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बालमणि अम्मा की काव्यगत विशेषताएँ
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नालापत बालमणि अम्मा जून 2025
जून 2025
right|thumb|200px|बालमणि अम्मा की पेंटिंग
बालमणि अम्मा केरल की राष्ट्रवादी कवयित्री थीं। उन्होंने राष्ट्रीय उद्बोधन वाली कविताओं की रचना की। वे मुख्यतः वात्सल्य, ममता, मानवता के कोमल भाव की कवयित्री के रूप में विख्यात हैं। फिर भी स्वतंत्रतारूपी दीपक की उष्ण लौ से भी वे अछूती नहीं रहीं। सन् 1929-39 के बीच लिखी उनकी कविताओं में देशभक्ति, गाँधी का प्रभाव, स्वतंत्रता की चाह स्पष्ट परिलक्षित होती है। इसके बाद भी उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहीं। अपने सृजन से वे भारतीय आजादी में अनोखा कार्य किया। टंडन विशण नारायण सरस्वती सम्मान, पुरस्कृत रचनाकार का वक्तव्य http://books.google.co.in/books?id=I0kNE8X02eMC&pg=RA1-PA27&lpg=RA1-PA27&dq=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4+%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE&source=bl&ots=tkrp17qfcZ&sig=rqzDUz2Du2ux_FDb-scFyXo3EL0&hl=hi&sa=X&ei=CMeRU9OXCIa8uASMj4LoDw&ved=0CD4Q6AEwBQ#v=onepage&q=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4%20%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE&f=false 6 जून 2014 https://web.archive.org/web/20140606222849/http://books.google.co.in/books?id=I0kNE8X02eMC&pg=RA1-PA27&lpg=RA1-PA27&dq=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4+%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE&source=bl&ots=tkrp17qfcZ&sig=rqzDUz2Du2ux_FDb-scFyXo3EL0&hl=hi&sa=X&ei=CMeRU9OXCIa8uASMj4LoDw&ved=0CD4Q6AEwBQ#v=onepage&q=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4%20%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE&f=false 6 जून 2014 live
वर्ष 1928 में अम्मा का विवाह वी॰ एम॰ नायर के साथ हुआ और वे उनके साथ कलकत्ता में रहने लगीं। कलकत्ता- वास के अनुभवों ने उनकी काव्य चेतना को प्रभावित किया। अपनी प्रथम प्रकाशित और चर्चित कविता 'कलकत्ते का काला कुटिया'उन्होने अपने पतिदेव के अनुरोध पर लिखी थी, जबकि अंतररतमा की प्रेरणा से लिखी गई उनकी पहली कविता 'मातृचुंबन' है। उनकी प्रारंभिक कविताओं में से एक 'गौरैया' शीर्षक कविता उस दौर में अत्यंत लोकप्रिय हुई। इसे केरल राज्य की पाठ्य-पुस्तकों में सम्मिलित किया गया। बाद में उन्होने गर्भधारण, प्रसव और शिशु पोषण के स्त्रीजनित अनुभवों को अपनी कविताओं में पिरोया। उनकी प्रारंभिक कविताओं में से एक 'गौरैया' शीर्षक कविता उस दौर में अत्यंत लोकप्रिय हुई। इसे केरल राज्य की पाठ्य-पुस्तकों में सम्मिलित किया गया। बाद में उन्होने गर्भधारण, प्रसव और शिशु पोषण के स्त्रीजनित अनुभवों को अपनी कविताओं में पिरोया। इसके एक दशक बाद उन्होने घर और परिवार की सीमाओं से निकलकर अध्यात्मिकता के क्षेत्र में दस्तक दी। तब तक यह क्षेत्र उनके लिए अपरिचित जैसा था। थियोसाफ़ी का प्रारंभिक ज्ञान उनके मामा से उन्हें मिला। हिन्दू शास्त्रों का सहज ज्ञान उन्हें पहले से ही था। इसलिए थियोसाफ़ी और हिन्दू मनीषा का संयोजित स्वरूप ही उनके विचारों के रूप में लेखन में उतरा।
अम्मा के दो दर्जन से अधिक काव्य-संकलन, कई गद्य-संकलन और अनुवाद प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने छोटी अवस्था से ही कविताएँ लिखना शुरू कर दिया था। उनकी पहला कविता संग्रह "कूप्पुकई" 1930 में प्रकाशित हुआ था। उन्हें सर्वप्रथम कोचीन ब्रिटिश राज के पूर्व शासक राम वर्मा परीक्षित थंपूरन के द्वारा "साहित्य निपुण पुरस्कारम" प्रदान किया गया। 1987 में प्रकाशित "निवेद्यम" उनकी कविताओं का चर्चित संग्रह है। कवि एन॰ एन॰ मेनन की मौत पर शोकगीत के रूप में उनका एक संग्रह "लोकांठरांगलील" नाम से आया था। A prolific writer एक विपुल लेखिका en http://hindu.com/2004/09/30/stories/2004093011150400.htm 23 अप्रैल 2014 द हिन्दू 30 सितम्बर 2004 https://web.archive.org/web/20050128165457/http://www.hindu.com/2004/09/30/stories/2004093011150400.htm 28 जनवरी 2005 dead
उनकी कविताएँ दार्शनिक विचारों एवं मानवता के प्रति अगाध प्रेम की अभिव्यक्ति होती हैं। बच्चों के प्रति प्रेम-पगी कविताओं के कारण मलयालम-कविता में वे "अम्मा" और "दादी" के नाम से समादृत हैं। Balamaniamma बालमणि अम्मा http://www.manoramaonline.com/advt//Lifestyle/Poetry_Day/memory_06.htm मलयाला मनोरमा मलयालम 23 अप्रैल 2014 https://archive.today/20130128032442/http://www.manoramaonline.com/advt//Lifestyle/Poetry_Day/memory_06.htm 28 जनवरी 2013 dead केरल साहित्य अकादमी, अखितम अच्युतन नंबूथरी में एक यादगार वक्तव्य के दौरान उन्हें "मानव महिमा के नबी" के रूप में वर्णित किया गया था और कविताओं की प्रेरणास्त्रोत कहा गया था। Balamaniyamma remembered बालमणि अम्मा स्मृति शेष en http://www.hindu.com/2004/10/08/stories/2004100811520400.htm 23 अप्रैल 2014 द हिन्दू 8 अक्टूबर 2004 https://web.archive.org/web/20070706015438/http://www.hindu.com/2004/10/08/stories/2004100811520400.htm 6 जुलाई 2007 live उन्हें 1987 में भारत सरकार ने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। जॉर्ज के॰एम॰ Western influence on Malayalam language and literature मलयालम भाषा और साहित्य पर पश्चिमी प्रभाव en 1998 साहित्य अकादमी 978-81-260-0413-3 132 http://books.google.co.in/books?id=MZqqyxVkufQC 1 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140502032920/http://books.google.co.in/books?id=MZqqyxVkufQC 2 मई 2014 live Balamani Amma no more बालमणि अम्मा नहीं रहीं en http://archive.is86ZwD#selection-809.0-809.21 3 मई 2014 द इंडियन एक्स्प्रेस 30 सितम्बर 2004 जून 2020 InternetArchiveBot
इन्हें भी देखें
right 250px बालमणि अम्मा सृजन के दौरान फ्लिकर डॉट कॉम
नालापत बालमणि अम्मा
मलयालम साहित्य का इतिहास
मलयालम साहित्य का इतिहास:परमेश्वरम नायर
टीका-टिप्पणी
बाहरी कड़ियाँ
Balamani Amma नालापत बालमणि अम्मा
नालापत बालमणि अम्मा
सरस्वती सम्मान: के॰ के॰ बिड़ला फाउंडेशन का भारतीय कविता सम्मान, गद्यकोश (हिन्दी)
सरस्वती सम्मान, भारत कोश (हिन्दी)
स्पृचुअलिज़्म, मैटेरियलिज़्म फ्यूज इन बालमणि अम्माज पोयम (अँग्रेजी में)
बालमणि अम्मा की कविता: माँ भी कुछ नहीं जानती-सच्चा शरणम् (हिन्दी अनुवाद)
मनोरमा ऑनलाइन में नालापत बालमणि अम्मा की प्रोफाइल(मलयालम में)
श्रेणी:भारतीय महिला साहित्यकार
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श्रेणी:बालमणि अम्मा