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ग्रेट लीप फ़ॉर्वर्ड
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Great Leap Forward (Chinese characters).svg सरलीकृत चीनी (ऊपर) और पारम्परिक चीनी वर्ण (नीचे) में "आगे की ओर बड़ा क़दम" (ग्रेट लीप फ़ॉर्वर्ड) 0.5 大躍進 st Dà yuè jìn Ta4 yüeh4 chin4 d a 4 - yue 4 - j in 4 Daai6 joek3 zeon3 Daaih yeuk jeun d aai 6 - j oek 3 - z eon 3 Tuā io̍k tsìn
ग्रेट लीप फॉरवर्ड (चीनी: 大跃进; पिन्यिन: Dà Yuèjìn; हिंदी: आगे की ओर बड़ा क़दम ) चीनी जनवादी गणराज्य (कॉम्युनिस्ट चीन) का 1958 से 1962 तक चलने वाला कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) द्वारा एक आर्थिक और सामाजिक अभियान था। अभियान का नेतृत्व चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति और पार्टी के चेयरमैन माओ से-तुंग ने किया था और इसका उद्देश्य तेजी से औद्योगिकीकरण और सामूहिक कृषि के माध्यम से देश की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को उत्पादन की समाजवादी विधा में तेज़ी तब्दील करना था। इन नीतियों के कारण सामाजिक और आर्थिक विपदा आई, लेकिन ये असफलताएँ व्यापक अतिशयोक्ति और छलपूर्ण रिपोर्टों द्वारा छिपी रहीं। संक्षेप में, बड़े आंतरिक संसाधनों को महंगे नए औद्योगिक परिचालनों पर उपयोग करने की ओर मोड़ दिया गया था, जो बदले में, अधिक उत्पादन करने में विफल रहा, और जिसने कृषि क्षेत्र को उन आवश्यक संसाधनों से वंचित कर दिया, जिनकी उसे तत्काल रूप से आवश्यकता थी। परिणामवश खाद्य उत्पादन में भारी गिरावट आई और चीन में अकाल पड़ गया और करोड़ों लोग भूखे मारे गए।
चीन के ग्रामीण लोगों के जीवन में आने वाले मुख्य बदलावों में अनिवार्य कृषि एकत्रीकरण का वृद्धिशील परिचय शामिल था। निजी खेती निषिद्ध थी, और इसमें लगे लोगों का दमन किया गया और उन्हें प्रति-क्रांतिकारियों की उपाधि दी गई। ग्रामीण लोगों पर प्रतिबंधों को सार्वजनिक संघर्ष सत्रों और सामाजिक दबाव के माध्यम से बनाया जाता था, हालांकि लोगों को भी बेगार मज़दूरी भी करनी पड़ी।Mirsky, Jonathan. "The China We Don't Know https://web.archive.org/web/20151016120725/http://www.nybooks.com/articles/archives/2009/feb/26/the-china-we-dont-know/ 16 अक्तूबर 2015 ." New York Review of Books Volume 56, Number 3. February 26, 2009. ग्रामीण औद्योगिकीकरण, जो आधिकारिक तौर पर अभियान की प्राथमिकता थी, "का विकास ... ग्रेट लीप फॉरवर्ड की गलतियों से अवरोधित हुआ।"Perkins, Dwight (1991). "China's Economic Policy and Performance" https://web.archive.org/web/20190226022155/https://books.google.com/books?id=WpS3nInK6aAC&pg=PA483&dq=degree+of+disruption+in+the+Great+Leap&hl=en&ei=5SiaTPefEYKclgfmjPWBAQ&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CCsQ6AEwAA#v=onepage&q=degree%20of%20disruption%20in%20the%20Great%20Leap&f=false 26 फ़रवरी 2019 . Chapter 6 in The Cambridge History of China, Volume 15, ed. by Roderick MacFarquhar, John K. Fairbank and Denis Twitchett. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस.
इतिहासकार व्यापक रूप से मानते हैं कि ग्रेट लीप के परिणामस्वरूप करोड़ों लोग मारे गए। Tao Yang, Dennis (2008). "China's Agricultural Crisis and Famine of 1959–1961: A Survey and Comparison to Soviet Famines" https://web.archive.org/web/20130714044539/http://www.palgrave-journals.com/ces/journal/v50/n1/full/ces20084a.html 14 जुलाई 2013 . Palgrave MacMillan, Comparative Economic Studies 50, pp. 1–29. इससे होने वाली मौतों का कमतर अनुमान 1 करोड़ 80 लाख है, जबकि चीनी इतिहासकार यू जिगुआंग के शोध के अनुसार 5 करोड़ 60 लाख लोगों को जान गँवानी पड़ी।http://www.liberation.fr/planete/2011/06/17/la-chine-creuse-ses-trous-de-memoire_743211 La Chine creuse ses trous de mémoire La Liberation fr 24 नवंबर 2019 https://web.archive.org/web/20191002195005/https://www.liberation.fr/planete/2011/06/17/la-chine-creuse-ses-trous-de-memoire_743211 2 अक्तूबर 2019 live
ग्रेट लीप फॉरवर्ड के वर्षों में आर्थिक प्रतिगमन देखा गया, 1953 और 1976 के बीच में दो अवधियों पर ऐसा हुआ कि चीन की अर्थव्यवस्था सिकुड़ गई हो, 1958-1962 इनमें से एक थी।GDP growth in China 1952–2015 The Cultural Revolution was the other period during which the economy shrank. राजनीतिक अर्थशास्त्री ड्वाइट पर्किन्स का तर्क है, "भारी मात्रा में निवेश से उत्पादन में या तो मामूली वृद्धि हुई, या बिलकुल भी नहीं... संक्षेप में, द ग्रेट लीप एक बहुत महंगी आपदा थी।"Perkins (1991). pp. 483–486 for quoted text, p. 493 for growth rates table.
मार्च 1960 और मई 1962 के बाद के सम्मेलनों में, सीपीसी द्वारा ग्रेट लीप फॉरवर्ड के नकारात्मक प्रभावों का अध्ययन किया गया, और पार्टी सम्मेलनों में माओ की आलोचना की गई। राष्ट्रपति लीउ शओची और देंग जियाओपिंग जैसे नरमपंथी पार्टी में सत्ता में आए, और अध्यक्ष माओ को पार्टी के भीतर हाशिए पर डाल दिया गया, जिसने उन्हें अपनी शक्ति को फिर से मजबूत करने के लिए 1966 में सांस्कृतिक क्रांति शुरू की।
पृष्ठभूमि
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:A_Great_Leap_Forward_Propaganda_Painting_on_the_Wall_of_a_Rural_House_in_Shanghai.jpg|अंगूठाकार|शंघाईसितंबर 2021 InternetArchiveBot में एक ग्रामीण घर की दीवार पर एक महान लीप फॉरवर्ड प्रचार पेंटिंग अक्टूबर 1949 में कुओमितांग (चीनी राष्ट्रवादी पार्टी, जो ताइवान भाग गई थी) की हार के बाद, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना की घोषणा की। इसके तुरंत बाद, जमींदारों और धनी किसानों की भूमि को जबरन गरीब किसानों में पुनर्वितरित कर दिया। कृषि क्षेत्र में, जो फ़सलें पार्टी को "बुराई से भरी" लगती थीं (जैसे अफीम), उन्हें नष्ट कर दिया जाता और उनकी जगह चावल जैसी अन्य फ़सलें उगाई जातीं।
पार्टी के भीतर, पुनर्वितरण के मुद्दे पर प्रमुख बहसें हुईं। पार्टी और भीतर का एक उदारवादी गुट और पोलिटब्यूरो सदस्य लीउ शओची ने तर्क दिया कि परिवर्तन क्रमिक होना चाहिए और किसी भी कृषि का सामूहिकीकरण करने के लिए तब तक रुकना चाहिए जबतक औद्योगिकीकरण न हो जाए। यह यंत्रीकृत खेती के लिए कृषि मशीनरी प्रदान कर सकता था। माओ ज़ेडॉन्ग के नेतृत्व में एक दूसरे (कट्टरपंथी) गुट ने तर्क दिया कि औद्योगिकीकरण के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन एकत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि सरकार का कृषि पर नियंत्रण स्थापित कर ले, जिससे अनाज वितरण और आपूर्ति पर उसका एकाधिकार स्थापित हो जाए। ऐसा करके सरकार कम कीमत पर खरीदकर महँगे में बेच सकती है, इस प्रकार देश के औद्योगिकीकरण के लिए आवश्यक पूंजी जुटाई जा सकती है।
सामूहिक कृषि और अन्य सामाजिक परिवर्तन
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Sending_officials_to_the_countryside.jpg|अंगूठाकार|सरकारीसितंबर 2021 InternetArchiveBot अधिकारियों को गाँव में काम करने के लिए भेजना, 1957 1949 से पहले, किसान अपनी खुद की छोटी-छोटी जमीनों पर खेती किया करते थे और पारंपरिक प्रथाओं-त्योहारों, दावतों और पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते थे।Mirsky, Jonathan. "The China We Don't Know https://web.archive.org/web/20151016120725/http://www.nybooks.com/articles/archives/2009/feb/26/the-china-we-dont-know/ 16 अक्तूबर 2015 ." New York Review of Books Volume 56, Number 3. February 26, 2009. ऐसा महसूस किया गया कि उद्योग के वित्तपोषण के लिए कृषि पर राज्य का एकाधिकार स्थापित करने की माओ की नीति का किसान विरोध करेंगे। इसलिए, यह प्रस्तावित किया गया था कि किसानों को सामूहिक कृषि के माध्यम से पार्टी नियंत्रण में लाया जाए, जो उपकरण और जानवरों के बंटवारे की सुविधा भी प्रदान करेगा।
1958 तक निजी स्वामित्व को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया था और पूरे चीन में परिवारों को राज्य द्वारा संचालित कॉम्यून में काम करने को मजबूर कर दिया गया था। माओ ने जोर देकर कहा कि कम्युनिस्टों को शहरों के लिए अधिक अनाज का उत्पादन करना चाहिए और निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित करनी चाहिए।Mirsky, Jonathan. "The China We Don't Know https://web.archive.org/web/20151016120725/http://www.nybooks.com/articles/archives/2009/feb/26/the-china-we-dont-know/ 16 अक्तूबर 2015 ." New York Review of Books Volume 56, Number 3. February 26, 2009. ये निर्णय आम तौर पर किसानों में अलोकप्रिय थे और आमतौर पर उन्हें बैठकों में बुलाकर दिनों और कभी-कभी हफ्तों तक वहीं रहने के लिए मजबूर किया जाता था, जब तक कि वे "स्वेच्छा से" सामूहिक खेती में शामिल होने के लिए सहमत नहीं हो जाते।
प्रत्येक घर की फसल पर प्रगतिशील कराधान (progressive taxation) के अलावा, राज्य ने अकाल-राहत के लिए गोदाम बनाने और सोवियत संघ के साथ अपने व्यापार समझौतों की शर्तों को पूरा करने के लिए निर्धारित कीमतों पर अनाज की अनिवार्य राज्य खरीद की व्यवस्था शुरू की। यदि कराधान और अनिवार्य खरीद से मिली फ़सल को मिलाकर देखा जाए तो 1957 तक 30% फसल का हिसाब रखा, जिससे बहुत कम अधिशेष (surplus) निकला। शहरों में फिजूलखर्ची’पर अंकुश लगाने और बचत (जो सरकारी बैंकों में जमा की गई थी और इस तरह निवेश के लिए उपलब्ध हो गई थी) को प्रोत्साहित करने के लिए राशनिंग भी शुरू की गई, और हालांकि भोजन सरकारी खुदरा विक्रेताओं से खरीदा जा सकता था लेकिन इसका मूल्य बाजारू मूल्य से अधिक पड़ता था। यह भी अत्यधिक खपत को हतोत्साहित करने के नाम पर किया गया था।
इन आर्थिक परिवर्तनों के अलावा, पार्टी ने गाँवों में सभी धार्मिक संस्थानों और समारोहों पर पाबंदी लगा दी, और उनकी जगह राजनीतिक बैठकों और प्रचार सत्रों को स्थापित किए, और इसी प्रकार के बड़े सामाजिक परिवर्तनों को लागू किया। ग्रामीण शिक्षा और महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए प्रयास किए गए (उदाहरण के लिए अब महिलाएँ चाहें तो तलाक की कार्रवाई शुरू कर सकतीं थीं) और पैर-बंधन, बाल विवाह और अफीम की लत को समाप्त करने की दिशा में प्रयास किए गए। आंतरिक पासपोर्ट (हूकोउ) की पुरानी प्रणाली को 1956 में पेश किया गया था, जो उचित काग़ज़ात के बिना अंतर-राज्यीय यात्रा को बाधित करता था। सबसे अधिक प्राथमिकता शहरी सर्वहारा वर्ग (proletariat) को दी गई, जिसके लिए एक कल्याणकारी राज्य स्थापित किया गया।
सामूहिकीकरण के पहले चरण के परिणामस्वरूप उत्पादन में मामूली सुधार हुआ। भोजन-सहायता के समय पर आवंटन के माध्यम से 1956 के मध्य में यांग्जी में अकाल पर क़ाबू पा लिया गया था, लेकिन 1957 में पार्टी की प्रतिक्रिया यह रही कि राज्य द्वारा एकत्र की गई फसल के अनुपात को और अधिक आपदाओं के खिलाफ बीमा के रूप में बढ़ाया जाए। झोउ एनलाई समेत पार्टी के भीतर नरमपंथियों ने इस आधार पर सामूहिकीकरण को उलटने के लिए तर्क दिया कि राज्य द्वारा भारी मात्रा में फसल एकत्रित करने के कारण लोगों की खाद्य-सुरक्षा सरकार के निरंतर, कुशल और पारदर्शी कामकाज पर निर्भर हो गई थी।
सौ फूल अभियान और दक्षिणपंथी-विरोधी अभियान
1957 में पार्टी में बढ़ते तनाव के चलते माओ ने सौ फूल अभियान के तहत मुक्त भाषण और आलोचना की अनुमति दी। पूर्वव्यापीकरण में, कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि ऐसा करने के पीछे माओ का असल औचित्य आलोचकों, मुख्य रूप से बुद्धिजीवियों, और उनकी कृषि नीतियों के विरोधियों की पहचान करने के लिए एक चाल थी।Chang, Jung and Halliday, Jon (2005). Mao: The Unknown Story, Knopf. p. 435. 0-679-42271-4. पहचान हो जाने के बाद उन्हें प्रताड़ित किया गया।
1957 में पहली पंचवर्षीय आर्थिक योजना पूरी होने पर, माओ के मन में यह संदेह आ गया था कि क्या सोवियत संघ द्वारा चुना गया समाजवाद का रास्ता वाक़ई में चीन के लिए उपयुक्त रहेगा। वे ख़्रुश्चेव की स्तालिनवादी नीतियों के उलटने और पूर्वी जर्मनी, पोलैंड और हंगरी (जो सभी साम्यवादी राज्य थे) में हुए विद्रोह से चिंतित थे और सोवियत संघ की पश्चिमी शक्तियों के साथ " शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व" की मांग को लेकर विचलित हो गए थे। उन्हें यह विश्वास हो गया था कि चीन को साम्यवाद केअपने स्वयं के रास्ते पर ही चलना चाहिए। चीनी मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले एक इतिहासकार और पत्रकार जोनाथन मिर्स्की के अनुसार, कोरियाई युद्ध के साथ-साथ शेष विश्व के अधिकांश देशों के समक्ष चीन के अलग-थलग पड़ जाने पर माओ ने अपने कथित घरेलू दुश्मनों पर हमले तेज़ कर दिए। इस कारण वे एक ऐसी अर्थव्यवस्था विकसित करना चाहते थे, जहां शासन को ग्रामीण कराधान से अधिकतम लाभ मिल सके।Mirsky, Jonathan. "The China We Don't Know https://web.archive.org/web/20151016120725/http://www.nybooks.com/articles/archives/2009/feb/26/the-china-we-dont-know/ 16 अक्तूबर 2015 ." New York Review of Books Volume 56, Number 3. February 26, 2009.
प्रारंभिक लक्ष्य
नवंबर 1957 में, अक्टूबर क्रांति की 40 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए, मास्को में कम्युनिस्ट देशों के पार्टी नेता एकत्र हुए। सोवियत संघ के राष्ट्रपति निकिता ख्रुश्चेव ने प्रस्ताव दिया कि अगले 15 वर्षों में शांतिपूर्ण प्रतिस्पर्धा के माध्यम से सोवियत संघ अमेरिका के साथ औद्योगिक उत्पादन में न केवल बराबरी हासिल कर लेगा, बल्कि उसे पीछे छोड़ देगा।
माओ इस नारे से इतना प्रेरित हुए कि उन्होंने चीन के लिए अपना स्वयं का नारा दिया, और चीन के लिए अगले 15 वर्षों में ब्रिटेन को पीछे छोड़ने और उससे आगे निकलने का लक्ष्य रखा।
कॉमरेड ख्रुश्चेव ने हमें बताया, 15 साल बाद सोवियत संघ संयुक्त राज्य अमेरिका से आगे निकल जाएगा। मैं यह भी कह सकता हूं, 15 साल बाद, हम यूके के साथ बराबरी कर सकते हैं या उससे आगे निकल सकते हैं। 10px माओ से-तुंगKhrushchev's Memoirs Nikita Khrushchev 赫鲁晓夫 1970 Little Brown & company 978-0316831406 250–257 赫鲁晓夫回忆录
संगठनात्मक और परिचालन कारक
ग्रेट लीप फॉरवर्ड अभियान द्वितीय पंचवर्षीय योजना की अवधि के दौरान शुरू हुआ था जो 1958 से 1963 तक चलने वाली थी, हालांकि इस अभियान को 1961 में ही बंद कर दिया गया था।Li, Kwok-sing (1995). A glossary of political terms of the People's Republic of China. Hong Kong: The Chinese University of Hong Kong. Translated by Mary Lok. pp. 47–48.https://books.google.com/books?id=9pPxwn6EvR4C&pg=PA13 Mao's crusade: politics and policy implementation in China's great leap forward Chan, Alfred L. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 2001 978-0-19-924406-5 Studies on contemporary China 13 2011-10-20 https://web.archive.org/web/20190612142616/https://books.google.com/books?id=9pPxwn6EvR4C&pg=PA13 12 जून 2019 live माओ ने जनवरी 1958 में नानजिंग में एक बैठक में ग्रेट लीप फॉरवर्ड का अनावरण किया।
ग्रेट लीप के पीछे केंद्रीय विचार यह था कि चीन के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों का तेज विकास समानांतर रूप से होना चाहिए। उम्मीद यह थी कि भारी मात्रा में मौजूद सस्ते श्रम का उपयोग करके और भारी मशीनरी आयात करने से बचकर औद्योगीकरण होगा। सरकार ने विकास के सोवियत मॉडल से सम्बंधित दुष्परिणाम- सामाजिक स्तरीकरण और तकनीकी अड़चनों- दोनों से बचने की भी कोशिश की, लेकिन उनकी कोशिश यह थी कि ऐसा करने के लिए तकनीकी समाधानों के बजाय राजनीतिक समाधान काम में लाए जाएँ। तकनीकी विशेषज्ञों पर भरोसा न करते हुए, The People's Republic, Part 1: The Emergence of Revolutionary China, 1949–1965 Lieberthal Kenneth Cambridge University Press 1987 978-0-521-24336-0 The Cambridge History of China 14, Part 1 Cambridge 301 The Great Leap Forward and the split in the Yenan leadership http://histories.cambridge.org/extract?id=chol9780521243360_CHOL9780521243360A008 26 नवंबर 2019 12 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20120312075301/http://histories.cambridge.org/extract?id=chol9780521243360_CHOL9780521243360A008 dead "Thus, the [1957] Anti-Rightist Campaign in both urban and rural areas bolstered the position of those who believed that proper mobilization of the populace could accomplish tasks that the 'bourgeois experts' dismissed as impossible."माओ और पार्टी ने अपने 1930 के दशक में लंबे मार्च के बाद यानान में पुनर्संरचना में इस्तेमाल की गई रणनीतियों को दोहराने की कोशिश की, जो थीं: "लोगों के समूह जुटाना, सामाजिक बराबरीकरण, नौकरशाही पर हमले, [और] लौकिक बाधाओं की अवहेलना।"Lieberthal (1987). p. 304.माओ ने कहा कि सोवियत संघ के " तीसरी अवधि" मॉडल पर आधाररित सामूहीकरण का एक और दौर के ग्रामीण इलाकों में जरूरी हो गया था, जहां मौजूदा कलेक्टिव्ज़ पीपुल्स कम्युन्स का विशाल में विलय कर दिया जाएगा।
लोगों के कम्यून
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:People's_commone_canteen3.jpg|अंगूठाकार|शुरुआतसितंबर 2021 InternetArchiveBot में, कम्यून के सदस्य कम्यून कैंटीन में मुफ्त में भोजन प्राप्त करने में सक्षम थे। यह तब बदल गया जब खाद्य उत्पादन रुक गया।अप्रैल 1958 में हेनान में चैयशान में एक प्रायोगिक कम्यून स्थापित किया गया था। यहां पहली बार निजी भूखंडों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया और सांप्रदायिक रसोई शुरू की गई। अगस्त 1958 में पोलित ब्यूरो की बैठकों में, यह निर्णय लिया गया कि इन लोगों के संवाद ग्रामीण चीन के आर्थिक और राजनीतिक संगठन का नया रूप बन जाएंगे। वर्ष के अंत तक लगभग 5,000 घरों में से प्रत्येक के साथ लगभग 25,000 कम्यून स्थापित किए गए थे। कम्यून अपेक्षाकृत तौर पर आत्मनिर्भर थे जहां मजदूरी और धन की जगह वर्क-पाइंट मिलते थे।
अपने फील्डवर्क के आधार पर, राल्फ ए॰ थैक्सटन जूनियर ने चीनी फ़ार्म हाउसों की तुलना " रंगभेद प्रणाली" (दक्षिण अफ़्रीका की अपार्टहाइड प्रणाली) से की। कम्यून प्रणाली का उद्देश्य श्रमिकों, संवर्गों और अधिकारियों के लिए शहरों और कार्यालयों, कारखानों, स्कूलों और सामाजिक बीमा प्रणालियों के निर्माण के लिए अधिकतम उत्पादन करना और शहरी-आवास का निर्माण करना था। ग्रामीण क्षेत्रों में जो नागरिक इस प्रणाली की आलोचना करते, उन्हें "खतरनाक" करार कर दिया जाता। पलायन भी मुश्किल या असंभव था, और जिन्होंने प्रयास किया उन्हें पार्टी द्वारा " सार्वजनिक संघर्ष" करवाया जाता, जो उन्हें और अधिक खतरे में डाल देता।Thaxton, Ralph A. Jr (2008). Catastrophe and Contention in Rural China: Mao's Great Leap Forward Famine and the Origins of Righteous Resistance in Da Fo Village https://web.archive.org/web/20190226022145/https://books.google.com/books?id=14A1qPQOgQMC&source=gbs_navlinks_s 26 फ़रवरी 2019 . Cambridge University Press. p. 3. 0-521-72230-6. कृषि के अलावा, कम्यूनों ने कुछ हल्के उद्योग (light industry) और निर्माण परियोजनाएँ भी पूरी कीं।
औद्योगीकरण
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Backyardfurnace5.jpg|अंगूठाकार|इस्पातसितंबर 2021 InternetArchiveBot उत्पादन करने के लिए गाँव में लोग रात को काम करते हुए।माओ अनाज और इस्पात उत्पादन को आर्थिक विकास के प्रमुख स्तंभों के रूप में देखते थे। उन्होंने अनुमान लगाया कि ग्रेट लीप की शुरुआत के 15 वर्षों के भीतर, चीन का औद्योगिक उत्पादन यूके सेआगे निकल जाएगा। अगस्त 1958 में पोलिटब्यूरो की बैठकों में यह निर्णय लिया गया कि इस्पात उत्पादन वर्ष के भीतर दोगुना करने के का लक्ष्य सेट किया जाएगा, जिसमें से अधिकांश वृद्धि पिछवाड़े की स्टील भट्टियों (backyard steel furnaces) के माध्यम से आएगी।https://books.google.com/books?id=9pPxwn6EvR4C&pg=PA69 Mao's Crusade : Politics and Policy Implementation in China's Great Leap Forward Alfred L. Chan 7 June 2001 Oxford University Press 978-0-19-155401-8 71–74 26 नवंबर 2019 https://web.archive.org/web/20190226022154/https://books.google.com/books?id=9pPxwn6EvR4C&pg=PA69 26 फ़रवरी 2019 live बड़े राज्य उद्यमों में प्रमुख निवेश किए गए: 1958, 1959 और 1960 में क्रमशः 1,587, 1,361, और 1,815 मध्यम और बड़े पैमाने की राज्य परियोजनाएं शुरू की गई थीं, प्रत्येक वर्ष में अधिक चीन की पहली पंचवर्षीय योजना से भी ज़्यादा।The People's Republic, Part 1: The Emergence of Revolutionary China 1949–1965 Lardy R. Nicholas Fairbank, K. John Cambridge University Press 1987 978-0-521-24336-0 Roderick MacFarquhar (ed.) Cambridge 367 The Chinese economy under stress, 1958–1965
इस औद्योगिक निवेश के परिणामस्वरूप करोड़ों चीनी सरकारी कर्मचारी बन गए: 1958 में, गैर-कृषि सरकारी भत्ते में 21 मिलियन लोग जोड़े गए, और 1960 में कुल राज्य रोजगार 50.44 मिलियन के शिखर पर पहुंच गया, जो 1957 के स्तर से दुगुना था; इतने से वक़्त में शहरी आबादी 31.24 मिलियन से बढ़ गई।Lardy and Fairbank (1987). p. 368. इन नए श्रमिकों ने चीन के खाद्य-राशन प्रणाली पर प्रमुख तनाव बनाया, जिसके कारण ग्रामीण खाद्य उत्पादन की माँग अनियंत्रित रूप से बढ़ गईं।
इस तेज विस्तार के दौरान, समन्वय कमज़ोर पड़ा और सामग्री की कमी पड़ना आम बात हॉट गई, जिसके परिणामस्वरूप "वेतन बिल में भारी वृद्धि हुई, जिसमें से अधिकतर निर्माण श्रमिकों के लिए थी, लेकिन विनिर्मित वस्तुओं की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई।"Lardy and Fairbank (1987). pp. 38–87. बड़े पैमाने पर घाटे का सामना करते हुए, सरकार ने 1960 से 1962 तक औद्योगिक निवेश में 38.9 से 7.1 बिलियन युआन की कटौती की (82% की कमी; 1957 का स्तर 14.4 बिलियन था)।
पिछवाड़े की भट्टियाँ
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Backyard_furnace4.jpg|अंगूठाकार|ग्रेटसितंबर 2021 InternetArchiveBot लीप फॉरवर्ड युग के दौरान चीन में पिछवाड़े की भट्टियां (backyard furnaces)
अंगूठाकार|पिछवाड़े की भट्टी में इस्पात बनाता किसान।
माओ को धातु विज्ञान का कोई ज्ञान नहीं था, फिर भी उन्होंने हर कम्यून और प्रत्येक शहरी इलाक़े में छोटी पिछवाड़े की स्टील भट्टियाँ लगाने का निर्णय लिया, जिसके परिणाम व्यापक थे। उन्होंने लोगों से अपने घरों के पिछवाड़े में स्टील की भट्टियाँ लगाने को कहा, ताकि चीन जल्द से जल्द अपना लक्ष्य पूरा कर सके। लोग बर्तन समेत घर के सामान को ही पिघलाकर जैसे-तैसे स्टील बनाने पर मजबूर हुए।
माओ को सितंबर 1958 में प्रांतीय प्रथम सचिव ज़ेंग ज़ेंगेंग द्वारा हेफ़ेई, अनहुई में एक पिछवाड़े की भट्ठी का एक उदाहरण दिखाया गया था।https://books.google.com/books?id=VyU6fwmdjf8C&pg=PA278 The Private Life of Chairman Mao Li Zhi-Sui 22 June 2011 Random House Publishing Group 978-0-307-79139-9 272–274, 278 26 नवंबर 2019 https://web.archive.org/web/20190226022153/https://books.google.com/books?id=VyU6fwmdjf8C&pg=PA278 26 फ़रवरी 2019 live यूनिट में उच्च गुणवत्ता वाले स्टील के निर्माण का दावा किया गया था।
किसानों और अन्य श्रमिकों ने स्क्रैप धातु से स्टील का उत्पादन करने का भारी प्रयास किया। भट्टियों को ईंधन देने के लिए, किसानों ने आस-पड़ोस के पेड़ काट डाले और यहाँ तक कि घर के दरवाजे और फर्नीचर तक से लकड़ी निकाली। भट्टियों के लिए "स्क्रैप" की आपूर्ति करने के लिए बर्तन, धूपदान और अन्य धातु की कलाकृतियों की आवश्यकता थी, ताकि माओ के दिए हुए उत्पादन के असम्भव लक्ष्यों को पूरा किया जा सके। कई पुरुष कृषि श्रमिकों और कई कारखानों, स्कूलों और यहां तक कि अस्पतालों में कामगारों तक को लोहे के उत्पादन में मदद करने के लिए काम से हटा दिया गया। किंतु इस उत्पादन से बनने वाले स्टील में कच्चे लोहे के पिंड बन पा रहे थे, जिनका आर्थिक मूल्य नगण्य था। फिर भी माओ को ऐसे बुद्धिजीवियों पर गहरा अविश्वास था जो इस तथ्य की ओर इशारा करते। इसके बजाय उन्होंने किसानों की भीड़ जुटाना ही ठीक समझा।
इसके अलावा, सौ फूल अभियान में माओ द्वारा दमन और हिंसा के कटु-अनुभव के चलते बुद्धिजीवी वर्ग के जागरूक लोगों ने इस तरह की मूर्खतापूर्ण योजना की आलोचना करने के बजाय चुप रहना ही ठीक समझा। माओ के निजी चिकित्सक, ली ज़िसुई के अनुसार, माओ और उनके दल ने जनवरी 1959 में मंचूरिया में पारंपरिक इस्पात कार्यों का दौरा किया, जहां उन्हें पता चला कि उच्च गुणवत्ता वाले स्टील का उत्पादन केवल कोयले जैसे विश्वसनीय ईंधन का उपयोग करके बड़े पैमाने पर कारखानों में किया जा सकता है। ऐसा जानते हुए भी उन्होंने फिर भी पिछवाड़े की स्टील भट्टियों को रोकने का आदेश नहीं दिया, केवल इसलिए ताकि जनता का क्रांतिकारी उत्साह को कम न हो। कार्यक्रम को उस वर्ष बहुत बाद में ही चुपचाप बंद किया गया।
सिंचाई
बड़े स्तर पर ग्रेट लीप फॉरवर्ड के दौरान पर्याप्त प्रयास किए गए थे, लेकिन अक्सर खराब योजनाबद्ध पूंजी निर्माण परियोजनाओं के रूप में, जैसे कि प्रशिक्षित इंजीनियरों से इनपुट के बिना निर्मित सिंचाई कार्य। माओ को इन जल संरक्षण अभियानों के मानव लागत के बारे में अच्छी तरह से पता था। 1958 की शुरुआत में, जिआंगसू में सिंचाई पर एक रिपोर्ट सुनते हुए, उन्होंने कहा कि: वू चीपू का दावा है कि वह 30 बिलियन क्यूबिक मीटर आगे बढ़ सकता है; मुझे लगता है कि 30,000 लोग मारे जाएंगे। ज़ेंग ज़िशेंग ने कहा है कि वह 20 बिलियन क्यूबिक मीटर आगे बढ़ाएगा, और मुझे लगता है कि 20,000 लोग मारे जाएंगे। वेईकिंग केवल 600 मिलियन क्यूबिक मीटर का वादा करता है, शायद कोई भी नहीं मरेगा।Dikötter, Frank (2010). p. 33.Weiqing, Jiang (1996). Qishi nian zhengcheng: Jiang Weiqing huiyilu. (A seventy-year journey: The memoirs of Jiang Weiqing) Jiangsu renmin chubanshe. p. 421. 7-214-01757-1 is the source of Dikötter's quote. Mao, who had been continually interrupting, was speaking here in praise of Jiang Weiqing's plan (which called for moving 300 million cubic meters). Weiqing states that the others' plans were "exaggerations," though Mao would go to criticize those cadres with objections to high targets at the National Congress in May (see p. 422).यद्यपि माओ ने "बड़े पैमाने पर जल संरक्षण परियोजनाओं के लिए बेगार के अत्यधिक उपयोग की आलोचना की थी,MacFarquhar, Roderick (1983). The Origins of the Cultural Revolution, Vol. 2 Columbia University Press. p. 150. 0-231-05717-2. 1958 के अंत में सिंचाई कार्यों पर बड़े पैमाने पर काम अगले कई वर्षों तक बेरोकटोक जारी रहा। परिणामवश ग्रामीणों को भूखा रखते हुए सैकड़ों हजारों लोगों के जान ले ली।Dikötter, Frank (2010). p. 33. चिंगशुई और गांसु में इन परियोजनाओं के तहत "हत्या क्षेत्र" (killing fields) स्थापित हुए।
फसल प्रयोग
कम्यूनों में, माओ के इशारे पर कई कट्टरपंथी और विवादास्पद कृषि नवाचारों को बढ़ावा दिया गया। इनमें से कई सोवियत कृषि विज्ञानी ट्रोफिम लिसेंको और उनके अनुयायियों के विचारों पर आधारित थे, जिन्हें आज ख़ारिज कर दिया गया है। नीतियों में पास-पास फसल उगाना शामिल था, जिससे बीजों को सामान्य धारणा की तुलना में कहीं अधिक घनीभूत रूप से बोया जाता था, यह मानकर कि एक ही वर्ग के बीज एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगे।Dikötter (2010). p. 39. गहरी जुताई (2 मीटर तक गहरी) को इस गलत धारणा पर प्रोत्साहित किया गया था कि इससे पौधों की जड़ें बड़ी होंगी। March 2019 मध्यम-उत्पादकता वाली भूमि को इस विश्वास के साथ अनियोजित छोड़ दिया गया था कि सबसे उपजाऊ भूमि पर खाद और प्रयास को केंद्रित करने से प्रति एकड़ उत्पादकता में वृद्धि होगी। कुल मिलाकर, इन अप्रयुक्त नवाचारों से अनाज उत्पादन में वृद्धि के बजाय कमी ही देखने को मिली।https://archive.org/details/shenfan00hint Shenfan: The Continuing Revolution in a Chinese Village Hinton William Vintage Books 1984 978-0-394-72378-5 New York 236–245 William H. Hintonइसी बीच, स्थानीय नेताओं पर अनाज उत्पादन को ज़्यादा-से-ज़्यादा दिखाने के लिए अपने राजनीतिक वरिष्ठों को दी गई रिपोर्ट में ग़लत आँकड़े दर्ज करने का दबाव डाला गया। राजनीतिक बैठकों में प्रतिभागियों ने उत्पादन के आंकड़ों को याद करते हुए बताया कि वरिष्ठ सदस्यों को खुश करने और शाबाशी लेने की दौड़ में वास्तविक उत्पादन मात्रा से 10 गुना तक बढ़ा-चढ़ा कर बताई जाती थीं - ऐसा करके उन्हें कई फ़ायदे मिल सकते थे, जैसे खुद माओ से मिलने का मौका। सरकार बाद में कई उत्पादन समूहों को इन झूठे उत्पादन आंकड़ों के आधार पर अतिरिक्त अनाज बेचने के लिए मजबूर करने में सक्षम रही।Hinton 1984, pp. 234–240, 247–249
ग्रामीणों के साथ बर्ताव
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Xinyang_working_at_night.jpg|अंगूठाकार|कम्यूनसितंबर 2021 InternetArchiveBot के सदस्य रात में खेतों में काम करते हुए मिरस्की के अनुसार निजी कृषि भूमि पर लगे प्रतिबंध ने किसान जीवन को उसके सबसे बुनियादी स्तर पर बर्बाद कर दिया। ग्रामीण जीवित रहने के लिए पर्याप्त भोजन इकट्ठा कर पाने में असमर्थ थे क्योंकि कम्यून सिस्टम के कारण वे पहले की तरह अपनी ज़मीन को किराए पर देने, बेचने, या ऋण के लिए संपार्श्विक के रूप में उपयोग करने के अधिकार से वंचित थे।Mirsky, Jonathan. "The China We Don't Know https://web.archive.org/web/20151016120725/http://www.nybooks.com/articles/archives/2009/feb/26/the-china-we-dont-know/ 16 अक्तूबर 2015 ." New York Review of Books Volume 56, Number 3. February 26, 2009.एक गाँव में, एक बार जब कम्यून का काम चालू हुआ, तो पार्टी के बॉस और उसके सहयोगी "उन्मत्त कार्रवाई करने लग जाते, और ग्रामीणों को खेतों में सोने और असहनीय घंटे काम करने और भूखे रहने के लिए मजबूर करते, और अतिरिक्त परियोजनाओं के लिए उन्हें दूर पैदल भेज देते, जहाँ लोग भूख से तड़प उठते।" एडवर्ड फ्राइडमैन, विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के एक राजनीतिक वैज्ञानिक, पॉल पिकॉविज़, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक इतिहासकार, सैन डिएगो और बिंगहैमटन विश्वविद्यालय के एक समाजशास्त्री मार्क सेल्डन ने पार्टी और ग्रामीणों के बीच के सम्बंध के बारे में लिखा है: इसमें कोई दोराय नहीं कि, कॉम्युनिस्ट राज्य ने प्रणालीगत और संरचित तौर पर लाखों देशभक्त और वफादार गाँववालों को धमकाया और गरीबी में झोंक दिया।Friedman, Edward; Pickowicz, Paul G.; and Selden, Mark (2006). Revolution, Resistance, and Reform in Village China. Yale University Press.थेक्सटन के समान ये लेखक बताते हैं कैसे कम्युनिस्ट पार्टी ने चीनी ग्रामीणों की परंपराओं का विनाश किया। परंपरागत रूप से अमूल्य माने जाने वाले स्थानीय रीति-रिवाजों को " सामंतवाद" के संकेत समझा जाता था, जिनका (मिरस्की के अनुसार) दमन किया जाना आवश्यक समझा गया। "उनमें अंतिम संस्कार, विवाह, स्थानीय बाजार और त्योहार आते थे। इस प्रकार पार्टी ने वह बहुत कुछ नष्ट कर दिया जो चीनी जीवन को अर्थ प्रदान करता था। ये निजी बंधन सामाजिक गोंद थे। शोक मनाना और ख़ुशी मनाना मानव अस्तित्व का हिस्सा है। खुशी, दुःख और दर्द को साझा करने के लिए मानवीयकरण करना है।"Mirsky, Jonathan. "China: The Shame of the Villages https://web.archive.org/web/20151029192253/http://www.nybooks.com/articles/archives/2006/may/11/china-the-shame-of-the-villages/ 29 अक्तूबर 2015 ", The New York Review of Books, Volume 53, Number 8. 11 May 2006 कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिक अभियानों में भाग लेने में विफलता - भले ही इस तरह के अभियानों का उद्देश्य अक्सर एक-दूसरे के उलट ही क्यों न हों - "का परिणाम नज़रबंदी, यातना, मृत्यु और पूरे परिवार की पीड़ा हो सकती है"।
स्थानीय अधिकारी अक्सर सार्वजनिक आलोचना सत्रों का प्रयोग अक्सर किसानों को डराने के लिए करते थे; उन्होंने (थेक्सटन के अनुसार), अकाल की मृत्यु दर को कई तरीकों से बढ़ाया। "पहले मामले में, शरीर पर चोट लगने से आंतरिक चोटें आतीं, जो शारीरिक क्षीणता और तीव्र भूख के साथ मिलकर मृत्यु का कारण बन जातीं।" एक मामले में, एक किसान ने काम्यून के खेतों से दो गोभी चुरा ली थीं। पकड़े जाने के बाद, चोर की आधे दिन तक सार्वजनिक आलोचनाकी गई थी। वह बेहोश होकर गिर पड़ा, बीमार पड़ गया और फिर कभी नहीं उबर पाया। बाक़ियों को श्रम शिविरों में भेजा जाता था।Thaxton 2008, p. 212.
फ्रैंक डिकॉटर लिखते हैं कि लाठी से पीटना सबसे आम तरीका था जो स्थानीय कॉम्युनिस्ट कैडरों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था और सभी कैडरों में से लगभग आधे नियमित रूप से लोगों को डंडों से पीटते थे। जो लोग अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते थे, अन्य कैडर उन्हें इससे भी बुरी तरह अपमानित करते और उन पर और भी क्रूर अत्याचार करते थे। जब बड़े पैमाने पर भुखमरी फैलने लगी, तो हर बार पहले से अधिक हिंसा करके कुपोषित लोगों को खेतों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। पीड़ितों को जिंदा जला दिया जाता, बांधकर तालाबों में फेंक दिया जाता, कपड़े फाड़कर नग्न करके सर्दियों के बीच श्रम करने के लिए मजबूर किया जाता, खौलते पानी में डुबो दिया जाता, मल-मूत्र निगलने के लिए मजबूर किया जाता और उनका उत्परिवर्तन (जड़ों से बाल उखाड़ना, नाक और कान काट देना) किया जाता था। ग्वांगडोंग में, कुछ कैडरों ने पीड़ितों में खारे पानी का इंजेक्शन, उसपर भी वे सुइयाँ जो सामान्य रूप से मवेशियों के लिए इस्तेमाल होती थीं। Dikötter (2010). pp. 294–296. ग्रेट लीप फॉरवर्ड के दौरान मरने वालों में से लगभग 6 से 8% लोगों को मौत की सजा दी गई थी या तुरंत मौत के घाट उतार दिए गए थे।Jasper Becker. Systematic genocide . The Spectator, September 25, 2010.
बेंजामिन वैलेंटिनो का कहना है कि "कॉम्युनिस्ट अधिकारी कभी-कभी अपने अनाज कोटे को पूरा करने में विफल रहने के आरोपियों को यातना देकर और मार डालते थे"।Valentino (2004). p. 128.
हालांकि, ग्रैंड वैली स्टेट यूनिवर्सिटी में लिबरल स्टडीज और ईस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर जेजी महोनी ने कहा है कि "यह देश इतना विविध और गतिमान है कि कोई एक किताब इसका पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकती ... ग्रामीण चीन के बारे में ऐसे बात करना मानो यह कोई एक जगह थी। " महोनी ग्रामीण शांक्सी में एक बुजुर्ग व्यक्ति का वर्णन करते हैं जो माओ को बड़े शौक़ से याद करते हुए कहते हैं, "माओ से पहले हमें कभी-कभी पत्ते खाने पड़ते थे, मुक्ति के बाद कभी नहीं।" इसके बावजूद, महोनी बताते हैं कि दा फोगाँव के लोग ग्रेट लीप को अकाल और मृत्यु के समय के रूप में को याद करते हैं, और इस गाँव में ठीक वे ही लोग जीवित रह पाए जो पत्तियाँ पचा पाते थे।Mahoney, Josef Gregory (2009). SpringerLink - Journal of Chinese Political Science, Volume 14, Number 3, pp. 319–320. https://web.archive.org/web/20201005190618/http://www.springerlink.com/content/b86930487m358224/ 5 अक्तूबर 2020 Mahoney reviews Thaxton (2008).
लुशान सम्मेलन
ग्रेट लीप फॉरवर्ड के प्रारंभिक प्रभाव पर जुलाई / अगस्त 1959 में लुशान सम्मेलन में चर्चा की गई थी। यद्यपि कई और उदारवादी नेताओं को नई नीति के बारे में संदेह रखते थे, लेकिन खुले तौर पर बोलने वाले एकमात्र वरिष्ठ नेता मार्शल पेंग देहुआई थे। माओ ने जवाब में पेंग (जो स्वयं एक गरीब किसान परिवार से आए थे) को रक्षा मंत्री के रूप में उनके पद से हटाकर, उन्हें और उनके समर्थकों को "बुर्जुआ" (bourgeois पूंजीपति) केक़रार देकर रिज करते हुए, और "दक्षिणपंथी अवसरवाद" के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करके उनकी आलोचना की। पेंग की जगह लिन बियाओ ने ले ली, और उन्होंने सेना से पेंग के समर्थकों का एक व्यवस्थित तरीक़े से बाहर निकालना शुरू किया।
परिणाम
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Birth_rate_in_China.svg|अंगूठाकार|चीनसितंबर 2021 InternetArchiveBot में जन्म दर और मृत्यु दर
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Total_number_of_deaths_by_age_globally_for_both_sexes_combined_1950%E2%80%932017.png|अंगूठाकार|ग्रेटसितंबर 2021 InternetArchiveBot लीप फॉरवर्ड ने वैश्विक मौतों की संख्या (1950-2017) में एक बड़ी स्पाइक आई। Dicker Daniel 2018 Global, regional, and national age-sex-specific mortality and life expectancy, 1950–2017: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2017 http://repositori.upf.edu/bitstream/10230/37209/1/GBD_lan_glob.pdf The Lancet 392 10159 1684–1735 10.1016/S0140-6736(18)31891-9कृषि नीतियों की विफलता, कृषि से औद्योगिक कार्यों की ओर किसानों का गमन और मौसम की स्थिति के कारण गंभीर अकाल से करोड़ों लोगों की मृत्यु हुई। अर्थव्यवस्था, जो गृहयुद्ध के अंत के बाद से सुधर गई थी, तबाह हो गई, गंभीर परिस्थितियों के चलते, जनता के बीच प्रतिरोध हुआ।
आपदा के जवाब में सरकार के ऊपरी स्तरों पर प्रभाव जटिल थे, 1959 में माओ ने राष्ट्रीय रक्षा मंत्री पेंग देहुआई को हटाकर लिन बियाओ, लियू शओची और डेंग शियाओपिंग के अस्थायी रूप से पदोन्नति प्रदान की। माओ की शक्ति और प्रतिष्ठा कम हुई, जिसे वापस प्राप्त करने के मक़सद से (ग्रेट लीप फॉरवर्ड के बाद), उन्होंने 1966 में सांस्कृतिक क्रांति शुरू करने का निर्णय लिया।
अकाल
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Global_famines_history.jpg|अंगूठाकार|वैश्विकसितंबर 2021 InternetArchiveBot अकाल इतिहास
कड़ी=https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Tree-Sparrow-2009-16-02.jpg|अंगूठाकार|गौरैया चार कीट अभियान की सबसे उल्लेखनीय शिकार बनी। हानिकारक कृषि नवाचारों के बावजूद, 1958 में मौसम बहुत अनुकूल था और फसल अच्छी होने के आसार थे। दुर्भाग्य से, इस्पात उत्पादन और निर्माण परियोजनाओं के लिए श्रमिकों के भारी मात्रा में कृषि से पलायन का मतलब यह था कि कुछ क्षेत्रों में बहुत सी फसल को बिना सोचे-समझे सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। माओ ने ग्रेट स्पैरो अभियान के तहत चीन की अधिकतर गौरैया मरवा दी थीं, यह सोचते हुए कि ये फ़सल बर्बाद करती हैं। समस्या तब और बढ़ गई विनाशकारी टिड्डों के झुंड भारी मात्रा में फ़सल नष्ट कर गए। ऐसा इसलिए सम्भव हो पाया क्योंकि उनके प्राकृतिक शिकारियों (गौरैया) को माओ मरवा चुके थे।
यद्यपि वास्तविक कटाई में कमी आई थी, केंद्र सरकार के दबाव के चलते स्थानीय अधिकारियों ने रिपोर्टों में घपला करते हुए बताया कि इन वर्षों में तो रिकॉर्ड कटाई हुई है। इन अतिरंजित परिणामों की घोषणा करने के पीछे एक मक़सद एक दूसरे के साथ उनकी प्रतिस्पर्धा भी थी। कस्बों और शहरों को आपूर्ति करने और निर्यात करने के लिए राज्य द्वारा उठाए जाने वाले अनाज की मात्रा का निर्धारण करने के लिए आधार के रूप में इन्हीं रिपोर्टों का उपयोग किया गया था। इस कारण किसानों के खाने के लिए थोड़ी ही फ़सल बच पाई, और कुछ क्षेत्रों में, भुखमरी फैल गई है। 1959 के सूखे और उसी वर्ष ह्वांगहो नदी की बाढ़ ने भी अकाल को और भीषण बना दिया।
1958-1960 के दौरान देश में व्यापक रूप से अकाल का अनुभव होने के बावजूद चीन अनाज का भारी मात्रा में निर्यात करता रहा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि माओ दुनिया को अपनी योजनाओं की सफलता दिखाना और अपनी साख बचाए रखना चाहते थे। उन्होंने विदेशी सहायता लेने से भी इनकार कर दिया। जब जापानी विदेश मंत्री ने अपने चीनी समकक्ष चेन यी को 100,000 टन गेहूं के प्रस्ताव को सार्वजनिक दृष्टिकोण से बाहर भेजने के लिए कहा, तो उन्हें फटकार लगाकर माना कर दिया गया। जॉन एफ॰ केनेडी को भी यह पता था कि चीन अकाल के बावजूद अफ्रीका और क्यूबा को भोजन निर्यात कर रहा था। उन्होंने कहा कि "हमें चीनी कम्युनिस्टों से कोई ऐसा संकेत नहीं मिला है कि वे भोजन के किसी भी प्रस्ताव का स्वागत करेंगे।"Dikötter, Frank (1991). pp. 114–115.
नाटकीय रूप से कम पैदावार के साथ, यहां तक कि शहरी इलाक़ों तक को राशन की भयानक कमी का सामना करना पड़ा; हालांकि, भुखमरी बड़े पैमाने पर ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित रही, जहां, उत्पादन में काफी बढ़े-चढ़े आँकड़ों के परिणामस्वरूप, किसानों के खाने के लिए बहुत कम अनाज बच पाया था। देश भर में भोजन की भयानक कमी थी; हालाँकि, जिन प्रांतों ने माओ के सुधारों को सबसे अधिक दृढ़ता के साथ अपनाया था, जैसे कि अनहुइ, गांसु और हेनान, उन्हीं को सबसे अधिक पीड़ा झेलनी पड़ी। सिचुआन, चीन के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांतों में से एक है, जिसे इसकी उर्वरता के कारण चीन में कभी " स्वर्ग का अन्नदाता " के रूप में जाना जाता था। माना जाता है कि इस प्रांत के अध्यक्ष जी जिंगक्वान ने माओ के आदेशों का बहुत दृढ़ता से पालन किया, जिस कारण इसी प्रांत में भुखमरी से सबसे बड़ी संख्या में मौतें हुईं। ग्रेट लीप फॉरवर्ड के दौरान, चीन के कुछ हिस्से, जो अकाल से बुरी तरह प्रभावित हुए थे, वहाँ नरभक्षण के मामले भी सामने आए।Bernstein, Richard. Horror of a Hidden Chinese Famine https://web.archive.org/web/20090305072906/http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9A0CE3D71E3DF936A35751C0A961958260 5 मार्च 2009 . New York Times February 5, 1997. Bernstein reviews Hungry Ghosts by Jasper Becker.https://www.theguardian.com/world/2013/jan/01/china-great-famine-book-tombstone China's Great Famine: the true story Branigan, Tania 1 January 2013 The Guardian 15 February 2016 https://web.archive.org/web/20160110054200/http://www.theguardian.com/world/2013/jan/01/china-great-famine-book-tombstone 10 जनवरी 2016 live
जो लोग अकाल से बच गए, उन्हें भी भारी पीड़ा का सामना करना पड़ा। लेखक यान लियनके जो ग्रेट लीप का सामना करते हुए हेनान प्रांत में पले बढ़े थे, उन्हें उनकी माँ ने यह सिखाया था कि "छाल और मिट्टी के उन प्रकारों को कैसे पहचानें, जो सबसे अधिक खाने योग्य थे। जब पेड़ों की सभी पत्तियाँ तोड़ कर खा ली गईं हों और मिट्टी भी नहीं बचे, तो उन्होंने सीखा कि कोयले के पिंड उनके पेट के शैतान को कम से कम थोड़ी देर के लिए को खुश कर सकते हैं।"Fan Jiayang 15 October 2018 Yan Lianke's Forbidden Satires of China https://www.newyorker.com/magazine/2018/10/15/yan-liankes-forbidden-satires-of-china The New Yorker 31 October 2018 https://web.archive.org/web/20181101055252/https://www.newyorker.com/magazine/2018/10/15/yan-liankes-forbidden-satires-of-china 1 नवंबर 2018 live
ग्रेट लेप फॉरवर्ड और संबंधित अकाल की कृषि नीतियां जनवरी 1961 तक जारी रहीं, जब, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 8 वीं केंद्रीय समिति की नौवीं योजना पर, ग्रेट लीप की नीतियों को उलटने के लिए कृषि उत्पादन की बहाली शुरू की गई। अनाज के निर्यात को रोक दिया गया, और कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से आयात ने कम से कम तटीय शहरों में भोजन की कमी के प्रभाव को कम करने में मदद की।
अकाल से होने वाली मौतें
अकाल से होने वाली मौतों की सही संख्या निर्धारित करना मुश्किल है, और अनुमान 30 मिलियन से 55 मिलियन (3 से 5.5 करोड़) लोगों तक है।Dikötter, Frank. Mao's Great Famine: The History of China's Most Devastating Catastrophe, 1958–62. Walker & Company, 2010. p. xii ("at least 45 million people died unnecessarily") p. xiii ("6 to 8 percent of the victims were tortured to death or summarily killed—amounting to at least 2.5 million people.") p. 333 ("a minimum of 45 million excess deaths"). 0-8027-7768-6.http://www.liberation.fr/planete/2011/06/17/la-chine-creuse-ses-trous-de-memoire_743211 La Chine creuse ses trous de mémoire La Liberation fr 24 नवंबर 2019 https://web.archive.org/web/20191002195005/https://www.liberation.fr/planete/2011/06/17/la-chine-creuse-ses-trous-de-memoire_743211 2 अक्तूबर 2019 live ग्रेट लीप फॉरवर्ड या किसी भी अकाल केकारण होने वाली अकाल मौतों का अनुमान लगाने में शामिल अनिश्चितताओं के कारण, विभिन्न अकालों की गंभीरता की तुलना करना मुश्किल होता है। हालांकि, यदि 30 मिलियन लोगों की मृत्यु का एक मध्य-अनुमान भी स्वीकार किया जाता है, तो ग्रेट लीप फॉरवर्ड चीन के इतिहास में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के इतिहास में सबसे घातक अकाल था।Ashton, Hill, Piazza, and Zeitz (1984). Famine in China, 1958–61. Population and Development Review, Volume 10, Number 4 (Dec 1984). p. 614.Yang, Jisheng (2010) "The Fatal Politics of the PRC's Great Leap Famine: The Preface to Tombstone" https://web.archive.org/web/20151016120726/http://www.tandfonline.com/doi/full/10.1080/10670564.2010.485408 16 अक्तूबर 2015 Journal of Contemporary China. Volume 19 Issue 66. pp. 755–776. Retrieved 3 Sep 2011. Yang excerpts Sen, Amartya (1999). Democracy as a universal value. Journal of Democracy 10(3), pp. 3–17 who calls it "the largest recorded famine in world history: nearly 30 million people died". यह आंशिक रूप से चीन की बड़ी आबादी के कारण था। चीजों को पूर्ण और सापेक्ष संख्यात्मक परिप्रेक्ष्य (absolute and relative numerical perspective) में रखने के लिए: महान आयरिश अकाल में, आयरलैंड के 80 लाख लोगों में से लगभग 10 लाख की मृत्यु हुई, या कुल आबादी का 12.5%।Wright, John W. (gen ed) (1992). The Universal Almanac. The Banta Company. Harrisonburg, Va. p. 411. महान चीनी अकाल में 60 करोड़ लोगों के देश में लगभग 3 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई, या 5%। इसलिए, केवल मूल संख्या के तौर पर देखने पर ग्रेट लीप फॉरवर्ड संभवतः विश्व का सबसे अधिक मृत्यु वाला अकाल था, लेकिन उच्चतम सापेक्ष (प्रतिशत) की दृष्टि से यह सबसे भीषण नहीं था।
1950 से चलता आ रहा मृत्यु दर में गिरावट का रुख ग्रेट लीप फॉरवर्ड ने उलट दिया,Coale, J. Ansley (1984). Rapid Population Change in China, 1952–1982. National Academy Press. Washington, D.C. p. 7. Coale estimates 27 million deaths: 16 million from direct interpretation of official Chinese vital statistics followed by an adjustment to 27 million to account for undercounting. हालांकि अकाल के दौरान भी मृत्यु दर 1949 के पूर्व के स्तर तक नहीं पहुंची होगी।Li, Minqi (2009). The Rise of China and the Demise of the Capitalist World Economy. Monthly Review Press. p. 41 978-1-58367-182-5. Li compares official crude death rates for the years 1959–1962 (11.98, 14.59, 25.43, and 14.24 per thousand, respectively) with the "nationwide crude death rate reported by the Nationalist government for the years 1936 and 1938 (27.6 and 28.2 per thousand, respectively). अकाल-सम्बंधित मृत्यु और जन्मों की संख्या में कमी के कारण 1960 और 1961 में चीन की जनसंख्या घट गई।Ashton (1984). p. 615, Banister (1987). p. 42, both get their data from Statistical Yearbook of China 1983 published by the State Statistical Bureau. 600 वर्षों में यह केवल तीसरी बार था जब चीन की जनसंख्या में कमी आई हो।Banister, Judith (1987). China's Changing Population. Stanford University Press. Stanford. p. 3. ग्रेट लीप फॉरवर्ड के बाद, मृत्यु दर लीप से पहले के अपने स्तर से नीचे चली गई और 1950 में शुरू हुई मृत्यु दर में गिरावट जारी रही।
अकाल की गंभीरता एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न रही। विभिन्न प्रांतों की मृत्यु दर में वृद्धि को सहसंबंधित करते हुए, पेंग सीझे ने पाया कि गांसु, सिचुआन, गुइझोऊ, हुनान, गुआंग्शी और अनहुई सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र थे, जबकि हीलोंगजियांग, इनर मंगोलिया, झिंजियांग, तियानजिन और शंघाई में ग्रेट लीप फॉरवर्ड के दौरान मृत्यु दर सबसे कम वृद्धि हुई थी (तिब्बत के लिए कोई डेटा उपलब्ध नहीं था)।Peng (1987). pp. 646–648 पेंग ने यह भी कहा कि शहरी क्षेत्रों में मृत्यु दर में वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग आधी वृद्धि थी। 1958 में 80 लाख की आबादी के साथ अनहुई के एक क्षेत्र फूयांग में मृत्यु दर इतनी अधिक थी कि वह खमेर रूज के काल वाले कंबोडिया को टक्कर देती थी; Dikötter, Frank (2010-10-13).Mao's Great Famine (Complete) https://web.archive.org/web/20110616010147/http://asiasociety.org/video/countries-history/maos-great-famine-complete 16 जून 2011 . Asia Society. Lecture by Frank Dikötter (Video). जहाँ तीन वर्षों में 24 लाख से अधिक लोगों मौत के घाट उतार दिया गया। Dikötter (2010). p. 317. जियांग्शी प्रांत के गाओ गांव में अकाल अवश्य पड़ा, लेकिन वास्तव में भुखमरी से किसी की मौत नहीं हुई।Gao, Mobo (2007). Gao Village: Rural life in modern China. University of Hawaii Press. 978-0824831929
मरने वालों की संख्या का आकलन करने के तरीके और त्रुटि के स्रोत
ग्रेट लीप फॉरवर्ड से होने वाली मृत्युओँ का अनुमानलोगों की मृत्यु
(मिलियन) लेखक साल 23पेंगPeng Xizhe (1987). Demographic Consequences of the Great Leap Forward in China's Provinces. Population and Development Review Volume 13 Number 4 (Dec 1987). pp. 648–649.198727कोयलCoale, J. Ansley (1984). Rapid Population Change in China, 1952–1982. National Academy Press. Washington, D.C. p. 7. Coale estimates 27 million deaths: 16 million from direct interpretation of official Chinese vital statistics followed by an adjustment to 27 million to account for undercounting.198430एश्टन, एट अल।Ashton, Hill, Piazza, and Zeitz (1984). Famine in China, 1958–61. Population and Development Review, Volume 10, Number 4 (Dec 1984). p. 614.198430बैनिस्टरBanister, Judith (1987). China's Changing Population. Stanford University Press. pp. 85, 118.198730बेकरBecker, Jasper (1998). Hungry Ghosts: Mao's Secret Famine. Holt Paperbacks. pp. 270, 274. 0-8050-5668-8.199632.5काओDikötter (2010) pp. 324–325. Dikötter cites Cao Shuji (2005). Da Jihuang (1959–1961): nian de Zhongguo renkou (The Great Famine: China's Population in 1959–1961). Hong Kong. Shidai guoji chuban youxian gongsi. p. 281200536यांगYang Jisheng (2012). Tombstone: The Great Chinese Famine, 1958–1962 (Kindle edition). Farrar, Straus and Giroux. p. 430. 9781466827790.200838चांग और हैलिडे200538अफवाह 200845 न्यूनतम डिकॉटर [ सत्यापित करें ][ सत्यापित करें ]201043 से 46 चेन 198055यू जिगुआंगhttp://www.liberation.fr/planete/2011/06/17/la-chine-creuse-ses-trous-de-memoire_743211 La Chine creuse ses trous de mémoire La Liberation fr 24 नवंबर 2019 https://web.archive.org/web/20191002195005/https://www.liberation.fr/planete/2011/06/17/la-chine-creuse-ses-trous-de-memoire_743211 2 अक्तूबर 2019 liveYu Xiguang, Da Yuejin Kurezi, Shidai Chaoliu Chubanshe, Hong Kong (2005)2005अनुमानों में त्रुटि के कई स्रोत हैं। राष्ट्रीय जनगणना के आंकड़े सटीक नहीं थे और उस समय चीन की कुल जनसंख्या 50 मिलियन से 100 मिलियन लोगों से कम-ज़्यादा हो सकती थी।
मौतों का कम आंकलन भी एक समस्या थी। मृत्यु पंजीकरण प्रणाली, जो अकाल से पहले ही अपर्याप्त थी,Banister (1987). p. 85. अकाल के दौरान बड़ी संख्या में मौतों से पूरी तरह ठप पड़ गई।Becker (1996). pp. 268–269.Dikötter (2010) p. 327. इसके अलावा, कई मौतें रिपोर्ट नहीं की जाती थीं, ताकि मृतक के परिवार के सदस्य उसके हिस्से का राशन लेना जारी रख सकें। 1953 और 1964 के बीच पैदा होने और मरने वाले बच्चों की संख्या, दोनों समस्याग्रस्त हैं। हालांकि, एश्टन का मानना है कि क्योंकि GLF के दौरान रिपोर्ट की गई जन्मों की संख्या सटीक लगती है, इसलिए मौतों की संख्या भी सही होनी चाहिए।Ashton et al. (1984). p. 617. बड़े पैमाने पर आंतरिक प्रवासन की वजह से भी जनसंख्या और मौतों की गणना, दोनों को ही समस्याग्रस्त हो गईं, हालांकि यांग का मानना है कि अनौपचारिक रूप से आंतरिक प्रवासन की मात्रा छोटी ही थीYang (2012) p. 430. और काओ का अनुमान आंतरिक प्रवास को ध्यान में रखता है।Yang Jisheng (2012). Tombstone: The Great Chinese Famine, 1958–1962 (Kindle edition). Farrar, Straus and Giroux. p. 427. 9781466827790.
अकाल के कारण और ज़िम्मेदार व्यक्ति
ग्रेट लीप फॉरवर्ड की नीतियां, अकाल की परिस्थितियों में सरकार की त्वरित और प्रभावी रूप से प्रतिक्रिया देने में विफलता, साथ ही अकाल के लिए खराब फसल उत्पादन के स्पष्ट प्रमाण के बावजूद अत्यधिक अनाज निर्यात कोटा बनाए रखने की माओ की ज़िद- ये सभी अकाल के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं। इस बात पर असहमति है कि क्या मौसम की स्थिति ने भी अकाल में योगदान दिया। इसके अलावा काफी सबूत हैं कि अकाल या तो जानबूझकर आयोजित किया गया, या जानबूझकर की गई लापरवाही के कारण घटित हुआ।
लंबे समय तक कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य और आधिकारिक चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के लिए एक संवाददाता यांग जिशेंग, सारा दोष माओवादी नीतियों और अधिनायकवाद की राजनीतिक प्रणाली को देते हैं,https://www.theguardian.com/world/2013/jan/01/china-great-famine-book-tombstone China's Great Famine: the true story Branigan, Tania 1 January 2013 The Guardian 15 February 2016 https://web.archive.org/web/20160110054200/http://www.theguardian.com/world/2013/jan/01/china-great-famine-book-tombstone 10 जनवरी 2016 liveजैसे कि कृषि श्रमिकों को फ़सल उगाने देने के बजाय उनसे ज़बरदस्ती इस्पात उत्पादन करवाना, और उसी समय अनाज का निर्यात करना।Yu, Verna (2008). "Chinese author of book on famine braves risks to inform new generations https://web.archive.org/web/20190226022150/https://www.nytimes.com/2008/12/18/world/asia/18iht-famine.1.18785257.html?pagewanted=all 26 फ़रवरी 2019 ." The New York Times, November 18, 2008. Yu writes about Tombstone and interviews author Yang Jisheng.Applebaum, Anne (2008). "When China Starved https://web.archive.org/web/20121107055147/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2008/08/11/AR2008081102015.html 7 नवंबर 2012 ." The Washington Post, August 12, 2008. Applebaum writes about Tombstone by Yang Jishen.अपने शोध के दौरान, यांग ने कहा कि जब अकाल अपने चरम पर था तब भी सरकारी खाद्य गोदामों में 22 मिलियन टन अनाज मौजूद था, भुखमरी की रिपोर्ट जब नौकरशाही के शीर्ष अधिकारियों तक पहुँचतीं, तो वे उन्हें नजरअंदाज कर देते, और अधिकारियों ने आदेश दिए कि उन क्षेत्रों में आंकड़े नष्ट कर दिए जाएँ जहाँ जनसंख्या में कमी प्रत्यक्ष रूप से दिखने लगी हो।Link, Perry (2010). "China: From Famine to Oslo" https://web.archive.org/web/20151126192536/http://www.nybooks.com/articles/archives/2011/jan/13/china-famine-oslo/ 26 नवंबर 2015 . The New York Review of Books, December 16, 2010.
अर्थशास्त्री स्टीवन रोजफिल्ड का तर्क है कि यांग के अनुसंधान "से पता चलता है कि माओ का यह नर-संहार काफी हद तक आतंक-भुखमरी के कारण हुआ था; अर्थात, यह अनिच्छित अकाल के बजाय स्वैच्छिक मानव-हत्या थी।"Rosefielde, Steven (2009). Red Holocaust. Routledge. p. 114. 0-415-77757-7. यांग का कहना है कि स्थानीय पार्टी के अधिकारी बड़ी संख्या में उनके आसपास मर रहे लोगों के प्रति उदासीन थे, क्योंकि उनकी प्राथमिक चिंता अनाज का वितरण था, जिससे माओ सोवियत संघ से लिया गया 1.973 बिलियन युआन का कुल ऋण चुकाना चाहते थे। ज़िनयांग में, अनाज गोदामों के दरवाजे पर भुखमरी से लोगों की मौत हो गई।O'Neill, Mark (2008). A hunger for the truth: A new book, banned on the mainland, is becoming the definitive account of the Great Famine. China Elections, 10 February 2012 माओ ने राज्य के खाद्य गोदाम खोलने से यह कहकर इनकार करते हुए उन्होंने भोजन की कमी की खबरों को खारिज कर दिया और किसानों पर अनाज छिपाने का आरोप लगाया।Becker, Jasper (1998). Hungry Ghosts: Mao's Secret Famine https://web.archive.org/web/20190612142623/https://books.google.com/books?id=iC4g0gXBmIkC&printsec=frontcover&dq=Hungry+Ghosts:+Mao%27s+Secret+Famine#v=onepage&q=&f=false 12 जून 2019 . Holt Paperbacks. p. 81. 0-8050-5668-8.
मौसम विज्ञान ब्यूरो के विशेषज्ञों के साथ रिकॉर्ड और बातचीत में अपने शोध से, यांग ने निष्कर्ष निकाला कि ग्रेट लीप फॉरवर्ड के दौरान मौसम अन्य वर्षों की तुलना में असामान्य नहीं था, इसलिए मौसम एक कारक नहीं था।Johnson, Ian (2010). Finding the Facts About Mao's Victims https://web.archive.org/web/20151029002955/http://www.nybooks.com/blogs/nyrblog/2010/dec/20/finding-facts-about-maos-victims/ 29 अक्तूबर 2015 . The New York Review of Books (Blog), December 20, 2010. Retrieved 4 Sep 2011. Johnson interviews Yang Jishen. (Provincial and central archives).यांग का यह भी मानना है कि चीन-सोवियत विभाजन एक कारक नहीं था क्योंकि यह 1960 तक नहीं हुआ था, जब अकाल चल रहा था।
चांग और हॉलिडे का तर्क है कि "माओ ने वास्तव में अधिक मौतों को होने दिया था। यद्यपि नरसंहार करना लीप के साथ उनका उद्देश्य नहीं था, फिर भी वह असंख्य मृत्युओँ के लिए तैयार ही नहीं थे बल्कि उनके उम्मीद लगाए बैठे थे, और उन्होंने अपने शीर्ष नेताओं को भी यह संकेत दिया था कि यदि बहुत अधिक मौतें हों तो उन्हें ज्यादा झटका नहीं लगना चाहिए। " नरसंहार इतिहासकार आरजे रोमेल ने पहले अकाल मौतों को अनिच्छित बताया था। चांग और हॉलिडे की पुस्तक में उपलब्ध कराए गए साक्ष्य के प्रकाश में, अब वे मानते हैं कि ग्रेट लीप फॉरवर्ड से जुड़ी बड़े पैमाने पर हुई मानव मौतें जानबूझकर किया गया नरसंहार ही थीं।
फ्रैंक डिकॉटर के अनुसार, माओ और कम्युनिस्ट पार्टी को पता था कि उनकी कुछ नीतियां भुखमरी में योगदान दे रही थीं।Dikötter, Frank. Mao’s Great Famine, Key Arguments . नवंबर 1958 में विदेश मंत्री चेन यी ने कुछ मानवीय नुकसानों के बारे में कहा:Dikötter (2010). p. 70.कुछ श्रमिकों की मौत वास्तव में हुई है, किंतु यह हमें रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह वह कीमत है जो हमें चुकानी पड़ेगी, इससे डरने की कोई बात नहीं है। कौन जानता है कि कितने लोगों ने युद्ध के मैदानों और जेलों में [क्रांतिकारी कारण से] बलिदान दिए हैं? फ़िलहाल हमारे पास बीमारी और मृत्यु के कुछ मामले हैं: यह तो कुछ भी नहीं है! 1959 में शंघाई में एक गुप्त बैठक के दौरान, माओ ने शहरों को खिलाने और विदेशी ग्राहकों को संतुष्ट करने के लिए सभी अनाज के एक तिहाई की राज्य खरीद की मांग की, और कहा कि "यदि आप एक तिहाई से ऊपर नहीं जाएँ, तो लोग विद्रोह नहीं करेंगे। " उन्होंने उसी बैठक में यह भी कहा:
जब खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं हो तो लोग भूख से मर जाते हैं। यदि इससे आधे लोगों का पेट भर पाता है, तो बाक़ी आधे लोगों को मरने देना बेहतर है। 10px माओ से-तुंगDikötter (2010). p. 88. बेंजामिन वैलेंटिनो लिखते हैं कि 1932-33 के अकाल के दौरान सोवियत संघ में, किसानों को उनके भूखे गांवों में घरेलू पंजीकरण की प्रणाली द्वारा सीमित कर दिया गया था,Valentino, Benjamin A. (2004). Final Solutions: Mass Killing and Genocide in the Twentieth Century https://web.archive.org/web/20190226022149/https://books.google.com/books?id=LQfeXVU_EvgC&pg=PA127&dq=soviet+union+mao+system+of+household+registration#v=onepage&q=soviet%20union%20mao%20system%20of%20household%20registration&f=false 26 फ़रवरी 2019 . Cornell University Press. p. 127. 0-8014-3965-5. और अकाल के सबसे बुरे प्रभावों को शासन के दुश्मनों के खिलाफ निर्देशित किया गया था।Valentino (2004). p. 128. जिन्हें भी सरकार "काले तत्व" (धार्मिक नेता, दक्षिणपंथी, अमीर किसान, आदि) की उपाधि दे देती थी, जिन्हें भोजन आवंटन में सबसे कम प्राथमिकता दी जाती थी, और इसलिए सबसे बड़ी संख्या में उन्हीं की मृत्यु हुई। नरसंहार के विद्वान एडम जोंस के अनुसार, "सबसे अधिक पीड़ा सहने वाला समूह तिब्बतियों का था था", 1959 से 1962 तक हर पांच में से एक तिब्बती भूख से मारा गया।Jones, Adam (2010). Genocide: A Comprehensive Introduction. Routledge, 2nd edition (August 1, 2010). p. 96. 0-415-48619-X.
एश्टन, एट अल॰लिखते हैं कि भोजन की कमी, प्राकृतिक आपदाओं, और कमी के शुरुआती संकेतों को लेकर धीमी प्रतिक्रिया के कारण चीनी सरकार की नीतियां अकाल के लिए जिम्मेदार थीं।Ashton, et al. (1984). pp. 624, 625. भोजन की कमी के लिए अग्रणी नीतियों में कम्यून प्रणाली का कार्यान्वयन और गैर-कृषि गतिविधियों जैसे पिछवाड़े में इस्पात के उत्पादन पर जोर देना शामिल था। प्राकृतिक आपदाओं में सूखा, बाढ़, आंधी, पौधों की बीमारी, और कीट शामिल थे।Ashton, et al. (1984). p. 629. धीमी प्रतिक्रिया कृषि स्थिति पर विषयनिष्ठ रिपोर्टिंग की कमी के कारण थी, Ashton, et al. (1984). p. 634. जिसमें "कृषि रिपोर्टिंग प्रणाली में लगभग पूर्ण विराम लगना" भी शामिल था।Ashton, et al. (1984). p. 630.
मोबो गाओ ने सुझाव दिया कि ग्रेट लीप फॉरवर्ड के भयानक प्रभाव उस समय के चीनी नेतृत्व के घातक इरादे से नहीं आए थे, बल्कि इसके शासन की संरचनात्मक प्रकृति, और एक देश के रूप में चीन की विशालता से संबंधित थे। गाओ कहते हैं, "यह भयानक सबक सीखा गया कि चीन इतना विशाल देश है और जब यह समान रूप से शासित होता है, तो त्रुटियों या गलत नीतियों में जबरदस्त परिमाण के प्रभाव गंभीर होंगे"।Gao, Mobo (2007). Gao Village: Rural life in modern China. University of Hawaii Press. 978-0824831929Chinese Government's Official Web Portal (English). China: a country with 5,000-year-long civilization . Retrieved 3 Sep 2011. "It was mainly due to the errors of the great leap forward and of the struggle against "Right opportunism" together with a succession of natural calamities and the perfidious scrapping of contracts by the Soviet Government that our economy encountered serious difficulties between 1959 and 1961, which caused serious losses to our country and people."
चीनी सरकार का आधिकारिक वेब पोर्टल 1959-1961 के "देश और लोगों" के लिए "गंभीर नुकसान" की जिम्मेदारी (अकाल का उल्लेख किए बिना) मुख्य रूप से ग्रेट लीप फॉरवर्ड और दक्षिणपंथी विरोधी संघर्ष, मौसम और सोवियत संघ द्वारा क्रय-अनुबंधों को रद्द करने के फ़ैसले को योगदान कारक के रूप में देता है।
हिंसा से होने वाली मौतें
ग्रेट लीप के दौरान सभी मौतें भुखमरी से नहीं हुईं। फ्रैंक डिकॉटर का अनुमान है कि कम से कम 25 लाख लोगों को पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया गया था और दस से तीस लाख लोगों ने आत्महत्या की थी।Dikötter (2010). pp. 298, 304.http://www.scmp.com/article/723956/revisiting-calamitous-time 45 million died in Mao's Great Leap Forward, Hong Kong historian says in new book 2018-12-06 27 नवंबर 2019 https://web.archive.org/web/20161023142821/http://www.scmp.com/article/723956/revisiting-calamitous-time 23 अक्तूबर 2016 live उदाहरण देते हुए वे बताते हैं, सिनयांग (Xinyang) में, जहां 1960 में दस लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई, इनमें से 6-7% (लगभग 67,000) को कॉम्युनिस्ट गुंडों ने पीट-पीटकर मार डाला था। दाओसियन काउंटी में, मरने वालों में से 10% "जिंदा दफन हुए, डंडों से पीट-पीट कर मार दिए गए या फिर पार्टी के सदस्यों और उनके गुंडों द्वारा मारे गए।" 1960 में शिमेन काउंटी में, लगभग 13,500 लोगों की मृत्यु हो गई, इनमें से 12% ऐसे थे जिन्हें "दम टूटने तक पीटा गया या मौत के लिए प्रेरित किया गया।"Dikötter (2010). pp. 294, 297. यांग जिशेंग के अनुसंधान के मुताबिक़,https://www.theguardian.com/world/2013/jan/01/china-great-famine-book-tombstone China's Great Famine: the true story Branigan, Tania 1 January 2013 The Guardian 15 February 2016 https://web.archive.org/web/20160110054200/http://www.theguardian.com/world/2013/jan/01/china-great-famine-book-tombstone 10 जनवरी 2016 liveYang Jisheng (2012). Tombstone: The Great Chinese Famine, 1958–1962 (Kindle edition). Farrar, Straus and Giroux. p. 430. 9781466827790. लोगों को सरकार के खिलाफ विद्रोह करने, फसल उपज की सही संख्या सूचना देने, लोगों को चेताने, बचा-खुचा अन्न सौंपने से इंकार करने, भागने की कोशिश करने अकाल-प्रभावित क्षेत्र से निकल भागने की कोशिश करने, भीख मांगने, यहाँ तक कि खाने के टुकड़े चोरी करने या अधिकारियों को गुस्सा दिलाने पर पीटा जाता या सीधा जान से मार दिया जाता था।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ग्रेट लीप के दौरान, चीनी अर्थव्यवस्था शुरू में बढ़ी। 1958 में लोहे का उत्पादन 45% बढ़ गया और अगले दो वर्षों में संयुक्त रूप से 30% बढ़ा, लेकिन 1961 में घट गया, और 1958 के ही पुराने स्तर तक पहुँचने के लिए इसे 1964 तक का इंतज़ार करना पड़ा।
ग्रेट लीप ने मानव इतिहास में अचल संपत्ति का सबसे बड़ा विनाश किया, द्वितीय विश्व युद्ध के किसी भी बमबारी अभियान से बढ़कर।Dikötter (2010). pp. xi, xii. चीन के लगभग 30% से 40% घरों को ढहा दिया गया।Dikötter (2010). p. 169. फ्रैंक डिकॉटर कहते हैं कि "घरों को उर्वरक बनाने, कैंटीन बनाने, ग्रामीणों को स्थानांतरित करने, सड़कों को सीधा करने, बेहतर भविष्य के लिए जगह बनाने या केवल उनके मालिकों को दंडित करने के लिए तोड़ दिया जाता था।"
कृषि नीति में, ग्रेट लीप दौरान खाद्य आपूर्ति की विफलताओं के बाद 1960 के दशक में क्रमिक रूप से सामूहीकरण की नीति को सरकार ने उलटना शुरू किया। इसने देंग जियाओपिंग के तहत आगे होने वाले विसामूहीकरण (de-collectivization) का भावी संकेत दिया। राजनीतिक वैज्ञानिक मेरेडिथ जंग-एन वू का तर्क है: "निर्विवाद रूप से कॉम्युनिस्ट शासन लाखों किसानों के जीवन को बचाने के लिए समय पर प्रतिक्रिया देने में विफल रहा, लेकिन अंततः जब इसने प्रतिक्रिया दी, तो इसने कई सौ मिलियन किसानों का जीवन बदल दिया (1960 के दशक की शुरुआत में मामूली तौर पर, लेकिन 1978 के बाद के डेंग शियाओपिंग के सुधारों के बाद स्थायी रूप से)।"Woo-Cummings, Meredith (2002). http://www.adbi.org/files/2002.01.rp31.ecology.famine.northkorea.pdf The Political Ecology of Famine: The North Korean Catastrophe and Its Lessons 2015-01-22 27 नवंबर 2019 https://web.archive.org/web/20060318194644/http://www.adbi.org/files/2002.01.rp31.ecology.famine.northkorea.pdf 18 मार्च 2006 dead (807 KB), ADB Institute Research Paper 31, January 2002. Retrieved 3 Jul 2006.
अपने करियर के लिए जोखिम के बावजूद, कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ सदस्यों ने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व का आपदा के लिए दोषारोपण किया और इसे इस प्रमाण के रूप में लिया कि चीन को शिक्षा पर अधिक भरोसा करना चाहिए, तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करना और अर्थव्यवस्था को विकसित करने में बुर्जुआ तरीकों को लागू करना होगा। लियू शाओकी ने 1962 में सेवन थाउज़ेंड कैडर्स कॉन्फ्रेंस में एक भाषण दिया था जिसमें कहा गया था कि "आर्थिक आपदा में प्रकृति की 30% गलती थी, 70% मानवीय त्रुटि।"Twentieth Century China: Third Volume. Beijing, 1994. p. 430.
पेकिंग विश्वविद्यालय के दो अर्थशास्त्रियों के एक 2017 के पेपर में "इस बात के ठोस सबूत मिले कि 1959-61 के दौरान अत्यधिक मृत्यु दर का कारण अवास्तविक उपज लक्ष्य थे, और आगे के विश्लेषण से पता चलता है कि उपज के लक्ष्यों ने अनाज उत्पादन के आंकड़ों की मुद्रास्फीति और अत्यधिक खरीद को प्रेरित किया। हम यह भी पाते हैं कि माओ की मृत्यु के दशकों बाद तक उनकी कट्टरपंथी नीतियों से प्रभावित क्षेत्रों में धीमा आर्थिक विकास और मानव पूंजी संचय में गंभीर गिरावट से ग्रस्त रहे।"Liu Chang Zhou Li-An 2017-11-21 Estimating the Short- and Long-Term Effects of MAO Zedong's Economic Radicalism https://papers.ssrn.com/abstract=3075015 Rochester, NY
जनविरोध
ग्रेट लीप फॉरवर्ड के प्रतिरोध के विभिन्न रूप थे। कई प्रांतों में सशस्त्र विद्रोह हुआ,Dikötter (2010) pp. 226–228.Rummel (1991). pp. 247–251. हालांकि इन विद्रोहों ने कभी भी चीनी केंद्र सरकार के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न नहीं किया। हेनान, शेडोंग, किन्हाई, गांसु, सिचुआन, फ़ुज़ियान और युन्नानप्रांतों और तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में विद्रोह रिकार्ड हुए हैं।Dikötter (2010) pp. 226–228 (Qinghai, Tibet, Yunnan).Rummel (1991). pp. 247–251 (Honan, Shantung, Qinghai (Chinghai), Gansu (Kansu), Szechuan (Schechuan), Fujian), p. 240 (TAR). हेनान, शेडोंग, किंघई, गांसु और सिचुआन में विद्रोह एक वर्ष से भी अधिक समय तक चले। कैडर सदस्यों के खिलाफ भी कभी-कभार हिंसा होती थी। Dikötter (2010) pp. 224–226. गोदामों पर छापेमारी, आगजनी और अन्य क़िस्म की बर्बरता, ट्रेन डकैती, और पड़ोसी गांवों और काउंटी में छापे पड़ना आम बात थी।
ब्रैंडिस यूनिवर्सिटी में राजनीति के प्रोफेसर राल्फ थैक्सटन के 20 से अधिक वर्षों के शोध के अनुसार, ग्रामीण ग्रेट लीप के दौरान और बाद में कॉम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ हो गए और उसे निरंकुश, क्रूर, भ्रष्ट और स्वार्थी के रूप में देखने लगे।Mirsky, Jonathan. "The China We Don't Know https://web.archive.org/web/20151016120725/http://www.nybooks.com/articles/archives/2009/feb/26/the-china-we-dont-know/ 16 अक्तूबर 2015 ." New York Review of Books Volume 56, Number 3. February 26, 2009. पार्टी की नीतियां, जिसमें थैक्सटन के अनुसार लूट, बेगार और भुखमरी शामिल थीं, ने ग्रामीणों को "कम्युनिस्ट पार्टी के साथ अपने रिश्ते के बारे में दुबारा सोचने पर मजबूर किया, इससे उत्पन्न विचार समाजवादी शासन की निरंतरता के लिए ख़तरनाक हैं।"
अक्सर, ग्रेट लीप के दौरान गाँववाले शासन के प्रति अपनी अवज्ञा व्यक्त करने के लिए और "शायद, स्वयं संयत रहने के लिए" छोटी-छोटी बेतुकी कविताओं की रचना किया करते थे। एक कविता कुछ इस प्रकार है:
"बेशर्मी से चापलूसी करो,
ठूँस के खाना खाओ।
चापलूसी न करो
निश्चित मौत को पाओ।"Mirsky, Jonathan. "China: The Shame of the Villages https://web.archive.org/web/20151029192253/http://www.nybooks.com/articles/archives/2006/may/11/china-the-shame-of-the-villages/ 29 अक्तूबर 2015 ", The New York Review of Books, Volume 53, Number 8. 11 May 2006
सरकार पर प्रभाव
कई स्थानीय अधिकारियों पर मुक़दमे दर्ज हुए और गलत सूचना देने के लिए सार्वजनिक रूप से प्राणदंड दिया गया।Friedman, Edward; Pickowicz, Paul G.; Selden, Mark; and Johnson, Kay Ann (1993). Chinese Village, Socialist State. Yale University Press. p. 243. 0300054289/ As seen in Google Book Search https://web.archive.org/web/20190226022147/https://books.google.com/books?vid=ISBN0300054289&id=GN2cXHxg_6oC&pg=PA243&lpg=PA243&dq=wu+zhipu+henan+xinyang&sig=N8jpvDEZe3NvS64YO0qa492A32k 26 फ़रवरी 2019 .
माओ ने 27 अप्रैल, 1959 को चीन के राज्य अध्यक्ष का पद छोड़ दिया, लेकिन पार्टी के अध्यक्ष बने रहे। लियू शाओची (चीन के नए अध्यक्ष) और सुधारवादी देंग शियाओपिंग(पार्टी के महासचिव) को आर्थिक सुधार लाने के लिए नीति बदलने का ज़िम्मा दिया गया। माओ की ग्रेट लीप फॉरवर्ड नीति की लुशान पार्टी सम्मेलन में खुलेआम आलोचना की गई। इनमें से मुख्य आलोचक रहे तत्कालीन राष्ट्रीय रक्षा मंत्री पेंग देहुआई, जिन्होंने शुरुआत में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर ग्रेट लीप के संभावित प्रतिकूल प्रभाव से परेशान होकर, अनाम पार्टी के सदस्यों को "एक ही झटके में साम्यवाद में कूदने" की कोशिश करने के लिए तिरस्कृत किया। लुशान प्रदर्शन के बाद, माओ ने पेंग को हटाकर उनका पद लिन बियाओ को दे दिया।
किंतु 1962 तक यह स्पष्ट हो गया था कि पार्टी उस अतिवादी विचारधारा से दूर जा चुकी थी जिसके कारण ग्रेट लीप हो पाई थी। 1962 में, पार्टी ने कई सम्मेलनों का आयोजन किया और जिन अपदस्थ कॉमरेडों ने ग्रेट लीप के बाद माओ की आलोचना की थी उनमें से अधिकांश का पुनर्वास किया। घटना पर फिर से चर्चा की गई, काफ़ी आत्म-आलोचना के साथ, और समकालीन सरकार ने इसे "हमारे देश और लोगों के लिए गंभीर [क्षति]" बताया और माओ की अंध-भक्ति करने को दोषी ठहराया।
विशेष रूप से, जनवरी - फरवरी 1962 में सेवन थाउज़ेंड कैडर्ससम्मेलन में, माओ ने आत्म-आलोचना की और लोकतांत्रिक केंद्रीयवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता फिर से पुष्ट की। इसके बाद के वर्षों में, माओ सरकार के संचालन से ज्यादातर दूर हो गए, जिससे नीति-निर्माण काफी हद तक लियु शाओची और डेंग ज़ियाओपिंग पर छोड़ दिया। माओवादी विचारधारा अब कम्युनिस्ट पार्टी के हाशिए पर पहुँच गई, और 1966 तक हाशिए पर ही रही जब माओ ने राजनीतिक वापसी को चिह्नित करते हुए सांस्कृतिक क्रांति शुरू की।
यह भी देखें
रियाज़ान चमत्कार
सांस्कृतिक क्रांति
ब्लैक बुक ऑफ़ कम्युनिज़्म
नई भूमि अभियान, सोवियत संघ में समकालीन कार्यक्रम
माओ ज़ेडॉन्ग के तहत जमींदारों की सामूहिक हत्याएं
संदर्भ
यह लेख यूनाइटेड स्टेट्स लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस कंट्री स्टडीजसे सार्वजनिक डोमेनपाठ को शामिल करता है।- चीन
ग्रंथ सूची और आगे की पढ़ाई
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