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सुखसागर
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सुखसागर, मुंशी सदासुखलाल द्वारा रचित एक हिन्दी ग्रन्थ है। यह हिंदी की प्रारम्भिक कृतियों में से एक है। खड़ीबोली गद्य को बढ़ने हेतु सदासुखलाल का महत्वपूर्ण स्थान है। वस्तुतः सुखसागर श्रीमद्भागवत महापुराण के दसवें स्कन्ध का एक लोकप्रिय हिंदी अनुवाद है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और मोक्ष के मार्ग का वर्णन है, जिसे शुकदेव जी ने महाराज परीक्षित को सुनाया था।
सुखसागर में भक्ति की प्रधानता है। अतः यत्र-तत्र भगवान श्रीकृष्ण को भगवान् सिद्ध करते हुए उनकी भक्ति को ही परम लक्ष्य तथा मोक्ष प्राप्ति का मुख्य साधन माना गया है।
व्यासपुत्र शुकदेव जी द्वारा महाराज परीक्षित को सुनाई गई मोक्षदायी पावन कथा है सुख सागर। ध्यातव्य है कि श्रीमद्भागवत महापुराण मूलरूप से संस्कृत में लिखा गया है। इसीलिए हिंदी भाषी जिज्ञासुओं के लिए विद्वान महापुरुषों ने ‘शुक सागर’ की रचना की। यही ‘शुक सागर’ लोगों के बीच ‘सुख सागर के रूप में प्रसिद्ध हो गया। इसकी भाषा-शैली अत्यंत साधारण है। कृष्ण भक्तों के लिए यह पुस्तक आराधना है।
इन्हें भी देखें
प्रेमसागर -- जो खड़ी बोली का एक अन्य प्ररम्भिक ग्रन्थ है। (लल्लू लाल द्वारा रचित)
बाहरी कड़ियाँ
सुखसागर (माखनलाल खत्री, पण्डित जोखूराम तथा जगन्नाथ प्रसाद एवं अन्य द्वारा १९५१ में श्रीमदभागवत के बारहों स्कन्धों का हिन्दी अनुवाद, सन १९५१ में प्रकाशित)
सुखसागर (१९२३ में प्रकाशित, भागवत के बारहों स्कन्धों का अनुवाद)
सुखसागर (माखनलाल खत्री द्वारा रचित)
सुखसागर (१९२७ संस्करण, नवलकिशोर प्रेस) - डिजिटल आर्काइव प्रति
श्रेणी:हिन्दी ग्रन्थ