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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ज़ाहिद हसन

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ज़ाहिद हसन (1918 – 27 मार्च 1988), जिन्हें आमतौर पर मौलाना ज़ाहिद हसन के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय इस्लामी विद्वान, सूफ़ी मार्गदर्शक और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक सहभागी थे। 1946 से 1952 तक उन्होंने देवबंद निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा सदस्य (MLA) के रूप में कार्य किया। वे दारुल उलूम देवबंद से स्नातक थे और हुसैन अहमद मदनी के शिष्य रहे। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के सक्रिय सदस्य के रूप में लगभग पाँच दशकों तक धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्रों में कार्य किया। उनके प्रयासों से क्षेत्र में चालीस से अधिक मदरसों की स्थापना हुई। == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == ज़ाहिद हसन का जन्म 1918 में इब्राहीमी गाँव, सरसावा, सहारनपुर ज़िला, उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध) में हुआ था। वे गुज्जर समुदाय की खटाना शाखा से संबंधित थे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा नानौता के पास आहीबा गाँव और सरसावा में सैयद शेर शाह हरीपुरी से फ़ारसी और क़ुरआनी तिलावत में प्राप्त की। 1934 में उन्होंने दारुल उलूम देवबंद में प्रवेश लिया और 1941 (1360 हिजरी) में स्नातक किया। वहां उन्होंने हुसैन अहमद मदनी, मियाँ असग़र हुसैन देबन्दी, मुहम्मद इब्राहीम बलियावी, और मुहम्मद शफी देवबन्दी जैसे विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की। स्नातक के बाद, उन्होंने कुछ समय अहमद अली लाहोरी से भी लाभ प्राप्त किया। == करियर == === अध्यापन === हसन ने अपना शिक्षण कार्य सहारनपुर के दमझेड़ा गाँव में मदरसा सिराजुल उलूम से शुरू किया। 1964 में उन्होंने उसी गाँव में एक नई शाखा स्थापित की, जहाँ उन्होंने अरबी, फ़ारसी और मिश्कातुल मसाबीह जैसी इस्लामी किताबें पढ़ाईं। 1978 के बाद उन्होंने बढ़ती सामाजिक जिम्मेदारियों के कारण नियमित शिक्षण से विराम लिया। वे गंगोह स्थित जामिया अहमदुल उलूम के आजीवन संरक्षक भी रहे। === सूफ़ी संबंध === स्नातक के बाद, हसन ने हुसैन अहमद मदनी के हाथ पर बैअत की और बाद में अब्दुल क़ादिर रायपुरी से खि़लाफ़त प्राप्त की। उन्हें मुहम्मद ज़करिया कांधलवी और असअद मदनी से भी इजाज़त प्राप्त थी। === सामाजिक और राजनीतिक जीवन === हसन जमीयत उलेमा-ए-हिन्द से चार दशकों से अधिक समय तक जुड़े रहे और सहारनपुर ज़िले की इकाई के उपाध्यक्ष और फिर अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने सहारनपुर में एक स्थानीय शरीअत पंचायती संस्था भी स्थापित की। 1946 के भारतीय प्रांतीय चुनाव में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से देवबंद से विधायक चुने गए। उन्होंने 1977 और 1980 में लोकसभा चुनाव भी लड़े, लेकिन विजयी नहीं हुए। उनके प्रयासों से क्षेत्र में चालीस से अधिक मदरसों की स्थापना हुई। == सम्मान == 2023 में, गंगोह स्थित जामिया अहमदुल उलूम की ओर से उनके नाम पर एक बालिका कॉलेज मौलाना ज़ाहिद हसन गर्ल्स इंटर कॉलेज की स्थापना की गई। == निधन == 27 मार्च 1988 (8 शा‘बान 1408 हिजरी) को एक शैक्षणिक दौरे से लौटते समय घोड़े से गिरने के कारण उन्हें गंभीर सिर की चोट लगी। उन्हें सहारनपुर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका निधन हो गया। उन्हें उनके पैतृक गांव में दफन किया गया। उनके पीछे दो बेटियाँ और पाँच बेटे—मुहम्मद आरिफ क़ासमी, मुहम्मद तय्यब कासमी, मुहम्मद अशफ़ाक़ क़ासमी, मुहम्मद साजिद ज़ाहिदी, और मुहम्मद असजद हुसैनी क़ासमी—छूटे। == सन्दर्भ ==