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अरहंत
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थेरवाद बौद्ध धर्म, में अर्हत (Sanskrit; Pali: अरहत या अरहन्त; " जो योग्य है"http://www.britannica.com/EBchecked/topic/34073/arhat Encyclopedia Britannica, Arhat (Buddhism) 18 नवंबर 2015 https://web.archive.org/web/20150504135830/http://www.britannica.com/EBchecked/topic/34073/arhat 4 मई 2015 live ) "पूर्ण मनुष्य"http://www.britannica.com/EBchecked/topic/34073/arhat Encyclopedia Britannica, Arhat (Buddhism) 18 नवंबर 2015 https://web.archive.org/web/20150504135830/http://www.britannica.com/EBchecked/topic/34073/arhat 4 मई 2015 live Warder 2000 67 को कहते हैं जिसने अस्तित्व की यथार्थ प्रकृति का अन्तर्ज्ञान प्राप्त कर लिया हो, और जिसे निर्वाण की प्राप्त हो चुकी हो।Warder 2000 67http://www.britannica.com/EBchecked/topic/34073/arhat Encyclopedia Britannica, Arhat (Buddhism) 18 नवंबर 2015 https://web.archive.org/web/20150504135830/http://www.britannica.com/EBchecked/topic/34073/arhat 4 मई 2015 live अन्य बौद्ध परम्पराओं में इस शब्द का अब तक 'आत्मज्ञान के रास्ते पर उन्नत लोगों' (जो सम्भवतः पूर्ण बुद्धत्व की प्राप्ति न कर सके हों) के अर्थ में प्रयोग किया गया है,
।Rhie Thurman 1991 102
Arhat arahant अर्हत् অর্হৎôrhôt ရဟန္တာ jəhàɴdà 阿羅漢, 羅漢 āluóhàn, luóhàn 阿羅漢, 羅漢 arakan, rakan 아라한, 나한 arahan, nahan a-la-hán dgra bcom pa อรหันต์(arahan) අරහත්, රහත් Arahat, Rahat
अर्हत और अरिहन्त पर्यायवाची शब्द जैसे प्रतीत होते हैं। जबकि दोनों में थोड़ा अंतर है। बौद्ध परंपरा में, अतिशय सम्मान के योग्य होने से इन्हें 'अरहत' (अर्ह योग्य होना) कहा गया है। ध्यान रहे कि बौद्ध परंपरा के 'अरहत' और जैन परंपरा के 'अरिहंत', दोनों की अवधारणाएं अलग-अलग हैं। मोहरूपी शत्रु (अरि) का अथवा आठ कर्मों का नाश करने के कारण ये 'अरिहन्त' (अरि का नाश करनेवाला) कहे जाते हैं। जैनों के णमोकार मंत्र में पंचपरमेष्ठियों में सर्वप्रथम अरिहंतों को नमस्कार किया गया है। सिद्ध परमात्मा हैं लेकिन अरिहंत भगवान् लोक के परम उपकारक हैं, इसलिए इन्हें सर्वोत्तम कहा गया है। एक में एक ही अरिहन्त जन्म लेते हैं। जैन आगमों को अर्हत् द्वारा भाषित कहा गया है। अरिहंत तीर्थंकर, केवली और सर्वज्ञ होते हैं। महावीर जैन धर्म के चौबीसवें (अंतिम) तीर्थंकर माने जाते हैं। बुरे कर्मों का नाश होने पर केवल ज्ञान द्वारा वे समस्त पदार्थों को जानते हैं इसलिए उन्हें केवली कहा है। सर्वज्ञ भी उसे ही कहते हैं।
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सन्दर्भ
30em
इन्हें भी देखें
अरिहन्त (जैन धर्म में)
श्रेणी:बौद्ध दार्शनिक अवधारणाएँ