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भाषा-द्वैत
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अंगूठाकार|भारत के हापुड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन में हिन्दी और उर्दू भाषी बोर्ड, दोनों जो हिन्दुस्तानी के संस्करण हैं।https://books.google.com/books?id=89aPZJ3qCD4C&pg=PA316 Language in South Asia Kachru Braj B. Kachru Yamuna Sridhar S. N. 2008 Cambridge University Press 978-0-521-78141-1 316 en English, the language of the despised colonial ruler, obviously was made unacceptable, and there emerged a general consensus that the national language of free and independent India would be "Hindustani," meaning Hindi/Urdu, essentially digraphic variants of the same spoken language, cf. C. King (1994) and R. King (2001). Hindi is written in Devanagari script and Urdu in a derivative of the Persian script, itself a derivative of Arabic.https://books.google.com/books?id=PTMsAwAAQBAJ&pg=PA52 Working with Written Discourse Cameron Deborah Panović Ivan 2014 Sage Publishing 978-1-4739-0436-1 52 en Hindi and Urdu, two major languages of the Indian subcontinent, have also featured frequently in discussions of digraphia, and have been described as varieties of one language, differentiated above all by the scripts normally used to write them. इसे भाषा-त्रैत माना जाता है।
भाषाविज्ञान में, भाषा-द्वैत या समष्टि द्विभाषिता या द्विभाषारूपिता उस दशा का नाम है जिसमें एक ही भाषा-समुदाय दो अलग तरह की भाषाओं का व्यवहार करता है। सामान्य तौर पर प्रतिदिन बोली जाने वाली 'निम्न' भाषा के अलावा एक दूसरी 'अतिपरिमार्जित' ('उच्च भाषा' ) का प्रयोग किया जाता है। 'उच्च भाषा' का प्रयोग प्रायः साहित्य, औपचारिक शिक्षा, आदि में होता है किन्तु सामान्य बातचीत में नहीं।
ऐसा मुमकिन है की जो 'उच्च' भाषा है वो 'निम्न' भाषा की ही प्राचीन संस्करण हो ( ऐसा मध्यकालीन यूरोप में देखा गया है, वहाँ लातिन का इस्तेमाल औपचारिक चीज़ों के लिया होता था जबकि लोगों की बोलचाल की भाषा इस से काफ़ी अलग थी)। ऐसा भी हो सकता है की जो दो भाषाओँ का इस्तेमाल हो रहा है वो बिकुल हीं अलग हो। या फिर ऐसा भी मुमकिन है की दो अलग अलग भाषाओँ का इस्तेमाल हो रहा हो मगर ये दोनों ही भाषाएँ एक जैसी हो (चीनी भाषाओँ में ऐसा देखा गया है)।
भाषा द्वैत के प्रकार
चार्ल्स ऐ. फर्गूसन के अनुसार भाषा द्वैत अकसर ही सम्बंधित भाषाओं के आस पास पाया जाता है, जिसमे कि एक भाषा को निम्न माना जाता है और दूसरे को उच्च श्रेणी का माना जाता है। लोग उच्च भाषा को प्रतिष्ठा के साथ जोड़ कर देखते हैं। फर्गूसन ने अरबी भाषा को उद्धरण के रूप में लिया और यह कहा कि," अक्सर ही उच्च प्रकार की अरबी बोलने वाले लोग यह कहते हैं कि उन्हें निम्न प्रकार की ज़बान नहीं आती, जबकि सच यह है की लोग अपनी बोलचाल में और रोज़मर्रा के कामों के लिए निम्न प्रकार का ही इस्तेमाल करते हैं।
जोशुआ फ़िशमैन ने अपने अनुसंधान में यह बोला की ये ज़रूरी नहीं है की जो दो भाषाएँ हैं वो एक दूसरे से सम्बंधित हो, ऐसा भी हो ये दोनों भाषायें एक दूसरे से बिलकुल अलग हो इस का एक उदाहरण अलज़ास में मिलता है जहाँ पर लोग बोलचाल के लिए अलज़ासी भाषा का इस्तेमाल करते है जबकि बाकि सभी औपचारिक कामों के लिए फ़्रांसीसी का इस्तेमाल करते हैं।
बहुत से अफ़्रीकी देशों में आज भी फ़्रांसीसी का इस्तेमाल सभी औपचारिक कार्यों में होता है और लोगों की आम भाषा इस से अलग है। जैसे की सेनेगल में वार्फ भाषा अनौपचारिक रूप से इस्तेमाल की जाती है जबकि फ़्रांसीसी वहां की औपचारिक भाषा है। यही चीज़ हम नाइजीरिया में भी देख सकते हैं, जहाँ लोग अंग्रेज़ी का इस्तेमाल सभी औपचारिक कार्यों में करते हैं। यह भी देखा गया है की अगर दो लोग, जो की अलग अलग निम्न भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जब मिलते हैं तो वो अनौपचारिक बातचीत के लिए भी उच्च भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
कुछ जगहों देखा गया है की महिलाएं और पुरुष अलग अलग भाषा का इस्तेमाल करते हैं, यह हम घाना में देख सकते हैं। आज कल महिलाएं रूढ़िवादी सोच को बदलने की लिए पुरुषों की भाषा का इस्तेमाल करने लगीं हैं। इस प्रकार के भाषा द्वैत को लिंग आधारित भाषा द्वैत कहते हैं।
सन्दर्भ
श्रेणी:भाषा
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