अष्टावक्रगीता (संस्कृत विकिस्रोत)
in Original Sanskrit as PDF
in Original Sanskrit
in Devanagari
in Romanized Sanskrit
अनुवाद
s:Ashtavakra Gita Translation at Wikisource by John Richards
Online Translation by John Richards - second editions:Talk:Ashtavakra Gita#Different editions
John Richards translation in pdf format
Poetic Hindi translation of Ashtavakra Gita by Dr. Mridul Kirti
Advaita Ashrama English translation by Swami Nityaswarupananda, with comments and an introduction.
Sam Yogi's Spirited Translation of Ashtavakra Gita from Sanskrit to English First of a set of 40 Audio CDs in English explaining the Entire Ashtavakra Gita
सन्दर्भ
श्रेणी:वेदांत
श्रेणी:हिन्दू साहित्य
श्रेणी:हिन्दू ग्रन्थ