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देवनागरी संयुक्ताक्षर
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250px|thumb| द् + ध् + र् + य संयुक्ताक्षरसंयुक्ताक्षर ब्राह्मी परिवार की लिपियों में पाए जाने वाले ऐसे संयुग्माक्षर हैं जो दो या दो से अधिक व्यञ्जनों के सम्मिलन से निर्मित होते हैं। ये बिम्बात्मक संयोजिताक्षर के रूप में व्यवस्थित होते हैं। द्विवर्णीय संयुक्ताक्षर सामान्यतया प्रचलित हैं, किन्तु जैसे-जैसे अधिक अक्षर एक साथ संयोजित होते हैं, भाषा-ध्वन्यविज्ञान एवं व्यावहारिक उपयोग की सम्भाव्यता नियमानुसार घटती जाती है। उलरिच स्टाइहल ने संस्कृत में पाए जाने वाले शीर्ष ३०७ संयुक्ताक्षरों में पाँच-अक्षर वाले देवनागरी संयुक्ताक्षर र्त्स्न्य (rtsny) को भी सन्निविष्ट किया है।As in Sanskrit word कार्त्स्न्य (In Bengali Script কার্ৎস্ন্য), meaning "the whole, entirety" एक अन्य पाँच-अक्षर संयुक्ताक्षर ङ्क्ष्ण्व (ṅkṣṇv) भी सम्भव है।When the "mordaceous" meaning adjective दङ्क्ष्णु (daṅkṣṇu) becomes दङ्क्ष्ण्वोः (daṅkṣṇvoḥ) if inflected through Dual Masculine/Feminine Genitive & Locative cases. A close example is found in śloka 15, chapter 15 of Vājasaneyi-saṃhitā, from Śukla Yajurveda.
पुञ्जिकस्थला च क्रतुस्थला चाप्सरसौ दङ्क्ष्णवः पशवो हेतिः पौरुषेयो वधः प्रहेतिस्तेभ्यो नमो अस्तु ते नोऽवन्तु ते नो मृडयन्तु ते यं द्विष्मो यश्च नो द्वेष्टि तमेषां जम्भे दध्मः
puñjikasthalā ca kratusthalā cāpsarasau daṅkṣṇavaḥ paśavo hetiḥ pauruṣeyo vadhaḥ prahetistebhyo namo astu te no'vantu te no mṛḍayantu te yaṃ dviṣmo yaśca no dveṣṭi tameṣāṃ jambhe dadhmaḥ अधिकांश संयुक्ताक्षर अक्सर किसी एक ही शब्दराशि के अक्ष्यांश की सीमा को पार कर जाते हैं, और नीचे दी गई सूची के कई संयुक्ताक्षर शब्द के मध्य में ही आते हैं, जहाँ एक अक्ष्यांश के अन्तिम व्यञ्जन अगले अक्ष्यांश के आरम्भिक व्यञ्जनों के साथ संयुक्त होते हैं।When the "mordaceous" meaning adjective दङ्क्ष्णु (daṅkṣṇu) becomes दङ्क्ष्ण्वोः (daṅkṣṇvoḥ) if inflected through Dual Masculine/Feminine Genitive & Locative cases. A close example is found in śloka 15, chapter 15 of Vājasaneyi-saṃhitā, from Śukla Yajurveda.
पुञ्जिकस्थला च क्रतुस्थला चाप्सरसौ दङ्क्ष्णवः पशवो हेतिः पौरुषेयो वधः प्रहेतिस्तेभ्यो नमो अस्तु ते नोऽवन्तु ते नो मृडयन्तु ते यं द्विष्मो यश्च नो द्वेष्टि तमेषां जम्भे दध्मः
puñjikasthalā ca kratusthalā cāpsarasau daṅkṣṇavaḥ paśavo hetiḥ pauruṣeyo vadhaḥ prahetistebhyo namo astu te no'vantu te no mṛḍayantu te yaṃ dviṣmo yaśca no dveṣṭi tameṣāṃ jambhe dadhmaḥ
दो-वर्णीय (द्वि) संयुक्ताक्षर
नीचे दी गई तालिका में दो संस्कृत वर्णों के कुल १२९६ सम्भावित संयोजनों का विवरण प्रस्तुत किया गया है। यह तालिका संस्कृत के ३६ व्यञ्जनों के साथ-साथ ळ (जो संस्कृत में प्रयुक्त नहीं होता) को सम्मिलित कर तैयार की गई है, जैसा कि मासिका में सूचीबद्ध है। इनमें से सभी संयोजन संयुक्ताक्षर का निर्माण नहीं करते; ऐसे स्थान तालिका में रिक्त रूप में प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, संयुक्ताक्षर की सङ्ख्या देवनागरी फ़ॉन्ट पर भी निर्भर करती है। किसी विशेष भाषा में प्रयुक्त संयुक्ताक्षरों में भी भिन्नता पाई जाती है। नीचे दिए गए कुछ ऐसे संयोजन, जो संयुक्ताक्षर का निर्माण नहीं करते, किसी भी भाषा में व्यावहारिक रूप से प्रयुक्त न भी हो सकते हैं।
किसी संयुक्ताक्षर पर कर्सर रखने पर उसका रोमन लिप्यांतरण (अन्तरराष्ट्रीय मानकीकरण सङ्गठन १५९१९ - आई॰एस॰ओ॰ १५९१९) तथा ध्वन्यात्मक लिपि (अन्तरराष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला - अ॰ध॰व॰) दिखाई जाती है। यदि कोई संयुक्त उस पङ्क्ति के सामान्य रूपरेखा के विरुद्ध हो तो उसे मोटे अक्षरों में दिखाया गया है और उसे अनियमित माना गया है।
अक्षरकखगघङचछजझञटठडढणतथदधनपफबभमयरलवशषसहळक्षज्ञकक्कक्खक्गक्घक्ङक्चक्छक्जक्झक्ञक्टक्ठक्डक्ढक्णक्तक्थक्दक्धक्नक्पक्फक्बक्भक्मक्यक्रक्लक्वक्शक्षक्सक्हक्ळक्क्षक्ज्ञखख्कख्खख्गख्घख्ङख्चख्छख्जख्झख्ञख्टख्ठख्डख्ढख्णख्तख्थख्दख्धख्नख्पख्फख्बख्भख्मख्यख्रख्लख्वख्शख्षख्सख्हख्ळख्क्षख्ज्ञगग्कग्खग्गग्घग्ङग्चग्छग्जग्झग्ञग्टग्ठग्डग्ढग्णग्तग्थग्दग्धग्नग्पग्फग्बग्भग्मग्यग्रग्लग्वग्शग्षग्सग्हग्ळग्क्षग्ज्ञघघ्कघ्खघ्गघ्घघ्ङघ्चघ्छघ्जघ्झघ्ञघ्टघ्ठघ्डघ्ढघ्णघ्तघ्थघ्दघ्धघ्नघ्पघ्फघ्बघ्भघ्मघ्यघ्रघ्लघ्वघ्शघ्षघ्सघ्हघ्ळघ्क्षघ्ज्ञङङ्कङ्गङ्घङ्मङ्यङ्रङ्क्षचच्कच्खच्गच्घच्ङच्चच्छच्जच्झच्ञच्टच्ठच्डच्ढच्णच्तच्थच्दच्धच्नच्पच्फच्बच्भच्मच्यच्रच्लच्वच्शच्षच्सच्हच्ळच्क्षच्ज्ञछछ्कछ्खछ्गछ्घछ्ङछ्चछ्छछ्जछ्झछ्ञछ्टछ्ठछ्डछ्ढछ्णछ्तछ्थछ्दछ्धछ्नछ्पछ्फछ्बछ्भछ्मछ्यछ्रछ्लछ्वछ्शछ्षछ्सछ्हछ्ळछ्क्षछ्ज्ञजज्कज्खज्गज्घज्ङज्चज्छज्जज्झज्ञज्टज्ठज्डज्ढज्णज्तज्थज्दज्धज्नज्पज्फज्बज्भज्मज्यज्रज्लज्वज्शज्षज्सज्हज्ळज्क्षज्ज्ञझझ्कझ्खझ्गझ्घझ्ङझ्चझ्छझ्जझ्झझ्ञझ्टझ्ठझ्डझ्ढझ्णझ्तझ्थझ्दझ्धझ्नझ्पझ्फझ्बझ्भझ्मझ्यझ्रझ्लझ्वझ्शझ्षझ्सझ्हझ्ळझ्क्षझ्ज्ञञञ्कञ्खञ्गञ्घञ्ङञ्चञ्छञ्जञ्झञ्ञञ्टञ्ठञ्डञ्ढञ्णञ्तञ्थञ्दञ्धञ्नञ्पञ्फञ्बञ्भञ्मञ्यञ्रञ्लञ्वञ्शञ्षञ्सञ्हञ्ळञ्क्षञ्ज्ञटट्टट्ठट्यट्रट्वठठ्ठठ्यठ्रडड्डड्ढड्यड्रढढ्ढढ्यढ्रणण्कण्खण्गण्घण्ङण्चण्छण्जण्झण्ञण्टण्ठण्डण्ढण्णण्तण्थण्दण्धण्नण्पण्फण्बण्भण्मण्यण्रण्लण्वण्शण्षण्सण्हण्ळण्क्षण्ज्ञतत्कत्खत्गत्घत्ङत्चत्छत्जत्झत्ञत्टत्ठत्डत्ढत्णत्तत्थत्दत्धत्नत्पत्फत्बत्भत्मत्यत्रत्लत्वत्शत्षत्सत्हत्ळत्क्षत्ज्ञथथ्कथ्खथ्गथ्घथ्ङथ्चथ्छथ्जथ्झथ्ञथ्टथ्ठथ्डथ्ढथ्णथ्तथ्थथ्दथ्धथ्नथ्पथ्फथ्बथ्भथ्मथ्यथ्रथ्लथ्वथ्शथ्षथ्सथ्हथ्ळथ्क्षथ्ज्ञदद्गद्दद्धद्नद्बद्भद्मद्यद्रद्वधध्कध्खध्गध्घध्ङध्चध्छध्जध्झध्ञध्टध्ठध्डध्ढध्णध्तध्थध्दध्धध्नध्पध्फध्बध्भध्मध्यध्रध्लध्वध्शध्षध्सध्हध्ळध्क्षध्ज्ञनन्कन्खन्गन्घन्ङन्चन्छन्जन्झन्ञन्टन्ठन्डन्ढन्णन्तन्थन्दन्धन्नन्पन्फन्बन्भन्मन्यन्रन्लन्वन्शन्षन्सन्हन्ळन्क्षन्ज्ञपप्कप्खप्गप्घप्ङप्चप्छप्जप्झप्ञप्टप्ठप्डप्ढप्णप्तप्थप्दप्धप्नप्पप्फप्बप्भप्मप्यप्रप्लप्वप्शप्षप्सप्हप्ळप्क्षप्ज्ञफफ्कफ्खफ्गफ्घफ्ङफ्चफ्छफ्जफ्झफ्ञफ्टफ्ठफ्डफ्ढफ्णफ्तफ्थफ्दफ्धफ्नफ्पफ्फफ्बफ्भफ्मफ्यफ्रफ्लफ्वफ्शफ्षफ्सफ्हफ्ळफ्क्षफ्ज्ञबब्कब्खब्गब्घब्ङब्चब्छब्जब्झब्ञब्टब्ठब्डब्ढब्णब्तब्थब्दब्धब्नब्पब्फब्बब्भब्मब्यब्रब्लब्वब्शब्षब्सब्हब्ळब्क्षब्ज्ञभभ्कभ्खभ्गभ्घभ्ङभ्चभ्छभ्जभ्झभ्ञभ्टभ्ठभ्डभ्ढभ्णभ्तभ्थभ्दभ्धभ्नभ्पभ्फभ्बभ्भभ्मभ्यभ्रभ्लभ्वभ्शभ्षभ्सभ्हभ्ळभ्क्षभ्ज्ञमम्कम्खम्गम्घम्ङम्चम्छम्जम्झम्ञम्टम्ठम्डम्ढम्णम्तम्थम्दम्धम्नम्पम्फम्बम्भम्मम्यम्रम्लम्वम्शम्षम्सम्हम्ळम्क्षम्ज्ञयय्कय्खय्गय्घय्ङय्चय्छय्जय्झय्ञय्टय्ठय्डय्ढय्णय्तय्थय्दय्धय्नय्पय्फय्बय्भय्मय्यय्रय्लय्वय्शय्षय्सय्हय्ळय्क्षय्ज्ञरर्कर्खर्गर्घर्ङर्चर्छर्जर्झर्ञर्टर्ठर्डर्ढर्णर्तर्थर्दर्धर्नर्पर्फर्बर्भर्मर्यर्रर्लर्वर्शर्षर्सर्हर्ळर्क्षर्ज्ञलल्कल्खल्गल्घल्ङल्चल्छल्जल्झल्ञल्टल्ठल्डल्ढल्णल्तल्थल्दल्धल्नल्पल्फल्बल्भल्मल्यल्रल्लल्वल्शल्षल्सल्हल्ळल्क्षल्ज्ञवव्कव्खव्गव्घव्ङव्चव्छव्जव्झव्ञव्टव्ठव्डव्ढव्णव्तव्थव्दव्धव्नव्पव्फव्बव्भव्मव्यव्रव्लव्वव्शव्षव्सव्हव्ळव्क्षव्ज्ञशश्कश्खश्गश्घश्ङश्चश्छश्जश्झश्ञश्टश्ठश्डश्ढश्णश्तश्थश्दश्धश्नश्पश्फश्बश्भश्मश्यश्रश्लश्वश्शश्षश्सश्हश्ळश्क्षश्ज्ञषष्कष्खष्गष्घष्ङष्चष्छष्जष्झष्ञष्टष्ठष्डष्ढष्णष्तष्थष्दष्धष्नष्पष्फष्बष्भष्मष्यष्रष्लष्वष्शष्षष्सष्हष्ळष्क्षष्ज्ञसस्कस्खस्गस्घस्ङस्चस्छस्जस्झस्ञस्टस्ठस्डस्ढस्णस्तस्थस्दस्धस्नस्पस्फस्बस्भस्मस्यस्रस्लस्वस्शस्षस्सस्हस्ळस्क्षस्ज्ञहह्णह्नह्मह्यह्रह्लह्वळळ्कळ्खळ्गळ्घळ्ङळ्चळ्छळ्जळ्झळ्ञळ्टळ्ठळ्डळ्ढळ्णळ्तळ्थळ्दळ्धळ्नळ्पळ्फळ्बळ्भळ्मळ्यळ्रळ्लळ्वळ्शळ्षळ्सळ्हळ्ळळ्क्षळ्ज्ञ
त्रि-, चतुर्क और पञ्च-वर्णीय संयुक्ताक्षर
अक्षरत्रि-वर्णीय संयुक्तचतुर्वर्णीय संयुक्तपञ्चवर्णीय संयुक्तकक्त्र · क्त्व · क्ष्ण · क्ष्म · क्ष्यक्ष्ण्यगग्ध्र · ग्न्य · ग्र्यङङ्क्त · ङ्क्र · ङ्क्षङ्क्ष्यचच्छ्य · च्छ्र · च्छ्वजज्ज्य · ज्ज्वणण्ड्य · ण्ड्र · ण्ड्वतत्क्र · त्क्व · त्क्ष · त्त्न · त्त्र · त्त्व · त्प्र · त्प्ल · त्र्य · त्स्न · त्स्य · त्स्वदद्ग्र · द्द्य · द्द्र · द्ध्म · द्ध्व · द्ब्र · द्व्यनन्त्य · न्त्र · न्द्ध · न्द्र · न्ध्य · न्ध्रपप्त्र · प्स्यमम्प्ररर्ग्य · र्ग्र · र्घ्य · र्ङ्ग · र्ज्य · र्ढ्य · र्ण्य · र्त्त · र्त्म · र्त्य · र्त्र · र्त्स · र्द्ध · र्द्र · र्द्व · र्ध्म · र्ध्र · र्ध्व · र्म्य · र्स्व · र्ष्ण · र्ष्म · र्ष्यर्त्त्र · र्ष्ट्यर्त्स्न्यषष्क्र · ष्क्व · ष्ट्व · ष्ठ्य · ष्प्य · ष्म्यसस्त्य · स्त्र
उल्लेखनीय अनियमित संयुक्ताक्षर
कुछ द्वि-व्यञ्जनयुक्त संयुक्ताक्षरों की लिगेचर-रचना परम्परागत देवनागरी लिपि-निर्माण की सामान्य प्रक्रिया से भिन्न होती है; अतः उनके स्वरूप का अनुमान सहजतापूर्वक नहीं लगाया जा सकता। यद्यपि हिन्दी भाषा में ये संयुक्ताक्षर व्यापक रूप से प्रचलित नहीं हैं, तथापि क्ष, त्र तथा ज्ञ जैसे अक्षर संस्कृत-प्रसूत सामान्य शब्दों में पर्याप्त रूप से प्रयुक्त होते हैं। इसी कारणवश, इन्हें कभी-कभी कुञ्जीपटल-विन्यास में सम्मिलित किया जाता है अथवा शिक्षण-सामग्री में वर्णमाला के साथ संलग्न किया जाता है। इसके अतिरिक्त, चार अन्य संयुक्ताक्षर जो सामान्य शब्दों अथवा धार्मिक महत्त्व वाले नामों में प्रयुक्त होते हैं, उनका उल्लेख भी निम्नलिखित सूची में किया गया है।
+प्रमुख अनियमित संयुक्ताक्षर — उदाहरणप्रथम व्यञ्जनद्वितीय व्यञ्जनसंयुक्ताक्षर लिगेचरउदाहरणक् (k)ष (ṣa)क्ष (kṣa)क्षत्रिय (kṣatríya, warrior)त् (t)र (ra)त्र (tra)त्रिकोण (trikoṇa, triangle)ज् (j)ञ (ña)ज्ञ (jña)ज्ञान (jñāna, knowledge)द् (d)व (va)द्व (dva)द्वार (dwāra, door)द् (d)ध (dha)द्ध (ddha)बुद्ध (Buddha)श् (ś)र (ra)श्र (śra)श्री राम (Śrī Rāma)ह् (h)म (ma)ह्म (hma)ब्रह्मा (Brahmā)
आवृत्ति के अनुसार संयुक्ताक्षर
यहाँ वे सभी संयुक्ताक्षर प्रस्तुत किए गए हैं जिनकी संस्कृत में आवृत्ति न्यूनतम ०.०१०% अथवा उससे अधिक पाई गई है। कुल ३०८ संयुक्ताक्षरों में से सात उल्लेखनीय एवं अपसामान्य संयुक्ताक्षर पृथक रूप से प्रदर्शित किए गए हैं।
मुख्य अक्षरसंयोजन के भागसंयुक्ताक्षरआवृत्ति (संयुक्ताक्षरों का प्रतिशत)कक + कक्क०.०७क + चक्च०.०६४क + तक्त४.८५क + त + यक्त्य०.१६२क + त + रक्त्र०.११८क + त + वक्त्व०.६८७क + थक्थ०.०१३क + नक्न०.१०२क + पक्प०.०८८क + प + रक्प्र०.०३७क + मक्म०.१४क + यक्य१.३०८क + रक्र५.२०७क + लक्ल०.३९१क + वक्व०.३क + शक्श०.०४३क + षक्ष९.९७६क + ष + णक्ष्ण०.३०५क + ष + मक्ष्म०.२४७क + ष + म + यक्ष्म्य०.०२६क + ष + यक्ष्य१.४७६क + ष + वक्ष्व०.१७६क + सक्स०.०६९खख + यख्य१.३०७गग + गग्ग०.०२५ग + जग्ज०.०२५ग + ज + यग्ज्य०.०३ग + णग्ण०.०२ग + दग्द०.०३४ग + धग्ध०.२४९ग + ध + वग्ध्व०.०१८ग + नग्न१.२९ग + न + यग्न्य०.०८१ग + बग्ब०.०२३ग + भग्भ०.१०१ग + भ + यग्भ्य०.०१८ग + मग्म०.३६४ग + यग्य०.१९१ग + रग्र२.४५३ग + र + यग्र्य०.१५ग + लग्ल०.०५२ग + वग्व०.१२६घघ + नघ्न०.५४५घ + रघ्र०.७४३घ + वघ्व०.०१६ङङ + कङ्क०.५०५ङ + क + तङ्क्त०.०९१ङ + क + षङ्क्ष०.१९५ङ + क + ष + वङ्क्ष्व०.०२५ङ + खङ्ख०.३३ङ + ख + यङ्ख्य०.०५२ङ + गङ्ग२.०९१ङ + ग + यङ्ग्य०.०१८ङ + ग + रङ्ग्र०.०१९ङ + घङ्घ०.०३८ङ + घ + रङ्घ्र०.१०९ङ + नङ्न०.०३ङ + मङ्म०.१३७चच + चच्च१.७१६च + च + यच्च्य०.०२२च + छच्छ४.२९७च + छ + रच्छ्र०.५३५च + छ + वच्छ्व०.०३३च + यच्य१.१११जज + जज्ज०.५८४ज + ज + ञज्ज्ञ०.०६१ज + ज + यज्ज्य०.०१७ज + ज + वज्ज्व०.०३३ज + ञज्ञ४.६४ज + मज्म०.०६१ज + यज्य१.९३७ज + रज्र०.३२९ज + वज्व०.४३५ञञ + चञ्च१.७७९ञ + छञ्छ०.०४४ञ + जञ्ज१.०५७ञ + ज + ञञ्ज्ञ०.०२१ञ + शञ्श०.५२८ञ + श + रञ्श्र०.०७३ञ + श + वञ्श्व०.०१८टट + कट्क०.०३ट + टट्ट०.०९१ट + पट्प०.०१५ट + यट्य०.०३७ट + शट्श०.०१४ट + सट्स०.०३२ठठ + यठ्य०.०१३डड + गड्ग०.१६७ड + भड्भ०.०४९ड + यड्य०.०९७ड + रड्र०.०१८ड + वड्व०.०३७ढढ + यढ्य०.०४३णण + टण्ट०.०६८ण + ठण्ठ०.०९५ण + डण्ड४.५७ण + ड + यण्ड्य०.०४५ण + ड + रण्ड्र०.०१८ण + णण्ण०.०७७ण + मण्म०.०५ण + यण्य१.५२३ण + वण्व०.१३७तत + कत्क१.८८३त + क + रत्क्र०.१३५त + क + वत्क्व०.०१८त + क + षत्क्ष०.१६६त + खत्ख०.०२५त + तत्त७.४६४त + त + यत्त्य०.०८१त + त + रत्त्र०.०९९त + त + वत्त्व१.३३९त + थत्थ०.५३६त + नत्न०.६२५त + न + यत्न्य०.०३८त + पत्प१.९१८त + प + रत्प्र०.९१त + फत्फ०.०७१त + मत्म४.१६३त + म + यत्म्य०.०५२त + यत्य९.७६३त + रत्र१४.०६त + र + यत्र्य०.१५८त + वत्व८.१२५त + व + यत्व्य०.०१५त + सत्स३.३५त + स + तत्स्त०.०१७त + स + त + रत्स्त्र०.०१६त + स + थत्स्थ०.०७२त + स + नत्स्न०.२१७त + स + मत्स्म०.०३३त + स + यत्स्य०.५२९त + स + रत्स्र०.०१६त + स + वत्स्व०.१९१थथ + यथ्य०.३६३थ + वथ्व०.०१८दद + गद्ग०.४८३द + ग + रद्ग्र०.०१८द + घध्ह०.०६१द + दद्द०.८६८द + द + यद्द्य०.०२५द + द + रद्द्र०.१०९द + द + वद्द्व०.११९द + धद्ध६.१५५द + ध + यद्ध्य०.२१७द + ध + रद्ध्र०.०१७द + ध + वद्ध्व०.२१५द + नद्न०.०३७द + बद्ब०.४१८द + ब + रद्ब्र०.२७७द + भद्भ१.६८७द + भ + यद्भ्य०.०७१द + भ + रद्भ्र०.०५७द + मद्म०.२६३द + यद्य५.५९१द + रद्र५.७६३द + र + यद्र्य०.०१६द + वद्व५.१६२द + व + यद्व्य०.११५द + व + रद्व्र०.०२धध + नध्न०.०३३ध + मध्म०.०६६ध + यध्य२.६८ध + रध्र०.३३५ध + वध्व०.८९७नन + कन्क०.८०६न + क + रन्क्र०.०६६न + क + लन्क्ल०.०१३न + क + षन्क्ष०.११२न + खन्ख०.०२५न + गन्ग०.३०४न + घन्घ०.०४३न + तन्त१२.९१९न + त + यन्त्य०.८२न + त + रन्त्र०.५३६न + त + र + यन्त्र्य०.०८८न + त + वन्त्व०.१४४न + त + स + यन्त्स्य०.०२३न + थन्थ०.१३३न + दन्द२.६३२न + द + यन्द्य०.०९५न + द + रन्द्र२.४२७न + द + वन्द्व०.०८५न + धन्ध२.३९६न + ध + यन्ध्य०.०६७न + ध + रन्ध्र०.०४६न + नन्न५.०८६न + न + यन्न्य०.०२७न + न + वन्न्व०.०२५न + पन्प१.१९५न + प + रन्प्र०.७१४न + फन्फ०.०१४न + बन्ब०.३१९न + ब + रन्ब्र०.१२न + भन्भ०.४९३न + भ + रन्भ्र०.०५४न + मन्म२.८०३न + यन्य७.२२३न + रन्र०.५३९न + वन्व२.६५न + व + यन्व्य०.०८९न + सन्स१.७६७न + स + थन्स्थ०.०३८न + स + मन्स्म०.०१७न + स + वन्स्व०.१०३न + हन्ह०.३४५पप + तप्त२.६६४प + त + वप्त्व०.०३५प + नप्न०.६०८प + मप्म०.०५५प + यप्य२.२८५प + रप्र२१.१७२प + लप्ल०.३प + सप्स०.५२३प + स + यप्स्य०.२३५बब + जब्ज०.०१४ब + दब्द०.४६ब + धब्ध०.४६४ब + ध + वब्ध्व०.०९५ब + यब्य०.०३ब + रब्र४.५८३ब + वब्व०.०३१मभ + णभ्ण०.०१७भ + यभ्य३.२४भ + रभ्र१.२४२भ + वभ्व०.०५५म + णम्ण०.०२१म + नम्न०.५४२म + पम्प०.२४५म + बम्ब०.७५५म + ब + यम्ब्य०.०१४म + भम्भ०.४८३म + यम्य२.११८म + रम्र०.१२९म + लम्ल०.०५९यय + यय्य०.२य + वय्व०.०१७रर + कर्क०.३२१र + क + ष + यर्क्ष्य०.०२४र + खर्ख०.०२र + गर्ग१.६९८र + ग + यर्ग्य०.०२३र + ग + रर्ग्र०.०३र + घर्घ०.३७९र + घ + यर्घ्य०.०३५र + ङ + गर्ङ्ग०.०३र + चर्च०.३६५र + च + छर्च्छ०.०२६र + च + यर्च्य०.०३८र + छर्छ०.०८१र + जर्ज२.२४र + ज + ञर्ज्ञ०.०२८र + ज + यर्ज्य०.०५र + ज + वर्ज्व०.०२र + णर्ण३.३५७र + ण + यर्ण्य०.०४७र + तर्त४.३१४र + त + तर्त्त०.०३३र + त + मर्त्म०.०४र + त + यर्त्य०.१८२र + त + रर्त्र०.०२१र + त + वर्त्व०.०२३र + त + सर्त्स०.०१७र + त + स + न + यर्त्स्न्य०.०३२र + थर्थ४.८८३र + थ + यर्थ्य०.०३२र + दर्द१.८७३र + द + धर्द्ध०.०१७र + द + यर्द्य०.०३५र + द + रर्द्र०.१३२र + द + वर्द्व०.१४२र + धर्ध१.४३४र + ध + नर्ध्न०.०६२र + ध + मर्ध्म०.०१५र + ध + यर्ध्य०.०२१र + ध + रर्ध्र०.०३१र + ध + वर्ध्व०.१८५र + नर्न१.११८र + न + यर्न्य०.०२३र + पर्प०.५३२र + बर्ब०.७३१र + ब + रर्ब्र०.११२र + भर्भ१.२८५र + भ + यर्भ्य०.०३३र + भ + रर्भ्र०.०४२र + मर्म९.११४र + म + यर्म्य०.०८र + यर्य६.६३३र + लर्ल०.२२५र + वर्व११.८९८र + व + यर्व्य०.१४६र + शर्श१.४४३र + श + वर्श्व०.१०३र + षर्ष४.११७र + ष + टर्ष्ट०.०२५र + ष + णर्ष्ण०.१७४र + ष + यर्ष्य०.०२६र + हर्ह१.६८८र + ह + यर्ह्य०.०१८र + ह + रर्ह्र०.०१९लल + कल्क०.११७ल + क + यल्क्य०.०९७ल + गल्ग०.२३२ल + पल्प०.७५४ल + बल्ब०.०९५ल + मल्म०.१४५ल + यल्य१.१७८ल + लल्ल०.५६३ल + वल्व०.१४५वव + यव्य६.०९५व + रव्र१.१७२शश + चश्च१२.९९९श + च + यश्च्य०.०४४श + छश्छ०.१८७श + नश्न०.२९७श + पश्प०.०२६श + मश्म०.३८श + यश्य३.२७६श + रश्र५.६०४श + लश्ल०.२०४श + वश्व३.४५४श + व + यश्व्य०.०३२षष + कष्क०.५७६ष + क + रष्क्र०.०६ष + टष्ट४.८५५ष + ट + यष्ट्य०.२३७ष + ट + रष्ट्र१.२५२ष + ट + वष्ट्व१.४०५ष + ठष्ठ४.५२१ष + ठ + यष्ठ्य०.०१५ष + णष्ण१.७९३ष + ण + यष्ण्य०.०४७ष + पष्प०.४५१ष + प + रष्प्र०.०७३ष + मष्म१.५०४ष + यष्य३.४४ष + वष्व१.१४५सस + कस्क०.७१३स + तस्त१३.७६२स + त + यस्त्य०.३३२स + त + रस्त्र२.७६४स + त + र + यस्त्र्य०.०२स + त + वस्त्व१.३३९स + थस्थ३.४९२स + थ + यस्थ्य०.०३स + नस्न०.४३२स + पस्प१.००३स + फस्फ०.१४५स + मस्म४.९६४स + म + यस्म्य०.०५५स + यस्य१३.४८३स + रस्र१.४८१स + वस्व४.८०१स + स + वस्स्व०.०१६हह + णह्ण०.२७३ह + नह्न०.२०१ह + मह्म२.९८ह + यह्य२.११८ह + रह्र०.३४१ह + लह्ल०.१३४ह + वह्व०.४२
पुरातन देवनागरी
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पुराने समय में प्रयुक्त हुई जाने वाली देवनागरी के कुछ वर्ण आधुनिक देवनागरी से भिन्न हैं।
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सन्दर्भ
श्रेणी:देवनागरी