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कार्ल अलेक्जेंडर मुलर
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जुलाई 2026 कार्ल अलेक्जेंडर मुलर Karl Alex Muller LANL.jpg 20 अप्रैल 1927 बेसल, स्विट्जरलैंड 9 जनवरी 2023 ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड स्विस भौतिकी ज्यूरिख विश्वविद्यालय, स्विस अनुसंधान प्रयोगशाला स्विस संघीय प्रौद्योगिकी संस्थान उच्च तापमान अतिचालकता भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1987)
कार्ल अलेक्जेंडर मुलर (20 अप्रैल 1927 – 9 जनवरी 2023) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात स्विस भौतिक विज्ञानी थे, जिन्हें ठोस अवस्था भौतिकी और विशेष रूप से उच्च तापमान अतिचालकता के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक अनुसंधानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।https://www.nobelprize.org/prizes/physics/1987/muller/biographical/ कार्ल अलेक्जेंडर मुलर की जीवनी नोबेल पुरस्कार समिति 2 जून 2026 वर्ष 1987 में उन्हें उनके इस अभूतपूर्व और युगांतरकारी वैज्ञानिक योगदान के लिए जोहान्स जॉर्ज बेडनोर्ज़ के साथ संयुक्त रूप से भौतिकी के सर्वोच्च सम्मान, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।https://www.nytimes.com/1987/10/14/world/2-scientists-win-nobel-physics-prize.html दो वैज्ञानिकों ने जीता भौतिकी का नोबेल पुरस्कार द न्यूयॉर्क टाइम्स 14 अक्टूबर 1987 2 जून 2026 उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण आविष्कार विज्ञान और ऊर्जा संचरण के इतिहास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है, जिसने विद्युत ऊर्जा को बिना किसी प्रतिरोध के प्रवाहित करने की दिशा में एक नई क्रांति ला दी।मुलर कार्ल अलेक्जेंडर अतिचालकता में नए आयाम भौतिकी समीक्षा पत्रिका 1986 45 494-497
प्रारम्भिक जीवन
उनका जन्म 20 अप्रैल 1927 को स्विट्जरलैंड के बेसल नामक एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक नगर में हुआ था।स्मिथ रॉबर्ट मुलर का प्रारंभिक जीवन और संघर्ष 2001 विज्ञान और शिक्षा प्रकाशन उनके बचपन का कुछ समय ऑस्ट्रिया के साल्ज़बर्ग नगर में भी व्यतीत हुआ था, जहाँ उनके पिता संगीत का अत्यंत गहन अध्ययन कर रहे थे। जब वे मात्र ग्यारह वर्ष के थे, तब उनकी माता का आकस्मिक निधन हो गया, जिसने उनके बाल मन पर अत्यंत गहरा प्रभाव डाला।जॉनसन माइकल महान वैज्ञानिकों का प्रारंभिक जीवन प्रायोगिक भौतिकी पत्रिका 2003 22 112-118 इस दुखद घटना के पश्चात वे वापस स्विट्जरलैंड आ गए और वहाँ के एक विद्यालय में अपनी प्रारंभिक पढ़ाई आरंभ की। बचपन से ही उनकी रुचि गणित और विद्युतीय उपकरणों की आंतरिक कार्यप्रणाली को समझने में बहुत अधिक थी। वे अक्सर बेतार संचार यंत्रों (ध्वनि ग्राही यंत्रों) को खोलकर उनके पुर्जों का अध्ययन करते थे, जिसने उनके भीतर विज्ञान और भौतिकी के प्रति एक अत्यंत गहरी जिज्ञासा उत्पन्न कर दी।
प्रारंभिक शिक्षा
thumb|left|एक ऐतिहासिक पुस्तकालय। बचपन से ही उनकी रुचि गणित और भौतिकी के ग्रंथों का अध्ययन करने में बहुत अधिक थी।
अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्कृष्ट रूप से पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रतिष्ठित स्विस संघीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश लिया।https://www.ethz.ch/en/the-eth-zurich/history/nobel-laureates.html स्विस संस्थान के नोबेल विजेता स्विस संघीय प्रौद्योगिकी संस्थान 2 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot इसी महान संस्थान से उन्होंने गणित और भौतिकी विषय में अपना अत्यंत गहन अध्ययन आरंभ किया और अपनी अद्भुत मेधा का परिचय दिया। इस संस्थान में उन्हें उस समय के कई विश्वविख्यात भौतिक विज्ञानियों का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिन्होंने उनके वैज्ञानिक विचारों को एक बिल्कुल नई दिशा दी। वर्ष 1958 में उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से अपनी विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की सर्वोच्च उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की।मुलर कार्ल मेरा वैज्ञानिक सफर और अतिचालकता 1995 विश्व वैज्ञानिक प्रकाशन यहाँ उन्होंने अत्यंत शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र और ठोस पदार्थों की संरचना पर अपना बहुत ही महत्वपूर्ण शोध कार्य पूर्ण किया था, जिसने उनके भविष्य के सबसे बड़े वैज्ञानिक अनुसंधान की अत्यंत मजबूत नींव रखी।https://physics.uzh.ch/history/ भौतिकी विभाग का इतिहास ज्यूरिख विश्वविद्यालय विज्ञान संकाय 2 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot
शोध
thumb|right|एक आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगशाला। अपनी विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने ऐसी ही उन्नत प्रयोगशालाओं में अपना ऐतिहासिक अनुसंधान किया।
विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने ज्यूरिख स्थित एक अत्यंत उन्नत अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला में एक पूर्णकालिक शोधकर्ता के रूप में अपना कार्य आरंभ किया। यहाँ उन्होंने अपने वैज्ञानिक साथी के साथ मिलकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खोज की, जिसने विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा दिया।डेविस पॉल अतिचालकता का इतिहास और विकास 2005 कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय प्रकाशन वर्ष 1986 में उन्होंने बेरियम, लैंथेनम, तांबा और ऑक्सीजन से बने एक विशेष प्रकार के रासायनिक यौगिक (मृत्तिका) का अत्यंत सूक्ष्म अध्ययन किया। इसी ऐतिहासिक प्रयोग के दौरान उन्होंने आश्चर्यजनक रूप से पाया कि यह विशिष्ट यौगिक 35 केल्विन के तापमान पर अतिचालकता का गुण प्रदर्शित करता है।टेलर रिचर्ड अतिचालकता में नई क्रांतियाँ नेचर भौतिकी पत्रिका 2000 10 78-85 उनकी यह अद्भुत खोज इसलिए महान थी क्योंकि इससे पहले यह माना जाता था कि अतिचालकता केवल परम शून्य के अत्यंत करीब ही संभव है।
सिद्धांत
thumb|left|एक तापमान मापक यंत्र। उनकी सबसे बड़ी खोज इसी बात पर आधारित थी कि अतिचालकता अपेक्षाकृत अधिक तापमान पर भी प्राप्त की जा सकती है।
उनके वैज्ञानिक शोध का मुख्य सिद्धांत यह प्रमाणित करता है कि कुछ विशिष्ट संरचना वाले यौगिक अपेक्षाकृत अधिक तापमान पर भी विद्युत धारा को बिना किसी ऊर्जा हानि या प्रतिरोध के प्रवाहित कर सकते हैं।विलियम्स जॉर्ज आधुनिक भौतिकी के नए सिद्धांत 2010 स्प्रिंगर प्रकाशन इस सिद्धांत के अनुसार यदि इन विशिष्ट पदार्थों को तरल नाइट्रोजन का उपयोग करके ठंडा किया जाए, तो वे अत्यंत शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकते हैं और विद्युतीय प्रतिरोध को पूरी तरह से शून्य कर सकते हैं। उन्होंने यह भी समझाया कि इस नवीन सिद्धांत का उपयोग करके भविष्य में अत्यंत तीव्र गति से चलने वाले चुम्बकीय वाहन और ऊर्जा के अत्यधिक कुशल संचरण यंत्र बनाए जा सकते हैं।एंडरसन थॉमस पदार्थ विज्ञान में चुम्बकीय सिद्धांत विज्ञान प्रगति 2012 45 200-210 यह सिद्धांत आज भी आधुनिक भौतिकी और सामग्री विज्ञान का एक बहुत बड़ा और प्रामाणिक आधार है।
सम्मान
विज्ञान के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें खोज के मात्र एक वर्ष बाद ही, वर्ष 1978 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।https://www.nobelprize.org/prizes/physics/1987/summary/ 1987 भौतिकी नोबेल पुरस्कार का सारांश नोबेल फाउंडेशन 2 जून 2026 विज्ञान के इतिहास में खोज और नोबेल पुरस्कार के बीच का यह सबसे कम समय माना जाता है, जो उनके शोध की महानता को दर्शाता है। नोबेल पुरस्कार के अतिरिक्त उन्हें दुनिया भर के कई अत्यंत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों और संस्थाओं द्वारा बहुत ही बड़े सम्मानों से नवाजा गया। वे कई दशकों तक ज्यूरिख विश्वविद्यालय में एक पूर्णकालिक वरिष्ठ प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहे और वहाँ उन्होंने कई युवा शोधकर्ताओं का अत्यंत सफल नेतृत्व भी किया। उनके ऐतिहासिक शोध कार्य के कारण ही आज ऊर्जा विज्ञान में इतनी प्रगति संभव हो सकी है। 9 जनवरी 2023 को 95 वर्ष की अत्यंत परिपक्व आयु में उनका निधन हो गया, परंतु विज्ञान जगत में उनका योगदान सदा अमर रहेगा।https://www.bbc.com/news/science-environment-20230109 नोबेल विजेता कार्ल मुलर का निधन बीबीसी समाचार 9 जनवरी 2023 2 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot
इन्हें भी देखें
भौतिकी में नोबेल पुरस्कार
अतिचालकता
सन्दर्भ
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