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खजुराहो स्मारक समूह

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1_Khajuraho.jpg खजुराहो, छतरपुर ज़िला, मध्य प्रदेश, भारत सांस्कृतिक: i, iii 240 1986 India#India Madhya Pradesh Location in Madhya Pradesh state of India 1 24.854422 N 79.921427 E dms inline खजुराहो स्मारक समूह खजुराहो स्मारक समूह हिन्दू और जैन स्मारकों का एक समूह है जिसके स्मारक भारतीय राज्य मध्य प्रदेश के छतरपुर क्षेत्र में देखने को मिलते है। ये स्मारक दक्षिण-पूर्व झांसी से लगभग १७५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्मारक समूह यूनेस्को विश्व धरोहर में भारत का एक धरोहर क्षेत्र गिना जाता है।World Heritage Day: Five must-visit sites in India http://www.hindustantimes.com/travel/world-heritage-day-five-must-visit-sites-in-india/article1-1338551.aspx 11 अप्रैल 2017 https://web.archive.org/web/20150814145305/http://www.hindustantimes.com/travel/world-heritage-day-five-must-visit-sites-in-india/article1-1338551.aspx 14 अगस्त 2015 live यहाँ के मन्दिर जो कि नगारा वास्तुकला से स्थापित किये गए जिसमें ज्यादातर मूर्तियाँ कामुक कला की है अर्थात् अधिकतर मूर्तियाँ नग्न अवस्था में स्थापित है।Philip Wilkinson (2008), India: People, Place, Culture and History, ISBN 978-1405329040, pp 352-353 खहुराहो के ज्यादातर मन्दिर चन्देल राजवंश के समय ९५० और १०५० ईस्वी के मध्य बनाए गए थे।India through the ages https://archive.org/details/indiathroughages00mada Gopal Madan 1990 179 K.S. Gautam Publication Division, Ministry of Information and Broadcasting, Government of India एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार खजुराहो में कुल ८५ मन्दिर है जो कि १२वीं शताब्दी में स्थापित किये गए जो २० वर्ग किलोमीटर के घेराव में फैले हुए है। वर्तमान में इनमें से, केवल २५ मन्दिर ही बचे हैं जो ६ वर्ग किलोमीटर में फैले हुए हैं।Khajuraho Group of Monuments https://web.archive.org/web/20181116173646/https://whc.unesco.org/en/list/240 16 नवंबर 2018 UNESCO World Heritage Site विभिन्न जीवित मन्दिरों में से, कन्दारिया महादेव मंदिर जो प्राचीन भारतीय कला के जटिल विवरण, प्रतीकवाद और अभिव्यक्ति के साथ प्रचुरता से सजाया गया है।Devangana Desai (2005), Khajuraho, Oxford University Press, Sixth Print, ISBN 978-0-19-565643-5 खजुराहो स्मारक समूह के मन्दिरों को एक साथ बनाया गया था, लेकिन इस क्षेत्र में हिन्दू और जैन के बीच विभिन्न धार्मिक विचारों के लिए स्वीकृति और सम्मान की परंपरा का सुझाव देते हुए, दो धर्मों, हिन्दू धर्म और जैन धर्म को समर्पित किया गया था।James Fergusson, Norther or Indo-Aryan Style - Khajuraho https://web.archive.org/web/20160410222703/https://archive.org/stream/historyofindiane02ferguoft#page/140/mode/2up/search/khajuraho 10 अप्रैल 2016 History of Indian and Eastern Architecture,  Updated by James Burgess and R. Phene Spiers (1910), Volume II, John Murray, London स्थिति खजुराहो स्मारक समूह के मन्दिर भारतीय राज्य मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले में स्थित है छतरपुर जो कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से तकरीबन ६२० किलोमीटर दूर है। छतरपुर में ये मन्दिर एक छोटे कस्बे जो कि खजुराहो कस्बे के नाम से ही जाना जाता है ,http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999 https://web.archive.org/web/20040616075334/http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999 ११ अप्रैल २०१७ Census of India 2001: Data from the 2001 Census, including cities, villages and towns (Provisional) 2008-11-01 Census Commission of India जिसकी २००१ की जनगणना के अनुसार जनसंख्या तकरीबन २०,००० है। खजुराहो में हवाई अड्डा भी है जिसका (आईएटीए कोड :HJR/एचजेआर) है जो दिल्ली ,आगरा ,वाराणसी और मुम्बई के लिए आने - जाने की सेवा देता है।Khajuraho airport https://web.archive.org/web/20150708201920/http://www.aai.aero/allAirports/khajuraho_generalinfo.jsp 8 जुलाई 2015 AAI, Govt of India यह धरोहर स्थल भारतीय रेलवे से भी जुड़ा हुआ है अर्थात यहाँ नजदीक ही रेलवे जंक्शन है जो कि मन्दिर से लगभग ६ किलोमीटर की दूरी पर है। समूह के स्मारक राष्ट्रीय राजमार्ग ७५ से पूरब-पश्चिम से १० किलोमीटर दूर है और मुख्य छतरपुर शहर से लगभग ५० किलोमीटर की दूरी पर ये स्मारक स्थापित है ,जबकि यह राजमार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग ८६ से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जोड़ता है। लगभग १०वीं शताब्दी में राजस्थान राज्य के बारां ज़िले में एक मन्दिर बनाया जो भांड देव मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध है। इसका निर्माण लगभग खजुराहो स्मारक जैसी शैली का है इस कारण बाद में इसे छोटा खजुराहो कहा गया। इतिहास खजुराहो स्मारक समूह के मन्दिरों का निर्माण चन्देल राजवंश के समय हुआ था। उस समय यहाँ चन्देल राजवंश अपने पैर जमा रहा था जो बाद में बुंदेलखंड के नाम से विश्वविख्यात हुआ।G.S. Ghurye, Rajput Architecture, ISBN 978-8171544462, Reprint Year: 2005, pp 19-24 इनमें अधिकतर मन्दिरों का निर्माण भारतीय हिन्दू राजा यशोवर्मन और धंग के शासन काल में हुआ था,यशोवर्मन जो कि एक चन्देल राजवंश का हिन्दू शासक था। यशोवर्मन की विरासत का उत्कृष्ट नमूना लक्ष्मण मन्दिर है जबकि धंग विश्वनाथ मन्दिर के लिए प्रसिद्ध हुए। Sen Sailendra A Textbook of Medieval Indian History Primus Books 2013 9789380607344 22 वर्तमान में सबसे लोकप्रिय मन्दिर कन्दारिया महादेव मन्दिर है जिसका निर्माण चन्देल राजवंश के शासक विद्याधर ने करवाया था।Devangana Desai 2005 10 इन मन्दिरों के अभिलेखों पर कुछ तथ्य मिले है जिनसे पता चलता है कि इन मन्दिरों का निर्माण ९७० से १०३० ईसा पूर्व में पूरा हुआ था। खजुराहो के मन्दिर मध्यकालीन महोबा शहर से लगभग ३५ मील दूर बनाये गए हैं,also called Erakana महोबा जो कि उस समय कालिंजर क्षेत्र में चन्देल राजवंश की राजधानी थी। प्राचीन और मध्ययुगीन साहित्य में, उनके राज्य को जिझाति, जेजाहोटी, चिह-ची-टू और जेजवक्कती भी कहा जाता था।Mitra (1977), The early rulers of Khajuraho, ISBN 978-8120819979 पारसी इतिहासकार अल बेरुनी का कहना है कि महमूद गज़नवी ने १०२२ ईसा पूर्व में कालिंजरखजुराहो जेजाहुती की राजधानी पर आक्रमण किया था ।J. Banerjea (1960), Khajuraho, Journal of the Asiatic Society, Vol. 2-3, pp 43-47 यह आक्रमण असफल रहा था क्योंकि उस समय एक हिन्दू शासक महमूद गज़नवी के पास पहुँचा और फिरौती देकर समझौता कर लिया। एक शताब्दी बाद, मोरक्की यात्री इब्न बतूता के अनुसार, वो यहाँ भारत में १३३५ से १३४२ ईस्वी तक रुका था और इन्होंने खजुराहो के मन्दिरों की भी यात्रा की थी और उनके अनुसार उस समय खजुराहो को "कजरा" कहते थे। phonetically translated from Arabic sometimes as “Kajwara”Director General of Archaeology in India (1959), Archaeological Survey of India, Ancient India, Issues 15-19, pp 45-46 (Archived: University of Michigan) thumb|left|१२वीं शताब्दी तक खजुराहो हिन्दू शासकों के हाथ में था उस समय ८५ मन्दिर थे। बाद में १३वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान कुतुब-उद-दीन ऐबक ने खजुराहो पर हमला कर दिया था जिसके कारण उस समय कई मन्दिरों का विनाश हो गया था, जो कालांतर में खण्डहर बन गए थे जिसमें घंटाई मन्दिर भी है जो अभी भी देखने को मिलता है लेकिन वह उजड़ी हुई अवस्था में है। मध्य भारतीय क्षेत्र में अवस्थित खजुराहो के मन्दिर जिन पर १३वीं से १८वीं शताब्दी तक भिन्न-भिन्न मुस्लिम शासकों ने शासन किया था इस दौरान उन्होंने कई मन्दिरों के साथ अपवित्र व्यवहार भी किया था। १४९५ ईसा पूर्व में सिकन्दर लोदी ने एक अभियान चला दिया था जिसमें खजुराहो के मन्दिरों का विनाश किया गया था।Michael D. Willis, An Introduction to the Historical Geography of Gopakṣetra, Daśārṇa, and Jejākadeśa, Bulletin of the School of Oriental and African Studies, University of London, Vol. 51, No. 2 (1988), pp. 271-278; See also K.R. Qanungo (1965), Sher Shah and his times, Orient Longmans, 175212, pp 423-427 खजुराहो के दूर-दूर और अलगाव लोगों ने मुसलमानों द्वारा निरंतर विनाश से हिन्दू मन्दिर और जैन मन्दिरों को सुरक्षित रखा।Trudy King et al., Asia and Oceania: International Dictionary of Historic Places, ISBN 978-1884964046, Routledge, pp 468-470Alain Daniélou (2011), A Brief History of India, ISBN 978-1594770296, pp 221-227 सदियों से, वनस्पति और जंगलों ने अधिक से अधिक खजुराहो के मन्दिरों का अधिग्रहण किया। १९३० के दशक में यहाँ के स्थानीय हिन्दुओं ने ब्रितानी सर्वेक्षक टी एस बर्ट की मदद की जिससे बर्ट ने खजुराहो के मन्दिरों की पुनः खोज की। इसके कुछ समय तत्पश्चात अंग्रेज पुरात्त्वशास्त्री अलेक्ज़ैंडर कन्निघम ने Louise Nicholson (2007), India, National Geographic Society, ISBN 978-1426201448, see Chapter on Khajuraho बर्ट की खोज का पुनरीक्षण किया था। उनकी रिपोर्ट से पता चलता है कि यहाँ मन्दिरों में हिन्दू योगी और हज़ारों की संख्या में हिन्दू लोग चुपके से यहाँ मार्च और फ़रवरी माह के शिवरात्रि उत्सव मनाया करते थे। १८५२ में मेसे ने खजुराहो के मन्दिरों की छायाचित्र तैयार किया था।Krishna Deva (1990), Temples of Khajuraho, 2 Volumes, Archaelogical Survey of India, New Delhi नामकरण खजुराहो नाम जो पहले कभी खर्जुरवाहक के नाम से भी जाना जाता था , सबसे पहले इसे संस्कृत में (खर्जुर ,Kharjura जिसे खजूर कहते है) कहा जाता था, और (वाहक ,vahak) जिसेkharjUra https://web.archive.org/web/20170226043143/http://spokensanskrit.de/index.php?tinput=kharjUra&direction=SE&script=HK&link=yes&beginning=0 26 फ़रवरी 2017 Sanskrit English Dictionary, Koeln University, Germany सन्देशवाहक या धारक कहते थे।vAhaka https://web.archive.org/web/20170226042823/http://spokensanskrit.de/index.php?tinput=vAhaka&direction=SE&script=HK&link=yes&beginning=0 26 फ़रवरी 2017 Sanskrit English Dictionary, Koeln University, Germany) स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार कहा गया है कि मन्दिर के आगे दो स्वर्ण-खजूर के पेड़ थे लेकिन पुनः जब खोज की तो तब ये खजूर के पेड़ नहीं थे। कनिंघम ने १८५० और १८६० के दशक में अपने कार्य के अंतर्गत बताया था किRana Singh (2007), Landscape of sacred territory of Khajuraho, in City Society and Planning (Editors: Thakur, Pomeroy, et al), Volume 2, ISBN 978-8180694585, Chapter 18 मन्दिरों लक्ष्मण के आसपास पश्चिमी समूह, जवेरी के पूर्वी समूह और दल्देव के दक्षिणी समूह में समूहीकृत था।'' खजुराहो देवता से संबंधित चार पवित्र स्थलों में से एक है जिसमें शिव (अन्य तीन हैं केदारनाथ, वाराणसी और गया)। इसका मूल और डिजाइन विद्वानों के अध्ययन का विषय है Shobita Punja (1992), Divine Ecstasy - The Story of Khajuraho, Viking, New Delhi, ISBN 978-0670840274।शोभाता पुंज का कहना है कि मन्दिर की उत्पत्ति हिन्दू पौराणिक कथाओं को दर्शाती है जिसमें खजुराहो वह जगह है जहाँ शिव का विवाह सम्पन्न हुआ था यही उल्लेख रघुवंश के श्लोक ५.५३ में मिलता है। चित्र दीर्घा सन्दर्भ 3 श्रेणी:भारत के विश्व धरोहर स्थल