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411 समाचार
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पूर्वांचल

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पूर्वांचल, भारत का एक भौगोलिक क्षेत्र है जो उत्तर प्रदेश और बिहार का ऐसा क्षेत्र जो भोजपुरी भाषित हैं। भोजपुरी क्षेत्र का एक उपभाग है।A Arya Facts उत्तर प्रदेश की भाषाएँ Languages of UP #uttarpradesh #avadhi #lokgeet 2022-12-08 https://www.youtube.com/watch?v=ldvCVBPQkPk&feature=youtu.be 2025-01-14 यह उत्तर में नेपाल, पूर्व में बिहार में भी पड़ता है, दक्षिण मे मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र और पश्चिम मे उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र द्वारा घिरा है। इसे एक अलग राज्य बनाने के लिए लंबे समय से राजनीतिक मांग उठती रही है। वर्तमान में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश विधानसभा में 117 विधायकों द्वारा होता है तो वहीं इस क्षेत्र से 23 लोकसभा सदस्य चुने जाते हैं। पूर्वांचल https://www.purvanchalnewsprint.co.in/2024/07/blog-post_63.html?m=1 पूर्वांचल की बात : पूर्वांचल ही नहीं, भोजपुरी भाषा भी उपेक्षा की शिकार www.purvanchalnewsprint.co.in 2024-10-05 भारतीय-गंगा मैदान पर स्थित है और बिहार के साथ यह दुनिया में सबसे अधिक घनी आबादी वाला क्षेत्र है। उत्तर प्रदेश के आसपास के जिलों की तुलना में मिट्टी की समृद्ध गुणवत्ता और उच्च केंचुआ घनत्व के कारण कृषि के लिए अनुकूल है। 1991 में उत्तर प्रदेश की सरकार ने पूर्वांचल विकास निधि की स्थापना की जिसका उद्देश्य था क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं के लिये धन इकट्ठा करना जिससे भविष्य में संतुलित विकास के जरिए स्थानीय जरूरतों को पूरा करते हुए क्षेत्रीय असमानताओं का निवारण हो सके। लेकिन आजादी के 70 सालों बाद तक भी नहीं हो सका। सिर्फ पूर्वांचल के पिछड़ेपन के नाम पर वोटों की सियासत की जा रही है।https://www.aajtak.in/india/uttar-pradesh/video/politics-of-purvanchal-important-for-political-parties-up-elections-uttar-pradesh-1356325-2021-11-13 UP Election में हर पार्टी के लिए इतनी अहम क्यों हैं पूर्वांचल की स‍ियासत, जान‍िए आज तक hi 2021-11-15 परिचय पूर्वांचल उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में से एक है। इसकी वजह जाति आधारित राजनीति तथा एक विशाल जनसंख्या है। पूर्वांचल के प्रमुख मुद्दों मे बुनियादी सुविधाओं की कमी, उचित ग्रामीण शिक्षा और रोजगार का अभाव, कानून व्यवस्था को चिह्नित किया गया है। पूर्वांचल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के नायक मंगल पांडे इसी क्षेत्र के बलिया के मूल निवासी थे। भदोही एशिया में कालीन निर्माण में प्रमुख खिलाड़ी रहे हैं। प्रयागराज इसका प्रमुख और बड़ा शहर है। जिला वाराणसी भारतीय पर्यटन और विशेष रूप से साड़ी के निर्माण का केंद्र है। सोनभद्र पूर्वांचल का एक जिला, ७०००MW बिजली का उत्पादन करता है, जो उत्तर प्रदेश के राज्य में कुल बिजली उत्पादन के लगभग आधा है और भारत क सबसे बड़ा और केवल चूना पत्थर की प्रमुख खदान है। वाराणसी और कुशीनगर कुल उत्तर प्रदेश में आने के पर्यटकों के ६५% से अधिक लोगो को आकर्षित करता है। मिर्जापुर और सोनभद्र प्राकृतिक संसाधनों के साथ बहुत समृद्ध हैं। सब के बावजूद पूर्वांचल अभी भी राज्य में सबसे पिछड़े क्षेत्रो मे से एक है। जिसका मुख्य कारण राज्य सरकार और केन्द्र सरकार द्वारा उचित ध्यान की कमी है। वाराणसी को पूर्वांचल की राजधानी कहा जाता है। पूर्वांचल के जिले गोण्डा गोंडा है, यह जिला ब्रिटिश राज में गोरखपुर से जुड़ा था बाद में अलग कर दिया गया। गोंडा नजदीकी जिले बस्ती , बलरामपुर ,श्रावस्ती और अयोध्या है। यह जिला देवीपाटनमंडल में आता है। वाराणसी वाराणसी शहर उत्तरी भारत की मध्य गंगा घाटी में, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर गंगा नदी के बायीं ओर के वक्राकार तट पर स्थित है। यहां वाराणसी जिले का मुख्यालय भी स्थित है। वाराणसी शहरी क्षेत्र — सात शहरी उप-इकाइयों का समूह है और ये ११२.२६ वर्ग कि॰मी॰ (लगभग ४३ वर्ग मील) के क्षेत्र फैला हुआ है।[49] शहरी क्षेत्र का विस्तार (८२°५६’ पूर्व) - (८३°०३’ पूर्व) एवं (२५°१४’ उत्तर) - (२५°२३.५’ उत्तर) के बीच है।[49] उत्तरी भारत के गांगेय मैदान में बसे इस क्षेत्र की भूमि पुराने समय में गंगा नदी में आती रहीं बाढ़ के कारण उपत्यका रही है। वाराणसी में विभिन्न कुटीर उद्योग कार्यरत हैं, जिनमें बनारसी रेशमी साड़ी, कपड़ा उद्योग, कालीन उद्योग एवं हस्तशिल्प प्रमुख हैं। बनारसी पान विश्वप्रसिद्ध है और इसके साथ ही यहां का कलाकंद भी मशहूर है। बनारसी रेशम विश्व भर में अपनी महीनता एवं मुलायमपन के लिये प्रसिद्ध है। बनारसी रेशमी साड़ियों पर बारीक डिज़ाइन और ज़री का काम चार चांद लगाते हैं और साड़ी की शोभा बढ़ाते हैं। इस कारण ही ये साड़ियां वर्षों से सभी पारंपरिक उत्सवों एवं विवाह आदि समारोहों में पहनी जाती रही हैं। कुछ समय पूर्व तक ज़री में शुद्ध सोने का काम हुआ करता था। वाराणसी के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (आई.सी.एस.ई), केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस.ई) या उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यू.पी.बोर्ड) से सहबद्ध हैं। जौनपुर अंगूठाकार|226x226पिक्सेल|जौनपुर, की शीतला माता चौकि‍यां धाम मंदिर जौनपुर जिला वाराणसी प्रभाग के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित है। इसकी भूमिक्षेत्र २४.२४०N से २६.१२०N अक्षांश और ८२.७०E और ८३.५०E देशांतर के बीच फैली हुई है। गोमती और सई मुख्य नदियाँ हैं। इनके अलावा, वरुण, पिली और मयुर आदि छोटी नदियाँ हैं। मिट्टी मुख्य रूप से रेतीली, चिकनी बलुई है। जिले मे खनिजों की कमी है। जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल ४०३८ किमी२ है। जौनपुर जिला की वास्तविक जनसंख्या ४,४७६,०७२ (भारतीय जनगणना २०११) है। जिनमे २,२१७,६३५ पुरुष तथा २,२५८,४३७ महिलाएँ है। जिले का आर्थिक विकास मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। भदोही अंगूठाकार|भदोही के गोपीगंज में कालीन का प्रदर्शन करता एक विक्रेता भदोही, उत्तर प्रदेश का एक जिला है। यह कालीन निर्माण के लिये प्रसिद्ध है। उत्‍तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के प्रमुख जनपद वाराणसी से 1996 में बना भदोही जिला आम जन के द्वारा 'कालीन नगरी' नाम से जाना जाता है। इलाहाबाद, जौनपुर, वाराणसी, मीरजापुर की सीमाओं को स्‍पर्श करता यह जिला अपने कालीन उद्योग के कारण विश्‍व में अत्‍यन्‍त प्रसिद्ध है। भारत के भौगोलिक मानचित्र पर यह जिला मध्‍य गंगा घाटी में 25.09 अक्षांश उत्‍तरी से 25.32 उत्‍तरी अक्षांश तक तथा 82.45 देशान्‍तर पूर्वी तक फैला है। 1056 वर्ग कि॰मी॰ क्षेत्रफल वाले इस जिले की जनसंख्‍या 10,77630 है। ज्ञानपुर, औराई, भदोही तीन तहसील मुख्‍यालयों के अधीन डीघ, अभोली, सुरियावां, ज्ञानपुर, औराई और भदोही विकास खण्‍ड कार्यालय है। इलाहाबाद की 2 विधानसभा सीटें हंडिया और प्रतापपुर के साथ मिलकर संसदीय क्षेत्र बनाने वाले इस जनपद में 3 विधान सभा क्षेत्र ज्ञानपुर,औराई और भदोही हैं। इस जनपद का मुख्‍य व्‍यवसाय कालीन है। गाज़ीपुर गाजीपुर, पूर्वांचल का पुराना जिला एवं नगर है। इसका प्राचीन नाम गाधिपुरी था जो कि लगभग सन १३३० में सैय्यद मसूद ग़ाज़ी नामक एक मुल्स्लिम शासक द्वारा बदल दिया गया। गाजीपुर, अंग्रेजों द्वारा १८२० में स्थापित, विश्व में सबसे बड़े अफीम के कारखाने के लिए प्रख्यात है। यहाँ हथकरघा तथा इत्र उद्योग भी है। ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड कार्नवालिस की मृत्यु यहीं हुई थी तथा वे यहीं दफन हैं। शहर उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा के बहुत नजदीक स्थित है। यहाँ की स्थानीय भाषा भोजपुरी है। यह पवित्र शहर बनारस के ७० की मी पूर्व में स्थित है । गोरखपुर गोरखपुर, पूर्वांचल का प्रमुख जिला एवं नगर है। यह गोरखपुर जिला, और गोरखपुर कमीशनरी तथा पूर्वोत्तर रेलवे का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह नगर गीता प्रेस एवं गोरखनाथ मन्दिर के लिये विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह महान संत परमहंस योगानन्द का भी जन्म स्थान है। शहर में भी कई ऐतिहासिक बौद्ध स्थल है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर पूर्वाचल का प्रसिद्ध विश्वविद्यालय है। यहां पर 4 विश्विद्यालय हैं। यहां पर 2 मेडिकल कॉलेज भी हैं। पिछले दिनों गोरखपुर एम्स का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कर कमलों से हुआ। अब गोरखपुर का उर्वरक कारखाना भी चालू हो गया है। यहां पर एयरफोर्स बेस स्टेशन भी है,जो कि 1963 में बनाया गया था। ये 6 सेंतुरारी में 16 जनपद में से एक था जिसे माला के नाम से जानते थे।चौरी चौरा कांड यही पर हुआ था। यहां पर मिया साहेब का इमामबाड़ा भी है, जिसमे सोने और चांदी की ताझिया रखी हुई है। इमामबाड़े में एक धुनि है जो कई दसको से जल रही। कुशीनगर thumb|महापरिनिर्वाण प्राप्त बुद्ध की छवि, कुशीनगर कुशीनगर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला एवं एक एक छोटा सा कस्बा है। इस जनपद का मुख्यालय कुशीनगर से कोई १५ किमी दूर पडरौना में स्थित है। कुशीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग २८ पर गोरखपुर से कोई ५० किमी पूरब में स्थित है। महात्मा बुद्ध का निर्वाण यहीं हुआ था। यहाँ अनेक सुन्दर बौद्ध मन्दिर हैं। इस कारण से यह एक अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भी है जहाँ मुख्यत: विश्व भर के बौद्ध तीर्थयात्री भ्रमण के लिये आते हैं। कुशीनगर कस्बे के और पूरब बढ़ने पर लगभग २० किमी बाद बिहार राज्य आरम्भ हो जाता है। हाल में कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी बना है, जिसका लोकार्पण भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 अक्टूबर, 2021 को किया। देवरिया thumb|श्याम मंदिर, देवरिया देवरिया भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक शहर एवं जिला मुख्यालय है। देवरिया जनपद में मुख्य रूप से हिन्दी भाषा बोली जाती है। देवरिया जनपद की कुल जनसंख्या की लगभग ९६ प्रतिशत जनता हिन्दी, लगभग ३ प्रतिशत जनता उर्दू और एक प्रतिशत जनता के बातचीत का माध्यम अन्य भाषाएँ हैं। बोली की बात करें तो ग्रामीण जनता के साथ-साथ अधिकांश शहरी जनता भी प्रेम की बोली भोजपुरी बोलती है। कुल जनसंख्या की दृष्टि से इस जनपद में लगभग चौरासी प्रतिशत हिन्दू, लगभग पंद्रह प्रतिशत मुस्लिम और एक प्रतिशत अन्य धर्म को मानने वाले हैं। आज़मगढ़ आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में से एक महत्वपूर्ण जिला है । जो सरयू नदी के दक्षिण और गंगा नदी के उत्तर में तमसा नदी के किनारे बसा है । महाकाब्यों के अनुसार तमसा नदी को भगवान श्रीराम पार करके चित्रकूट की तरफ गयें थें। प्रथम पंचवर्षी योजना यहां के लिए बहुत ही लाभकारी रही थी। यहां पर अवधि और भोजपुरी भांषाओं का संगम है।उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में से एक, आजमगढ़, अपने उत्तर-पूर्वी हिस्से को छोड़कर कभी प्राचीन कोसल राज्य का हिस्सा था। आजमगढ़ को ऋषि दुर्वासा की भूमि के रूप में भी जाना जाता है, जिसका आश्रम फूलपुर तहसील में स्थित था, जो फूलपुर तहसील मुख्यालय से 6 किलोमीटर (3.7 मील) उत्तर में तमसा और मझुए नदियों के संगम के पास स्थित था। इसकी स्थापना शाहजहां के शासनकाल के दौरान 1665 में विक्रमजीत के बेटे आजम ने की थी। विक्रमाजीत परगना निज़ामाबाद में मेहनगर के गौतम राजपूतों के वंशज थे जिन्होंने अपने कुछ पूर्ववर्तियों की तरह इस्लाम अपनाया था। उसकी एक मुस्लिम पत्नी थी, जिससे उसके दो बेटे आज़म और अज़मत हुए। आज़म ने अपने नाम से शहर का नाम आज़मगढ़ शहर, और किला को अपना नाम दिया, जबकी अज़मत ने परगना सगरी में किले और अज़मतगढ़ बाजार का निर्माण करवाया था। चैबील राम के हमले के बाद, अज़मत खान अपने सैनिकों के साथ उत्तर की ओर भाग गया। उन्होंने गोरखपुर में घाघरा पार करने का प्रयास किया, लेकिन दूसरी तरफ के लोगों ने उसके आने का विरोध किया, और उन्हें या तो मध्य धारा में गोली मार दी गई या बचने के प्रयास में डूब गया। आजमगढ़ स्वतंत्रा आंदोलन के लिए भी पहचाना जाता है, गांधीजी के आव्हान पर सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अतरौलिया खंड के रामचरित्र सिंह व उनके नाबालिक बेटे सत्यचरण सिंह ने एक साथ अंग्रेजो का डटकर मुकाबला किया और गोली खायी। पिता पुत्र का एकसाथ स्वतंत्रा के आंदोलन में कूदने का विरला ही उदाहरण देखने को मिलता है। महान यायावर साहित्यकार महापंडित राहुल सांकृत्यायन और शायर कैफी आजमी का संबंध पर आजमगढ़ से रहा है। वीर रस के महान कवि अयोध्या प्रसाद उपाध्याय हरिओंध और श्याम नारायण पांडेय का जन्म भी आजमगढ़ में ही हुआ। झारखंड के प्रसिद्ध स्वयंसेवी संस्था विकास भारती के संस्थापक सह सचिव अशोक भगत का जन्म भी आजमगढ़ जिले में हुआ। आदिवासियों के बीच सेवा और विकास के प्रकल्प चलाने के लिए भारत सरकार ने श्री अशोक भगत को प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किया गया। मऊ मऊ उत्तर प्रदेश के मऊ जिला का मुख्यालय है। इसका पूर्व नाम मऊनाथ भंजन (उर्दु:امئو نات بنجن)) था। वनदेवी, देइया माई खुरहट, मधुबन,घोसी, मोहम्मदाबाद गोहना ,दोहरीघाट, दुर्वासा आश्रम देवलास, मऊ के प्रमुख स्थलों में से है। यह जिला लखनऊ के दक्षिण-पूर्व से 282 किलोमीटर और आजमगढ़ के पूर्व से 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह शहर तमसा नदी के किनारे बसा है। तमसा नदी शहर के बीच से निकलती/गुजरती है। मऊ जिले के इतिहास को लेकर कई भ्रम है। सामान्यत: यह माना जाता है कि मऊ शब्द तुर्किश शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ गढ़, पांडव और छावनी होता है। वस्तुत: इस जगह के इतिहास के बारे में कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। माना जाता है प्रसिद्ध शासक शेर शाह सूरी के शासन काल के दौरान इस क्षेत्र में कई आर्थिक विकास करवाए गए। वहीं मिलिटरी बेस और शाही मस्जिद के निर्माण में काफी संख्या में श्रमिक और कारीगर मुगल सैनिकों के साथ यहां आए थे। स्वतंत्रता आन्दोलन के समय में भी मऊ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वीर रस के महान कवि श्यामनारायण पांडेय और ब्रिगेडियर उस्मान का जन्म भी मऊ जिले में हुआ था। मऊ जिला अपने हथकरघा उद्योग जैसे साड़ी और लूंगी के लिए प्रसिद्ध है। महाराजगंज भारत-नेपाल सीमा के समीप स्थित महाराजगंज उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है। इसका जिला मुख्यालय महाराजगंज शहर मे स्थित है। पहले इस जगह को कारापथ के नाम से जाना जाता था। यह जिला नेपाल के दक्षिण, गोरखपुर जिले के उत्तर, कुशीनगर जिले के पश्चिम और सिद्धार्थ नगर व संत कबीर नगर जिले के पूर्व मे स्थित है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण स्थल है। नौतनवा, सौनोली, आनंद नगर, कोल्हुई, सिसवा, परतावल और निचलोल यहां की मुख्य बाज़ार और कस्बे है। बस्ती यह भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक शहर और बस्ती जिला का मुख्यालय है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। बस्ती जिला संत कबीर नगर जिले के पश्चिम में और गोण्डा के पूर्व में स्थित है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भी यह उत्तर प्रदेश का सातवां बड़ा जिला है। प्राचीन समय में बस्ती को 'कोसल' के नाम से जाना जाता था। संत कबीर नगर संत कबीर नगर जिला उत्तरी भारत के उत्तर प्रदेश राज्य 75 जिलों में से एक है। खलीलाबाद शहर जिला मुख्यालय है| संत कबीर नगर जिला बस्ती मंडल का एक हिस्सा है। यह जिला उत्तर में सिद्धार्थ नगर जिले से पूर्व में गोरखपुर जिले से दक्षिण में अम्बेडकर नगर जिले से और पश्चिम में बस्ती जिला द्वारा घिरा है। इस जिले का क्षेत्रफल 1659.15 वर्ग किलोमीटर है।यह तीन तहसीलो मे बटा है धनघटा,खलीलाबाद, मेहदावल । भगवान शिव का विश्वव प्रसिद्ध मंदिर श्री तामेश्वरनाथ धाम,अवधी के मसहूर कवि रंगपाल हरिहरपुर,विश्व प्रसिध्द संत कबीर की निर्वाण स्थली मगहर और बखिर पक्षी विहार झील,हैंसर आदि यहां के प्रमुख स्थलों में से हैं। घाघरा, राप्‍ती,आमी और कुआनो यहां की प्रमुख नदियां है। मगहर एक कस्बा है जो आमी नदी के किनारे स्थित है|मगहर में संत कबीरदास की मृत्यु हुई थी|जिनके नाम पर जिले का नाम पड़ा है। मेहदावल विधानसभा से ही उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला विधायक श्रीमती सुचेता कृपलानी (पूर्व मुख्यमन्त्री) चुनी गयी थीं। सिद्धार्थ नगर सिद्धार्थनगर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है। जिले का मुख्यालय सिद्धार्थनगर है। प्राचीन काल के शाक्य गणराज्य की राजधानी भगवान बुद्ध जहां के राजकुमार थे "कपिलवस्तु" इसी जनपद में स्थित है। भगवान बुद्ध के वास्तविक नाम "सिद्धार्थ" के ऊपर ही इस जनपद का नाम सिद्धार्थनगर रखा गया है। इस जनपद में नौगढ़,शोहरतगढ़,इटवा, डुमरियागंज और बांसी 5 तहसीलें हैं। कपिलवस्तु, शोहरतगढ़, इटवा,डुमरियागंज और बांसी 5 विधानसभा क्षेत्र हैं। सिद्धार्थनगर के पूर्व में जनपद महराजगंज और संतकबीरनगर, पश्चिम में जनपद बलरामपुर, उत्तर में नेपाल देश और दक्षिण में जनपद बस्ती स्थित है।इस जिले की प्रमुख नदियां राप्ती, बूढ़ी राप्ती, बाणगंगा आदि नदियां हैं। इस जिले में चार बड़े रेलवे स्टेशन नौगढ़, बढ़नी, शोहरतगढ व उसका है। इस जिले में 5 तहसील, 14 व्लाक व 6 नगर हैं। यहां की मुख्य भाषा हिन्दी, अवधी, उर्दू व भोजपुरी है। मुख्य व्यवसाय कृषि है।उपजाऊ मिट्टी के पाये जाने के कारण यहां पर धान (प्रसिद्ध कालानमक), गेहूं व गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। सिद्धार्थनगर का "कालानमक" चावल अपने स्वाद और सुगंध के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसके अलावा सिद्धार्थनगर में 'सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्धार्थनगर, कपिलवस्तु भी अवस्थित है, जो पठन-पाठन के लिए एवं बौद्ध अध्ययन के लिए जाना जाता है। और अभी हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने ,स्व० माधव प्रसाद त्रिपाठी, मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण भी किया है, यह पर घरेलू हवाई अड्डा भी प्रस्तावित है। बलिया बलिया पूर्वांचल का प्रमुख जिला एवं नगर है। शहर की पूर्वी सीमा गंगा और घाघरा के संगम में निहित है। बलिया, गाजीपुर से 76 किलोमीटर और वाराणसी से 150 किलोमीटर स्थित है। पूर्वांचल के अन्य जिलों की भांति भोजपुरी यहाँ के लोगों की मुख्य बोली है। भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बलिया बागी बलिया (विद्रोही बलिया) के रूप में अपना महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। १९४२ के भारत छोड़ो आन्दोलन के समय बलिया ने एक छोटी अवधि के लिये ब्रिटिश शासन के जिला सरकार का तख्ता पलट किया और चित्तू पांडे के अधीन एक स्वतंत्र प्रशासन स्थापितकिया। यहां पर महर्षि भृगु जी का मंदिर है जोक बलिया के कई अन्य क्षेत्रो में प्रसिद्ध है । वार्षिक मेले के ददरी मेला, एक मैदान पर शहर की पूर्वी सीमा पर गंगा और सरयू नदियों के संगम पर मनाया जाता है। मऊ, आजमगढ़, देवरिया,गोरखपुर,गाजीपुर और वाराणसी के रूप में पास के जिलों के साथ नियमित संपर्क में रेल और सड़क के माध्यम से मौजूद है। बेल्थरा रोड यहां का मुख्य कस्बा और विधानसभा क्षेत्र है जहां से कुछ दूरी पर प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की जन्मस्थली और अवधूतेश्वर शिव मंदिर प्रसिद्ध है। रसड़ा ३५ किलोमीटर पश्चिम में स्थित एक क़स्बा है। यहाँ नाथ बाबा का मंदिर है जो स्थानीय सेंगर राजपूतों के देवता हैं। इसके अलावा यहाँ दरगाह हज़रत रोशन शाह बाबा, दरगाह हज़रत सैयद बाबा और लखनेसर डीह के प्राचीन अवशेष दर्शनीय स्थल हैं। सोनभद्र सोनभद्र भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है। जिले का मुख्यालय राबर्ट्सगंज है। स्वतंत्रता मिलने के लगभग 10 वर्षों तक यह क्षेत्र (तब मिर्जापुर जिले का भाग) अलग-थलग था तथा यहां यातायात या संचार के कोई साधन नहीं थे। पहाड़ियों में चूना पत्थर तथा कोयला मिलने के साथ तथा क्षेत्र में पानी की बहुतायत होने के कारण यह औद्योगिक स्वर्ग बन गया। यहां पर देश की सबसे बड़ी सीमेन्ट फैक्ट्रियां, बिजली घर (थर्मल तथा हाइड्रो), एलुमिनियम एवं रासायनिक इकाइयां स्थित हैं। साथ ही कई सारी सहायक इकाइयां एवं असंगठित उत्पादन केन्द्र, विशेष रूप से स्टोन क्रशर इकाइयां, भी स्थापित हुई हैं। . रायबरेली रायबरेली भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है। या मुख्यतः अवध के अंतर्गत आता है। इसके पड़ोसी जिले राजधानी लखनऊ, फतेहपुर, उन्नाव, अमेठी, सुल्तानपुर और बाराबंकी है। इसका मुख्यालय रायबरेली में ही स्थित है। शिक्षा अंगूठाकार|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) वाराणसी पूर्वांचल के प्रमुख विश्वविद्यालय बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, (बीएचयू) वाराणसी सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु सिद्धार्थ नगर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय,बलिया महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय,आज़मगढ़ मदन मोहन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर महायोगी गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर महत्वपूर्ण सड़क, रेल और हवाई अड्डे प्रमुख सड़कें राष्ट्रीय राजमार्ग-२, ७, १९, २८, ५६, ९७ स्वर्णिम चतुर्भुज रेलवे पूर्वांचल के महराजगंज जिला को छोड़कर सभी जिले रेलवे से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। प्रयागराज, उत्तर मध्य रेलवे का मुख्य़ालय है जबकि गोरखपुर, पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय है। सन्दर्भ