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गुजरी महल (हिसार)

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दिसम्बर 2017 दिसम्बर 2017 हिसार का गुजरी महल प्रेम की उस निशानी को दर्शाता है, जिसमें प्रेम के वशीभूत होकर दिल्ली के बादशाह फिरोजशाह तुगलक ने अपने दरबार को दिल्ली से हिसार में लाने को मजबूर कर दिया था. फिरोजशाह तुगलक ने गुजरी के प्रेम में सन 1354 में गुजरी महल का निर्माण करवाया थाhttps://www.etvbharat.com/hindi/haryana/state/hisar/gujari-mahal-of-hisar-built-by-firoz-shah-tughlaq-is-witness-of-love-story/haryana20220310164527978 फिरोज शाह तुगलक की प्रेम निशानी है हिसार का गुजरी महल, जानें इसका इतिहास Bharat E. T. V. 2022-03-10 ETV Bharat News hi 2025-06-29 हरियाणा के हिसार में स्थित गुजरी महल की खोज फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने की थी। इसको 8 वी सदी का माना जाता है।सोनू शर्मा म्हारा हरियाणा प्रभात प्रकाशन https://www.google.co.in/books/edition/MAHARA_HARYANA/57OODwAAQBAJ?q=%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%B2&gbpv=1#f 19 जनवरी 2021 इस महल को 1354 ई. मे खोजा गया था। यह फिरोज शाह महल का भाग है। हिसार शहर एक दुर्ग के अंदर एक दीवारों के बंदोबस्त के बीच बसा था जिसमें चार दरवाजे थे, दिल्ली गेट, मोरी गेट, नागौरी गेट और तलाकी गेट। महल में एक मस्जिद है जिसका नाम 'लाट की मस्जिद' है।इतिहास हिसार https://hisar.gov.in/hi/%E0%A4%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B8/ hisar.gov.in 19 मई 2022 यह लगभग 20 फुट ऊंची बलुआ पत्थर के स्तंभों से बनाई गयी है। ध्यातव्य है कि हिसार को फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ के समय से 'हिसार' कहा जाने लगा, क्योंकि उसने यहां हिसार-ए-फ़िरोज़ा नामक दुर्ग बनवाया था। गुजरी महल की भव्यता महज़ दो साल में बनकर तैयार हो गया। गुजरी महल में काला पत्थर इस्तेमाल किया गया है। महल की स्थापना के लिए फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने क़िला बनवाया। दीवान-ए-आम के पूर्वी हिस्से में स्थित कोठी फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ का महल बताई जाती है। इस इमारत का निचला हिस्सा अब भी महल-सा दिखता है। फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ के महल की बगल में लाट की मस्जिद है। अस्सी फ़ीट लंबे और 29 फ़ीट चौड़े इस दीवान-ए-आम में सुल्तान कचहरी लगाता था। महल के खंडहर इस बात की निशानदेही करते हैं कि कभी यह विशाल और भव्य इमारत रही होगी। फ़िरोज़ शाह तुगलक का परिचय फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ दिल्ली सल्तनत में तुग़लक़ वंश का शासक था। फ़िरोजशाह तुग़लक़ का जन्म १३०९ को हुआ।उसका शासन १३५१ से १३८८ तक रहा। उसने अपने शासनकाल में ही चांदी के सिक्के चलाये। वह मुहम्मद तुग़लक़ का चचेरा भाई एवं सिपहसलार 'रजब' का पुत्र था।https://books.google.am/books?id=O0oPIo9TXKcC&pg=PA37&dq=bhati+rajput+princess&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwiI86Te8OHvAhUO-qQKHazACi0Q6AEwAXoECAIQAw#v=onepage&q=bhati%20rajput%20princess&f=false A History of Jaipur: C. 1503-1938 Sarkar Jadunath Orient BlackSwan (August 20, 2018) August 20, 2018 9788125003335 464 मुहम्मद तुग़लक़ की मुत्यु के बाद 23 मार्च 1351 को फ़िरोज़ तुग़लक़ का राज्याभिषक थट्टा के निकट हुआ। पुनः फ़िरोज़ का राज्याभिषेक दिल्ली में अगस्त, 1351 में हुआ। सुल्तान बनने के बाद फ़िरोज़शाह तुग़लक़ ने सभी क़र्ज़े माफ कर दिए, जिसमें 'सोंधर ऋण' भी शामिल था, जो मुहम्मद तुग़लक़ के समय किसानों को दिया गया था। फ़िरोज शाह कट्टर सुन्नी धर्मान्ध मुस्लिम था। श्रेणी:महल सन्दर्भ