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411 समाचार
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वैष्णव सम्प्रदाय

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वैष्णव संप्रदाय: एक परिचय वैष्णव सम्प्रदाय सनातन धर्म के प्रमुख और सबसे व्यापक संप्रदायों में से एक है, जिसमें भगवान विष्णु और उनके विभिन्न अवतारों (विशेषकर श्री राम और श्री कृष्ण) को परम आराध्य या सर्वोच्च ईश्वर माना जाता है। इस परंपरा में भक्ति को मोक्ष और ईश्वर प्राप्ति का सबसे सुगम मार्ग बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग और त्रेतायुग से ही विभिन्न देवी-देवताओं द्वारा वैष्णव महामंत्र की दीक्षा की परंपरा चली आ रही है, जिसके आधार पर आगे चलकर प्रमुख आचार्यों ने विभिन्न संप्रदायों की स्थापना की। चार प्रमुख वैष्णव संप्रदाय और उनके आचार्य वैष्णव परंपरा मूल रूप से चार प्रमुख संप्रदायों में बंटी हुई है। इन चारों संप्रदायों के प्रमुख आचार्यों का जन्म दक्षिण भारत में हुआ था, जिन्होंने बाद में पूरे भारत में वैष्णव भक्ति का प्रचार-प्रसार किया। १. श्री संप्रदाय आद्य प्रवर्तिका: माता लक्ष्मी (श्री) प्रमुख आचार्य: रामानुजाचार्य वर्तमान स्वरूप: श्री वैष्णव संप्रदाय विवरण: इस संप्रदाय के मुख्य दार्शनिक सिद्धांत 'विशिष्टाद्वैतवाद' पर आधारित हैं। इसके अनुसार जीव और जगत भगवान का ही अंग हैं, लेकिन उनका स्वतंत्र अस्तित्व भी है। रामानुजाचार्य ने भक्ति और शरणागति (प्रपत्ति) को मोक्ष का मुख्य द्वार बताया। २. ब्रह्म संप्रदाय आद्य प्रवर्तक: चतुरानन ब्रह्मा देव प्रमुख आचार्य: माधवाचार्य वर्तमान स्वरूप: माध्व संप्रदाय विवरण: माधवाचार्य ने 'द्वैतवाद' का सिद्धांत प्रतिपादित किया। इस दर्शन के अनुसार ईश्वर, जीव और प्रकृति पूर्णतः भिन्न और स्वतंत्र हैं। भगवान विष्णु ही सर्वसुप्रीम हैं और जीव उनका eternal (नित्य) सेवक है। ३. रुद्र संप्रदाय आद्य प्रवर्तक: देवाधिदेव महादेव (शिव) प्रमुख आचार्य: विष्णुस्वामी (बाद में इसी परंपरा में महाप्रभु वल्लभाचार्य हुए) वर्तमान स्वरूप: वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) विवरण: इस संप्रदाय का मुख्य दर्शन 'शुद्धाद्वैतवाद' है। वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित 'पुष्टिमार्ग' में भगवान कृष्ण की बाल रूप (बालकृष्ण) की सेवा और अनन्य प्रेममयी भक्ति पर विशेष बल दिया गया है। ४. कुमार संप्रदाय आद्य प्रवर्तक: सनत्कुमार गण प्रमुख आचार्य: निम्बार्काचार्य वर्तमान स्वरूप: निम्बार्क संप्रदाय विवरण: निम्बार्काचार्य ने 'द्वैताद्वैतवाद' (भेदाभेद) का सिद्धांत दिया। इसके अनुसार जीव और ब्रह्म एक साथ भिन्न भी हैं और अभिन्न भी हैं। इस संप्रदाय में राधा और कृष्ण की युग्म उपासना की प्रधानता है। मध्यकालीन उत्तर भारत के प्रमुख वैष्णव आंदोलन मध्यकाल में भक्ति आंदोलन के दौरान उत्तर भारत में वैष्णव धर्म का और अधिक विस्तार हुआ, जिसमें कुछ नई और प्रभावशाली धाराओं का जन्म हुआ: ब्रह्ममाध्वगौड़ेश्वर (गौड़ीय) संप्रदाय: इस संप्रदाय के प्रवर्तक श्रीमन्महाप्रभु चैतन्य देव थे। बंगाल और ओडिशा क्षेत्र में कृष्ण भक्ति का प्रसार करते हुए इन्होंने संकीर्तन आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया। इनका मुख्य दर्शन 'अचिन्त्य भेदाभेदवाद' है। रामानन्दी संप्रदाय: आचार्य श्री रामानन्दाचार्य द्वारा प्रवर्तित इस संप्रदाय ने भक्ति के द्वार सभी जातियों और वर्गों के लिए खोल दिए। रामानंदाचार्य ने 'सर्वधर्म समभाव' की भावना को बल देते हुए कबीर, रैदास और अन्य शिष्यों को भक्ति का उपदेश दिया। तुलसीदास जी का योगदान: रामानंदी परंपरा में ही आगे चलकर गोस्वामी तुलसीदास जी हुए। उन्होंने लोकभाषा अवधी में श्रीरामचरितमानसकी रचना कर के आम जनमानस तक भगवान श्रीराम की महिमा को पहुँचाया। इसके अलावा उन्होंने विनय पत्रिका, दोहावली, गीतावली, बरवै रामायण और रामाज्ञा प्रश्नावली जैसी अमूल्य रचनाएँ दीं। स्वामीनारायण मत: आधुनिक काल में भगवान स्वामीनारायण द्वारा इस मत का प्रवर्तन किया गया, जो आज एक अत्यंत लोकप्रिय और अनुशासित वैष्णव संप्रदाय के रूप में दुनिया भर में फैला हुआ है। वैष्णव धर्म में भक्ति और मोक्ष का स्वरूप वैष्णव धर्म का दृष्टिकोण अत्यंत सार्वजनिक, उदार और व्यापक रहा है। भगवद्गीता के सिद्धांतों के अनुसार, मोक्ष प्राप्ति के लिए कठिन तपस्या या संन्यास अनिवार्य शर्त नहीं है। एक साधारण मनुष्य अपने पारिवारिक और गृहस्थ जीवन का निर्वाह करते हुए भी भगवान में सच्ची निष्ठा और भक्ति रखकर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। मध्यकालीन आचार्यों ने जाति और वर्ण के बंधनों से ऊपर उठकर सभी के लिए भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे समाज में प्रेम, समरसता और आध्यात्मिक चेतना का अभूतपूर्व संचार हुआ। क्या आप इस लेख के किसी विशिष्ट भाग (जैसे किसी विशेष संप्रदाय के दर्शन या इतिहास) को और अधिक विस्तार से जानना चाहेंगे? इन्हें भी देखें सम्प्रदाय शैव सम्प्रदाय शाक्त सम्प्रदाय बाहरी कड़ियाँ 'सेवाभारती' - वैष्णव धर्म से सम्बन्धित विविध सूचनाओं से परिपूर्ण श्री वेंकटचारी का तमिल-हिन्दी-अंग्रेजी ब्लॉग Vaishnavism (Heart of Hinduism) Who is Vishnu? Vaishnava FAQ (dvaita.org) Nathamuni-Alavandar.org - Dedicated to Shriman Nathamunigal and Shri Alavandar सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दू धर्म के मत श्रेणी:हिन्दू धर्म श्रेणी:वैष्णव सम्प्रदाय