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होली
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होली A Holi Festival - Krishna Radha and Gopis.jpg कृष्ण द्वारा राधा और गोपीयों के साथ होली खेलना हिन्दू हिन्दू, तथा अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक, वसन्तोत्सव होली की पूर्वसन्ध्या: होलिका दहन अथवा काम-दहन होली के दिन: गुलाल एवं रंग-बिरंगे जल से खेलना, नृत्य, गीत, शुभकामनाएँ, पर्व-व्यंजन वार्षिक होला मोहल्ला, शिग्मो तथा याओसांग * सदाचार की दुराचार पर विजय
राधा कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव
वसन्त ऋतु का आगमन १३-१४ मार्च ३-४ मार्च Holi 2025 in India https://www.timeanddate.com/holidays/india/holi 14 March 2025 www.timeanddate.com en होली भारत 2026 3 3 5.5
होली वसन्त ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है। होली-रंगों का त्यौहार https://www.dekhoyaar.com/holi-festival-of-colours/]दिसंबर 2021 InternetArchiveBot रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
</ref> पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं। दूसरे दिन, जिसे प्रमुखतः धुलेंडी व धुरड्डी, धुरखेल या धूलिवंदन इसके अन्य नाम हैं, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं। http://www.thecolorsofindia.com/holi-celebrations.html Holi Celebrations 3 मार्च 2008 एचटीएमएल द कलर्स ऑफ़ इंडिया en https://web.archive.org/web/20080308180703/http://www.thecolorsofindia.com/holi-celebrations.html 8 मार्च 2008 dead
होली की रात परी साधना का विशेष महत्व है, इसे धन प्राप्ति और संतान पर मौजूद किसी भी शक्ति की सवारी को उतारने के लिए किया जाता है। राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है।http://hindi.webdunia.com/religion/occasion/others/0802/09/1080209019_1.htm ऋतुओं का राजा वसंत 3 मार्च 2008 एचटीएम वेब दुनिया https://web.archive.org/web/20090715072941/http://hindi.webdunia.com/religion/occasion/others/0802/09/1080209019_1.htm 15 जुलाई 2009 dead राग अर्थात संगीत और रंग तो इसके प्रमुख अंग हैं ही पर इनको उत्कर्ष तक पहुँचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्यौहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है।http://festivals.iloveindia.com/holi/ HINDU HOLI FESTIVAL 3 मार्च 2008 फ़ेस्टिवल्स आईलविइंडिया.कॉम en https://web.archive.org/web/20080311235554/http://festivals.iloveindia.com/holi/ 11 मार्च 2008 dead गुझिया होली का प्रमुख पकवान है जो कि मावा (खोया) और मैदा से बनती है और मेवाओं से युक्त होती है इस दिन कांजी के बड़े खाने व खिलाने का भी रिवाज है। नए कपड़े पहन कर होली की शाम को लोग एक दूसरे के घर होली मिलने जाते है जहाँ उनका स्वागत गुझिया,नमकीन व ठंडाई से किया जाता है। होली के दिन आम्र मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का बड़ा माहात्म्य है।http://www.riiti.com/1490/holi_holika_dahan_process_vidhi संग्रहीत प्रति 17 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121103172436/http://www.riiti.com/1490/holi_holika_dahan_process_vidhi 3 नवंबर 2012 dead
इतिहास
होली भारत का अत्यंत प्राचीन पर्व है जो होली, होलिका या होलाकाआप्टे वामन शिवराम संस्कृत हिन्दी कोश 1969 मोतीलाल बनारसीदास दिल्ली, पटना, वाराणसी भारत 1181 editor: वामन शिवराम आप्टे नाम से मनाया जाता था। वसंत की ऋतु में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने के कारण इसे वसंतोत्सव और काम-महोत्सव भी कहा गया है।
thumb|right|280px|राधा-श्याम गोप और गोपियों की होली
इतिहासकारों का मानना है कि आर्यों में भी इस पर्व का प्रचलन था लेकिन अधिकतर यह पूर्वी भारत में ही मनाया जाता था। इस पर्व का वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकों में मिलता है। इनमें प्रमुख हैं, जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र। नारद पुराण औऱ भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों और ग्रंथों में भी इस पर्व का उल्लेख मिलता है। विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से ३०० वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है। संस्कृत साहित्य में वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव अनेक कवियों के प्रिय विषय रहे हैं। https://hindutime.in/holi-kab-hai-%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80/ Holi Kab hai :आखिर कब है होली? जानिए बीकानेर के विद्वानों का शास्त्रसम्मत निर्णय - Hindu times india 2026-02-27 hindutime.in hi-IN 2026-03-01 12 जून 2026 https://web.archive.org/web/20260612211735/https://hindutime.in/holi-kab-hai-%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%AC-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%80/ dead
सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है। भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं मुसलमान भी मनाते हैं। सबसे प्रामाणिक इतिहास की तस्वीरें हैं मुगल काल की और इस काल में होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं। अकबर का जोधाबाई के साथ तथा जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहाँगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है।http://www.tribuneindia.com/2002/20020120/ncr1.htm Alwar Museum: A fossilised collection that comes alive 11 मार्च 2008 एचटीएम द ट्रिब्यून en https://web.archive.org/web/20081007091947/http://www.tribuneindia.com/2002/20020120/ncr1.htm 7 अक्तूबर 2008 live शाहजहाँ के समय तक होली खेलने का मुग़लिया अंदाज़ ही बदल गया था। इतिहास में वर्णन है कि शाहजहाँ के ज़माने में होली को ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था।http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/msid-1448831,prtpage-1.cms Who says Holi is only a Hindu festival? 5 मार्च 2008 सीएमएस टाइम्स ऑफ इंडिया en https://web.archive.org/web/20110316055718/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/msid-1448831,prtpage-1.cms 16 मार्च 2011 live अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के बारे में प्रसिद्ध है कि होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाने जाया करते थे।http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040306_holi_history.shtml कृष्ण-राधा से लेकर अकबर-जोधाबाई तक 3 मार्च 2008 एसएचटीएमएल बीबीसी https://web.archive.org/web/20060308061250/http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040306_holi_history.shtml 8 मार्च 2006 live मध्ययुगीन हिन्दी साहित्य में दर्शित कृष्ण की लीलाओं में भी होली का विस्तृत वर्णन मिलता है।
इसके अतिरिक्त प्राचीन चित्रों, भित्तिचित्रों और मंदिरों की दीवारों पर इस उत्सव के चित्र मिलते हैं। विजयनगर की राजधानी हंपी के १६वी शताब्दी के एक चित्रफलक पर होली का आनंददायक चित्र उकेरा गया है। इस चित्र में राजकुमारों और राजकुमारियों को दासियों सहित रंग और पिचकारी के साथ राज दम्पत्ति को होली के रंग में रंगते हुए दिखाया गया है। १६वी शताब्दी की अहमदनगर की एक चित्र आकृति का विषय वसंत रागिनी ही है। इस चित्र में राजपरिवार के एक दंपत्ति को बगीचे में झूला झूलते हुए दिखाया गया है। साथ में अनेक सेविकाएँ नृत्य-गीत व रंग खेलने में व्यस्त हैं। वे एक दूसरे पर पिचकारियों से रंग डाल रहे हैं। मध्यकालीन भारतीय मंदिरों के भित्तिचित्रों और आकृतियों में होली के सजीव चित्र देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इसमें १७वी शताब्दी की मेवाड़ की एक कलाकृति में महाराणा को अपने दरबारियों के साथ चित्रित किया गया है। शासक कुछ लोगों को उपहार दे रहे हैं, नृत्यांगना नृत्य कर रही हैं और इस सबके मध्य रंग का एक कुंड रखा हुआ है। बूंदी से प्राप्त एक लघुचित्र में राजा को हाथीदाँत के सिंहासन पर बैठा दिखाया गया है जिसके गालों पर महिलाएँ गुलाल मल रही हैं। http://www.holifestival.org/history-of-holi.html History of Holi 3 मार्च 2008 एचटीएमएल होलीफेस्टिवल.ऑर्ग en https://web.archive.org/web/20080317011228/http://www.holifestival.org/history-of-holi.html 17 मार्च 2008 dead
कहानियाँ
होली की कहानियाँ
thumb|right|भगवान नृसिंह द्वारा हिरण्यकशिपु का वधहोली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की। माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। अपने बल के अहंकार में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गया। ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है।http://www.essortment.com/all/whatishinduho_rksm.htm What is the Hindu Holi festival 3 मार्च 2008 एचटीएम एसोर्टमेंट en https://web.archive.org/web/20080319004331/http://www.essortment.com/all/whatishinduho_rksm.htm 19 मार्च 2008 live प्रतीक रूप से यह भी माना जाता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है। http://vishwahindusamaj.com/holi.htm86,652 होली या होलिका या होलाका 3 मार्च 2008 एचटीएम विश्व हिंदू समाज जून 2020 InternetArchiveBot
होलिका दहन की मुख्य कथा
होली से सम्बन्धित मुख्य कथा के अनुसार एक नगर में हिरण्यकश्यप नाम का दानव राजा रहता था। वह सभी को अपनी पूजा करने को कहता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का उपासक भक्त था। हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को बुलाकर राम का नाम न जपने को कहा तो प्रहलाद ने स्पष्ट रूप से कहा, पिताजी! परमात्मा ही समर्थ है। प्रत्येक कष्ट से परमात्मा ही बचा सकता है। मानव समर्थ नहीं है। यदि कोई भक्त साधना करके कुछ शक्ति परमात्मा से प्राप्त कर लेता है तो वह सामान्य व्यक्तियों में तो उत्तम हो जाता है, परंतु परमात्मा से उत्तम नहीं हो सकता।<
यह बात सुनकर अहंकारी हिरण्यकश्यप क्रोध से लाल पीला हो गया और नौकरों सिपाहियों से बोला कि इसको ले जाओ मेरी आँखों के सामने से और जंगल में सर्पों में डाल आओ। सर्प के डसने से यह मर जाएगा। ऐसा ही किया गया। परंतु प्रहलाद मरा नहीं, क्योंकि सर्पों ने डसा नहीं।
प्रह्लाद की कथा के अतिरिक्त यह पर्व राक्षसी ढुंढी, राधा कृष्ण के रास और कामदेव के पुनर्जन्म से भी जुड़ा हुआ है। http://www.thecolorsofindia.com/holi-legends/index.html Holi - Legends and Myths 3 मार्च 2008 एचटीएमएल द कलर्स ऑफ़ इंडिया। कॉम en https://web.archive.org/web/20080308220817/http://www.thecolorsofindia.com/holi-legends/index.html 8 मार्च 2008 dead कुछ लोगों का मानना है कि होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग शिव के गणों का वेश धारण करते हैं तथा शिव की बारात का दृश्य बनाते हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था। इसी खु़शी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था।http://www.bawarchi.com/festivals/holi.html Holi 5 मार्च 2008 एचटीएमएल बावर्ची.कॉम en https://web.archive.org/web/20080210025823/http://www.bawarchi.com/festivals/holi.html 10 फ़रवरी 2008 dead
परंपराएँ
होली के पर्व की तरह इसकी परंपराएँ भी अत्यंत प्राचीन हैं और इसका स्वरूप और उद्देश्य समय के साथ बदलता रहा है। प्राचीन काल में यह विवाहित महिलाओं द्वारा परिवार की सुख समृद्धि के लिए मनाया जाता था और पूर्ण चंद्र की पूजा करने की परंपरा थी। वैदिक काल में इस पर्व को नवात्रैष्टि यज्ञ कहा जाता था। उस समय खेत के अधपके अन्न को यज्ञ में दान करके प्रसाद लेने का विधान समाज में व्याप्त था। अन्न को होला कहते हैं, इसी से इसका नाम होलिकोत्सव पड़ा। भारतीय ज्योतिष के अनुसार चैत्र शुदी प्रतिपदा के दिन से नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है। इस उत्सव के बाद ही चैत्र महीने का आरंभ होता है। अतः यह पर्व नवसंवत का आरंभ तथा वसंतागमन का प्रतीक भी है। इसी दिन प्रथम पुरुष मनु का जन्म हुआ था, इस कारण इसे मन्वादितिथि कहते हैं। http://www.dpb.in/magazines/sadhnapath/article.phtml?86,652 क्यों मनाई जाती है होली? 3 मार्च 2008 पीएचटीएमएल साधनापथ https://web.archive.org/web/20071022050639/http://dpb.in/magazines/sadhnapath/article.phtml?86,652 22 अक्तूबर 2007 dead
एक अन्य कथा के अनुसार त्रेतायुग की शुरुआत में भगवन विष्णु जी ने धूलि का वंदन किया था। इसलिए होली के इस त्यौहार को धुलेंडी के नाम से भी मनाया जाता है। धुलेंडी होली के अगले दिन मनाया जाता है जिसमें लोग एक दूसरे पर धुल और कीचड़ लगाते हैं और इसे धूल स्नान कहा जाता है।होली के 10 इंटरेस्टिंग फैक्ट्स https://hindi.webdunia.com/holi-special/10-interesting-facts-of-holi-121032300099_1.html hindi.webdunia.com 24 फरवरी 2023
thumb|right|280px|होलिका दहन
होली का पहला काम झंडा या डंडा गाड़ना होता है। इसे किसी सार्वजनिक स्थल या घर के आहाते में गाड़ा जाता है। इसके पास ही होलिका की अग्नि इकट्ठी की जाती है। होली से काफ़ी दिन पहले से ही यह सब तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। पर्व का पहला दिन होलिका दहन का दिन कहलाता है। इस दिन चौराहों पर व जहाँ कहीं अग्नि के लिए लकड़ी एकत्र की गई होती है, वहाँ होली जलाई जाती है। इसमें लकड़ियाँ और उपले प्रमुख रूप से होते हैं। कई स्थलों पर होलिका में भरभोलिएhttp://www.khabarexpress.com/3/1/2007/-news_928.html भरभोलियों का है होली पर विशेष महत्व 3 मार्च 2008 एचटीएमएल खबर एक्सप्रेस https://web.archive.org/web/20110315031743/http://www.khabarexpress.com/3/1/2007/-news_928.html 15 मार्च 2011 dead जलाने की भी परंपरा है। भरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं जिनके बीच में छेद होता है। इस छेद में मूँज की रस्सी डाल कर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं। होली में आग लगाने से पहले इस माला को भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर फेंक दिया जाता है। रात को होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है। इसका यह आशय है कि होली के साथ भाइयों पर लगी बुरी नज़र भी जल जाए। लकड़ियों व उपलों से बनी इस होली का दोपहर से ही विधिवत पूजन आरंभ हो जाता है। घरों में बने पकवानों का यहाँ भोग लगाया जाता है। दिन ढलने पर ज्योतिषियों द्वारा निकाले मुहूर्त पर होली का दहन किया जाता है। इस आग में नई फसल की गेहूँ की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है। होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है। यह बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का सूचक है। गाँवों में लोग देर रात तक होली के गीत गाते हैं तथा नाचते हैं।
thumb|280px|right|सार्वजनिक होली मिलन
thumb|280px|विदेश (जर्मनी) में होली मनाते हुए युवा
होली से अगला दिन धूलिवंदन कहलाता है। इस दिन लोग रंगों से खेलते हैं। सुबह होते ही सब अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने निकल पड़ते हैं। गुलाल और रंगों से सबका स्वागत किया जाता है। लोग अपनी ईर्ष्या-द्वेष की भावना भुलाकर प्रेमपूर्वक गले मिलते हैं तथा एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। इस दिन जगह-जगह टोलियाँ रंग-बिरंगे कपड़े पहने नाचती-गाती दिखाई पड़ती हैं। बच्चे पिचकारियों से रंग छोड़कर अपना मनोरंजन करते हैं। सारा समाज होली के रंग में रंगकर एक-सा बन जाता है। रंग खेलने के बाद देर दोपहर तक लोग नहाते हैं और शाम को नए वस्त्र पहनकर सबसे मिलने जाते हैं। प्रीति भोज तथा गाने-बजाने के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
होली के दिन घरों में खीर, पूरी और पूड़े आदि विभिन्न व्यंजन (खाद्य पदार्थ) पकाए जाते हैं। इस अवसर पर अनेक मिठाइयाँ बनाई जाती हैं जिनमें गुझियों का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। बेसन के सेव और दहीबड़े भी सामान्य रूप से उत्तर प्रदेश में रहने वाले हर परिवार में बनाए व खिलाए जाते हैं। कांजी, भांग और ठंडाई इस पर्व के विशेष पेय होते हैं। पर ये कुछ ही लोगों को भाते हैं। इस अवसर पर उत्तरी भारत के प्रायः सभी राज्यों के सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहता है, पर दक्षिण भारत में उतना लोकप्रिय न होने की वज़ह से इस दिन सरकारी संस्थानों में अवकाश नहीं रहता।
विशिष्ट उत्सव
देश विदेश की होली
भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में भिन्नता के साथ मनाया जाता है। ब्रज की होली आज भी सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। बरसाने की लठमार होलीhttp://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040306_holi_mathura.shtml नंदगाँव और बरसाने की लठमार होली 4 मार्च 2008 बीबीसी https://web.archive.org/web/20060308061256/http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040306_holi_mathura.shtml 8 मार्च 2006 live काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ उन्हें लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। इसी प्रकार मथुरा और वृंदावन में भी १५ दिनों तक होली का पर्व मनाया जाता है। कुमाऊँ की गीत बैठकी http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040305_holi_kumaon.shtml कुमाऊँ की बैठक होली 4 मार्च 2008 एसएचटीएम बीबीसी https://web.archive.org/web/20060308061112/http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040305_holi_kumaon.shtml 8 मार्च 2006 live में शास्त्रीय संगीत की गोष्ठियाँ होती हैं। यह सब होली के कई दिनों पहले शुरू हो जाता है। हरियाणा की धुलंडी में भाभी द्वारा देवर को सताए जाने की प्रथा है। बंगाल की दोल जात्राhttp://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040305_holi_bengal.shtml बंगाल की होली 4 मार्च 2008 बीबीसी https://web.archive.org/web/20060308061103/http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040305_holi_bengal.shtml 8 मार्च 2006 live चैतन्य महाप्रभु के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। जलूस निकलते हैं और गाना बजाना भी साथ रहता है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र की रंग पंचमीhttp://www.jitu.info/merapanna/?p=503?ref=BenimShopum.com रंग पंचमी 4 मार्च 2008 एचटीएम मेरा पन्ना https://web.archive.org/web/20181117192926/http://www.jitu.info/merapanna/?p=503%3Fref%3DBenimShopum.com 17 नवंबर 2018 dead में सूखा गुलाल खेलने, गोवा के शिमगोhttp://www.holifestival.org/shimgo.html Shimgo 4 मार्च 2008 होलीफ़ेस्टिवल.ऑर्ग en https://web.archive.org/web/20080223072759/http://www.holifestival.org/shimgo.html 23 फ़रवरी 2008 dead में जलूस निकालने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा पंजाब के होला मोहल्लाhttp://www.jitu.info/merapanna/?p=503?ref=BenimShopum.com होला मोहल्ला 4 मार्च 2008 मेरा पन्ना https://web.archive.org/web/20181117192926/http://www.jitu.info/merapanna/?p=503%3Fref%3DBenimShopum.com 17 नवंबर 2018 dead में सिक्खों द्वारा शक्ति प्रदर्शन की परंपरा है। तमिलनाडु की कमन पोडिगईhttp://www.jitu.info/merapanna/?p=503?ref=BenimShopum.com कमन पोडिगई 4 मार्च 2008 एचटीएम मेरा पन्ना https://web.archive.org/web/20181117192926/http://www.jitu.info/merapanna/?p=503%3Fref%3DBenimShopum.com 17 नवंबर 2018 dead मुख्य रूप से कामदेव की कथा पर आधारित वसंतोतसव है जबकि मणिपुर के याओसांगhttp://www.abhivyakti-hindi.org/parva/alekh/2006/desh_videsh_ki_holi.htm देश विदेश की होली 5 मार्च 2008 एचटीएम अभिव्यक्ति https://web.archive.org/web/20080514093529/http://www.abhivyakti-hindi.org/parva/alekh/2006/desh_videsh_ki_holi.htm 14 मई 2008 live में योंगसांग उस नन्हीं झोंपड़ी का नाम है जो पूर्णिमा के दिन प्रत्येक नगर-ग्राम में नदी अथवा सरोवर के तट पर बनाई जाती है। दक्षिण गुजरात के आदिवासियों के लिए होली सबसे बड़ा पर्व है, छत्तीसगढ़ की होरी में लोक गीतों की अद्भुत परंपरा है और मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है भगोरियाhttp://hindi.webdunia.com/religion/occasion/holi/0803/20/1080320041_1.htm फिर बिखरे भगोरिया के रंग 20 मार्च 2008 एचटीएम वेब दुनिया https://web.archive.org/web/20080323175752/http://hindi.webdunia.com/religion/occasion/holi/0803/20/1080320041_1.htm 23 मार्च 2008 dead, जो होली का ही एक रूप है। बिहार का फगुआ http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/S/SurendrnathTiwari/saNuse_%20sahriyaa_rang.htm भोजपुरी अंचल की होली 4 मार्च 2008 एचटीएम साहित्यकुंज https://web.archive.org/web/20080522081710/http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/S/SurendrnathTiwari/saNuse_%20sahriyaa_rang.htm 22 मई 2008 dead जम कर मौज मस्ती करने का पर्व है और नेपाल की होलीhttp://www.nepalhomepage.com/society/festivals/fagupurnima.html Holi 6 मार्च 2008 एचटीएमएल नेपालपृष्ठ en https://web.archive.org/web/20070816051832/http://www.nepalhomepage.com/society/festivals/fagupurnima.html 16 अगस्त 2007 dead में इस पर धार्मिक व सांस्कृतिक रंग दिखाई देता है। इसी प्रकार विभिन्न देशों में बसे प्रवासियों तथा धार्मिक संस्थाओं जैसे इस्कॉन या वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में अलग अलग प्रकार से होली के शृंगार व उत्सव मनाने की परंपरा है जिसमें अनेक समानताएँ और भिन्नताएँ हैं।
आधुनिक काल में
होली रंगों का त्योहार है, हँसी-खुशी का त्योहार है, लेकिन होली के भी अनेक रूप देखने को मिलते हैं। प्राकृतिक रंगों के स्थान पर रासायनिक रंगों का प्रचलन, भांग-ठंडाई की जगह नशेबाजी और लोक संगीत की जगह फ़िल्मी गानों का प्रचलन इसके कुछ आधुनिक रूप हैं।http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2007/03/070301_holi_forum.shtml क्या होली में बदलाव होना चाहिए 4 मार्च 2008 एसएचटीएम बीबीसी https://web.archive.org/web/20070306094248/http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2007/03/070301_holi_forum.shtml 6 मार्च 2007 live लेकिन इससे होली पर गाए-बजाए जाने वाले ढोल, मंजीरों, फाग, धमार, चैती और ठुमरी की शान में कमी नहीं आती। अनेक लोग ऐसे हैं जो पारंपरिक संगीत की समझ रखते हैं और पर्यावरण के प्रति सचेत हैं। इस प्रकार के लोग और संस्थाएँ चंदन, गुलाबजल, टेसू के फूलों से बना हुआ रंग तथा प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की परंपरा को बनाए हुए हैं, साथ ही इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान भी दे रहे हैं।http://www.kalpavriksh.org/f1/f1.4/GAholi1 The Safe Holi campaign 15 मार्च 2008 कल्पवृक्ष en https://web.archive.org/web/20070326041336/http://www.kalpavriksh.org/f1/f1.4/GAholi1 26 मार्च 2007 dead रासायनिक रंगों के कुप्रभावों की जानकारी होने के बाद बहुत से लोग स्वयं ही प्राकृतिक रंगों की ओर लौट रहे हैं।http://www.kenzoamour-indianholi.com/EN/kenzo-amour-indian-holi.html केन्ज़ोआमूर इंडियन होली 11 मार्च 2008 एचटीएमएल केन्ज़ोआमूर https://web.archive.org/web/20080320001715/http://www.kenzoamour-indianholi.com/EN/kenzo-amour-indian-holi.html 20 मार्च 2008 dead होली की लोकप्रियता का विकसित होता हुआ अंतर्राष्ट्रीय रूप भी आकार लेने लगा है। बाज़ार में इसकी उपयोगिता का अंदाज़ इस साल होली के अवसर पर एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठान केन्ज़ोआमूर द्वारा जारी किए गए नए इत्र होली है से लगाया जा सकता है।http://www.hindu.com/mp/2006/03/13/stories/2006031301530100.htm Play safe this Holi 11 मार्च 2008 एचटीएम द हिन्दू enसितंबर 2021 InternetArchiveBot
प्रचलित संस्कृति में
साहित्य
प्राचीन काल के संस्कृत साहित्य में होली के अनेक रूपों का विस्तृत वर्णन है। श्रीमद्भागवत महापुराण में रसों के समूह रास का वर्णन है। अन्य रचनाओं में 'रंग' नामक उत्सव का वर्णन है जिनमें हर्ष की प्रियदर्शिका व रत्नावलीरत्नावली क none तथा कालिदास की कुमारसंभवम् तथा मालविकाग्निमित्रम् शामिल हैं। कालिदास रचित ऋतुसंहार में पूरा एक सर्ग ही 'वसन्तोत्सव' को अर्पित है। भारवि, माघ और अन्य कई संस्कृत कवियों ने वसन्त की खूब चर्चा की है। चंद बरदाई द्वारा रचित हिंदी के पहले महाकाव्य पृथ्वीराज रासो में होली का वर्णन है। भक्तिकाल और रीतिकाल के हिन्दी साहित्य में होली और फाल्गुन माह का विशिष्ट महत्व रहा है। आदिकालीन कवि विद्यापति से लेकर भक्तिकालीन सूरदास, रहीम, रसखान, पद्माकरपद्माकर ख none, जायसी, मीराबाई, कबीर और रीतिकालीन बिहारी, केशव, घनानंद आदि अनेक कवियों को यह विषय प्रिय रहा है। महाकवि सूरदास ने वसन्त एवं होली पर 78 पद लिखे हैं। पद्माकर ने भी होली विषयक प्रचुर रचनाएँ की हैं। http://www.shabdamhindi.com/sanskrit_holi.html होली या होलिका या होलाका 3 मार्च 2008 एचटीएम विश्व हिंदू समाज https://web.archive.org/web/20100129075808/http://www.shabdamhindi.com/sanskrit_holi.html 29 जनवरी 2010 dead इस विषय के माध्यम से कवियों ने जहाँ एक ओर नितान्त लौकिक नायक नायिका के बीच खेली गई अनुराग और प्रीति की होली का वर्णन किया है, वहीं राधा कृष्ण के बीच खेली गई प्रेम और छेड़छाड़ से भरी होली के माध्यम से सगुण साकार भक्तिमय प्रेम और निर्गुण निराकार भक्तिमय प्रेम का निष्पादन कर डाला है। http://www.hindinest.com/bhaktikal/009.htm भक्तिकालीन काव्य में होली 4 मार्च 2008 एचटीएम हिंदीनेस्ट.कॉम https://web.archive.org/web/20080225135601/http://www.hindinest.com/bhaktikal/009.htm 25 फ़रवरी 2008 dead सूफ़ी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, अमीर खुसरो और बहादुर शाह ज़फ़र जैसे मुस्लिम संप्रदाय का पालन करने वाले कवियों ने भी होली पर सुंदर रचनाएँ लिखी हैं जो आज भी जन सामान्य में लोकप्रिय हैं। आधुनिक हिंदी कहानियों प्रेमचंद की राजा हरदोल, प्रभु जोशी की अलग अलग तीलियाँ, तेजेंद्र शर्मा की एक बार फिर होली, ओम प्रकाश अवस्थी की होली मंगलमय हो तथा स्वदेश राणा की हो ली में होली के अलग अलग रूप देखने को मिलते हैं। भारतीय फ़िल्मों में भी होली के दृश्यों और गीतों को सुंदरता के साथ चित्रित किया गया है। इस दृष्टि से शशि कपूर की उत्सव, यश चोपड़ा की सिलसिला, वी शांताराम की झनक झनक पायल बाजे और नवरंग इत्यादि उल्लेखनीय हैं। http://www.bhaskar.com/2008/02/11/0802110029_edit.html हरी-हरी वसुंधरा पे नीला-नीला ये गगन 4 मार्च 2008 एचटीएमएल दैनिक भास्कर https://web.archive.org/web/20080904212010/http://www.bhaskar.com/2008/02/11/0802110029_edit.html 4 सितंबर 2008 live
संगीत
thumb|right|280px|वसंत रागिनी- कोटा शैली में रागमाला शृंखला का एक लघुचित्रभारतीय शास्त्रीय, उपशास्त्रीय, लोक तथा फ़िल्मी संगीत की परम्पराओं में होली का विशेष महत्व है। शास्त्रीय संगीत में धमार का होली से गहरा संबंध है, हालाँकि ध्रुपद, धमार, छोटे व बड़े ख्याल और ठुमरी में भी होली के गीतों का सौंदर्य देखते ही बनता है। कथक नृत्य के साथ होली, धमार और ठुमरी पर प्रस्तुत की जाने वाली अनेक सुंदर बंदिशें जैसे चलो गुंइयां आज खेलें होरी कन्हैया घर आज भी अत्यंत लोकप्रिय हैं। ध्रुपद में गाये जाने वाली एक लोकप्रिय बंदिश है खेलत हरी संग सकल, रंग भरी होरी सखी। भारतीय शास्त्रीय संगीत में कुछ राग ऐसे हैं जिनमें होली के गीत विशेष रूप से गाए जाते हैं। बसंत, बहार, हिंडोल और काफ़ी ऐसे ही राग हैं। होली पर गाने बजाने का अपने आप वातावरण बन जाता है और जन जन पर इसका रंग छाने लगता है। उपशास्त्रीय संगीत में चैती, दादरा और ठुमरी में अनेक प्रसिद्ध होलियाँ हैं। होली के अवसर पर संगीत की लोकप्रियता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि संगीत की एक विशेष शैली का नाम ही होली है, जिसमें अलग अलग प्रांतों में होली के विभिन्न वर्णन सुनने को मिलते है जिसमें उस स्थान का इतिहास और धार्मिक महत्व छुपा होता है। जहाँ ब्रजधाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के जैसे होली खेलें रघुवीरा अवध में। राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली का विशेष रंग है। उनकी एक प्रसिद्ध होली है आज रंग है री मन रंग है, अपने महबूब के घर रंग है री। http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/2002/sangeetholi.htm होली और संगीत 11 मार्च 2008 एचटीएम अभिव्यक्ति https://web.archive.org/web/20090706172502/http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/2002/sangeetholi.htm 6 जुलाई 2009 dead इसी प्रकार शंकर जी से संबंधित एक होली में दिगंबर खेले मसाने में होली कह कर शिव द्वारा श्मशान में होली खेलने का वर्णन मिलता है। भारतीय फिल्मों में भी अलग अलग रागों पर आधारित होली के गीत प्रस्तुत किये गए हैं जो काफी लोकप्रिय हुए हैं। 'सिलसिला' के गीत रंग बरसे भीगे चुनर वाली, रंग बरसे और 'नवरंग' के आया होली का त्योहार, उड़े रंगों की बौछार, को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं।
रंगों का उपयोग
प्राचीन काल में लोग चन्दन और गुलाल से ही होली खेलते थे। समय के साथ इनमें भी बदलाव देखने को मिला है। कई लोगों द्वारा प्राकृतिक रंगों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे त्वचा या आँखों पर किसी भी प्रकार का कुप्रभाव न पड़े।अभिलाष श्रीवास्तव Holi 2022: आध्यात्म के साथ वैज्ञानिक रूप से भी होली की रस्मों के हैं महत्व, जानिए सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है यह त्योहार? https://www.amarujala.com/photo-gallery/lifestyle/fitness/holi-rituals-and-health-benefits-in-hindi-why-holika-dahan-and-thandai-is-beneficial?pageId=3 24 नवम्बर 2022 अमर उजाला 2022
टीवी9 भारतवर्ष द्वारा घर पर होली के रंग बनाने एवं रासायनिक रंगों से दूर रहने की सलाह दी गई है।अंजलि राघव Holi Colours : प्राकृतिक रंगों से खेलना चाहते हैं होली तो घर पर इस तरह बनाएं होली के रंग https://www.tv9hindi.com/lifestyle/holi-colours-if-you-want-to-play-holi-with-natural-colors-then-make-holi-colors-like-this-at-home-1109198.html 24 नवम्बर 2022 टीवी9 भारतवर्ष 2022गरिमा गर्ग Holi 2022 Organic Colours: घर पर इन आसान तरीकों से बनाएं ऑर्गेनिक रंग, जानें विधि https://www.india.com/hindi-news/lifestyle/holi-2022-how-to-make-organic-natural-colours-at-home-5283473/ 24 नवम्बर 2022 India.com 2022
इन्हें भी देखें
होली लोकगीत
होलिका दहन
विभिन्न देशों में होली उत्सव
हिन्दू पर्व
वैष्णव पंथ
वसंत
वसन्तोत्सव
भगोरिया
सन्दर्भ
2
बाहरी कड़ियाँ
Holi
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